कुपोषण के बीच पोषण की कबायत तेज: महिला बाल विकास ने बताई माँ के दूध की महिमा

म.प्र. शिवपुरी। गत दिनों म.प्र. के जिला मुख्यालय पर महिला बाल विकास द्वारा मीडिया के लिये एक जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजन किया गया, जिसमें चिकित्सा विभाग डॉक्टर एवं कर्मचारियों सहित महिला बाल विकास के समस्त ब्लॉक अधिकारियों तथा जिले के पत्रकारों ने भाग लिया।
जिला चिकित्सालय परिसर में मौजूद नर्स प्रशिक्षण केन्द्र में आयोजित कार्यशाला को जिला महिला बाल विकास अधिकारी उपासना राय ने सम्बोधित करते हुये बताया कि शिवपुरी जिले में एक अगस्त से विश्व स्तनपान सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें मीडिया की भूमिका भी अहम है। लेागों तक अधिक से अधिक जागरुकता स्तनपान के सम्बन्ध में अर्थात नवजात बच्चों के लिये माँ के दूध की उपयोगिता का लेागों को ज्ञान हो सके, और बच्चो को होने वाली जान लेवा बीमारियों से बचा स्वस्थ बनाया जा सके। के उद्देश्य से स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा है। 

जिसका आयोजन निर्धारित तिथियों अनुसार किया जायेगा। लेाग खासकर माता-बहिने ही नहीं घर के मुखिया या परिवार के सदस्य इस बात के लिये जागरुक हो। कि नवजात बच्चों के लिये मां का दूध उस सजीवनी के समान है, जो बच्चों को तंदुरुत ही नहीं स्वस्थ बना होने वाली कई गम्भीर बीमारियों से बच्चों की रक्षा कर सके।

इसलिये हम सभी की खासकर मीडिया की अहम जबावदेही बन जाती है, एक स्वस्थ समाज के निर्माण में जब हमारी आने वाली नस्ल स्वस्थ और तंदुरुत होगी। तो बच्चों को होने वाली गम्भीर बीमारी और बीमारियों से हाथ दो हाथ होते लेागों को बचाया जा सकता है। साथ ही कई समस्याओं से भी निजात पाई जा सकती है।
इस मौके पर कार्यशाला में उपस्थित विशेषज्ञो ने बच्चों के लिये दूध की अहमियत और मां के दूध में मौजूद विभिन्न स्वास्थ बर्धक गम्मीार,बीमारी रोधी तत्वों के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर जिला महिला बाल विकास अधिकारी द्वारा कार्यशाला में मौजूद महान भावो से सहयोग एवं कार्यक्रम को सफल बनाने सलाह की भी उम्मीद की। 

कार्यशाला में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद भार्गव ने जहां सरकारी योजनाओं पर चिन्ता व्यक्त करते हुये विश्व स्वास्थ संगठन द्वारा चलाई जाने वाली योजनाओं संदेह व्यक्त किया। वहीं वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक वीरेन्द्र शर्मा ने अपेक्षा कि इस कार्यक्रम में लेागों की अधिक से अधिक भागीदारी एवं मीडिया से जुड़े लेागों सीधे जोड़ मां के दूध महत्व को समझाने स्थानीय परम्पराओं के शामिल करने पर जोर दिया। वहीं एक दैनिक अखबार के संवाददाता देबू समाधिया एवं एक अन्य पत्रकार मणीकान्त शर्मा ने महिला बाल विकास के अधीन संचालित आगनबाड़ी केन्द्रो एवं माताओं की स्थिति पर सवाल खड़े करते हुये कहां कि जब संचालित केन्द्र एवं माताओं की आर्थिक स्थिति देयनीय हो। तब ऐसे में कैसे कार्यक्रम सफल होगा,अन्दाजा लगाया जा सकता।

बहरहाल महिला बाल विकास अधिकारी ने खड़े किये गये सवालो से विचलित हुये बिना कहां कि चूंकि हमारा उद्देश्य लेागों के बीच मां के दूध की महिमा बता माता-बहिनो इस बात के लिये प्रोत्साहित कर जागरुक करना है कि वह अपने बच्चों को कम से कम छ: माह तक मां के दूध के अलावा बच्चों को न तो कुछ खिलाये न ही पिलाये क्योंकि नवजात शिशु को स्वस्थ रखने एवं तंदुरुत बनाने मां के दूध में वह सारे तत्व मौजूद होते है,जो आवश्यक हो। साथ ही माता-बहिने इस बात का भी ख्याल रखे कि समय-समय पर बच्चे को अपना ही दूध पिलाये जब भी शिशु चाहे उसे अपना ही दूध पिलाये कोशिस यह करें कि जन्म के तत्काल बाद बच्च्चे का मुंंह मां के स्तन के नजदीक ही रहे जिससे वह जरुरत अनुसार अपनी भूख और प्यास स्वत: ही बुझा सके। हो सके तो माताऐं बहिने अपने नवजात शिशु को अपने से दूर बिल्कुल भी न रखे और हमेशा जब भी समय मिले नवजात शिशु का मुंह अपने स्तन के पास ही रखे। अगर कोई माता बहिने कामकाजी है तो वह अपना दूध निकाल कुछ घन्टों के लिये ठन्डी जगह पर रख सकती है। तथा जरुरत पडऩे पर बच्चे की देखभाल करने वाला उसे रखे उस दूध को बच्चे को पिला सकता। अगर यो कहें कि मां का दूध बच्चों के लिये स्वस्थ रखने सौ दवा की एक दवा है,तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी।

मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक पहल,सी.एम. हेल्पलाइन 181 का लोकार्पण
भोपाल : गुरूवार, जुलाई 31, 2014, मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश में सभी सुखी हों, निरोगी हों, सबका कल्याण हों, कोई दुखी ना रहे, यही शासन व्यवस्था का ध्येय है। इसी की पूर्ति के लिये प्रदेश में सी.एम. हेल्पलाइन 181 प्रारंभ की गई है।

श्री चौहान ने प्रदेश की सुशासन व्यवस्था को अधिक चुस्त-दुरूस्त और जनहित में सक्रिय करने की ऐतिहासिक पहल करते हुए आज यहाँ सी.एम. हेल्पलाइन का लोकार्पण किया। देश में अपने तरह की अनूठी इस हेल्पलाइन से प्रदेश के विभिन्न विभाग के पाँच हजार अधिकारी-कर्मचारियों को जोड़ा गया है। ये अधिकारी इस हेल्पलाइन से प्राप्त समस्याओं का निराकरण करेंगे। हेल्पलाइन के नि:शुल्क टोल नम्बर 181 से जन-कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी प्राप्त की जा सकेगी। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी प्रदेशवासी को अपनी समस्या के लिये भटकना नहीं पड़े, यह हेल्पलाइन जनहेतु-जनसेतु के रूप में कार्य करेगी। समस्या का पूर्ण निराकरण होने पर आवेदक की संतुष्टि के पश्चात ही यहाँ दर्ज किया गया प्रकरण बंद किया जायेगा। श्री चौहान ने कहा कि प्रत्येक शासन व्यवस्था का कर्त्तव्य है कि विकास करे, जन कल्याणकारी योजनाएँ बनायें और उनकी सबको जानकारी देकर बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। मध्यप्रदेश में इन तीनों पर लगातार ध्यान देने का ही परिणाम है कि कभी बीमारू कहा जाने वाले इस राज्य ने देश में ही नहीं विश्व में सर्वाधिक 24.99 प्रतिशत कृषि विकास दर और देश में सबसे अधिक 11.02 प्रतिशत विकास दर हासिल की है। सभी वर्गों के कल्याण की योजनाएँ बनी हैं। 

सबकी समस्याओं के समय पर निराकरण, योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिये परख, समाधान ऑन लाइन तथा लोक सेवा गारंटी अधिनियम जैसी व्यवस्थाएँ लागू की गयीं। उन्होंने कहा कि आज युग बदल रहा है। आमजन क्यों भटके। यह हेल्पलाइन शुरू की गयी है जिसमें कोई भी अपने मोबाइल टेलीफोन द्वारा जहाँ है वहीं से 181 डायल कर अपनी बात शासन तक पहुँचा सकेगा। श्री चौहान ने अधिकारियों से कहा कि इस हेल्पलाइन को चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए अपनी दक्षता तथा कर्मठता का परिचय दें।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सी-21 मॉल में स्थापित सी.एम. हेल्प लाइन का अवलोकन किया। उन्होंने यहाँ हेल्प लाइन एक्जीक्यूटिव सुश्री पूजा देशवाड़ी तथा ललिता वर्मन से हेल्प लाइन संचालन के बारे में जानकारी ली। उन्होंने इस हेल्प लाइन में आ रहा फोन कॉल भी रिसीव किया।

लोक सेवा प्रबंधन मंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि सरकार सबसे पीछे और गरीब जरूरतमंद तक पहुँचे तभी प्रजातंत्र की सार्थकता है। सी.एम. हेल्पलाइन देश में पहली बार लोक सेवा की गारंटी देने वाले राज्य का सुशासन की दिशा में एक सशक्त प्रयास है। उन्होंने कहा कि जनता से सीधे जुड़ने की देश में यह पहली अभिनव पहल है। शासन की योजनाओं का लाभ आवेदक, घर से फोन कर प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि इस सेवा के क्रियान्वयन में कोई कमी नहीं रहने दी जायेगी। भविष्य में आवश्यकतानुसार सुधार भी किये जायेंगे। कार्य की मॉनीटरिंग के लिये वे स्वयं भी सप्ताह में एक दिन हेल्प लाइन की समीक्षा करेंगे।

