मर्दानगी के मुंह पर दरिंदगी का तमाचा, गैंग रैप के बाद जघन्य हत्या

विलेज टाईम्स/उत्तरप्रदेश, लखनऊ। शहर से सटे स्थान पर एक वेबस महिला से गैंग रैप के पश्चात उसकी जघन्य हत्या ने भले ही देश वासियो को दिल्ली में हुये र्निभया कांण्ड की याद ताजा करते हुये एक बार फिर से झंझकोर कर रख दिया हों, मगर मर्दो की जमात आज भी वेबस बन आत्मा को झंझकोर देने वाली घटना पर चुप बैठी है।

जिस कार्य को बेजुबान जानवर, पशु पक्षी तक नहीं करते वह कार्य आदमी के रुप में कर इन्सान हैवान को भी मात कर, कर रहा है। क्या सरकारों के रगो में बहने वाला खून सूख गया है। या फिर कानून की किताबों को बंद कर हमारी व्यवस्था में ऐसे दरिंदो को सरेयाम दरिन्दगी करने छोड़ दिया है। जिसमें न तो मासूम बच्चियाँ,बहु बेटियाँ ही सुरक्षित है न ही उनकी इज्जत ऐसी स्थिति में क्या लिखे क्या कहें सब कुछ समझ से बाहर होता जा रहा है?

किसी भी स्त्री लिंग के साथ पशु-पक्षी, जानवर, जीव में आज भी ऐसी स्थिति देखने नहीं मिलती जो आज इन्सानों के बीच देखने मिल रही है। कलेजा कांप उठता है,हर इन्सान का जिसके अन्दर थोड़ी सी भी संवेदना बाकी है ऐसी दरिन्दगी देखकर। मगर अवसोस कि ऐसी घटनाओं के बाद घसिटता कानून और वेबस सरकारें केवल संवेदनाओं पर आकर अटक जाती है। और मानव अधिकारों को लेकर कुर्तक करने वालो की घिग्गी बंद हो जाती है। जो न जाने कहां से ज्ञान हासिल कर टी व्ही चैनलो पर बैठ बड़ी-बड़ी मानवता की दलीले दे जाते है। ऐसी जघन्य घटनाओं पर कार्यवाही के बजाये आंकड़ों के गणित पढ़ाने वाले नेता और मानव अधिकार का भय समझा अपने निक मेपन को छिपाने वाली पुलिस यह भूल रही है, कि उनकी गैर जि मेदारियों चलते जिस समाज का ताना बाना गड़ा जा रहा है उसी समाज में सभी को रहना है। जब समाज के अन्दर कानून का राज इसी तरह दम तोड़ता रहेगा तो न रहेगा लेागों में कानून का भय और न रह जायेगी कानून के रखवालो की जरुरत है। आखिर हम क्यों भारत जैसे महान देश जिसमें माता-बहिनो को देवियो के रुप में पूजा जाता हो उस महान देश में क्यों हम दरिंदगी से सना समाज बनाना चाहते है? कौन है वो लेाग जो ऐसे दरिंदो का बचाव और कौन है ऐसे दरिंदों के जन्मदाता जिन्होंने इन्सान के रुप में ऐसे दरिंदो को जन्म दिया? इतिहास ही नहीं वर्तमान गवाह है इस भारत भूमि का जिसके महान सपूतो ने आन-वान और इज्जत के लिये कितनी ही मर्तवा सर कलम किये या करवाये। मगर माता-बहिनो का सर नीचे नहीं होने दिया। बेहतर हो सरकारे नेता, बुद्धिजीवी और व्यवस्था में कानून का पालन कराने वाले बिचार करें कि उन्हें कैसा समाज चाहिए। कहते है, कि महल कितना ही ऊँचा बड़ा क्यों न हो, अगर उसके पास गन्दगी पन्नपती है तो उस गन्दगी से वह महल भी अछूता नहीं रह सकता। फिर वह महल किसी दरिंदे का हो, या फिर किसी इन्सान का। क्योंकि जब भी इन्सानियत रोती है तो वह कयामत लेकर आती है। जो सिवाऐ बिनाश के कुछ और देखना पसन्द नहीं करती। इसलिये कानून है संविधान प्रदत्त अधिकार संसाधनों का भी टोटा नहीं फिर दरिंदगी का ऐसा नंगा नाच क्यों?

