शिवपुरी में मनरेगा घोटाला: निर्दोष साबित होने भोपाल कूच की तैयारी

शिवपुरी। शिवपुरी मनरेगा में हुई मुरहम बोल्डर सड़को में 21.82 करोड़ की अनिमितता को म.प्र. शासन ग्राम पंचायत एवं ग्रामीण विकास आदेश 19-4-2011 के द्वारा मु यमंत्री ग्राम संड़क योजना के अतिरिक्त आंतरिक्त मार्गो को छोड़कर अन्य मार्गो के निर्माण की नई स्वीकृतियाँ विभाग के अनुमोदन के बिना नहीं दिये जाने के निर्देश थे।
जो विभाग के अपर सचिव आर.परशुराम के हस्ताक्षर से जारी किये गये थे। मगर शासन आदेश और निर्देशो को धता बता मनमाने ढंग से उपयंत्रियों द्वारा प्राक्कलन प्रस्तुत कर सहायक यंत्रियों द्वारा तकनीकी स्वीकृतियाँ दी गई। मगर जिला कलेक्टर द्वारा अतिरिक्त सी.ई.ओ. जिला पंचायत की जांच पर आयुक्त को भेजे प्रतिवेदन में आयुक्त ग्वालियर द्वारा खनियाधाना सहायक यंत्री मनरेगा को निलंबित कर दिया गया। 

जब निलंबित सहायक यंत्री द्वारा आयुक्त के संज्ञान में यह बात लाई गई कि इस तरह की सड़कों का निर्माण समुचे जिले में हुआ है। इस पर से संयुक्त आयुक्त विकास ग्वालियर द्वारा अधीक्षण यंत्री ग्रामीण यंात्रिकी सेवा मण्डल ग्वालियर से जांच कराई गई। अधीक्षण यंत्री द्वारा जांच उपरांत संयुक्त आयुक्त विकास को पत्र क्रमांक 720/ग्रा.या.से./स्था./2014 दिनांक 24-5-2014 के द्वारा शासन आदेश निर्देषों का हवाला देते हुये शिवपुरी जिले के 8 जनपदों के संबंध में विस्तृत रिर्पोट में कहां है कि कार्यो के मस्टरोल जारी करना, एम.आई.एस. एन्ट्री,वित्तीय नियंत्रण जनपद पंचायत के मु य कार्यपालन अधिकारियों का है। अत: उपरोक्त अनिमितता के लिये शिवपुरी जिले के मनरेगा के उपयंत्री सहायक यंत्री एवं मु य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत उत्तरदायी है।

अधीक्षण यंत्री द्वारा प्रेसित 50 पृष्ठिये अपने अभिमत के साथ प्रतिवेदन में जिन्हें दोषी पाया उनमें से सहायक यंत्री तो पूर्व से निलंबित है मगर सारे जनपद सी.ई.ओ. सहायक यंत्री और उपयंत्री अ ाी भी अपने कत्र्तव्यों को सरअंजाम देने में भी लगे है। मगर इन दोषियों की जांच उपरांत दोषी पाये जाने के बावजूद ाी इन पर आयुक्त ग्वालियर या म.प्र. सरकार द्वारा कार्यवाही न किया जाना चर्चा का विषय है।

वहीं अपुष्ट सूत्रों की माने तो बड़े पैमाने पर हुई इस अनियमितता को छिपाने जिला स्तर से इस समुचे प्रकरण को भोपाल ले जाया जा रहा है। जिससे 21 करोड़ 82 लाख रुपये की तकनीकी स्वीकृतियाँ और अनियमित तरीके से शासन आदेशों के विरुद्ध डलवाई गई बोल्डर मुरहम सड़कों को अमली जामा पहनाया जा सके। सूत्रों की माने तो इतनी बड़ी राशि पर शासन का अनुमोदन शायद ही बगैर कैबीनेट की अनुमति के संभव नहीं। मगर प्रशासन आज भी इस उ मीद है, कैसे भी करके इस अनिमितता पर पर्दा डल जाये।

मगर यहां यक्ष प्रश्र यह है कि शासन निर्देशों की धज्जियाँ उड़ाते हुये मु यमंत्री सड़कों का कार्य शुरु होने के बावजूद मुरहम बोल्डर सड़को पर 21 करोड़ 82 लाख से अधिक की राशि कैसे बगैर शासन की अनुमति के खर्च कर दी गई।

ऐसा नहीं कि मनरेगा में म.प्र. शासन के निर्देशो की धज्जियाँ उड़ाने का यह मामला पहला हो, इससे पूर्व भी विगत वर्ष जून 2013 में सड़कों के पेंडिग भुगतान के नाम पर लगभग 47 लाख रुपये का भुगतान जनपद पंचायत पेाहरी और कोलारस में मस्टरो के माध्ययम से जिला पंचायत से करा दिया गया। जबकि ज्ञात हो कि वर्ष 2013 में विलंबित भुगतान के लिये भी मई 2013 में 3 दिन का समय भुगतान हेतु 31 मार्च 2013 से ई-पेमेन्ट हो जाने के कारण बंद कर दिया गया था। यहां भी शासन निर्देशों के विरुद्ध मस्टरों से भुगतान कर दिया गया।
जो आज भी जांच की जद मेेंं है। इतना ही नहीं जिस संविदा सहायक यंत्री को तकनीकी स्वीकृति देने का अधिकार ही नहीं उस सहायक यंत्री ने काउन्टर हस्ताक्षर कराकर 1 करोड़ से अधिक की तकनीकी स्वीकृतियाँ जारी कर डाली।
बहरहॉल इतने बड़े पैमाने पर अनियमितता उसी विभाग के अधीक्षण यंत्री द्वारा उजागर करने के बावजूद कार्यवाही का न होना किसी बड़े घोटाले का संकेत अवश्य देता है। जिसमें अगर ईमानदारी से जांच हो जाये तो कईयों की गर्दन नपना तय है।

