पत्रकारिता के अत्यधिक व्यावसायीकरण से प्रभावित होती है निष्पक्षता

भोपाल। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि वर्तमान समय में पत्रकारिता को सकारात्मक और सृजनात्मक होने की आवश्यकता है। पत्रकारिता के अत्यधिक व्यावसायीकरण से निष्पक्षता प्रभावित होती है।

उन्होंने कहा कि समाचार-पत्र समाज के मार्गदर्शक हैं और इसी रूप में उनकी भूमिका भविष्य में भी बनी रहेगी। श्री चौहान आज यहाँ माधवराव सप्रे समाचार-पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान की तीसवीं वर्षगांठ के अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

श्री चौहान ने कहा कि दुनिया के इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं को किन समाचार-पत्रों ने किन शब्दों में प्रस्तुत किया था यह जानने की जिज्ञासा माधवराव सप्रे संग्रहालय में पूरी हो जाती है। उन्होंने कहा कि संग्रहालय की स्थापना इसके संस्थापक पत्रकार श्री विजयदत्त श्रीधर के अथक परिश्रम और दूरदृष्टि का सुफल है। यह उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है जो प्रदेश के लिये धरोहर बन गई है। उन्होंने कहा कि संग्रहालय को और समृद्ध बनाने के लिये राज्य शासन की ओर से आवश्यक सहयोग दिया जायेगा।

श्री चौहान ने महात्मा गाँधी, माधवराव सप्रे और माखनलाल चतुर्वेदी की पत्रकारिता का स्मरण करते हुए कहा कि शांति और अहिंसा पत्रकारिता के अस्त्र हैं। उन्होंने हाल में संपन्न अपनी दक्षिण अफ्रीका यात्रा की चर्चा करते हुए बताया कि राज्य सरकार महात्मा गाँधी की स्मृति को संजोने के लिये एक करोड़ की राशि संबंधित ट्रस्ट को उपलब्ध करवायेगी। पूर्व मुख्यमंत्री श्री कैलाश जोशी ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता में अनुसंधान की कमी को माधवराव सप्रे संग्रहालय ने पूरा किया है। इसके लिये उन्होंने श्री विजयदत्त श्रीधर की सराहना की।

उन्होंने कहा कि स्व-प्रेरणा से ही हिन्दी को आगे बढ़ाया जा सकता है। इस कार्य में संग्रहालय को पूरा सहयोग मिलेगा। इस अवसर पर विगत पाँच दशक से पत्रकारिता कर रहे श्री अशोक मानोरिया और विख्यात चित्रकार-चिंतक और लेखक श्री अमृतलाल वेगड़ को सम्मानित किया गया। माधवराव सप्रे की स्मृति को चिरस्थाई बनाने के लिये छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी का भी सम्मान किया जाना था लेकिन खराब मौसम के चलते वह उपस्थित नहीं हो सके। उनके प्रतिनिधि श्री विक्रम सिसोदिया ने डॉ. रमन सिंह की ओर से सम्मान ग्रहण किया।

श्री अशोक मानोरिया ने अपने पत्रकारिता जीवन के अनुभवों को साझा किया। श्री अमृतलाल वेगड़ ने कहा कि पत्रकारिता शब्दों से प्यार करती है शब्दों का व्यापार नहीं करती। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री चौहान ने श्री के.जी. व्यास द्वारा लिखित 'भारत का परम्परागत जल विज्ञान'' किताब का विमोचन किया। श्री विजयदत्त श्रीधर ने सप्रे संग्रहालय के तीन दशक की रोमांचक यात्रा की चर्चा की। उन्होंने बताया कि 1984 में छोटे से कमरे से शुरू हुए इस संग्रहालय में आज हिन्दी पत्रकारिता से संबंधित 70 लाख संदर्भ सामग्री है, जो अन्यत्र उपलब्ध नहीं है।

यह संग्रहालय न सिर्फ हिन्दी पत्रकारिता के शोधार्थियों के लिये बल्कि समाज-विज्ञानियों के लिये भी एक तीर्थ बन चुका है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी ख्याति पहुँच रही है। उन्होंने संग्रहालय की स्थापना से जुड़े परिवारों, संस्थाओं, जनसंपर्क विभाग और राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर जनसंपर्क आयुक्त श्री राकेश श्रीवास्तव, राजधानी के बुद्धिजीवी, नागरिक, कवि, लेखक, पत्रकार एवं अनुसंधानकर्ता उपस्थित थे।

