कुप्रबन्ध की शिकार अर्थव्यवस्था ?

व्ही.एस.भुल्ले। बड़े ही शर्म की बात है जो कार्य हमारे देश की माता,बहिने,बहुये वर्षो से बेहतर ढंग से करती चली आ हरी उस कार्य को देश के म...

व्ही.एस.भुल्ले। बड़े ही शर्म की बात है जो कार्य हमारे देश की माता,बहिने,बहुये वर्षो से बेहतर ढंग से करती चली आ हरी उस कार्य को देश के मर्दाे की सरकारे क्यों नहीं कर पा रही। अगर प्रशासन इस देश का यंत्र है तो इसे ऑपरेट करने वाली सरकारें है। मगर कुप्रबन्ध का काकस इतनी गहरी जड़े जमा चुका है। कि आती और जाती सरकारें मंहगाई और बेरोजगारी के इर्द गिर्द दम तोड़ जाती है। ऐसा ही कुछ हमारे देश में आजादी से लेकर आज तक चला आ रहा है।

अगर हम देश में बढ़ती मशीनों और विलाशिता सहित देश के धन के दुरुउपयोग को हम विकास तथा कुप्रबन्ध को हमारी संस्कृति मानते है तो यह हमारी बड़ी भूल है।
मनमाफिक ढंग से प्राकृतिक संपदा का दोहन और विकास के नाम देश के धन की लूट की छूट, जब कल्याण के नाम बड़े पैमाने पर बटौना, देश का भला नहीं कर सकता। वर्तमान कुव्यवस्था संस्कृति विरुद्ध संस्कार हीन व्यवस्था की ही देन है कि देश के आधे से अधिक लेाग शासकीय सहायता के मोहताज है। और युवा बुजुर्ग के हाथ बैकार है। यह कड़वा सच है हमारी व्यवस्था का। जिसकी कमजोरी विगत 30 वर्षो से विलासिता और वोट की राजनीति रही। मगर देश की महान जनता ने एक बार फिर से एक ही दल को पूर्ण बहुमत दे। खुले मन से देश की सेवा करने का अवसर दिया है।

आज देश में न तो धन न ही साधनो, संसाधनो की कमी है। ऐसे में सरकारों को अपने प्रबन्धन को देश वासियों की मदद से कुछ आवश्यक निर्णय ले। तत्कालिक रुप में फौरी तौर पर सुधारा जा सकता है। अगर सरकार सिंचाई,उत्पादन,बैंक,बीमा रियल स्टेट,परिवहन,खनन,वाणिज्य,शिक्षा कौशल जैसे क्षेत्रो में ही कुछ कड़े निर्णय ले ले तो मंहगाई की मार आंधी रह जायेगी। मगर कोई करे तब न, जो करने वाले है,उन्हें अपनी इमेज और वोटो की पढ़ी रहती है और प्राशसनिक तंत्र भ्रष्टाचार की बीमारी से ग्रषित हो मृत प्राय: कि स्थिति में है ऐसे में किसी को सोचने समझने सुनने पढऩे की फुरसत कहां। देखा जाये तो बढ़ती मंहगाई और घिसटती अर्थव्यवस्था का मूल कारण ही हमारा आर्थिक कुप्रबन्ध है। जो न तो प्रोफेसनल ही बन पाया न ही संवेदनशील जिसके चलते देश के धन का बहुत बड़ा भाग सवा अरब आबादी वाले देश के कुछ लेागों के हाथ में है,जो देश के धन से अकूत दौलत बना अपने देश वासियों से इतर अपना अपना साम्राज्य खड़ा करने में लगे है। और देश का धन और उसकी संपदा का जमकर दोहन कर रहे है।

आज हमारी गलत नीतियों और स्थापित हो चुकी संस्कृति विरुद्ध पर परा का ही परिणाम है। जो देश का सर्वाधिक धन इलेक्ट्रॉनिक यंत्र,क्रूड तेल और ड्रग सहित उरर्वरक पर खर्च हो रहा है। या फिर देश में कमाये धन से विदेशों में हो रही खरीदो के चलते हो रहा है। जिससे देन दारियों के चलते बार बार रुपये का भांव कम होता रहता है।
बहरहाल अगर सरकार देश वासियों के बीच उनकी सुरक्षा के भांव के साथ सहयोग देने लेने की शुरुआत करती है तो परिणाम 1 वर्ष में ही चौकाने वाले होगें। अब सुरक्षा चाहे अािर्थक हो या शारीरिक अगर देश का सहयोग लेने में सरकार सफल रही तो कोई कारण नहीं जो परिणाम सार्थक और लेाग समस्या रहित हो। जिसके मूल में हमारी संस्कृति और संस्कारों,पर पराओं की माहति जरुरत है। बगैर इनके कुछ भी स भव नहीं।
देखा जाये तो वह हमारी संस्कृति ही है। जिसकी जरा सी झलक भर में हमारे लोकतंत्र के मन्दिर में सन्नाटा सा खीच उस मन्दिर में बैठने वालो को उनका कत्र्तव्य बोध और देश और देश वासियों की सेवा के पैमाने समझा दिये।