सायलो भण्डारण क्षमता के उपयोग के लिये मध्यप्रदेश को मिला अवार्ड
रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री अनंत कुमार ने दिया अवार्ड
भोपाल : शुक्रवार, जुलाई १८, २०१४ मध्यप्रदेश में अनाज के सुरक्षित भण्डारण में सायलो बेग के उपयोग के लिये गुरूवार को नई दिल्ली में रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री अनंत कुमार ने प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति मंत्री कुँवर विजय शाह को अवार्ड प्रदान किया। इस मौके पर केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्री निहालचंद भी मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में पिछले वर्षों में समर्थन मूल्य पर गेहूँ की भारी मात्रा में खरीदी के दौरान जूट के बारदानों की कमी की वजह से मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान की पहल पर सायलो बेग में गेहूँ के सुरक्षित भंडारण किये जाने की यह अभिनव पहल की गई थी। कार्यक्रम में केन्द्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री श्री अनंत कुमार ने देश में पर्यावरण को नुकसान पहुँचाये बगैर ग्रीन प्लास्टिक रिवेल्यूशन का आव्हान किया। श्री अनंत कुमार ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में प्लास्टिक का इस तरह उपयोग हो, जो ईको फ्रेण्डली हो।

अनाज भण्डारण में सायलो बेग के उपयोग वाला पहला प्रदेश
मध्यप्रदेश को यह अवार्ड रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के चौथे नेशनल अवार्ड कार्यक्रम में प्रदान किया गया। यह अवार्ड सायलो बेग में अनाज के सुरक्षित भण्डारण की श्रेणी में दिया गया है। मध्यप्रदेश में अनाज भण्डारण में सायलो बेग का उपयोग २०१२-१३ में प्रारंभ हुआ। इस वर्ष होशंगाबाद के बाबई और रायसेन जिले के गौहरगंज में २० हजार ६७७ मीट्रिक टन गेहूँ का भण्डारण किया गया। इसके बाद वर्ष २०१३-१४ में एक लाख ३१ हजार मीट्रिक टन और वर्ष २०१४-१५ में २ लाख ७८ हजार अनाज का सुरक्षित भण्डारण सायलो बेग में किया गया। प्रदेश में सायालो बेग में भण्डारण के लिये निजी क्षेत्र में निवेशकों को प्रोत्साहित किया गया। मध्यप्रदेश को भण्डारण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य एवं राज्य में सायलो बेग में सुरक्षित भण्डारण के नवाचार में इण्डियन चेम्बर ऑफ कॉमर्स द्वारा मार्च २०१३ को बेस्ट इनोवेटिव स्टेट वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन ऑफ द इयर अवार्ड से भी पुरस्कृत किया जा चुका है।
क्या है सायलो बेग सायलो बेग एक प्लास्टिक का बड़ा बेग होता है, जिसमें खुले अनाज को मशीन द्वारा खींचते हुए भण्डारण किया जाता है। सायलो बेग की क्षमता लगभग २००० मीट्रिक टन होती है, जो लगभग १४० फुट लम्बा होता है। इसे आवश्यकतानुसार कम किया जा सकता है। सायलो बेग में आक्सीजन गैस को मशीन द्वारा निकालकर कार्बन डाईआक्साइड गैस को प्रवाह करते हुए कीटों पर नियंत्रण किया जाता है। सायलो बेग में औसतन दो वर्ष तक सुरक्षित रूप से अनाज का भण्डारण किया जा सकता है। अवार्ड स्वरूप एक लाख रुपये एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया। इस मौके पर एम.पी. वेयर हाउसिंग एण्ड लॉजिस्टिक कार्पोरेशन के प्रबंध संचालक श्री अरूण पाण्डे एवं कार्पोरेशन के महाप्रबंधक श्री उमाशंकर पाण्डे भी मौजूद थे।

