घरोंदो के बीच जन्नत ,विभाये अनेक बगीचा एक

व्ही.एस.भुल्ले/म.प्र.ग्वालियर। यूं तो परिसंपत्ति म.प्र. स्थित जिला मु यालय शिवपुरी नगर पालिका की है मगर इसे सवारने वाले हाथ अनेक मगर इस मूर्त रुप देने वाले नौजवान का नाम है क्षेत्रपाल उनके नाम अनुरुप एक उजड़े पार्क को सबारने वाले इस नौजवान ने बो सब कुछ अपने बल बूते कर दिखाया जिसकी उ मीद लेाग आज व्यवस्था से करते है। जो वर्तमान हालातों में किसी भी कीमत पर स भव नहीं।

कभी शराबी,मजनुओं की शरणगाह बन अपने नाम की प्रतिष्ठा के विपरीत कचरे के ढेर में तब्दील होता यह बगीचा हरियाली को तरसता था। जहां सिर्फ और सिर्फ चिमगादड़ों के झुंड का आशियाना और आवारा जानवर व सुअरों के झुंड नजर आते थे। कभी छात्र राजनीति मेें विद्यालय और विश्वविद्यालय में अपने झंण्डे गाढऩे वाले इस दबंग नौजवान को भी उ मीद न रही होगी। कि एक दिन वह अपनी लगन और द्रण इच्छा शक्ति के चलते वो काम कर दिखायेगा जिसे करने में आज अच्छी-अच्छी सरकारों और संस्थाओं के पसीने छूटने लगते है,जिनके पास भारतीय लेाकतंत्र में समस्त अधिकार है।

शिवपुरी के हदृय स्थल के करीब मौजूद इस पार्क का नाम यूं तो वीरसावरकर पार्क है। मगर इसकी स पूर्ण गतिविधियों पर नजर गढ़ाये तो यह किसी जन्नत से कम नहीं। जिसकी गतिविधियाँ छोटे से नहीं अदने से भू-भाग पर स पूर्ण भारत वर्ष के दर्शन कराती है।

इस पार्क की सबसे बड़ी दो विशेषताऐं इसे औरों से अलग बनाती है,पहला अनुशासन दूसरी सुरक्षा और तीसरी विशेषता हमारे संस्कारों की स यता दिखाती है। जिसमें आध्यात्म, शिक्षा,खेल,संगीत,पीटी,व्यायाम,सर्वधर्म भांव के साथ ही प्राकृतिक सौन्दर्यता का अनुभव कराती है। देखा जाये तो इस जरा से हरे भरे भू-भाग पर सामाजिक,सांस्कृतिक,धार्मिक गतिविधियाँ ही नहीं शिक्षण से लेकर प्रशिक्षण तक का कार्य नि:शुल्क किया जाता है। चाहे आ.ई.एस.,आई.पी.एस. या अन्य प्रतिस्पर्धाओं की तैयारी हो या फिर संगीत में गिटार,आध्यात्म में विभिन्न शिविर और स्वास्थ मजबूत रखने के लिये कराटे,स्कैटिंग,जिम,मॉनरिंग,शाखा,स्वास्थ वर्धक यन्त्र,योगा ऐसी कई गतिविधियाँ इस पार्क के गर्व में अन्तिरित है। जिन्हें देखकर ही सराहा जा सकता है।
जिसमें भारत का यह ऐसा पहला भू-भाग है,जहां अनुशासन और सुरक्षा स्व:प्रेरित है। शिवपुरी वासी गर्व से कह सकते है कि जितने अनुशासित इस बगीचे की विभिन्न विधाओं का लाभ लेने वाले है,उतने ही सुरक्षित इस बगीचे में आने वाले है। भले ही इस बगीचे में पुलिस का संगीन पहरा न हो मगर मजाल क्या कोई किसी को आंख उठाकर भी देख सके। यहीं सब बाते इस छूटे से भू-भाग को अलग बनाती है। काश सारे देश में ऐसे भू-भाग अपनी अलग पहचान बना इस देश को गौरान्वित कर सके।

