काश राहुल की ही, सुन ली होती कांग्रेस नेे धन्यवाद की पात्र है, देश की आवाम

व्ही.एस.भुल्ले। विगत 20 वर्षो में जिस दंश को झेल कांग्रेस आज जिस मुकाम तक पहुंची है। उसे देश की महान आवाम का शुक्र गुजार होना चाहिए। जो प्रमुख कार्य स्वयं के लिये कॉग्रेस न कर सकी,वह कार्य देश की आवाम ने लेाकसभा चुनावों में कर दिखाया।
जिसके लिये कांग्रेस को देश की जनता का धन्यवाद करना चाहिए। उसे समझना होगा देश में लेाकतंात्रिक व्यवस्था है न कि सम्राज्यवाद सामंतवाद न ही वंश बाद,यहां वंशवाद से तात्पर्य कदाचित यह नहीं कि कोई काबिल देश भक्त लेाकतंात्रिक तरीके से पीढ़ी दर पीढ़ी देश की सेवा नहीं कर सकता। लेाग राजनीति में पीढ़ी दर पीढ़ी सेवा भी कर सकते है और राजनीति भी।

मगर शासन और सत्ता सहित संगठन का यह कटु सत्य भी है कि जिस व्यक्ति का लेागों से जीवंत स पर्क नहीं होता या जिसके जमीनी स्तर तक अईयार नहीं होते वह मु िाया असफल हो जाता है। चाहे वह शासक,सत्ता प्रमुख या संगठन प्रमुख ही क्यों न हो? इसलिये जिनके के लिये आप कुछ करना चाहते है। उनकी आवश्यकता,आवो हवा और उनकी महात्वकांक्षाओं के बारे में सही जानकारी होना जरुरी है।

कहते अगर आप लेाकतंात्रिक व्यवस्था में है। और जनसेवक या लेाकसेवक है तो आपको पता होना चाहिए कि जिनकी सेवा या चाकरी कर रहे है, वह आपसे क्या चाहते है और यह तभी स भव है। जब आपका सीधा स पर्क जनता से हो। मगर दुर्भाग्य कि सीधे संवाद के अभाव में सब कुछ चौपट हो गया,जहां फिलहाल की पोजीसन में संगठन शून्य तो 543 सदस्य वाली लेाकसभा में कांग्रेस को लगभग 44 सदस्य ही मिल सके।

सत्ता के लिये जो शुरुआत नर्सिंंगराव सरकार के समय से गठबंधन या बंधन के रुप में क्या हुई उसने सब कुछ चौपट कर डाला। उस पर से यू.पी.ए 2 में तो ऐसी अन्धी रही कि कॉग्रेस दो पैरो पर चलने वाली होने के बावजूद स्वार्थ बस कान फूकुओं,दर वारियो ने एक मजबूत संगठन को विकलांग बता डाला और बन्धन,गठबन्धन की बैसाखियों को भाई लेागों ने मुंह मांगे दामो पर खरीद डाला। हालात ये हुये कि नकली बैसाखियों को तो टूटना ही था सो परिणाम सामने है

मगर धन्य है देश की जनता कि उसने भाजपा जैसे लेाकतांत्रिेक संगठन को पूर्ण बहुमत दे यह साबित कर दिया। कि वह स मान और स्वाभिमान का जीवन और सैद्धान्तिक दलों की वह सत्ता में चाहती है। काश कॉग्रेस ने भी पूर्व में भाजपा की तरह धैर्य रखा होता न कि गलत सलाहकारों की सलाह में गठबन्धनों का खेल शुरु किया होता या फिर कॉग्रेस ने अपने ही उपाध्यक्ष राहुल को सुना होता जो उन्होंने अपने ही दम पर चुनाव लडऩे का ऐलान किया था मगर उन्हें भी अनसुना कर दिया और सत्ता लेालुपों ने सरकार ही नहीं संगठन का वो हॉल किया कि विमुख जनता ने एक ही झटके में चारो खाने चित कर दिया।

मगर लगता नहीं कि अभी भी कॉग्रेस बहुत कुछ सीख पायेगी। जनता द्वारा मंथन को मिले। 5 वर्षो में देश भर में मजबूत संगठन खड़ा कर पायेगी।
वैसे भी राजनीति में कहावत है देर आयद दुरुस्त आयद सो कॉग्रेस को अपने पूर्व नेता स्व. इन्दिरा जी से सीख लेना चाहिए। कि ठोकर खाकर और कड़े संघर्ष के बाद ही सफलता मिल पाती है। इस जनादेश से इतना तो साफ है कि लेागों को शिकायत कॉग्रेस से कम उसमें चले क्रियान्वयन से ज्यादा रही। जिसने आम आदमी के स्वाभिमान,मान,स मान को सीधे चोट पहुंचाई अगर यो कहें कि व्यवहारिक मुद्दों पर कॉग्रे्रस विफल रही, तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी।