सचिव लोक सेवा प्रबंधन श्री हरिरंजन राव ने बताया कि छह माह के प्रयोग और प्रशिक्षण के उपरांत यह सेवा तैयार की गई हैं। टोल-फ्री नम्बर पर प्रतिदिन पाँच से लेकर 10 हजार कॉल रिसीव कर संबंधित अधिकारी को मामले निराकरण के लिये भेजे जायेंगे। यही नहीं, निराकरण की स्थिति से भी आवेदकों को अवगत करवाया जायेगा। हेल्पलाइन में 100 से अधिक कॉल एक साथ रिसीव करने की व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि यह प्रयास फेसलेस गव्हर्नमेन्ट का उत्कृष्ट नमूना है। उन्होंने बताया कि परीक्षण अवधि में ही इस हेल्प लाइन में 12 लाख फोन रिसीव हुए हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकों की संतुष्टि के सर्वोच्च मानदण्ड स्थापित करने की कोशिश होगी।

आभार श्री अविनाश लवानिया ने माना। संचालन श्री सुधीर कोचर ने किया। कॉल सेंटर के संबंध में विस्तृत जानकारी देने वाला ऑडियो-वीडियो प्रस्तुतिकरण भी किया गया। प्रारंभ में मुख्यमंत्री सहित अतिथियों ने दीप-प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
कार्यक्रम में मुख्य सचिव श्री अंटोनी डि सा, विधायक द्वय श्री रामेश्वर शर्मा तथा श्री अनिल जी और विभिन्न विभाग के प्रमुख सचिव, सचिव और विभागाध्यक्ष उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल की अध्यक्षता में परिषद की वार्षिक साधारण सभा आयोजित
वित्तीय वर्ष 2014-15 के लिए प्रस्तावित कार्यो का किया गया अनुमोदन
रायपुर, 31 जुलाई 2014छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद की वार्षिक साधारण सभा में वित्तीय वर्ष 2014-15 में परिषद के लिए प्रस्तावित कार्यो का अनुमोदन किया गया। परिषद के अध्यक्ष तथा कृषि मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल की अध्यक्षता में आज यहां वार्षिक साधारण सभा आयोजित की गयी। छत्तीसगढ़ के पूर्व शिक्षा मंत्री तथा विधायक श्री सत्यनारायण शर्मा, महासमुन्द के विधायक डॉ. विमल चोपड़ा, परिषद के उपाध्यक्ष श्री मोहन चोपड़ा सहित परिषद की कार्यकारिणी के सदस्य तथा साधारण सभा के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

परिषद के अध्यक्ष श्री बृजमोहन अग्रवाल ने सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर तथा शारीरिक एवं मानसिक रूप से निःशक्त बच्चों के लिए काम करना इस परिषद का उद्देश्य है। हमारी कोशिश होनी चाहिए कि बच्चों के कल्याण के लिए जो भी कानून बनाए गए हैं, उनका सही ढंग से पालन हो। बच्चों के संवैधाानिक अधिकारों का संरक्षण उचित रूप से होना चाहिए। 

राज्य शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद बच्चों को मिले, यह देखना भी परिषद के सदस्यों की जिम्मेदारी है। परिषद एक सेवाभावी संस्था है। इस संस्था के माध्यम से बच्चों के कल्याण के लिए अधिक से अधिक गतिविधियां चलायी जाएं। श्री अग्रवाल ने कहा कि राजधानी रायपुर में मानसिक और शारीरिक रूप से निःशक्त बच्चों के पुनर्वास के लिए दान दाताओं के सहयोग से एक संस्थान स्थापित करने कार्य योजना बनायी जाए। उन्होंने कहा कि परिषद को ऐसे कामों को हाथ में लेना चाहिए, जो शासकीय तौर पर नहीं किए जाते हैं। ऐसे कार्योे से छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद की एक अलग पहचान बनेगी। श्री अग्रवाल ने साधारण सभा के सभी सदस्यों को परिषद की गतिविधियों की जानकारी एस.एम.एस. के माध्यम से देने के लिए जरूरी व्यवस्था करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।