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा एवं कल्याण के लिये भारतीय सरकार तत्पर पर
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का मसला भारत सरकार के लिए उच्च प्राथमिकता का मामला
नई दिल्ली २०-जून, २०१४ भारत सरकार के लिए भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का मामला उच्च प्राथमिकता बना हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वरिष्ठ मंत्रियों की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की जिसमें गृहमंत्री, विदेश मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, भारतीय खुफिया एजेंसियों के प्रमुखों के साथ विदेश मंत्रालय एवं प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। यह बैठक इराक में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के मसले पर सभी विकल्पों के अनुसार समीक्षा करने के लिए आयोजित की गई। विस्तृत समीक्षा के आधार पर यह पुष्टि की गई कि इराक में अपहृत भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। भारत सरकार इराक में फंसे भारतीयों की सुरक्षा के लिए सभी प्रयास कर रही है ताकि यह मुद्दा जल्द से जल्द सुलझा लिया जाए। बगदाद में भारत का दूतावास लगातार उन भारतीयों की मदद कर रहा है जो इराक से निकलना चाहते हैं। इराक में जिन इलाकों में सुरक्षा नगण्य है वहां भी दूतावास भारतीयों के संपर्क में है। भारत सरकार भारतीय नागरिकों के कल्याण, सुरक्षा और संरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। समीक्षा बैठक हर रोज की जा रही है तथा आज निर्णय लिया गया कि जो भी भारतीय इराक से वापस आना चाहे और उसके पास टिकट के लिए भी पैसे नहीं हैं उसकी मदद इराक में भारतीय दूतावास के जरिए भारतीय समुदाय कल्याण कोष के माध्यम से की जाएगी। भारतीय अधिकारी इराक के वीजा अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इराक की सीमा से लगे सभी देशों में भारतीय दूतावासों को सूचना दी गई है यदि भारतीय नागरिक जमीन के रास्ते इराक से निकलना चाहें तो उन्हें पूरी सहायता उपलब्ध कराई जाए। इराक में हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों से विदेश मंत्रालय के पास उपलब्ध सत्यापित जानकारी के अनुसार १६ भारतीय नागरिक बगदाद लाए गए हैं ताकि वे वहां से उडान भर सकें। आठ कामगारों को बैजी से निकाला गया है तथा अनबार में लैनको परियोजना में काम कर रहे आठ भारतीय कामगारों को निकाला गया। हिंसा से प्रभावित क्षेत्र में ४६ नर्सों के लगातार संपर्क में है तथा उस क्षेत्र में सुरक्षा की हालत ऐसी है कि गोलीबारी नहीं हो रही है तथा जिस अस्पताल में वे हैं वहां से किसी का अपहरण नहीं किया गया है। उन्हें अस्पताल में बिजली, पानी, भोजन, संचार जैसी सुविधाएं मिल रही हैं।

दोपहिया चलाने वालों के लिए हेलमेट है सुरक्षा कवच : डॉ. रमन सिंह
रायपुर २० जून २०१४ छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के लोगों को आज उस समय सुखद आश्चर्य हुआ जब उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को स्कूटर पर सवार होकर शहर की सड़कों पर घूमते देखा। मुख्यमंत्री स्वयं हेलमेट पहनकर दोपहिया में सड़कों पर निकले। उन्होंने दोपहिया वाहन चलाने वालों और उनमें सवारी करने वालों को जीवन की रक्षा के लिए हेलमेट पहनने का संदेश दिया। जनता को हेलमेट का महत्व बताने और हेलमेट पहनने के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए मुख्यमंत्री ने अपनी ओर से स्वयं पहल कर आज हेलमेट रैली का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि लोगों को दोपहिया चलाते समय अच्छी गुणवत्ता और अच्छी कम्पनी का हेलमेट जरूर पहनना चाहिए। डॉ. सिंह स्कूटर पर सवेरे अपने निवास से निकले और शंकर नगर चौक, गांधी उद्यान चौक, नगर घड़ी चौक, शास्त्री चौक होते हुए जय स्तंभ चौक आए। इसके बाद वे वहां से स्कूटर चलाते हुए तेलीबांधा होकर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सीधे कृषि विश्वविद्यालय तक पहुंचे। डॉ. सिंह वहां से फिर स्कूटर पर तेलीबांधा होकर निवास पहुंचे। लगभग २४ किलोमीटर की स्कूटर यात्रा उन्होंने की। मुख्यमंत्री ने जय स्तंभ चौक पर लोगों से चर्चा करते हुए कहा कि स्कूटर चलाकर मुझे अपने कॉलेज के दिनों की याद हो आयी। उन्होंने कहा कि मैं जब १९९० और १९९३ में विधायक था, उन दिनों भी दो पहिया वाहन चलाता था। डॉ. सिंह ने कहा कि प्रत्येक इंसान का जीवन अनमोल है और दोपहिया चलाते समय उसके जीवन के लिए हेलमेट सुरक्षा कवच है। उन्होंने कहा कि सड़क हादसों में दोपहिया चलाने वालों में से अधिकांश लोग हेलमेट नहीं पहनने के कारण सिर में लगी चोट की वजह से कई बार गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं और कई लोगों की आकस्मिक मौत भी हो जाती है, जो निश्चित रूप से अत्यंत दुखद और दुर्भाग्यजनक है। डॉ. सिंह ने कहा कि मुझे यह देखकर काफी दुःख होता है कि हमारे होनहार युवा बिना हेलमेट वाहन चलाकर दुर्घटनाग्रस्त होते हैं और कई बार जीवन भर के लिए विकलांगता के भी शिकार हो जाते हैं। हेलमेट पहनने पर ९० प्रतिशत मौतों को रोका जा सकता है। ऐसी मौतों को रोकने के लिए मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों के तहत राज्य में हेलमेट को अनिवार्य किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को यह समझना होगा कि हेलमेट की अनिवार्यता सख्ती के लिए नहीं बल्कि उनके जीवन की रक्षा के लिए है। मैंने प्रदेश की बहनों और बेटियों से भी आव्हान किया है कि वे इस बार रक्षा बंधन के दिन भाईयों को राखी बांधते समय उनसे यह वचन लें कि वे दोपहिया चलाते समय हेलमेट जरूर पहनेंगे। मुख्यमंत्री के साथ आज उनके प्रमुख सचिव श्री अमन कुमार सिंह, पुलिस महानिरीक्षक श्री जी.पी. सिंह, कलेक्टर रायपुर ठाकुर रामसिंह, पुलिस अधीक्षक श्री ओ.पी. पाल और अन्य अनेक अधिकारियों ने भी हेलमेट पहनकर दोपहिया वाहन चलाते हुए रैली में शामिल हुए।

