अमृत के नाम बिकता ,मंद जहर, नस्ल नष्ट करने पर उतारु मुनाफा खोर

म.प्र. शिवपुरी। जिस देश मेें हरी सब्जी दही,घी,छाच को अमृत माना जाता है व देश की मातायेंं बहिनें अपने नौनिहालो को हरी सब्जियाँ,दूध,दही,छाच व दूध से बनने वाले पकवानो मुंह मांग दामों पर खरीद तदरुत बनाने अपने नौनिहालो को खिलाती पिलाती है। जिस भारतीय संस्कृति में स्वास्थ के लिये इन्हें अमृत कहां जाता है।
मगर अमृत के नाम जिस तरह से भारत वर्ष ही नहीं म.प्र. के शिवपुरी जिले में मंद जहर के माध्ययम से हमारी भावी या मौजूद नस्ल को निस्तानाबूत करने का बीड़ा मुनाफा खोरों ने उठा रखा है वो भी इस बिना पर कि वह कम लागत पर अधिक से अधिक लाभ कैसे कमाये। भले ही देश की नस्ल ही नष्ट क्यों न हो जाये? उसी लालच के चलते अज्ञानता बस फसल व पशुधन की पूजा करने वाले लालचियों के चंगुल में फस मुनाफाखोर बनउस फसल और पशु धन पर अत्याचार कर उसके अपमान पर तुले है।  कारण साफ है कि कम लागत में अधिक से अधिक मुनाफा कैसे हो कभी माता बहिनों की पीढ़ा हरने और सुरक्षित प्रशव के लिये लगाये जाने वाले टौक्सीन इन्जेक्शन का उपयोग सब्जियों,पशुओं पर होगा किसी ने सपने में भी न सोचा होगा।

अगर सूत्रों की माने तो लालच बस इस इन्जेक्शन का खुलकर उपयोग हो रहा है। जबकि भारत सरकार द्वारा उक्त इन्जेक्शन औषधि पर बन्दिस है उसके बावजूद भी दूध की मात्रा बढ़ाने व सब्जियों का साइज बढ़ाने खुलेयाम उपयोग हो रहा है। जिसके दुष्प्रभाव के रुप में अब नस्ल तो नस्ल हो ही रही साथ ही पर्यावरण को भी बड़े पैमाने पर नुकसान हो चुका है। ज्ञात हो गाँवो में सढ़े गले मांस को साफ करने वाले गिद्ध इसके दुस्परिणाम के चलते सफर हो चुके है। और वह ढूढ़े से भी इस क्षेत्र में दिखाई नहीं पड़ते। दूध और दुधारु पशुओं में टोक्सीन की मात्रा के चलते बच्चों की बॉडी में अन्यास परिवर्तन इस बात के परिणाम है कि जिस दूध को हम अमृत समझते थे वह मन्द जहर बन गया है। जिस लॉकी,कद्दू को मरीज का सुरक्षित आहार समझते थे वह भी बर्बाद हो चुके है। हालात यहीं पर नहीं रुकते खोया,मिठाईयों को सफेद करने में हाइड्रो के इस्तेमाल ने आम नागरिक को बैजान सा कर दिया है। जिसका इल्म आज तक उन लेागों को नहीं जो अमृत केे नाम मुंह मांगे दामों पर खरीद इस्तेमाल कर रहे है।

अपुष्ट सूत्रों की माने तो 90 प्रतिशत दुग्ध उत्पादक प्रतिबंधित इन्जेक्शन का इस्तेमाल कर रहे है वहीं अधिकांश लेाकी,कद्दू उत्पादक भी इसका इस्तेमाल कर रहे है।
जागरुकता के आभाव में आज हमारे सब्जी उत्पादक पशुपालक इतना घिनौना कार्य कर रहे जिसके लिये शायद ही ईश्वर कभी इन्हें माफ नहीं करे। बेहतर हो सरकारें पशुपालको व कुछ किसानों में फैली इस भ्रान्ति को दूर कर कृषि व पशुपालन विभाग को जागरुकता लाने सक्रिय करे। जिससे आने वाली नस्ल को इन मुनाफाखोरों से बचाया जा सके।

जयपुर के सांसद श्री रामचरण बोहरा ने देश में सर्वाधिक मत हासिल किए
लोकसभा सचिवालय ने जारी किया बुलेटिन
जयपुर, 09 जून। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी लोकसभा चुनावों में जहां देश में सर्वाधिक मतों के अंतर से विजयी होने वाले प्रत्याक्षी रहे हैं, वहीं जयपुर के सांसद श्री रामचरण बोहरा देश में सबसे अधिक मत पाने वाले उ मीदवार है। लोकसभा सचिवालय के शोध एवं सूचना प्रभाग द्वारा जारी बुलेटिन में यह तथ्य प्रकाश में आया है। बुलेटिन में कहा गया है कि जयपुर लोकसभा सीट के प्रत्याक्षी श्री रामचरण बोहरा को देश में सर्वाधिक 8 लाख 63 हजार 358 मत प्राप्त हुए जो कि अपने आप में एक रिकार्ड है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भी वड़ोदरा (गुजरात) से सर्वाधिक मतों (5 लाख 70 हजार 128) के अंतर से विजयी होकर एक नया कीर्तिमान बनाया है।

मध्यप्रदेश और दक्षिण अफ्रीकी राज्य द्विपक्षीय संबंध मजबूत बनाने पर हुए सहमत
भोपाल : सोमवार, जून ९, २०१४, मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज दक्षिण अफ्रीका के फ्री स्टेट के प्रमुख श्री एस. मैगाशुले से मुलाकात की। दोनों नेता मध्यप्रदेश और फ्री स्टेट के बीच द्विपक्षीय संबंध मजबूत बनाने के मुददे पर सहमत हुए।
श्री चौहान द्वारा मध्यप्रदेश आने का निमंत्रण स्वीकार करते हुए श्री मैगाशुले ने कहा कि उनके प्रदेश की ओर से एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधि-मंडल जुलाई माह में मध्यप्रदेश आयेगा और विभिन्न क्षेत्रों में आपसी सहयोग की संभावनाओं की तलाश करेगा। इसके अलावा कृषि, शिक्षा और लघु और मध्यम उद्योगों की स्थापना के क्षेत्र में निवेश अवसरों का अध्ययन करेगा। श्री मैगाशुले ने कहा कि निवेशकों का प्रतिनिधि-मंडल इंदौर में अक्टूबर में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में भी भाग लेगा।
मुख्यमंत्री श्री चौहान और मध्यप्रदेश के प्रतिनिधि-मंडल के सदस्यों ने नार्थ वेस्ट क्षेत्र के उच्च-स्तरीय अधिकारियों से विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग और निवेश की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। नार्थ वेस्ट क्षेत्र के अधिकारियों ने भविष्य की निवेश और विकास योजनाओं पर विस्तारपूर्वक प्रस्तुतिकरण दिया। मुख्य रूप से पर्यटन, वन्य-जीव पर्यटन प्रबंधन, उत्खनन एवं उत्खनन प्रबंधन और खाद्य प्र-संस्करण पर विशेष चर्चा हुई।

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