पूर्व शिक्षा मंत्री तथा विधायक श्री सत्यनारायण शर्मा ने कहा कि परिषद के सुचारू संचालन के लिए आपसी ताल-मेल और सामंजस्य जरूरी है। उन्होंने संस्था में वित्तीय अनुशासन की जरूरत पर जोर देते हुए इसके लिए जरूरी फैसले लेने का सुझाव दिया। श्री शर्मा ने साधारण सभा के सदस्यों की शिकायतों को दूर करने, उनकी समस्याओं का निराकरण करने, गर्मियों में बच्चों के लिए अधिक से अधिक रचनात्मक गतिविधियां चलाने तथा परिषद में और ज्यादा संख्या में महिलाओं को सदस्य के रूप में शामिल करने की बात कही। श्री शर्मा ने मध्यप्रदेश बाल कल्याण परिषद से बटवारा लेने के लिए कार्रवाई करने का सुझाव भी सभा में दिया। 

महासमुन्द के विधायक डॉ. विमल चोपड़ा ने जिला स्तरीय समितियों को अधिकार देने का सुझाव देते हुए कहा कि ये समितियां स्थानीय जरूरतों के अनुसार बच्चों के कल्याण से संबंधित योजनाएं बनाकर उस पर अमल कर सकें। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद बच्चों के कल्याण के लिए काम करने का बहुत अच्छा माध्यम है। परिषद के अच्छे कामों से समाज में सकारात्मक बदलाव आएंगे। परिषद के उपाध्यक्ष श्री मोहन चोपड़ा ने परिषद के कार्यो को और अधिक सुव्यवस्थित और प्रभावी बनानेे के लिए अनेक महत्वपूर्ण सुझाव दिए। महासचिव श्री पी.पी. सोती ने परिषद के प्रस्तावित कार्यक्रमों की रूप-रेखा सभा के सामने रखी। कोषाध्यक्ष श्री नरेश चन्द्र गुप्ता ने वित्तीय वर्ष 2012-13 की ऑडिट रिपोर्ट तथा वर्ष 2014-15 के बजट बारे में बताया। साधारण सभा के अनेक सदस्यों ने भी अपने सुझाव दिए।

शिक्षु ( राजस्थान संशोधन) विधेयक, 2014 ध्वनिमत से पारित
जयपुर, 31 जुलाई। राज्य विधानसभा ने गुरुवार को शिक्षु (राजस्थान संशोधन) विधेयक, 2014 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। प्रभारी मंत्री एवं शिक्षा मंत्री श्री कालीचरण सराफ ने विधेयक को सदन में प्रस्तुत किया और विधेयक पर हुई चर्चा के बाद श्री सराफ ने इसके उद्देश्यों और कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश में स्थापित उद्योगों के विकास और उनकी मांग के अनुरूप प्रशिक्षित जनसमूह उपलब्ध कराने की दृष्टि से केन्द्र सरकार द्वारा अप्रेंटिस नियम, 1961 लागू किया गया है। परन्तु इस अधिनियम में बदली हुई परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए और इसकी धाराओं और उपधाराओं में आंशिक संशोधन किया जाना इसलिए आवश्यक है क्योंकि हमारे प्रदेश में कुशल श्रमिकों की भारी कमी है। उन्होंने कहा कि इसी को ध्यान में रखकर राज्य सरकार ने यह संशोधन लाने का निर्णय किया। शिक्षा मंत्री ने कहा कि वर्तमान में हम केन्द्र सरकार द्वारा अप्रेंटिस नियम, 1961 के तहत ही प्रशिक्षण योजना लागू कर सकते हैं। इसमें राज्य स्तर पर लचीलापन न होने के कारण यह योजना विफल हो रही है। अधिसूचित सीटों की सं या 11 हजार 838 है जिसमें से केवल 3 हजार 889 स्थानों पर ही एपे्रंटिस लगे हुए हैं। इसका कारण यह है कि हम राज्य की मांग और आवश्यकता के अनुसार योजना का क्रियान्वयन नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए राज्य सरकार की ओर से ये संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं। श्री सराफ ने कहा कि इन संशोधनों से स्टेट एप्रेंटिसशिप काउंसिल को अधिकृत किया जा रहा है। काउंसिल को यह अधिकार होगा कि वह तय करे कि किस उद्योग में कितने एप्रेंटिस लगें। साथ ही पाठ्यक्रम की अवधि तय करने और किसी विवाद को सुलझाने का अधिकार भी इस काउंसिल के पास होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कई बार एप्रेंटिस को न्यूनतम मजदूरी से भी कम मानदेय दिए जाने के मामले सामने आते हैं। संशोधन के बाद इस तरह के मामलों पर भी नियंत्रण रहेगा।
उन्होंने कहा कि यह विधेयक युवाओं में कौशल प्रशिक्षण बढ़ाने, रोजगार के अवसर सृजित करने और औद्योगिक विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इससे पहले विधेयक को प्रवर समिति को सौंपने एवं जनमत जानने के लिए परिचारित करने के प्रस्तावों को वापस ले लिया जिसे सदन ने ध्वनिमत से स्वीकार कर लिया।
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