जयपुर फुट बना अफगानिस्तान के विकलांगोंं के लिए वरदान
जयपुर,२० जून २०१४ राजस्थान के जयपुर स्थित भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति द्वारा अफगानिस्तान के काबुल शहर में एक महीने के लिए लगाया जा रहा नि:शुल्क कृत्रिम अंग शिविर उन लोगों के लिए एक वरदान बनकर आया है जिन्होंने अफगानिस्तान में युद्घ, खनन विस्फोटों एवं अन्य मानवीय दुर्घटनाओं के कारण अपने अंग गवा दिये थे। उल्लेखनीय है कि उपराष्ट्रपति श्री मोह मद हामिद अंसारी ने इस शिविर के लिए चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों के एक दल को इसी माह नई दिल्ली से अफगानिस्तान के लिए रवाना किया था।
पिछले ढाई दशक में अफगानिस्तान की हजारों महिलाएं एवं पुरूषों ने युद्घ एवं दंगों के चलते अपनी पैरों को खो दिया। ऐसे विकलांग लोगों के लिए जयपुर फुट एक किफायती और आसानी से उपयोग किए जा सकने वाला कृत्रिम पैर साबित हुआ है तथा इन कृत्रिम पैरों की स्थायित्व क्षमता भी काफी ल बी है। काबुल के 48 वर्षीय विकलांग अब्दुल बताते हैं कि युद्घ एवं दंगों के कारण कई परिवारों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि चार वर्ष पूर्व एक विस्फोट के दौरान मेरी एक टांग चली गई और मैं अपाहिज हो गया तथा चलने फिरने से लाचार हो गया और अपनी जीविका चलाने के लिए रोड़ के किनारे फल बेचने का काम शुरू करने लगा। लेकिन आज मैं बहुत खुश हूं कि भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति के कृत्रिम टांग के माध्यम से अपने दोनों पैरों पर खड़ा हो सकता हूं। गैर सरकारी संगठन, भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति द्वारा काबुल में आयोजित किये जो रहे इस कै प के दौरान श्री अब्दुल अपने साथ तीन अन्य विकलांगों को भी उपचार के लिए लाये, जिनकी टांगे संस्था द्वारा नि:शुल्क रूप से प्रतिस्थापित की गई है। विकलांगों को जयपुर फुट के नाम से कृत्रिम टांग उपलब्ध करवाने वाला दुनियां का सबसे बड़ा जयपुर स्थित राजस्थान का यह गैर सरकारी संगठन अब तक काबुल में कृत्रिम टांग प्रत्यारोपित करने के लिए चार बार शिविर लगा चुका है। इन चार शिविरों के दौरान करीब 3 हजार 51 लोगों को कृत्रिम टांग उपलब्ध करवा चुका है तथा संस्था ने इस पांचवें शिविर में लगभग एक हजार लोगों को कृत्रिम टांग प्रत्यारोपित का लक्ष्य रखा है। कृत्रिम टांग के लाभार्थी 24 वर्षीय पूर्व सैनिक मीरवाईज ने बताया कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि उनका जीवन इस तरह से एक दु:खद और दर्दनाक मोड़ ले लेगा। कंधार में काम के दौरान अचानक एक भारी विस्फोट से वह एक टांग से अपाहिज हो गये और नौकरी खोने की चितांओं के आगे उनकी जिदंगी बदतर होने लगी, इसके बाद उन्होंने अपने माता-पिता को भी एक दुर्घटना के