मुसीबत बनी मदद, कंगाली के कगार पर खुशहाल कौम

व्ही.एस.भुल्ले। कभी प्रकृति की छत्रछाया में जंगल आधारित जीवन जीने वाली म.प्र. शिवपुरी जिले की शहरिया आदिवासी कौम अपना खुशहाल जीवन छोड़ इस तरह से कंगाली के कागार पर होगी किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा।

स्वभाव से सीधी,सरल, कम जरुरत, मेहनत कश यह कौम का हाल यह है कि न तो अब इन्हें जंगल आधारित जीवन जीने का ही अवसर रहा,न ही यह मुफत मिली भूमि पर किसान बन पाये। रही सही कसर व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार,गांव गांव बिचती अवैध शराब तथा दंबगो की दंबगई ने कर डाली।

कहने को म.प्र. शिवपुरी जिले में 551 शहररिया आदिवासी बाहुल्य गांव है। जिनकी जनसं या लगभग 2 लाख के करीब है। देखा जाये तो सरकारे इनके उत्थान तथा बेहतर जीवन बनाने अरबों रुपये आजादी से लेकर आज तक खर्च कर चुकी है।

मगर शहररिया आदिवासी जाति का जीवन स्तर ऊपर उठने के बजाये दिन व दिन नीचे गिरता जा रहा है। अगर यो कहें कि अब यह जाति अधिकांशता वोट देने की मशीन या यो कहें कि दया की पात्र बनती जा रही है, तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी।

सूत्रों की माने तो 30-40 वर्ष पूर्व म.प्र. शिवपुरी जिले की शहररिया जाति जंगली फल,जड़ी बूटियाँ तेन्दूपत्ता,महुआ लकडिय़ाँ बेच या फिर खेतों,खदानों शहरों में मजदूरी कर अपना भरण पोषण कर लेती थी।
मगर जब से अभियंत्रित हस्तक्षेप इन शहररिया,आदिवासियों के जीवन में बढ़ा कैसे वैसे इनके मूल धन्धे,पानी मजदूरी तो जाती ही रही बल्कि शासन द्वारा खेती के लिये इन्हें दिये गये पट्टेा के रट्टों ने इनका सरल जीवन मुश्किल बना दिया।

जिस तरह से विगत 4 दशक में इन शहरयिा जाति के धन्धों पर कुठाराघात हुआ और मजदूरी के नाम इन्हें बैकाम बनाया गया। तथा दंबगों की हैबानियत ऐसी कि इस जाति की हजारों वीघा जमीन या तो औने पौने दाम बिच गयी या ल_ के बल छीन ली गयी। हालात ये है कि जमीन या मजदूरी के चलते आये दिन दंबग इन्हें धुनक देते है। शराब का प्रचलन और उपलब्धता आदिवासी बस्तियों में इस हद तक है कि अधिकांश परिवार तबाह हो अत्याचार और मुफलिसी के दौर से गुजर रहा है।

बहरहॉल हर मंगलगबार ही नहीं आय दिन कलेक्टर कार्यालय और पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर आवेदन के लिये घूमते दिखना आम बात है। जो इस बात की गबाह है कि एक भोली भाली ईमानदार कौम आज किस हाल में है उदाहरण सामने है।

विश्व राजनीति के विराट व्यक्तित्व थे स्वर्गीय श्री मंडेला
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने देखी श्री मंडेला की काल कोठरी
भोपाल : शनिवार, जून १४, २०१४ मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान आज दक्षिण अफ्रीका के रॉबिन द्वीप के उस कमरे में गये जहाँ दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति श्री नेल्सन मंडेला को १८ वर्ष तक कैद रखा गया था। स्वर्गीय श्री मंडेला का स्मरण करते हुए श्री चौहान ने कहा कि ''मेरा हृदय अत्यंत भावुक हो गया और मैंने श्रद्धापूर्वक अपना शीश झुका दिया''। मुख्यमंत्री ने कहा कि रंगभेद के खिलाफ श्री मंडेला का संघर्ष, विश्व समाज और राजनीति के लिये प्रेरणादायी है। उन्होंने रंगभेद का जवाब प्रजातांत्रिक मूल्यों से दिया और कभी समझौता नहीं किया। श्री चौहान ने श्री मंडेला को प्रेरणा पुरुष, विश्व शांति के प्रणेता और विराट व्यक्तित्व वाला विश्व का महान नेता बताते हुए श्रद्धांजलि दी।

दलहन-तिलहन विकास योजना : इस बार खरीफ में किसानों को उन्नत बीजों के २.२५ लाख मिनिकिट बांटने का लक्ष्य
रायपुर, १४ जून २०१४ राज्य शासन के कृषि विभाग ने दलहन-तिलहन विकास योजना के तहत चालू खरीफ मौसम में किसानों को मुफ्त में दलहनी और तिलहनी फसलों की दो लाख २५ हजार से अधिक प्रमाणित बीज मिनिकिट बांटने का कार्यक्रम बनाया है। छत्तीसगढ़ राज्य कृषि एवं बीज विकास निगम की ओर से जिलों में मिनिकिट का भण्डारण किया जा रहा है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि दलहन-तिलहन विकास योजना के तहत किसानों को हर वर्ष मुफ्त में अरहर, उड़द, मूंग, तिल और रामतिल जैसी फसलों के बीज दिए जाते हैं। मिनिकिट बांटने के लिए सभी जिलों के लिए कार्य योजना बनाई जाती है। अलग-अलग जिलों में वहां की मिट्टी, वर्षा तथा मौसम के अनुसार बीज मिनिकिट बांटने का कार्यक्रम बनाया जाता है। अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष चालू खरीफ मौसम में दलहन फसलों की एक लाख ८५ हजार बीज मिनिकिट तथा तिलहन फसलों की ४० हजार बीज मिनिकिट वितरित की जानी है। दलहनी फसल अरहर, उड़द और मूंग की प्रत्येक मिनिकिट में चार किलो बीज रहता है। इसी प्रकार तिल और रामतिल की मिनिकिट में एक-एक किलो बीज दिया जाता है। इस वर्ष एक लाख अरहर बीज मिनिकिट, ५० हजार उड़द बीज मिनिकिट, ३५ हजार मूंग बीज मिनिकिट, २० हजार तिल मिनिकिट तथा २० हजार रामतिल बीज मिनिकिट किसानों को बांटी जाएगी।

