आयोग की बैठक में उद्योग व्यापार प्रतिनिधियों ने की छत्तीसगढ़ सरकार की प्रशंसा

रायपुर. प्रदेश के दौरे पर आए १४वें केन्द्रीय विŸा आयोग को आज यहां आयोजित अलग-अलग बैैठकों में उद्योग-व्यापार संगठनों, पंचायत राज संस्थाओं, नगरीय निकायों और विभिन्न राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों ने राज्य के आर्थिक विकास में और भी अधिक तेजी लाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। बैठक में आयोग के अध्यक्ष श्री वाय.व्ही. रेड्डी और सदस्यों ने प्राप्त सुझावों और ज्ञापनों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया।
छŸाीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष और स्थानीय विधायक श्री श्रीचंद सुंदरानी तथा महामंत्री श्री जितेंद्र बरलोटा ने आयोग को संयुक्त ज्ञापन सौंपकर यह आग्रह किया कि वाणिज्यिक-करों से मिलने वाले राजस्व को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार को भी छŸाीसगढ़ की वाणिज्यिक-कर प्रणाली को एक मॉडल के रूप में अपनाना चाहिए। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के प्रतिनिधियों ने भी आयोग को अपने सुझावों सहित ज्ञापन सौंपा। सीआईआई छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष श्री दिनेश अग्रवाल ने भवन निर्माण सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए होम लोन सस्ता करने का भी सुझाव दिया।

विचार विमर्श के दौरान छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कामर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज के अध्यक्ष श्री सुंदरानी ने छŸाीसगढ़ सरकार की टैक्स प्रणाली की प्रशंसा करते हुए कहा गया कि राज्य में वाणिज्यिक- कर चौकी समाप्त की गई, करों का युक्तियुक्त सरलीकरण किया गया, इसके फलस्वरूप राज्य के राजस्व में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई। छŸाीसगढ़ राज्य निर्माण के समय सन् २००० में जहां मात्र ४५८ करोड़ रुपए का कर-राजस्व आता था आज २०१३ की स्थिति में यह बढ़कर आठ हजार ८९२ करोड़ रुपए तक पहुंच रहा है। श्री सुंदरानी ने आयोग के अध्यक्ष से कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की सरकार की उद्योग-वाणिज्य हितैषी नीतियों के परिणामस्वरूप छŸाीसगढ़ भारत के उन राज्यों में सर्वप्रथम है, जहां कर मुक्त माल के क्रय-विक्रय करने वाले व्यापारियों को पंजीयन से छूट दी गई है।

पंजीयन प्राप्त करने के लिए लोकल क्रय-विक्रय होने की स्थिति में २० लाख रुपए तक छूट दी गई है। वेट आडिट करवाने के लिए सीमा दस करोड़ रुपए से ऊपर रखी गई है। प्रदेश में अधिकतर खाद्य वस्तुएं टैक्स फ्री हैं। श्री सुंदरानी कहा कि वाणिज्यिक-कर विभाग ने व्यापारियों को ऑन लाइन पंजीयन की सुविधा दिलाई। इससे उन्हें वाणिज्यिक-कर दफ्तरों में आने जाने की समस्या से मुक्ति मिली। सी-फार्म को स्वयं अनुमोदित करने और ऑनलाइन रिफंड की सुविधा दी गई। इससे छŸाीसगढ़ का व्यापारी अब इंस्पेक्टर राज से मुक्त है और भयमुक्त होकर व्यापार कर रहा है। इसके फलस्वरूप राज्य का वाणिज्यिक-कर राजस्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अगर चाहे तो छŸाीसगढ़ की वाणिज्यिक-कर प्रणाली को मॉडल के रूप में अपना सकती है।

चेंबर ऑफ कॉसर्म ने आयोग को इन्कम टैक्स में भी सरलीकरण का सुझाव दिया और ज्ञापन में कहा कि आय-कर की दरें दस प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। बैठक में राज्य की पंचायत राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी कई सुझाव दिए। जिला पंचायत रायपुर की अध्यक्ष श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, जिला पंचायत महासमुंद की अध्यक्ष श्रीमती सरला कोसरिया तथा अन्य अनेक पंचायत प्रतिनिधियों ने ग्राम विकास के लिए राशि गांवों की स्थानीय जरूरतों के अनुरूप सीधे ग्राम पंचायतों के खाते में हस्तांतरित करने का सुझाव दिया। उन्होंने मूलभूत कार्यों के लिए भी आवंटन बढ़ाने, प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम्प्यूटर और इंटरनेट सुविधा सहित डाटा एण्ट्री ऑपरेटर की नियुक्ति, सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने का भी सुझाव दिया।