शायद पहली बार हमने वो लोकतंत्र का मन्दिर देखा जिसके बारे में हम सुना व पढ़ा करते थे। कि स्वर्गीय नेहरु जी के वक्त कितनी महान पर परायें संस्कृति,संस्कारों का पालन इस लोकतंत्र के मन्दिर में होता था। इसे हम अपना सौभाग्य ही कह सकते है कि एक सच्ची शुरुआत हमारे देश में बेहतर संस्कारों के साथ तो हुई परिणाम जो भी हों।

स्कूल चलें हम अभियान का आज शुभारंभ
मुख्यमंत्री श्री चौहान होंगे मुख्य अतिथि
भोपाल : रविवार, जून १५, २०१४ मध्यप्रदेश में स्कूल जाने योग्य उम्र के सभी बच्चों को स्कूल में दाखिला दिलाने के लिये 'स्कूल चलें हम अभियान'' का कल सोमवार को शुभारंभ होगा। मोतीलाल नेहरू स्टेडियम, लाल परेड ग्राउण्ड भोपाल पर शाम ६.३० बजे होने वाले इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान होंगे। इस अवसर पर प्रतिभाशाली बच्चों को लेपटॉप भी वितरित किये जायेंगे। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री श्री पारस चन्द्र जैन, आदिम-जाति कल्याण मंत्री श्री ज्ञान सिंह और स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री श्री दीपक जोशी भी उपस्थित रहेंगे।

आज से शुरू होगा छत्तीसगढ़ के शिक्षा जगत का सबसे बड़ा उत्सव
रायपुर, १५ जून २०१४ मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में एक माह का प्रदेश व्यापी शाला प्रवेश उत्सव कल १६ जून को राज्य के लगभग ४८ हजार से अधिक प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में शुरू होने जा रहा है। यह छत्तीसगढ़ के शिक्षा जगत का सबसे बड़ा सालाना उत्सव है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह प्रदेश के हर बच्चे, हर माता-पिता, हर अभिभावक और राज्य के प्रत्येक नागरिक का अपना उत्सव है। उल्लेखनीय है कि राज्य में स्कूल शिक्षा, आदिम जाति विकास, नगरीय विकास और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को मिलाकर प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक (मिडिल) स्कूलों की संख्या ४८ हजार ५०१ है, जहां लगभग एक लाख ५९ हजार शिक्षकों, डेढ़ लाख से ज्यादा पंचायत प्रतिनिधियों और नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों सहित प्रदेश के मंत्रियों, सांसदों, और विधायकों की सक्रिय भागीदारी से शाला प्रवेश उत्सव मनाया जाएगा। वर्तमान में इन स्कूलों में पहली से आठवीं तक ३५ लाख २० हजार बच्चे दर्ज हैं। शाला प्रवेश उत्सव के दौरान छह वर्ष से १४ वर्ष आयु समूह के उन सभी बच्चों को स्कूलों में प्रवेश दिलाया जाएगा, जो अभी किन्ही कारणों से स्कूल नहीं जा रहे हैं, या जिन्होंने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी है। मुख्यमंत्री कल १६ तारीख को सवेरे १० बजे नया रायपुर के ग्राम उपरवारा स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय में शाला प्रवेश उत्सव का शुभारंभ करेंगे। डॉ. रमन सिंह ने उत्सव की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने शाला प्रवेश उत्सव की पूर्व संध्या पर रायपुर में जारी अपने शुभकामना संदेश में प्रत्येक प्राथमिक और मिडिल स्कूल में आम जनता के सहयोग से शुरू हो रहे इस विशेष अभियान के दौरान प्रवेश लेने वाले सभी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। डॉ. सिंह ने गांवों और शहरों के सभी लोगों से शाला प्रवेश उत्सव में उत्साह के साथ शामिल होने का आग्रह किया है और कहा है कि यह छत्तीसगढ़ की जनता और राज्य के नौनिहालों का अपना उत्सव है। सबकों मिलकर इसे मनाना है। स्थानीय लोग कल १६ जून को और आगे की तारीखों में भी शाला प्रवेश उत्सवों में जरूर आएं और बच्चों को तिलक लगाकर और मिठाई खिलाकर आशीर्वाद प्रदान करें। डॉ. रमन सिंह ने अपने संदेश में कहा है कि प्रारम्भिक शिक्षा के लोक व्यापीकरण के लिए राज्य सरकार ने व्यापक पैमाने पर बुनियादी और नवीन व्यवस्थाएं की हैं। छत्तीसगढ़ में हमने हर एक किलोमीटर के भीतर प्राथमिक स्कूल और हर तीन किलोमीटर के भीतर पूर्व माध्यमिक शाला (मिडिल स्कूल) की स्थापना की है। नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर जिलों में पुनर्वास शिविरों के नजदीक ६० स्थानों पर पोटा केबिन बनाकर आवासीय विद्यालय खोले गए हैं, जिनमें लगभग ३० हजार बच्चों को पढ़ाई की बेहतर सुविधा मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश के स्कूली बच्चों के भविष्य निर्माण के लिए एक नया कदम उठाया है और शिक्षा सत्र २०१४-१५ को शिक्षा गुणवत्ता वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। अगले पांच वर्ष भी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए गुणवत्ता वर्ष के रूप में होंगे।

राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष ने की जन सुनवाई,
जयपुर, 15 जून। राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष श्री एच.आर.कुड़ी ने रविवार को भरतपुर में मानवाधिकारों के हनन के संबंध में सर्किट हाउस में जन सुनवाई की वहीं अधिकारियों से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि अधिकारी-कर्मचारी यदि कार्यालय समय में उपस्थित रहकर अपने दायित्वों का निर्वहन करें तो बहुत से मानवाधिकारों का हनन होने से रोका जा सकेगा। आयोग के अध्यक्ष श्री कुड़ी मानवाधिकारों स बंधी शिकायतों की सुनवाई के पश्चात अधिकारियों की बैठक में स बोधित कर रहे थे। उन्होंने विशेषकर ग्रामसेवक, पटवारी, अध्यापक, एएनएम जैसे ग्राम स्तरीय कर्मचारियों की चर्चा करते हुए कहा कि यदि वे अपने मु यालय पर रहे तो ना केवल ग्रामीणों को सुशासन का अहसास होगा अपितु उनके मानवाधिकारों के संरक्षण में भी मदद मिलेगी। उन्होंने राजकीय कार्यालयों की व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि अधिकारी-कर्मचारी पेंशन प्रकरणों के निस्तारण में संवेदनशील रहे, आमजन के प्रति अपने कार्य व्यवहार को मधुर रखें और पूर्ण समय कार्यालय में उपस्थित रहकर आमजन की समस्याओं का निष्ठा से निस्तारण करने की मानसिकता बनाये। उन्होंने जनसुनवाई के दौरान अनेक फरियादी की समस्याओं को सुना एवं मौके पर ही उपस्थित अधिकारियों को उनकी समस्या समाधान के निर्देश दिये।
जन सुनवाई के अवसर पर जिला कलक्टर श्री गिरिराज सिंह कुशवाहा ने बताया कि फरवरी माह में मु यमंत्री व मंत्रियों द्वारा की गई जन सुनवाई में प्राप्त 19 हजार परिवादों में से 16 हजार का निस्तारण किया जा चुका है और उस समय 248 ग्राम पंचायतें ऐसी थी जिनमें फरवरी में जन सुनवाई नहीं हो सकी थी। उन सभी में अधिकारियों द्वारा जन सुनवाई की गई है जिनमें 3600 परिवाद प्राप्त हुए और जिन परिवादों का निस्तारण शिविर में नहीं हो सका उनके निस्तारण के समयबद्घ प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार अब अधिकारी व कर्मचारियों द्वारा नियमित ग्राम स्तर तक जन सुनवाई प्रारंभ की गई है जिसके सकारात्मक परिणाम भी दिखने लगे हैं और अब जिला स्तर पर परिवेदनाएं लेकर पहुंचने वाले लोगों की सं या में बड़ी कमी आई है। इस अवसर पर संभागीय आयुक्त श्री ओ.पी.सैनी, पुलिस महानिरीक्षक श्री बीजू जॉर्ज जोसफ, पुलिस अधीक्षक श्री राहुल प्रकाश, नगर निगम की आयुक्त श्रीमती शुचि त्यागी, उपखण्ड मजिस्ट्रेट श्री संदेश नायक, अतिरिक्त संभागीय आयुक्त श्री गुमानसिंह बारैठ सहित स बन्धित प्रमुख विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे। 

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तीरंदाज,328,व्ही.एस.भुल्ले,523,
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