व्यापम पर बखेड़ा, भाई हो, या कसाई

व्ही.एस.भुल्ले तीरंदाज। 
भैया- म्हारे महान म.प्र. में व्यापम न हुआ पटेल की पोर हो ली। जो देखो, सो देखो हरयेक, आराम फरमा गालियाँ दे, कोस रहा है आखिर कोई बताये तो म्हारे मर्यादा पुरुषोत्तम के भक्त भाई का आखिर भक्ती में दोष कहां है जो भाई लोग भाई की भक्ती को लेकर भूपाल ही नहीं दिल्ली तक की देहरी खूंदे खा रहे है और पूरे एक दो महिने से सदन ही नहीं समुचे म.प्र. में कोहराम मचा, गला फाड़ चिल्ला रहे है। कोई सरे राह, पुतला फंूक रहा है, तो कोई भाई भक्त का पलता पुतला लातो तले खूंद रहा है।

जबकि म्हारे भक्त भाई की एस.टी.एफ. गाड़ी भरे लेागों को चुन चुन कर सलाखों के पीछे ठूश चुकी है साथ ही कई घोटाले बाजो को बैनकाम कर पकडऩे की कार्यवाही भी श्रंखला बद्ध तरीके से चल रही है अब देखो न हाल ही में म्हारे भाई भक्त की सरकार की अनुशंसा पर म्हारे प्रदेश के, दो माई बापो को अकूत दौलत के जुर्म में केन्द्र सरकार ने वर्खास्त ही किया है। मने तो बोल्यू भाया भाई के साथ, व्यापम के नाम पर भारी अन्याय हो रहा है। ढेरन बांधे छापो के बावजूद भी प्रदेश में भ्रष्टाचार कहां रुक रहा है। बेचारे अदने से बाबूओ के ही यहां निकलती अकूत दौलत और अधिकारियों के यहां नोटो के बण्डल। आखिर यह भी तो भाई भक्त की ही भ्रष्टाचार मुफत प्रदेश बनाने अदनी सी पहल है फिर इसमें गलत क्या?

भैये- तने तो बावला शै, तू कै जांड़े राजनीति के गुण रहस्य जिसमें सीधे भले आदमी की परछाई भी उल्टी नजर आवे। कै थारे को मालूम कोणी मेले में भी कभी उल्टा पुल्टा घर लगता था विभिन्न प्रकार के शीशो में चेहरा ही नहीं समुचा शरीर बैडोल दिखता था। अगर आज की राजनीति में ऐसा कुछ हो रहा है, तो यह राजनीति का दोष है न कि थारे भक्त भाई का।

भैया- आखिर कै करुं इस मुई राजनीति का, जिसमें पढ़ भाई भक्त ने सेवा के अलावा, एक भी सफल गुण शासक का न सीखा। सच वोल्यू तो सत्ता के मुखिया रहते भाई का तीसरा टर्म चल रहा है। ऐसे में तो संगठन तो संगठन, सत्ता में भी भाई की निर्विवाद तूती बोल जाती, जिसमें अपने पराये क्या सभी चिल्लाने वालो की तो घिग्घी ही बन्द हो जाती। मगर संगठन और अपनो के विश्वास ने भाई भक्त को कहीं का न छोड़। मने तो शर्म आवें, अब भक्त कहने पर वह भी प्रभु राम ही नहीं जनता का भी, जिनके नाम लेने भर से लेाग तर जाते है और फुटपाती, अपराधी, भ्रष्ट लेाग तक जनता के आर्शीवाद से लेाकतंत्र में राजा बन जाते है। मगर कै करुं भाई भक्त कि उस जन भक्ति और इन्सानियत का जिसके बखान भर से पिछली सरकार में सदन ही नहीं समुचा संगठन हिल गया था। और भाई को अगले ५ वर्ष तक फ्री हेन्ड मिल गया था। मगर फिर भी भाई भक्त आज इन आरोप प्रत्यारोपो की काठी ढो रहा है। जिसमें पराये तो पराये अपनो का दगा भी साफ दिख रहा है।

भैये- कहते है दगा कभी किसी का सगा नहीं होता, देखना है तो करके देख?

भैया- थारी बाते सुड़ मनेे तो म्हारी काठी कूटने का मन होवे, आखिर कै करुं भाई भक्त और मुये व्यापम घोटाले का और क्या करुं म्हारे उस सुन्दर शहर शिवपुरी के सीवेज सिन्ध प्रोजक्ट सहित ३०० बिस्तरो वाले अस्पताल का जो मने धूल, कीचड़, गड्डे गन्दगी के ढेर पर बैठ, शेष बचे जीवन की जद्दोजहद करती, म्हारी काठी का। कभी म्हारे केन्द्रीय मंत्री जी ने मने बोला कमलनाथ से अगस्त २०१३ में सिन्ध का पेयजल दिलाऊँगा तो कभी भाई भक्त भी बेसमय आती जाती अटल ज्योति जलाते वक्त कह गया था कि अगली बार आऊंगा सिन्ध देकर जाऊंगा केन्द्रीय मंत्री तो सांसद के रुप में परमानेन्ट है। भाई भक्त भी दो मर्तवा शिवपुरी हो लिया मगर बड़ी मसक्कत के बाद भी स्कूल चलो के शुभारम्भ पर भरी भीड़ के बीच कान फाड़ चिल्लाने पर भी भाई भक्त सिन्ध पर कुछ नहीं बोला।

अब तो म्हारे से म्हारी काठी बोल्ये कि सिन्ध का शुद्ध पेयजल मिले न मिले, हाथो हाथ चारों धाम की यात्रा छोड़, जनता के भगवान भक्तो की सीमा तोड़, म्हारे नेशनल पार्क के महान नौकरशाह की ही चरण रज ले आऊं और उस चरण रज को माथे पर पोत, सत्ता के महामण्डेश्लेश्वरों म्हारे मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, केन्द्रीय मंत्री से हाथो हाथ पूंछ आंऊ कि कब अबतरित होगी सिन्ध। म्हारी राजमाता की कर्म भूमि पर जिन्होंने अपने हाथों से रात तुम्हे दूध पिलाया था। जिन्होंने सारा जीवन सत्ताधारी दल की परवरिस में खपाया था।
मगर दुर्भाग्य म्हारे जैसे कूकर का, जिसकी जन्म भूमि पर सिन्ध जलावर्धन सीवर प्रोजक्ट जैसी योजनाये कलफ रही है वहीं लेागों को जीवन देने वाली जिला चिकित्सालय की ३०० बिस्तरो वाली बिल्डिंग मूर्त रुप लेने सिसक रही है। भाया मने तो लागे अब म्हारा शहर शिवपुरी न हुआ खाला का घर हो लिया जहां लेागों की भावनाओं पर जबानी जमा खर्च चल रहा। मने तो बोल्यू एक लगाओगे: सौ पाओगे।
चल गया तो जादू, चूक गये तो मौत कम्पनी का प्रचार है। 
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