न सिन्ध पर बात, न मोदी की चर्चा, स्कूल चलो में शिवराज

व्ही.एस.भुल्ले. बड़ी उ मीद थी कि विगत 25 वर्षो से शुद्ध पेयजल को कलफते लेागों को कि सूवे के मुखिया शिवराज सिंह से बात होगी। और प्रदेश मुखिया के माध्ययम से मोदी की भी चर्चा होगी। मगर 2 घन्टे तक मसिस भरी गर्मी में पसीने से नहाते कुछ वर्ग के लेाग ही नहीं बड़े बड़े खबरची भी चिल्लाते रह गये। मगर मुखिया ने थोक बन्द आवेदन अपने सुशासन के इकट्टे कर चलते बने।

यू. तो प्रदेश के मुखिया और म.प्र. के मु यमंत्री म.प्र. के शिवपुरी जिले में स्कूल चलो अभियान का विधिवत शुभार भ करने आये थे। जिसमें आओ बनाये अपना म.प्र. की बात भी कह गये।
दीप प्रजबलित कर कन्याओं का चरण छू आर्शीवाद लेने वाले शिवराज ने मंच पर मौजूद विभिन्न धर्म गुरुओं का स मान कर स्कूल चलो अभियान का ध्वजारोहण भी किया।
इस मौके पर मौजूद छात्र छात्राओं वकील जनप्रतिनिधियों,व्यापारियों एवं विभिन्न वर्ग के लेागों से स्कूल चलो अ िायान को जनअभियान बनाने की अपील की और सभी से अपेक्षित सहयोग का संकल्प लिया। साथ मौजूद लेागों को शपथ भी दिलाई।

मगर उन्होंने अपने उदबोधन से शिक्षा के महत्व को बताते हुये जहां बाबा साहब अ बेडकर पूर्व प्रधानमंत्री स्व.लाल बहादुर शास्त्री की चर्चा की जिन्होंने विषम परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा के माध्ययम से देश व समाज में स्थान बनाया। मगर जिन विषम परिस्थितियों के बीच मोदी देश के प्रधानमंत्री बने यह चर्चा मंच से न हो सकी। क्योंकि कार्यक्रम बेहत अलग प्रकार था जो सुनने को मिला।

मु यमंत्री ने मंच से ही अपने मातहतों के बीच यह भी मंशा जाहिर की जनसेवा और अच्छे कार्य करने वालो को शाबासी व जन उपेक्षा करने वालो को व शा नहीं जायेगा। क्योंकि वह जल्द जनदर्शन जैसे कार्यक्रम भी करने वाले है। भ्रष्टाचार पर लगाम कसने की गरज से उन्होंने कहां तथ्य परख शिकायत सहीं पायी जाती है तो छापे भी डलेगें और दोषी लेागों की स पत्तियाँ भी राजसात होगी।
उन्होंने छात्र छात्राओं को विश्वास दिलाया कि कक्षा 1 से 12 तक नि:शुल्क शिक्षा,किताब,ड्रेस,सायकल और जिन्हें खाने रहने नहीं उन्होंने भोजन और रहने की व्यवस्था सरकार करेगी। उच्च शिक्षा हेतु रिण की गारन्टी भी शिवराज की होगी।

लेकिन कार्यक्रम पश्चात जैसे ही थोक बन्द आवेदनों को इक_ा करने मु यमंत्री जनता के बीच पहुंचे। उन्होंने आवेदन तो बटोरे मगर प्रेस के चिल्ला,चिल्ला कर अनुरोध के बाद वह कुछ नहीं बोले। अपनी पूर्व यात्रा में सिन्ध का पानी दिलाने की बात दो बार कहने वाले शिवराज विलेज टाई स के सवाल पर कि कब मिलेगा सिन्ध का पानी? अनसुना कर आगे बढ़ लिये। मगर यहां यक्ष प्रश्न यह है कि अगर सूवे के मुखिया को कुछ कहना सुनना ही नहीं तो फिर लाखों करोड़ों खर्च मजमा क्यों लगाया जाता है। जो वह मंच से कहना चाहते है कि वह टी.वी. आकाशवाड़ी और माइक प्रचार से भी कहा जा सकता है। फिर समय और धन की बर्बादी क्यों? क्यों ढेाकर प्रशासनिक मशनीनरी के सहारे लेागों का मजमा लगाया जाता है। बहरहॉल बहुत कुछ नहीं तो बच्चों के कुछ तो समझ आ रहा है। जय म.प्र.

