वैज्ञानिक ज्ञान- अनुसंधान के रचनात्मक उपयोग से संभव है समस्याओं का हल

भोपाल : शुक्रवार, जून २७, २०१४, राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि वैज्ञानिक ज्ञान अनुसंधान और प्रौद्योगिकी नवाचार के रचनात्मक उपयोग से देश की बड़ी समस्याओं का समाधान संभव है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी के ज्ञान से सम्पन्न देश को कोई पीछे नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक शिक्षा, तकनीकी अनुसंधान, नवाचार और गुणात्मक अनुसंधान नये युग में राष्ट्र की प्रगति के संकेतक हैं। आज यहाँ भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान के दूसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों का आव्हान किया कि वे अपने ज्ञान और कौशल के सहारे आत्म-विश्वास पैदा करें और नये भारत का निर्माण करने में आगे बढ़ें। यह दुनिया युवा शक्ति की है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की युवा शक्ति और प्रतिभा के बेहतर उपयोग के लिये नये रास्ते बनाने की जरूरत है। उन्होंने देश में उच्च शिक्षा की उत्कृष्टता और उच्च मापदण्डों के संबंध में चिंता करते हुए कहा कि देश के विश्वविद्यालय दुनिया के २०० सर्वोच्च विश्वविद्यालय में नहीं जबकि करीब १५०० साल पहले हमारे यहाँ नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय थे, जिनमें विश्व से विद्यार्थी पढ़ने आते थे। श्री मुखर्जी ने कहा कि भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और भारत उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता के मापदण्ड स्थापित कर सकता है। उन्होंने वैज्ञानिक हरगोविंद खुराना, डॉ. चन्द्रशेखर, सर सी वी रमन और डॉ. अमृत्य सेन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय प्रतिभाओं को और भी नोबल पुरस्कर मिल सकते हैं। ये प्रतिभाएँ भारत में पोषित हुई लेकिन विदेशी विश्वविद्यालयों में उच्च स्तरीय अध्ययन के बाद पहचानी गईं। श्री मुखर्जी ने कहा कि यह संतोषप्रद है कि भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों में सुधार हो रहा है। हाल ही में आई आई टी मद्रास, मुम्बई और गुवाहटी दुनिया के शीर्षस्थ संस्थान की सूची में शामिल हुए। राष्ट्रपति ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षण, प्रशिक्षण के तंत्र का विकास, बौद्धिक समागम और अकादमिक संकाय का आदान-प्रदान होना चाहिये। इसके लिये संस्थागत आंतरिक व्यवस्थाएँ स्थापित की जाना चाहिये। राष्ट्रपति ने कहा कि लोगों मे वैज्ञानिक अभिरूचि जागृत कर ही देश के मानव और प्राकृतिक संसाधन का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने भारतीय विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान द्वारा इस दिशा में की जा रही पहल की सराहना की। राज्यपाल श्री रामनरेश यादव ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान को सामाजिक सरोकारों से जोड़ना जरूरी है। समाज के विकास में विज्ञान के सकारात्मक योगदान को बढ़ावा देने की जरूरत बताते हुए उन्होंने शोधार्थियों को स्कॉलरशिप तथा फेलोशिप सहित आवश्यक शैक्षणिक और अनुसंधान सुविधाएँ उपलब्ध करवाने पर जोर दिया। राज्यपाल ने कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में हमारा देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। अत: विश्व-स्तरीय वैज्ञानिक शोध के नए प्रकल्पों को बढ़ावा दिया जाना चाहिये। राज्यपाल ने इस दौरान भारतीय विज्ञान शिक्षण और अनुसंधान संस्थान भोपाल की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने संस्थान के विद्यार्थियों से कहा कि वे ज्ञान के साथ - साथ नैतिकता और चरित्र निर्माण को जीवन में सर्वोच्च स्थान दें। केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी ने कहा कि विद्यार्थियों को अकादमिक उत्कृष्टता के लिये निरंतर प्रयास करना चाहिये। वे देश की पवित्र धरोहर हैं। देश का भविष्य उनके भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने आव्हान किया कि अकादमिक और केरियर में सफलता के साथ मानवीय मूल्यों की सुरक्षा का भी ध्यान रखें। मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा कि आज भारत की वैज्ञानिक प्रतिभाओं को पूरे विश्व में सम्मान मिल रहा है। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से वैज्ञानिक देश रहा है। यहाँ ज्योतिष शास्त्र, चिकित्सा शास्त्र उन्नत अवस्था में थे। नालंदा और तक्षशिला विश्वविद्यालय ऐसे समय अपनी उत्कृष्ट अवस्था में थे जब विश्व के कई देश सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से पिछड़े थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा में अनुसंधान में थोड़ी कमी रह गई है जबकि भारतीय प्रतिभाएँ स्वभाविक रूप से खोजी प्रवृत्ति की हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों पर बस्तों के बढ़ते बोझ से उनकी स्वभाविक प्रतिभा और खोजी प्रवृत्ति प्रभावित हो रही है। उनकी प्रतिभा कुंठित हो रही है। वे हर चीज रटने लगे हैं। यदि बच्चों को स्वभाविक वातावरण में शिक्षा-दीक्षा दी जाये तो ज्ञान का सृजनात्मक प्रकटीकरण होगा। यदि बस्ते का बोझ घट जाये तो वे रचनात्मक रूप से आगे बढ़ेंगे। श्री चौहान ने कहा कि भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान प्रदेश का ही नहीं देश का गौरव है। संस्थान परिसर में पेयजल एवं बुनियादी सुविधा उपलब्ध करवायी जायेगी और राज्य सरकार पूरा सहयोग देगी। विद्यार्थियों को देश का भविष्य बताते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों की प्रतिभा को पुष्पित होने का मौका मिलना चाहिये ताकि उनका पलायन न हो। युवा प्रतिभा हर असंभव काम कर सकती है। विद्यार्थी साधारण हैं लेकिन विशिष्ट हैं। वे सफल होंगे तो देश सफल होगा।