राजस्थान को विकास की दृष्टि से देश का अग्रणी प्रदेश बनाएंगे- मु यमंत्री
जयुपर, 14 जून। मु यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे ने कहा है कि जनता के आत्मीय प्रेम, संत-महात्माओं और देवी-देवताओं के आशीर्वाद और समग्र विकास के संकल्पों के साथ राजस्थान को हर दृष्टि से अग्रणी प्रान्त बनाने के लिए भरपूर प्रयास किए जाएंगे और जन विश्वास पर खरा उतरते हुए जनता का कर्ज चुकाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी जाएगी। श्रीमती राजे शनिवार को बांसवाड़ा के समीप जानामेड़ी में उत्तम सेवा धाम रविन्द्र ध्यान आश्रम में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वावधान में 'राष्ट्रीय संतों का साहित्यिक अवदानÓ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह में मु य अतिथि के रूप में संबोधित कर रही थी। उन्होंनेेेे इस मौके पर श्रीधर पराड़कर द्वारा लिखित ÓÓउत्तम स्वामी के जीवन परिचयÓÓ नामक पुस्तक का विमोचन किया।
मु यमंत्री ने वैदिक ऋचाओं व मंगलाचरण के साथ भारत माता की तस्वीर पर पुष्पहार अर्पित करते हुए दीप प्रज्वलित कर संगोष्ठी का उद्घाटन किया। शंख ध्वनि और समवेत स्वरों में शारदा वंदना के बीच मु यमंत्री ने संत-महात्माओं, महंतों, मठाधीशों का अभिवादन कर स्वागत किया। श्रीमती राजे ने कहा कि जनता द्वारा दिए गए अपार प्यार और विश्वास को अच्छी तरह महसूस किया जा रहा है तथा राजस्थान प्रदेश और प्रदेशवासियों के कल्याण के लिए जो समय जनता ने दिया है उसका भरपूर उपयोग करते हुए राजस्थान को बदलने की हरसंभव कोशिश की जाएगी।

विकास के लिए मिले सिर्फ तीन माह
मु यमंत्री ने कहा कि उन्होंने 13 दिस बर को मु यमंत्री पद की शपथ ली थी। 20 दिस बर को मंत्रीमण्डल बना था । उसके बाद 5 मार्च को आचार संहिता लग गई। कुल मिलाकर करीब तीन माह आचार संहिता और दूसरे कामों में व्यतीत हो गए। उन्हें तो प्रदेश के लिए तीन महिने का समय ही मिला। इसके बावजूद उनकी सरकार ने जो महत्वपूर्ण फैसले लिए वे जनता को मालूम हैं और फिर सरकार तो पांच साल की चुनी जाती है। इस अवधि में हम निश्चित रूप से राजस्थान को देश के अग्रणी प्रदेशों में शुमार करवाएंगे। लेकिन यह बहुत बड़ा काम जिसे कोई अकेला नहीं कर सकता। प्रदेश की जनता की भागीदारी से ही हम प्रदेश की तकदीर बदलेंगे।

संत महात्माओं के बिना नहीं बढ़ सकता कोई राज आगे
उन्होंने कहा कि बांसवाड़ा छोटी काशी के रूप में जाना जाता है। उन्हें त्रिपुरा सुन्दरी और माही की इस तपोभूमि पर आकर दिव्य ऊर्जा और ताजगी का अहसास होता है। संत-महात्माओं तथा देवी-देवताओं के आशीर्वाद से भरी यह धरा ईश्वरीय अंश का बोध कराती है। उन्होंने कहा कि संत-महात्माओं के आशीर्वाद के बिना राज आगे नहीं बढ़ सकता।

मु यमंत्री ने क्षेत्र के देव सोमनाथ, बेणेश्वर, त्रिपुरा सुंदरी, घोटिया आ बा, मानगढ़ आदि तीर्थों का जिक्र किया और कहा कि सरकार इनके विकास के लिए कृत संकल्पित है और इस दिशा में जो काम हुए हैं वे ऐतिहासिक हैं। उन्होंने राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण द्वारा इस दिशा में किए गए प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश मेेें व्यापक और बेहतर काम हो रहा है।

मु यमंत्री ने किया कीर्तिमान स्थापित
उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता कर रहे राज्यसभा सांसद श्री कप्तान सिंह सौलंकी ने कहा कि मु यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे ने राजस्थान में कीर्तिमान स्थापित किए हैं। विधानसभा चुनाव में 163 और लोकसभा चुनाव 25 की 25 सीटेें उनकी मेहनत का नतीजा है। श्रीमती राजे में विकास के लिए विजन है। इसीलिए राजस्थान की जनता उनसे विकास की अपेक्षा रखती है, जिस पर वह खरा उतरने का प्रयास कर रही हैं। सोलंकी ने कहा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से संतों के साहित्यिक अवदान से जन-जन को परिचित कराने और नवचेतना की गतिविधियों को संबल मिलता है।

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