पंचायत प्रतिनिधियों का यह भी सुझाव था कि पंचायत पदाधिकारियों को उनके कार्यकाल के प्रारंभिक महीनों में ही समुचित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। ग्राम सभाओं के फैसलों के क्रियान्वयन के लिए पंचायतों में पर्याप्त कर्मचारी होने चाहिए। इसके अलावा बेहतर करारोपण और कर वसूली में सराहनीय काम करने वाली पंचायतों को प्रोत्साहन राशि भी मिलनी चाहिए। इसी तरह नगरीय निकायों के प्रतिनिधियों ने भी कई सुझाव दिए। उनका कहना था कि सिवरेज ट्रिटमेंट की व्यवस्था को राज्य के सभी नगरीय निकायों में एक विशेष प्रोजेक्ट के रूप में लेना चाहिए और इसके लिए वित्त आयोग को राशि बढ़ाने के बारे में विचार करना चाहिए।

आयोग के साथ चर्चा में नगर निगम रायपुर की महापौर श्रीमती किरणमयी नायक, नगर निगम जगदलपुर के महापौर श्री किरणदेव, अम्बिकापुर नगर निगम के महापौर श्री प्रबोध मिंज, दुर्ग नगर निगम के महापौर डॉ. शिवकुमार तमेर, जनपद पंचायत रायगढ़ के अध्यक्ष श्री कन्हैया चरण पटेल, नगर पंचायत किरंदुल के अध्यक्ष श्री शैलेंद्र सिंह, ग्राम पंचायत सिरली, (जिला कोरबा) के सरपंच श्री रघुराज सिंह, ग्राम पंचायत बेरलगांव के सरपंच श्रीमती भुनेश्वरी नेताम, नगर पंचायत खैरागढ़ के अध्यक्ष श्री विक्रांत सिंह, जनपद पंचायत लुंड्रा के अध्यक्ष श्री प्रदीप कुमार, नगर पंचायत पत्थलगांव के अध्यक्ष डॉ. बीएल भगत, नगर पालिका बैकुंठपुर के श्री शैलेष शिवहरे, नगर पंचायत दीपका के श्री मनोज शर्मा, ग्राम पंचायत दनिया (खैरागढ़) के सुधीर गोलछा, जिला पंचायत दुर्ग की उपाध्यक्ष श्रीमती संध्या भारद्वाज, जनपद पंचायत कुरूद के श्री सतीश जैन और नगर पंचायत लैलूंगा के उपाध्यक्ष श्री कपिल सिंघानिया ने भी विचार विमर्श में अपने सुझाव रखे। इन बैठकों में १४वें वित्त आयोग के अध्यक्ष श्री रेड्डी के साथ आयोग के सदस्य श्री अभिजीत सेन, सुश्री सुषमा नाथ, डॉ. एम. गोविन्द राव और डॉ. सुदीप्तो मंडल, आयोग के सचिव श्री ए.एन. झा, राज्य सरकार के सचिव वाणिज्यिक कर श्री आर. एस. विश्वकर्मा, वित्त विभाग के सचिव श्री अमित अग्रवाल, राजस्व सचिव श्री के.आर. पिस्दा, आयुक्त पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्री पी.सी. मिश्रा और अन्य संबंधित वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

सरकार प्रदेश में शुद्घ पेयजल उपलब्ध कराने को कटिबद्घ -मु यमंत्री
जयपुर, 13 जून। मु यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने कहा है कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी क्षेत्रों में शुद्घ पेयजल उपलब्ध कराने के लिये कटिबद्घ है। उन्होंने कहा कि पेयजल आमजन केे जीवन की पहली प्राथमिकता और मूलभूत अधिकार है। राज्य में शुद्घ पेयजल का शत-प्रतिशत कवरेज हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। 

श्रीमती राजे शुक्रवार को यहां हरिश्चन्द्र माथुर लोक प्रशिक्षण संस्थान में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के इंजीनियर्स की कान्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र को स बोधित कर रही थी। उन्होंने कहा मुझे विश्वास है कि विभाग के इंजीनियर्स में इस लक्ष्य को पूरा करने की क्षमता है। सरकार सबके सहयोग से राज्य की सभी बस्तियों में पीने योग्य पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। 

मु यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 4 हजार 965 एमएलडी पानी की मांग की तुलना में 3 हजार 679 एमएलडी पानी उपलब्ध है। इस प्रकार 1200 एमएलडी से ज्यादा पानी की कमी है। उन्होंने कहा कि राजस्थान का क्षेत्रफल देश के क्षेत्रफल का 10.4 प्रतिशत, जनसं या 5.6 प्रतिशत तथा देश का 18.7 प्रतिशत पशुधन है। देश की तुलना में यहां सतही जल मात्र 1.1 प्रतिशत और भूजल केवल 1.7 प्रतिशत ही उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि पानी की इतनी अल्प मात्रा से सभी की जरूरतें पूरी करना बहुत बड़ी चुनौती है, लेकिन हम दृढ़ इच्छा शक्ति से इन स्थितियों का मुकाबला करने को प्रतिबद्घ है। 