दौरान खो दिया। जिससे परिवार के भरण-पोषण की जि मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। ऐसे में जयपुर फुट ने उनकी जिदंगी में नया मोड़ दिया और आज इस कृत्रिम टांग के माध्यम से वह आसानी से घूम फिर सकता है। यहां तक की दौड़ भी सकता है आज उसे उ मीद है कि वह अपना विवाह भी कर सकता है। काबुल के 'खैर-खानाÓ स्थान पर आयोजित किये जा रहे इस कै प के प्रथम दिन 65 विकलांगों की टांग सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित की गई और अगले ही दिन ये सभी लोग अपने चेहरों पर मुस्कान लिये वर्षों की दु:खद घटनाओं से निजात पा गये। काबुल में इस शिविर का आयोजन 07 जुलाई तक किया जाना है। जिसके दौरान लगभग एक हजार विकलांगों को नि:शुल्क रूप से सेवाएं दी जायेंगी। इस शिविर का आयोजन भगवान महावीर सहायता समिति तथा अफगानिस्तान के श्रम एवं सामाजिक कल्याण, शहीद एवं विकलांग मंत्रालय के सक्रिय सहयोग से किया गया है। शिविर के दौरान स्थानीय निवासी अहमद शाह ने बताया कि विकलांगता की वजह से अपने दुख एवं दर्द को बांट तो सकते हैं लेकिन एक दूसरे की सहायता करना काफी मुश्किल होता है। ऐसे में जयपुर फुट द्वारा आसान गतिशीलता और अन्य सामान्य व्यक्तियों की तरह स मान से जीने का अवसर दिया है अब हम आसानी से अपनी आजीविका भी कमा सकते हैं। भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति के संस्थापक एवं मु य संरक्षक श्री डी.आर मेहता ने बताया कि ऐसे शिविरों का उद्देश्य न केवल विकलांगों को अपने पैरों पर खड़ा करना और चलने योग्य बनाना है बल्कि ऐसे लोगों को सामाजिक आर्थिक और शारीरिक रूप से स मान के साथ पुन: समाज से जोडऩा भी हैं। उन्होंने कहा कि संस्था ऐसे लोगों को कृत्रिम पैर उपलब्ध करवाती है। जिनके पैर घुटने से नीचे अथवा ऊपर से अपाहिज है। भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति विश्वप्रसिद्घ जयपुर फुट की निर्माता है तथा 1975 से अब तक जयपुर फुट की इन कृत्रिम टांगों से दुनियां के करीब 1.4 मिलियन विकलांग लाभांवित हो चुके हैं इनमें अफगानिस्तान के अलावा बांग्लादेश, इंडोनेशिया, नाइजीरिया, नैरोबी, पनामा, फिलीपिन्स, रवांडा, सौमालिया, ट्रिटीनाद, वियतनाम, सूडान, जि बाबे, लेबनान, मोरिशस, ईराक, पाकिस्तान, श्रीलंका, सैनेगल, फिजी, लिबिया, पापुआ न्यू-गुना, नेपाल, मलावी, डोमीकन रिपब्लिक आदि देशों के विकलांग शामिल हैं और इन कृत्रिम पैरों के माध्यम से अपना स मानित जीवन जी रहे हैं। उच्च तकनीकी और कम कीमत पर इस संस्था द्वारा जयपुर फुट तैयार किया जाता है। अफगानिस्तान के काबुल शहर में लगाया जा रहा एक माह का यह नि:शुल्क कृत्रिम अंग शिविर ÓÓशिविर अल-फराहÓÓ द्वारा प्रायोजित किया जा रहा है। 

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