वस्‍तुगत माल भाड़े से रेलवे के राजस्‍व में अप्रैल-मई २०१४ में ७.०५ प्रतिशत की वृद्धि
नई दिल्ली। भारतीय रेल ने अप्रैल-मई २०१४ में वस्‍तुगत माल ढुलाई से भाड़े के रूप में १६४०५.२६ करोड़ रू. का राजस्‍व अर्जित किया है। राजस्‍व आय में पिछले वर्ष की तुलना में ७.०५ प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह आय १५३२४.२५ करोड़ रू. थी। रेलवे ने अप्रैल-मई २०१४ में १८०.६३ मिलियन टन माल की ढुलाई की। पिछले साल की इसी अवधि में रेलवे ने १७१.८४ मिलियन टन की माल ढुलाई की थी। इस तरह माल ढुलाई ५.१२ की प्रतिशत की वृद्धि हुई।
मई २०१४ में वस्‍तुगत माल ढुलाई से हुई कुल ८३३४.०९ करोड़ रू. की आय में से ३६०१.२७ करोड़ रू. ४३.९६ मिलियन कोयले की ढुलाई से अर्जित हुआ। निर्यात तथा इस्‍पात संयत्रों के लिए १०.४२ मिलियन टन लौह अयस्‍क ढुलाई ७२०.१० करोड़ रू, ८१८.४७ करोड़ रू १०.२२ मिलियन टन सीमेंट ढुलाई से, ७६५.१५ करोड़ रू. ४.८९ मिलियन टन अनाज की ढुलाई से, ४९९.२७ करोड़ रू. ३.८० मिलियन टन पैट्रोलियम तथा तेल ढुलाई से आय अर्जित की गई।

मुख्यमंत्री ने की च्पंडित माधव राव सप्रे राष्ट्रीय रचनात्मकता सम्मानज् शुरू करने की घोषणा
रायपुर १८ जून २०१४ मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कल १९ जून को देश के प्रसिद्ध साहित्यकार छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता के जनक स्वर्गीय पंडित माधव राव सप्रे की जयंती के अवसर पर जनता को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा है कि स्वर्गीय सप्रे जी से जुड़ी स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने पंडित माधव राव सप्रे राष्ट्रीय रचनात्मकता सम्मान की स्थापना की है। यह सम्मान प्रति वर्ष एक ऐसे मनीषी को दिया जाएगा, जिन्होंने मीडिया के क्षेत्र में अपने विशिष्ट रचनात्मक लेखन और हिन्दी भाषा के प्रति समर्पण भाव से रचनात्मक कार्य करके राष्ट्र का गौरव बढ़ाया हो। सम्मान राशि दो लाख ५० हजार रूपए की होगी। राज्य सरकार के जनसम्पर्क विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है, जिसमें सम्मान से संबंधित नियमों की पूरी जानकारी शामिल है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित यह अधिसूचना जनसम्पर्क विभाग की वेबसाईट- डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यूडॉटडीपीआरसीजीडॉटजीओव्हीडॉटइन (222.स्रश्चह्म्ष्द्द.द्दश1.द्बठ्ठ) पर भी अपलोड कर दी गयी है। मुख्यमंत्री ने सप्रे जी की जयंती की पूर्व संध्या पर आज राजधानी रायपुर में जारी शुभकामना संदेश में कहा है कि पंडित माधव राव सप्रे ने आज से लगभग ११४ वर्ष पहले छत्तीसगढ़ के पेण्ड्रा को अपनी कर्मभूमि बनाकर एक ऐसे दौर में च्छत्तीसगढ़ मित्रज् नामक साहित्यिक पत्रिका का प्रकाशन शुरू किया, जब आज की तरह प्रिन्टिग टेक्नॉलॉजी के अत्याधुनिक संसाधन नहीं थे। उन्होंने अपने सहयोगी रायपुर के स्वर्गीय श्री रामराव चिंचोलकर और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित वामन बलीराम लाखे के साथ वर्ष १९०० में इस पत्रिका का प्रकाशन प्रारंभ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित माधव राव सप्रे एक गंभीर चिंतक और संवेदनशील साहित्यकार थे। उनकी लिखी कहानी च्टोकरी भर मिट्टीज् को आधुनिक हिन्दी की पहली कहानी के रूप में मान्यता मिलना भी छत्तीसगढ़वासियों के लिए गर्व की बात है। उल्लेखनीय है कि पंडित माधव राव सप्रे का जन्म वर्तमान मध्यप्रदेश के पथरिया में १९ जून १८७१ को हुआ था। उनकी प्राथमिक शिक्षा छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में और हाई स्कूल की पढ़ाई रायपुर में हुई। वह सन् १८९० में रायपुर में ही एन्ट्रेंस की शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा के लिए जबलपुर गए। उन्होंने नागपुर से बी.ए. और ग्यालियर से इलाहाबाद विश्वविद्यालय की एफ.ए. की शिक्षा की हासिल की। सप्रे जी १८९९ में छत्तीसगढ़ के पेण्ड्रा के राजकुमार के अंग्रेजी शिक्षक बने। स्वर्गीय श्री सप्रे ने वहीं से सन् १९०० में च्छत्तीसगढ़ मित्रज् का संपादन शुरू किया। उनकी यह पत्रिका देशभर में प्रसिद्ध हो गयी। इसका प्रकाशन सन् १९०२ तक चलता रहा। पत्रिका के संपादन में स्वर्गीय श्री रामराव चिंचोलकर उनके सहयोगी थे, जबकि प्रकाशन का दायित्व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय पंडित वामन बलीराम लाखे ने सम्हाला था। स्वर्गीय पंडित माधव राव सप्रे ने रायपुर में सन् १९०० में राष्ट्रीय चेतना और चिंतन के प्रथम केन्द्र के रूप में आनंद समाज वाचनालय की स्थापना में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने सन् १९०५ में नागपुर में हिन्दी ग्रंथ प्रकाशन मण्डली की स्थापना की और सन् १९०७ में १३ अपै्रल से हिन्दी केसरी का प्रकाशन शुरू किया। अपनी पत्रकारिता और लेखनी के माध्यम से स्वतंत्रता आन्दोलन को प्रोत्साहित करने की वजह से पंडित माधव सप्रे को अंग्रेज हुकूमत ने २२ अगस्त १९०८ को भारतीय दण्ड संहिता की धारा १२४-अ के तहत गिरफ्तार भी कर लिया था। कुछ महीनों बाद उनकी रिहा किया गया। सप्रे जी ने रायपुर में ही सन् १९१२ में जानकी देवी कन्या पाठशाला की स्थापना करवायी। उन्होंने लोकमान्य पंडित बाल गंगाधर तिलक के मराठी गं्रथ च्गीता रहस्यज् का हिन्दी अनुवाद किया, जो सन् १९१६ में प्रकाशित हुआ। पंडित माधव सप्रे ने रायपुर में सन् १९२० में राष्ट्रीय विद्यालय और हिन्दु अनाथालय की स्थापना में भी अहम भूमिका निभायी। सप्रे का जी का निधन २३ अपै्रल १९२६ को रायपुर में हुआ।