श्रीमती राजे ने कहा कि सुराज संकल्प यात्रा और भरतपुर में सरकार आपके द्वार कार्यक्रम के दौरान राज्य में धरातल पर पेयजल को लेकर इन विकट स्थितियों को उन्होंने करीब से देखा। उन्होंने कहा कि राज्य के 243 ब्लॉक में से मात्र 25 ब्लॉक ही भूजल के स्तर की दृष्टि से सुरक्षित है। पूरे देश की तुलना में राजस्थान की 28.8 प्रतिशत बस्तियों में कम गुणवत्तायुक्त, 44 प्रतिशत बस्तियों में लोराइडयुक्त और 84 प्रतिशत बस्तियों में खारा पानी है। मु यमंत्री ने कहा कि पेयजल की समस्या से निपटने के लिए राज्य में अब तक बिना किसी दूरदृष्टि के पुराने ढर्रे से ही काम किया जा रहा है। हम पानी की जरूरतों के लिए अधिकतर भूजल पर ही निर्भर रहे हैं। अब हमें नई सोच और तकनीक के साथ इस दिशा में कार्य करना होगा। 

समय की आवश्यकता है कि हम सिर्फ गर्मी के दिनों के लिए कन्टीजेंसी प्लान बनाने व टैंकरों से सप्लाई जैसे पुराने तौर-तरीको से बाहर निकले। उन्होंने राज्य में भूजल की बजाय सतही जल पर आधारित प्रोजेक्ट बनाने, नदियों को जोडऩे, व्यर्थ बहने वाले पानी को संचित कर भूजल स्तर बढ़ाने, पेयजल के लिए वाटर ग्रिड बनाने, आधुनिक तकनीकों का उपयोग एवं पीपीपी मोड पर कार्य करने की आवश्यकता जताई। कान्फ्रेंस को जल संसाधन मंत्री प्रो. सांवरलाल जाट, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री राजेन्द्र राठौड़ ने स बोधित करते हुए प्रदेश में नियमित एवं व्यवस्थित जल आपूर्ति के स बन्ध में महत्वपूर्ण सुझाव दिये। 

मु य सचिव श्री राजीव महर्षि ने कहा कि मु यमंत्री के निर्देश पर राज्य में बेहतर जल प्रबन्धन के लिए विभाग में नवाचारों को अपनाने एवं उपयोगी सुझावों पर विचार करने के साथ ही विभाग के सुदृढ़ीकरण के लिए एक कमेटी का गठन किया जायेगा, जिसमें स्वयं सेवी संगठन एवं सिविल सोसायटी के प्रतिनिधि और इंजीनियर्स शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि अभियंता जनता के प्रति संवेदनशील बने तथा जन समस्याओं का समय पर निस्तारण करें। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव श्री पी.एस. मेहरा ने कहा कि इस कांफ्रेंस में प्राप्त महत्वपूर्ण सुझाव विभाग के लिए दिशा-निर्देश का काम करेंगे। 

कान्फ्रेंस में गुणवत्तायुक्त पेयजल सप्लाई, जनता जल योजना, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी सप्लाई के लिए टैंकरों का उपयोग घटाने सहित कई विषयों पर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के इंजीनियर्स ने प्रस्तुतीकरण देते हुए अपने सुझाव दिये। मु यमंत्री ने सभी के सुझावों को गौर से सुना। उन्होंने प्रस्तुतीकरण के बीच में अलग-अलग बिन्दुओं पर इंजीनियर्स के साथ गहन चर्चा भी की। इस अवसर पर अतिरिक्त मु य सचिव इन्फ्रा. श्री सी.एस.राजन, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के शासन सचिव श्री श्रीमत पाण्डेय, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख शासन सचिव श्री दीपक उप्रेती, ऊर्जा विभाग के शासन सचिव श्री आलोक के अलावा राज्य भर से आये इंजीनियर्स, स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि और विषय विशेषज्ञ मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा सरदार सरोवर बाँध की ऊँचाई बढ़ाने के निर्णय का स्वागत
भोपाल : शुक्रवार, जून १३, २०१४ मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण द्वारा सरदार सरोवर बाँध की ऊँचाई १७ मीटर बढ़ाने के निर्णय का स्वागत किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने १३८ मीटर पूर्ण बाँध ऊँचाई तक के लिए २००८ में पुनर्वास एवं पुनर्व्यस्थापन का काम पहले ही पूरा कर लिया है। बाँध का स्तर बढ़ने से मध्यप्रदेश को ८२७ मेगावाट अतिरिक्त बिजली प्राप्त हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि खुली स्थिति में गेट लगाने की अनुमति दी गई है। अत: इससे डूब के वर्तमान स्तर में वृद्धि नहीं होगी। नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण द्वारा निर्माण कार्य और डूब क्षेत्र के संतोषप्रद रूप से पूरी तरह खाली हो जाने के बाद ही उच्च स्तरों पर पानी को रोकने की अनुमति दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि घबराने की कोई बात नहीं है। पर्याप्त समय है और अपनाई जानेवाली प्रक्रिया में सावधानी बरती गई है। निर्माण कार्य में ३६ माह से अधिक का समय लगेगा।

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