डेंगू से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा सतर्कता बरतने के निर्देश जारी
रायपुर, १८ जुलाई २०१४ वर्षा ऋतु के आगमन के साथ महामारी के प्रकोप को फैलने से रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सर्तकता संबंधी निर्देश जारी किए हैं। इस दौरान होने वाले डेंगू बुखार के संबंध में बताया गया कि यह एक आम संचारी रोग है इसके मुख्य लक्षण हैं, तीव्र बुखार, अत्यधिक शरीर दर्द तथा सिर दर्द हैं। यह एक ऐसी बीमारी है जिसे महामारी के रूप में देखा जाता है। वयस्कों के मुकाबले, बच्चों में इस बीमारी की तीव्रता अधिक होती है। किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए राज्य स्तरीय महामारी नियंत्रण कक्ष के दूरभाष नम्बर अथवा जिलों के महामारी नियंत्रण कक्ष से सम्पर्क किया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आम भाषा में इसे च्हड्डी तोड़ बुखारज् कहा जाता है। डेंगू के लक्षण -अकस्मात तेज सिर दर्द व बुखार का होना। ठंड के साथ मांसपेशियों तथा जोड़ों में दर्द होना। आँखों के पीछे दर्द होना, जो कि आँखों को घुमाने से बढ़ता है। जी मिचलाना एवं उल्टी होना।गंभीर मामलों में नाक, मुँह, मसूड़ों में खून आना अथवा त्वचा पर चकत्ते उभरना। डेंगू से बचाव के उपाय इस प्रकार है- डेंगू फैलाने वाले च्च्एडीजज्ज् मच्छर ठहरे हुए साफ पानी में पनपता है, अतःघर में या आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए जैसे कि कूलर, पानी की टंकी, पक्षियों के पीने के पानी का बर्तन, फ्रिज की ट्रे, फूलदान, नारियल का खोल, टूटे हुए बर्तन व टायर इत्यादि से पानी निकाल देना चाहिए। पानी से भरे हुए बर्तनों व टंकियों आदि को ढंककर रखना चाहिए। कूलर को खाली करके सुखा देना चाहिए। यदि कूलरों तथा पानी की टंकियों को पूरी तरह खाली कर पाना संभव नहीं है तो उनमें सप्ताह में एक बार पेट्रोल या मिट्टी का तेल डाल देना चाहिए। मच्छरों को भगाने व मारने के लिए मच्छर नाशक क्रीम, स्प्रे, मैट्स, कॉइल्स आदि प्रयोग करना चाहिए। यह मच्छर दिन के समय भी काटता है। अतः ऐसे कपड़े पहनना चाहिए जो बदन को पूरी तरह ढंके।
डेंगू के उपचार के लिए कोई खास दवा या वैक्सीन नहीं है। बुखार उतारने के लिये पैरासीटामॉल लिया जा सकता है। एस्प्रीन या आइबूप्रोफेन का इस्तेमाल अपने आप नहीं करना चाहिए। डॉक्टर की सलाह लेना चाहिए। डेंगू के हर रोगी को प्लेटलेट्स की आवश्यकता नहीं पड़ती किन्तु हेमोरेजिक डेंगू में प्लेटलेट्स निरंतर घटता है जो कि अत्यंत खतरनाक एवं जानलेवा होता है। डेंगू बुखार से ग्रस्त रोगी को बीमारी के शुरू के ६-७ दिन तक मच्छरदानी से ढ़के हुए बिस्तर पर ही रखना चाहिए ताकि मच्छर उस तक ना पहुँच पायें। इस उपाय से डेंगू बुखार से बचाने में सहायता मिलेगी। घर के आस-पास कम से कम १०० मीटर की दूरी तक कूड़ा-करकट, घास-फूस तथा गंदगी फैलने नहीं देना चाहिए।

संसद में राजस्थान बीकानेर में हवाई सेवा शुरू करवाने के लिए उठाया मुद्दा
जयपुर, 18 जुलाई। बीकानेर सांसद श्री अर्जुन राम मेघवाल ने शुक्रवार को लोकसभा के शून्यकाल के दौरान बीकानेर के नाल हवाई अड्डे से हवाई सुविधाएं शुरू करवाने का आग्रह किया।
श्री मेघवाल ने कहा कि बीकानेर शहर पर्यटन की दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है। हाल ही में केन्द्रीय नागर विमानन मंत्री ने बीकानेर के पास नाल में एयरपोर्ट भवन के टर्मिनल का उद्घाटन किया है, लेकिन अभी हवाई सेवा प्रार भ नहीं हुई है।
उन्होंने बताया कि बीकानेर के नाल एयरपोर्ट पर हवाई सेवाओं के लिए सभी आधारभूत सेवाएं विकसित कर बीकानेर शहर को शीघ्र हवाई सेवा से जोड़ा जाए।

SHARE
    Your Comment

0 comments:

Post a Comment