लकीर पीटती कॉग्रेस: बगैर समीक्षा किये चल पड़ा कारवा

व्ही.एस.भुल्ले। हम तब तक नहीं रुकेगें जब तक कि पार्टी को पुरानी प्रतिष्ठा नहीं मिल जाती यह गुरु मत्र कांग्रेस अध्यक्ष ने हताश निराश कार्यकत्र्ताओं का मनोबल बढ़ाने उन्हें संबोधित करते हुये रायबरेली में कहीं।

करारी हार के बाद जो उम्मीद कॉग्रेस विचारधारा के लेागों को कॉग्रेस से थी वह अब काफुर होते दिख रही है। क्योकि जिस तरह का खेल स भवत: कॉग्रेस के अन्दर चल रहा है, जिसकी स भावना परिणामों के रुप में अब सबके सामने है। मगर अब भी न जाने क्यों कॉग्रेस अपनी गलतियों की समीक्षा के बजाये उसी रास्ते पर चल निकली है। जिस रास्ते पर वह बगैर किसी अपराध के सत्ता गवां विपक्ष का रुतवा तक गवां अकेली बैठी है।

करारी हार के बाद जिस तरह से एक निदोष व्यक्ति को दोषी ठहराने वाले कुछ लेाग बफादार होने का दम भरते है। वहीं लेाग अपने गुर्गो के माध्ययम से सच सुनने कहने वालो का रास्ता काट खास बने रहते है।

आज जो लेाग कॉग्रेस का भट्टा बैठने के पीछे दबी जुबान में कॉग्रेस उपाध्यक्ष को दोषी ठहराना चाहते है। उनसे सवाल होना चाहिए। कॉग्रेस उपाध्यक्ष तो पार्टी के प्रतीक मात्र है मगर कॉग्रेस चलाने वाले क्या कर रहे थे शायद जयपुर स मेलन में कॉग्रेस उपाध्यक्ष ने सही कहा था कि सत्ता जहर के समान है। जो उनकी माँ कॉग्रेस अध्यक्ष ने उन्हें बताया। क्या गलत कहा? जबकि हकीकत यह है कि कॉग्रेस उपाध्यक्ष की बात न तो पहले सुनी गई और न ही आज सुनी जा रही है। ऐसे में उपाध्यक्ष पर दोष न्याय संगत नहीं।

देश की स पदा और धन की अनयंत्रित लूटपाट के बीच जो स पन्नता देश वासियों के बीच बड़ी और परिदर्शिता ही नहीं लेागों को कानूनी संरक्षण सहित ग्रामीण रोजगार,किसानो को मालिकाना हक मिला इसे भुलाया नहीं जा सकता। मगर जिस तरह से सत्ता में रहते आज कॉग्रेस की दुर्गति हुई वह एक नहीं कई यक्ष सवाल खड़े करती है। उसमें एक अहम सवाल यह भी है कि जिसके श्रवण तथा दिव्य सूत्र जाम हो वह कैसे देखने सुनने के बाद भी गुनाहगार हो सकता है। शायद एक सांसद ने सही ही कहा कि जब बड़े नेता ही सुपारी ले चुके हो ऐसे में क्या किया जा सकता है।

ऐसे में आलाकमान को जल्दबाजी के बजाये हर स्तर पर गहन समीक्षा करनी चाहिए और संगठन नये तरीके से कैसे खड़ा हो उस रास्ते पर बढऩा चाहिए। नहीं तो वो दिन दूर नहीं जब कॉग्रेस जैसी महान पार्टी जिसकी नीव में न जाने कितनी कुर्बानियों छुपी है। बगैर किसी अपराध के देखते ही देखते दफन हो जायेगी।

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