नये जिलों में जिला पंचायतों के गठन के लिए अधिसूचना जारी : दस दिनों के भीतर दिए जा सकेंगे दावे - आपत्ति और सुझाव
रायपुर, २७ जून २०१४ राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ के नौ नये जिलों में जिला पंचायतों के गठन के लिए आज यहां नया रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) से अधिसूचना जारी कर दी। पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी यह अधिसूचना राज्यपाल के प्राधिकार से प्रकाशित भी कर दी गई है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा की गई घोषणा के अनुरूप राज्य में जनवरी २०१२ में बालोद, गरियाबंद, बेमेतरा, बलौदाबाजार-भाटापारा, सुकमा, कोण्डागांव, मुंगेली, सूरजपुर और बलरामपुर-रामनुजगंज जिलों की स्थापना की गई है। इन्हें मिलाकर प्रदेश में जिलों की संख्या २७ हो गई है। नये जिलों में जिला पंचायतों का गठन उनके पूर्ववर्ती जिला पंचायतों के पुर्नगठन के जरिए किया जाएगा। इसके लिए रायपुर, दुर्ग, बस्तर (जगदलपुर), दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा), बिलासपुर और सरगुजा जिला पंचायतों का पुर्नगठन किया जाएगा। अधिसूचना के प्रकाशन के दस दिनों के भीतर आम नागरिक अपने दावे-आपत्ति अथवा सुझाव मंत्रालय (महानदी भवन) के कक्ष क्रमांक एस-०-४१ में पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के उपसचिव के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। इस अवधि में मिलने वाले दावे और आपत्तियों पर आगामी तारीख में राज्य शासन द्वारा सुनवाई कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इन सभी नये जिलों में छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम १९९३ (क्रमांक-१, सन १९९४) की धारा १० की उपधारा ३ के तहत जिला पंचायतों का गठन किया जाएगा। अधिसूचना में राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा १२७ की उपधारा ३ के तहत यह भी प्रस्तावित किया है कि इस अधिसूचना से प्रभावित होने वाली जिला पंचायतों-रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, दंतेवाड़ा, बस्तर और सरगुजा आगामी सामान्य निर्वाचन के बाद अधिनियम की धारा ३४ की उपधारा (१) के अंतर्गत नवगठित जिला पंचायतों के प्रथम सम्मिलन के आयोजन तक पूर्ववत अस्तित्व में बनी रहेंगी।

सार्वजनिक निर्माण मंत्री ने बीकानेर में ओवरब्रिज का उद्घाटन किया
जयपुर, 27 जून। सार्वजनिक निर्माण मंत्री श्री यूनुस खान ने शुक्रवार को बीकानेर में चौबीस करोड़ रुपये की लागत से नवनिर्मित चौखूंटी ओवरब्रिज का उद्घाटन किया। बाईस पिलर्स पर बनाया गया यह ओवरब्रिज टू लेन है। इस ओवरब्रिज पर 8.30 मीटर चौड़ी सड़क बनाई गई है। इस अवसर पर श्री खान ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए कृत संकल्प है। प्रदेश में सड़क तंत्र के सुदृढ़ीकरण के साथ निर्माण कार्य में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि मु यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे की पहल पर राजस्थान के इतिहास में पहली बार 'सरकार आपके द्वारÓ कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के तहत स्वयं मु यमंत्री, सभी मंत्रीगण तथा वरिष्ठ अधिकारी तेज गर्मी और उमस के बीच गांव-गांव व ढाणी पहुंचकर आमजन की समस्याएं तथा उनके दु:ख-दर्द जान रहे हैं तथा उन्हें दूर करने के हरसभंव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के तहत प्राप्त प्रत्येक प्रार्थना-पत्र पर प्रभावी कार्रवाई होगी तथा परिवादी को टोकन न बर देकर अवगत करवाया जाएगा। सार्वजनिक निर्माण मंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा है कि आम व्यक्ति को अपनी छोटी-छोटी समस्या को लेकर जगह-जगह भटकना न पड़े। इसे ध्यान रखते हुए ग्राम पंचायत स्तर तक जनसुनवाई प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाया गया है। प्रत्येक अधिकारी की जि मेदारी तय की गई है तथा उन्हें आमजन के कार्यों को प्राथमिकता और गंभीरता से करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि 'सरकार आपके द्वारÓ कार्यक्रम के तहत भरतपुर और बीकानेर के बाद शेष संभागों में भी सरकार पहुंचेगी और स्थानीय समस्याओं को जानने के प्रयास करेगी।

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