आदिवासी और अनुसूचित जाति के बच्चों के आश्रम-छात्रावासों में डेढ़ हजार से ज्यादा सीटों की वृद्धि मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद जारी हुआ आदेश
रायपुर, 21 जून 2014 मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य के आदिवासी और अनुसूचित जाति वर्ग के बच्चों के लिए संचालित 40 आश्रम-छात्रावासों में कुल एक हजार 530 सीटों की वृद्धि करने के प्रस्ताव का अनुमोदन कर दिया है। इनमें से आदिवासी वर्ग के बच्चों के लिए संचालित 31 संस्थाओं में 1200 और अनुसूचित जाति के बच्चों के लिए संचालित एक दर्जन प्री-मेट्रिक छात्रावासों में 330 अतिरिक्त सीटों की स्वीकृति दी गयी है। आदिम जाति और अनुसूचित जाति विकास तथा स्कूल शिक्षा मंत्री श्री केदार कश्यप ने आज यहां बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के अनुमोदन के बाद इन विद्यालयों में सीटों की संख्या बढ़ाने का आदेश विभाग द्वारा यहां मंत्रालय से जारी कर दिया गया है। आदेश में इन सीटों की वृद्धि के लिए चालू वित्तीय वर्ष 2014-15 में आवर्ती और अनावर्ती व्यय के मद में डेढ़ करोड़ रूपए भी मंजूर किए गए हैं। उन्होंने बताया कि स्वीकृति आदेशों के तहत इनमें से आदिवासी बच्चों की जिन 15 संस्थाओं में 50-50 सीटों की वृद्धि की गयी है, उनमें आदिवासी बालक आश्रम धवलपुर, जिला गरियाबंद, कमार बालक प्राथमिक आश्रम शाला बेहराडीह (झरियाबहरा), विकासखण्ड मैनपुर, जिला गरियाबंद, आदिवासी बालक आश्रम और आदिवासी कन्या आश्रम खोड़ विकासखण्ड ओड़गी, जिला सूरजपुर, प्राथमिक स्तर आदिवासी कन्या आश्रम पिना बचेली जिला दंतेवाड़ा, प्राथमिक स्तर आदिवासी बालक आश्रम कारली, जिला दंतेवाड़ा, प्राथमिक स्तर आदिवासी बालक आश्रम चेरपाल, जिला दंतेवाड़ा, प्राथमिक स्तर आदिवासी कन्या आश्रम खम्हार, विकासखण्ड खरसिया, जिला रायगढ़, प्राथमिक स्तर आदिवासी कन्या आश्रम पिरदा और प्राथमिक स्तर आदिवासी कन्या आश्रम सागुनढाप, विकासखण्ड पिथौरा, जिला महासमुन्द, आदिवासी बालक आश्रम बोरपाल और हलामीमुजगेटा, विकासखण्ड और जिला नारायणपुर, आदिवासी बालक आश्रम नेलनार, हतलानार और आदिवासी कन्या आश्रम कुरूषनार, विकासखण्ड ओरछा, जिला नारायणपुर शामिल हैं। प्राथमिक स्तर आदिवासी बालक आश्रम ग्राम परसदा और प्राथमिक स्तर आदिवासी कन्या आश्रम ग्राम सिरपुर, विकासखण्ड और जिला महासमुन्द, प्राथमिक स्तर आदिवासी कन्या आश्रम बैदपाली और डुडुमचुआ, प्राथमिक स्तर आदिवासी बालक आश्रम टेमरी विकासखण्ड सरायपाली, जिला महासमुन्द के लिए चालीस-चालीस सीटों की वृद्धि की गयी है। आदिवासी बालक आश्रम ग्राम कांगा विकासखण्ड और जिला कोण्डागांव, माध्यमिक स्तर आदिवासी कन्या आश्रम ग्राम फरसपाल और विकासखण्ड गीदम, जिला दंतेवाड़ा और प्राथमिक स्तर आदिवासी बालक आश्रम ग्राम बनेपनेड़ा, विकासखण्ड गीदम, जिला दंतेवाड़ा में तीस-तीस सीटों की वृद्धि की गयी है। दंतेवाड़ा जिले में ही प्राथमिक स्तर आदिवासी बालक आश्रम ग्राम मेटापाल, विकासखण्ड दंतेवाड़ा, माध्यमिक स्तर आदिवासी बालक आश्रम उपेट और प्राथमिक स्तर आदिवासी बालक आश्रम ग्राम भथाड़ी, विकासखण्ड कटेकल्याण जिला दंतेवाड़ा में बीस-बीस सीट बढ़ाने की मंजूरी दी गयी है। प्राथमिक स्तर आदिवासी बालक आश्रम ग्राम छिन्दनार विकासखण्ड गीदम जिला दंतेवाड़ा, प्राथमिक स्तर आदिवासी बालक आश्रम ग्राम गोगपाल विकासखण्ड कुआकोंडा जिला दंतेवाड़ा और प्राथमिक स्तर आदिवासी कन्या आश्रम ग्राम तेलम, विकासखण्ड कटेकल्याण, जिला दंतेवाड़ा में दस-दस सीटों की वृद्धि की गयी है। श्री कश्यप ने बताया कि अनुसूचित जाति वर्ग के लिए संचालित प्री-मेट्रिक कन्या छात्रावास दंतेवाड़ा, प्री-मेट्रिक बालक छात्रावास राजिम, विकासखण्ड फिंगेश्वर, जिला गरियाबंद में पन्द्रह-पन्द्रह सीटों की वृद्धि की गयी है। प्री-मेट्रिक अनुसूचित जाति बालक छात्रावास कोरबा, विकासखण्ड एवं जिला कोरबा, प्री-मेट्रिक अनुसूचित जाति बालक छात्रावास खरोरा, विकासखण्ड तिल्दा, जिला रायपुर, प्री-मेट्रिक अनुसूचित जाति बालक छात्रावास धमतरी, विकासखण्ड एवं जिला धमतरी, प्री-मेट्रिक अनुसूचित जाति बालक छात्रावास, राजनांदगांव में तीस-तीस सीटें बढ़ायी गयी हैं। प्री-मेट्रिक अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास और बालक छात्रावास डोंगरगढ़, जिला राजनांदगांव में तीस-तीस सीटों की वृद्धि करने की मंजूरी दी गयी है। प्री-मेट्रिक अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास, जिला मुख्यालय राजनांदगांव में बीस सीटों की वृद्धि की गयी है। प्राथमिक स्तर अनुसूचित जाति कन्या आश्रम ग्राम इंदौरी, विकासखण्ड कवर्धा, जिला कबीरधाम में 50 सीटें बढ़ायी गयी हैं। प्राथमिक स्तर अनुसूचित जाति कन्या आश्रम ग्राम गिरौदपुरी, विकासखण्ड कसडोल, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा और प्राथमिक स्तर अनुसूचित जाति कन्या आश्रम ग्राम कोट, विकासखण्ड बिलाईगढ़, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा में कुल 25-25 अतिरिक्त सीटें मंजूर की गयी है।