केरला समाजम ने दान किया स्वर्ग रथ : मुख्यमंत्री ने समाजसेवी संस्था ज्बढ़ते कदमज् को चाबी सौंपी
रायपुर, २० जुलाई, २०१४ मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज शाम यहां अपने निवास परिसर में रायपुर केरला समाजम की ओर से दान में दिए गए स्वर्ग रथ (शव वाहन) की चाबी समाजसेवी संस्था ज्बढ़ते कदमज् के अध्यक्ष श्री पहलाज खेमानी को सौंपी। लगभग दस लाख रूपए की लागत से स्वर्ग रथ तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री ने मानवता की सेवा के लिए केरला समाजम की इस पहल को अनुकरणीय बताया। उन्होंने ज्बढ़ते कदमज् द्वारा किए जा रहे समाज सेवा के कार्यों की भी प्रशंसा की। इस अवसर पर रायपुर केरला समाजम के उपाध्यक्ष श्री के.एस. शशिधरन, कोषाध्यक्ष श्री थामस मैथ्यू, कार्यकारिणी सदस्य सर्वश्री आनंद पिल्लई, राजेन्द्रन पिल्लई और नारायणम कूट्टी, ज्बढ़ते कदमज् संस्था के संयोजक श्री इंद्रकुमार डोडवानी, महासचिव श्री सुनील अमरानी सहित सर्वश्री राजेश वाधवानी, राजू दावानी और सुनील नारवानी उपस्थित थे। बढ़ते कदम संस्था के अध्यक्ष श्री पहलाज खेमानी ने बताया कि उनकी संस्था द्वारा नेत्रदान, शरीरदान, रक्तदान, वृद्धाश्रम और गौशाला का संचालन, देवेन्द्र नगर शमशान घाट में मरचुरी भवन, एम्बूलेंस, स्वर्ग रथ और काफिंन फ्रीजर की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इसके साथ ही संस्था द्वारा गरीब बच्चों को छात्रवृत्ति का वितरण भी किया जाता है और हर वर्ष तीन सौ बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा कराई जाती है। संस्था द्वारा वृक्षारोपण के लिए पौधे बांटने का काम भी किया जा रहा है।

भारतीय सीमा के पास उच्च शक्ति संचार टावरों की स्थापना करने की मांग
जयपुर, 20 जुलाई। सांसद श्री नारायण लाल पंचारिया ने राज्यसभा में अनुदान मांग पर बोलते हुुए बताया कि राजस्थान में भारतीय सीमा से सटी पाकिस्तान सीमा में लगे उच्च शक्ति के टावर्स के कारण भारतीय सीमाओं को खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने बताया कि इन टावरों की रेंज भारतीय सीमा में 40-50 किलोमीटर तक की होती है जिसके कारण कोई भी व्यक्ति पाकिस्तान में आसानी से बात कर सकता है। श्री पंचारिया ने भारत सरकार से भारतीय सीमा के निकट उच्च शक्ति संचार टावरों की स्थापना के संबंध में तुरंत कारवाई करने का अनुरोध किया और भारतीय सीमा के पास उच्च शक्ति संचार टावरों की स्थापना करने की मांग की। ताकि भारतीय सीमाएं और अधिक सुरक्षित हो सकें।

राजस्थान में बागवानी मिशन के तहत और जिलों को शामिल किये जाने का अनुरोध
श्री पंचारिया ने नई दिल्ली में कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री डॉ. संजीव कुमार बालियान से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान उन्होंने राजस्थान में बागवानी को अधिक से अधिक बढ़ाने और जिलों को शामिल किये जाने की मांग की है। राज्य मंत्री डॉ. संजीव कुमार बालियान ने बताया कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन (एनएचएम) के तहत राजस्थान के 24 जिलों सहित 19 राज्यों और 4 संघ राज्य क्षेत्रों में कुल 384 जिले कवर किये गये हैं, जबकि पूर्वोत्तर एवं हिमालयी राज्यों हेतु बागवानी मिशन (एचएमएनईएच) के तहत आठ पूर्वोत्तर तथा तीन हिमालयी राज्यों के 137 जिले कवर किये गये है। राजस्थान ने एनएचएम के तहत नौ और जिलों को शामिल किये जाने का अनुरोध किया है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन (एनएचएम) में बागवानी फसलों के कृषि जलवायु स्थितियों, विकास की संभावनाओं तथा विपणन अवसरों के आधार पर उनके प्रतिस्पर्धो लाभ के अनुसार विकास हेतु एक सामूहिक दृष्टिकोण की परिकल्पना की गई है। इस कार्यक्रम के तहत और अधिक जिलों को शामिल किये जाने से दुर्लभ संसाधनों का प्रसार होगा। कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने राज्यों को सलाह दी है कि वे गैर एनएएचएम जिलों में बागवानी विकास के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना से निधियों का उपयोग करें।

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