राज्य में सुराज संकल्प योजना के तहत खोले जायेंगे नवीन बाल आश्रम गृह
जयपुर, 18 जून। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के प्रमुख शासन सचिव डॉ. मंजीत सिंह ने बताया कि राज्य में सुराज संकल्प योजना के तहत नवीन बाल आश्रम गृह खोले जायेंगे। डॉ. सिंह बुधवार को यहां शासन सचिवालय में आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की घोषणा के अनुरूप सुराज संकल्प योजना के तहत ईट भट्टों पर काम करने वाले, रेल्वे स्टेशनों पर घुमंतु बच्चे एवं उद्योगों के बाल श्रमिकों को आश्रय देने के लिए बाल ओपन सेल्टर खोलने के लिए प्रस्तावो ंको भारत सरकार को भेजने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक जिले में कम से कम एक बाल ओपन सेल्टर खोलने का प्रस्ताव है। विशेष योग्यजन निदेशक श्री रघुवीर सिंह मीणा ने बताया कि राज्य की विभिन्न स्वयं सेवी संस्थाओं से प्राप्त आवेदन पत्रों का गहन परीक्षण किया गया है। उन्होंने बताया कि निर्धारित मापदण्डों के अनुसार प्राप्त स्वयं सेवी संस्थाओं के आवेदन पत्रों को भारत सरकार को भेजने की सिफारिश की जायेगी। उन्होंने बताया कि विशेष योग्यजन बच्चों के लिए 12 स्वयं संस्थाओं के पंजीयन, सुराज संकल्प योजना के तहत नवीन बाल आश्रय गृह खोलने के 22 प्रस्ताव, किशोर न्याय अधिनियम के तहत 13, समेकित बाल संरक्षण योजना के 52 आवेदन पत्रों को सही पाया गया है। बैठक में स्वयं सेवी संस्थाओं द्वारा खोले जाने वाले शिशु ग्रह, बाल आश्रम, बाल सुधार गृह, विधवा, नि:शक्तजनों के ओपन सेल्टर के लिए प्राप्त आवेदन पत्रों पर विस्तार से चर्चा की गयी।
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