मुख्यमंत्री ने बढ़ते सड़क हादसों पर चिन्ता प्रकट की
रायपुर, २४ मई २०१४ मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है । मुख्यमंत्री ने सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को उनके कार्य क्षेत्र के जिलों में यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए आवश्यक पहल करने, अभियान चलाने तथा इसके लिए संबंधित अधिकारियों की बैठक लेने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सभी जिलों में यातायात सुधार के लिए प्रशासन और नगरीय निकायों को मिलकर तत्परता से कदम उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यातायात व्यवस्था को सुगम और सुरक्षित बनाने की जरूरत है। डॉ. रमन सिंह ने बीती रात धमतरी जिले में रायपुर-धमतरी मार्ग पर ग्राम दरबा के पास एक सड़क हादसे में धमतरी निवासी माता-पिता और पुत्र की आकस्मिक मृत्यु पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने इस दुर्घटना से पीड़ित सोनी परिवार के प्रति अपनी संवेदना और सहानुभूति प्रकट की है। डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जहां सभी वाहन चालकों को यातायात नियमों का पालन करना चाहिए। इसके अलावा लोक निर्माण विभाग तथा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों को अपने कार्य क्षेत्र की सड़कों को ठीक-ठाक रखने के लिए सतत निरीक्षण भी करना चाहिए। बिजली विभाग और स्थानीय निकायों को रात्रि में सड़कों की प्रकाश व्यवस्था पर विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए। मुख्यमंत्री ने सभी दोपहिया वाहन चालकों से वाहन चलाते समय हेलमेट पहनने और मोटर गाड़ियों में सफर के दौरान सीट बेल्ट बांधकर चलने की अपील की है।

म.प्र. पुनर्वास विभाग बंद होगा
भोपाल : शनिवार, मई २४, २०१४, पुनर्वास विभाग की उपयोगिता नहीं रहने और इस विभाग के सभी कार्य केन्द्र सरकार के अधिनियम तथा राजस्व आयुक्त कार्यालय के अंतर्गत आने के कारण इसे बंद किया जायेगा। आज यहाँ राजस्व एवं पुर्नवास विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी। भारत सरकार के भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम लागू होने और राजस्व आयुक्त कार्यालय स्थापित होने के कारण पुनर्वास विभाग की उपयोगिता नहीं रह गई है। उल्लेखनीय है कि पुनर्वास विभाग की स्थापना पाकिस्तान और तिब्बत से आये विस्थापितों के पुनर्वास के लिये की गयी थी। पुनर्वास विभाग ने विकास परियोजनाओं के लिये अर्जित निजी भूमि के विस्थापितों के पुनर्वास की आदर्श पुनर्वास नीति २००२ बनायी थी। इसके बाद केन्द्र सरकार ने भी २००७ में पुनर्वास नीति बनायी। इस नीति के अनुक्रम में राज्य की पुनर्वास नीति को पुनरीक्षित करने का काम चलता रहा। केन्द्र सरकार का भूमि अर्जन अधिनियम २०१३ आने से अब पुनर्वास पैकेज भी इसी अधिनियम के अंतर्गत दिया जायेगा। पुनर्वास पैकेज बनाने और लागू करने का काम कलेक्टर और पुनर्वास पुर्नव्यवस्थापन आयुक्त द्वारा किया जायेगा। इस प्रक्रिया में पुनर्वास विभाग के बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। इसकी कोई उपयोगिता भी नहीं रह गयी है।

अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए अभिभाषकों की भूमिका महत्वपूर्ण -मु य न्यायाधिपति
जयपुर 24 मई। राजस्थान उच्च न्यायालय के मु य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति अमिताभ रॉय ने कहा कि आपसी सहमति और समझाइश से होने वाला न्याय सामाजिक अपराधों पर अंकुश लगाता है, साथ ही भाईचारे को भी बढ़ावा मिलता है। इसके लिए अभिभाषकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। न्यायमूर्ति राय शनिवार को टोंक में न्यायालय परिसर में 75 लाख रुपये की लागत से नवनिर्मित वैकल्पिक विवाद निस्तारण केन्द्र (एडीआर सेंटर) के उद्घाटन समारोह में मु य अतिथि के रुप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में कई कारणों के चलते काफी समय लग जाता है, इसके चलते सस्ता, सुलभ और शीघ्र न्याय की स्थितियां नहीं आ पाती हंै, ऐसे में लोक अदालत के माध्यम से आपसी सहमति की प्रक्रिया न्याय संगत बन गई है। वैकल्पिक विवाद निस्तारण पर प्रकाश डालते हुए न्यायाधिपति अमिताभ रॉय ने कहा कि आपसी सहमति से न्याय की प्रक्रिया में मध्यस्थों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है जो दोनों पक्षों को सुनकर आपसी सहमति बनाकर उनके मान-स मान के साथ समझौता करवाते हंै और उन्हीं समझौते के आधार पर उससे संबंधित सभी मुकदमों का निस्तारण भी हो जाता है। न्यायाधिपति रॉय ने कहा कि किसी भी प्रकरण को प्रारंभिक स्तर पर सुलझाना आसान होता है, ऐसे में मध्यस्थता के माध्यम से समझौते के आधार पर न्याय न्यायिक प्रणाली का अभिन्न अंग हो गया है, जिसमें वादार्थी, अभिभाषकों एवं मध्यस्थों के माध्यम से न्याय सस्ता, सुलभ एवं शीघ्र मिलता है। इस मौके पर राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव कुंज बिहारी कट्टा ने वैकल्पिक विवाद निस्तारण प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी तथा यहां बने भवन की पूरी उपयोगिता करने का आव्हान किया। इस अवसर पर प्रशासनिक न्यायाधीश आलोक शर्मा, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेन्द्र शर्मा भी मंच पर मौजूद रहे। समारोह में राजस्थान आवास विकास के प्रबंध निदेशक आर.के.अग्रवाल ने बताया कि 75 लाख रुपये की लागत से एडीआर भवन 18 माह में तैयार किया गया है।
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