शिवपुरी मनरेगा में बड़ा घोटाला: शासन आदेशों के विरुद्ध हुए 22 करोड़ के काम

शिवपुरी। भ्रष्टाचार की वायस बनी महात्मा गांधी रोजगार गारन्टी योजना यूं तो शिवपुरी में लगभग 500 करोड़ फूकने के बाद किसी परिचय की मोहताज नहीं। मगर तमाम शिकायतों जांचों के बाद वर्तमान में जो मामला सामने आया है। वह बढ़ा ही चौकाने वाला है।
जिसकी जांच कमिश्रर ग्वालियर के आदेश पर अधीक्षण यंत्री ग्रामीण यंात्रिकी सेवा द्वारा की गई, जिसमें जिले के 8 जनपद पंचायतों के सीईओ एवं मनरेगा में पदस्थ जनपदों के सहायक यंत्री, उपयंत्रियों को दोषी माना है। जिन्होंने शासन आदेशों के विरुद्ध प्रशासकीय, तकनीकी स्वीकृति के साथ ही उन कार्यो का भुगतान कर डाला जिन्हें करने की मनाही म.प्र. शासन ने की थी।

आयुक्त को प्रस्तुत प्रतिवेदन में अधीक्षण यंत्री ने शासन आदेश और सीईओ जनपद, सहायक यंत्री, उपयंत्रियों द्वारा की गई घोर अनियमितता के लिये दोषी माना है। मामला है पूर्व निर्मित सड़कों पर वोल्डर मुरहम सड़कों के निर्माण का।

अपुष्ट सूत्रों की मानें तो कुछ सड़कों केा छोड़ पूरा फर्जी फिकेशन है। अगर रोलर, पानी टेंकर के न बर खंगाले जाये और मनरेगा से जुड़े अधिकारियों की हैसियत तलाशी जाए तो परियोजना के अन्य मामलों के उजागर होने की भी पूरी संभावना है।

ज्ञात हो कि 2011 में मु यमंत्री सड़कों की शुरुआत के साथ ही शासन वोल्डर मुरहम सड़कों पर रोक लगा दी थी। बावजूद इसके जिले में 22 करोड़ की मुरहम वोल्डरों सड़कों का निर्माण यह बताने कॉफी है कि किस कदर शिवपुरी जिले में वर्ष 2006 से आज तक मनरेगा में लूटमार मची है। हालिया मामला खेत सड़कों का भी है। जिनमें भी न तो रोलर चल रहे न ही वॉटरिंग हो रही, मगर फिर भी सड़कों के नाम पर करोड़ों रुपये का भुगतान यह दर्शाता है कि कितनी दयनीय स्थति है, इस जिले की और कितने खुद्दार है यहां के लेाग जिनकी बिना पर यह लूटमार का धन्धा बेरोकटोक चल रहा है।

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