राजस्थान के हर गांव के इतिहास लेखन का काम होगा
जयपुर, 21 जून। प्रदेश की सांस्कृतिक व ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के लिए प्रत्येक गांव का इतिहास लिखा जाएगा। नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोडऩे के लिए राज्य सरकार की ओर से जल्दी ही यह कार्य शुरू किया जाएगा। राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री ओंकार सिंह लखावत ने शनिवार को चूरू जिले के साहवा कस्बे में अपने कार्यक्रम के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वीरभूमि राजस्थान के गांव-गांव में अपने स्वाभिमान और मूल्यों की रक्षा के लिए किए गए त्याग व बलिदान से भरी कहानियां भरी पड़ी हैं और हर गांव का अपना एक गौरवशाली इतिहास है। नई पीढ़ी को इस गौरव से रूबरू कराने और सांस्कृतिक, ऐतिहासिक धरोहर को कायम रखने के लिए इतिहास लेखन का यह काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गोगामेड़ी में वीर गोगाजी का स्मारक आगामी एक माह में आमजन के लिए खोल दिया जाएगा। इससे वीर गोगाजी के जीवन और कृतित्व से लोग परिचित होंगे। श्री लखावत ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की धरोहर संरक्षण के लिए संकल्पबद्घ है और इस दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए जाने की योजना है। उन्होंने कहा कि संत चरणदास, लालदास, हसन खां मेवाती, कवि माघ, महाराणा प्रताप, पन्नाधाय सहित राज्य के संतों, महापुरुषों और कवियों के स्मारक और पैनोरमा तैयार किए जाएंगे, जिनसे आने वाली पीढिय़ोंं को इस बारे में जानकारी और उनके चमत्कारी व्यक्तित्व और कृतित्व से लोग प्रेरणा ले सकें। यहां के प्राचीन कुओं, बावडिय़ों, ऐतिहासिक भवनों की मर मत के लिए इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि उनके मूल स्वरूप व सौंदर्य को बरकरार रखते हुए उनका संरक्षण किया जा सके। रावत कांधल स्मारक के विकास और साहवा सरोवर के सौंदर्यीकरण पर चर्चा करते हुए कहा कि उनके स्मारक के विकास के लिए यथासंभव प्रयास किए जाएंगे और यहां गऊघाट के निर्माण का शेष कार्य आगामी एक माह में शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने स्मारक विकास की कार्ययोजना के लिए पटवारी को राजकीय रिकॉर्ड एवं मौके के हालात की रिपोर्ट तैयार कर देने के लिए कहा। उन्होंने इस दौरान साहवा सरोवर का निरीक्षण किया और गुरुद्वारे पर मत्था टेका। इस दौरान उनके साथ संबंधित अधिकारी व जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

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