माँ भारती को,मेरा शत शत नमन..............?

व्ही.एस.भुल्ले/ भैया- हारी महान मां भारती के सुपुत्र सुत्रियो ने वो काम कर दिखाया कि मैं एक बार फिर से नमन करने मजबूर हूं भ्रष्टाचार,नैतिकता,संस्कृति,सिद्धान्तों की सीमा तोड़ हमें धर्म,जाति के नाम बांटने वालो को ऐसा सबक सिखाया है। कि अब उनकी 7 पुस्तों तक को सोचने पर मजबूर कर देगी कि भारत में लेाकतंत्र है न कि परिवार,सम्राज्यवादी तंत्र जिन दलो में लेाकतंत्र के नाम परिवार और साम्राज्यवादी तंत्र चल रहा था उन्हें देश की महान जनता ने बता दिया कि देश में लेाकतंत्र है और सत्ता के लिये उनका सौदा करने वालो को वह ऐसे ही दण्ड देती रही है। और देती रहेगी।
परिणाम के बन्धन,गठबन्धन के नाम देश की भावनाओं से खेल सत्ता की मलाई फाकने वालो को देश की जनता ने विपक्ष में गठबन्धन बनाने का मौका दिया है। अर्थात पेन्डूलम उल्टा कर दिया है देश व देश की जनता की सेवा के नाम सत्ता में गठबन्धन रखने वाले क्या एक अच्छे विपक्ष के लिये भी गठबन्धन करेगें जिससे वह 60 महिने का समय लेने वालो पर नजर रख सके। क्योकि जो दल सत्ता से बाहर रह गये है। वे जनसेवा देश सेवा के लिये क्या विपक्ष में बैठ वह अपना धर्म निभायेगें?
भैये- विपक्ष में बैठ वह मातम मनायेगें या धर्म निभायेगें इससे तुझे क्या लेना देना मैं तो बस इतना जाड़ू कि अच्छे दिन आने वाले है।
भैया- तो अब हम नंगे भूखों का कै होगा। हमारे साथ अपना हाथ रखने वाले तो फिलहॉल स्वयं सहारे की तलाश में है। प्रधानमंत्री भले ही हारे दल से न हो सदन में विपक्ष का नेता ही बन जाये। मने तो खूब चिल्लाया मुओं के सामने मगर मने कै पता था कि चाटूकार चापलूस लुटिया डुबा कर ही छोड़ेगे मगर कै करता हारे आलाकमान में तो नीरों की आत्मा जो घर कर रही थी भाया कुछ तो कर गर दिल टूट गया तो क्या करेगे हम गरीब के साथ हाथ वाले?
भैये- सुनना चाहे तो सुन कै थारे को मालूम कोणी देश में श्ेायर बाजार खूब चढ़ रहा है। निफटी भी सारे रिकार्ड भाजपा की जीत की तरह तोड़ रहा है एक लगायेगा दस पायेगा,चल गया तो जादू,चूक गया तो,मौत,क पनी का प्रचार है।
भैया- मैं समझा नहीं मैं ठहरा गांव का गबई गंवार मैं कैं जाड़ू थारी गूढ़ बातों को हो सके तो बिस्तार से बता हारे साथ वालो को सहारा कैसे लगे वह तरकीब सुझा ।
भैये- थारे सुडऩे से कै होने वाला है मुये झकाझक कलफ वाले सुने तब न कै थारे को मालूम कोणी जब सारा देश सड़कों पर चिल्लाता रहा। हर कॉग्रेसी मायूस हो घर जा बैठा, कहते है नियति के आगे कौन टिका है सो जहाज तो डूबना ही था। कहते है अंहकार किसका हुआ है वो भी लेाकतंत्र की मालिक जनता से अहंकार जिसके चलते एक दो नहीं पूरे के पूरे 72 मंत्री चित पढ़े है। 125 वर्ष पुरानी सबसे बढ़ी पार्टी को 543 में से 60 सांसद भी नहीं मिले है। वो तो गनी मत रही जो 44 तो जीत पाये जो जनता को मालिक समझ उसकी सेवा कर पाये। फिर भी मैं तो बौल्यू भाया पहले 10 जनपथ ही नहीं 24 अकबर रोड के शुद्धिकरण की रिर्पोट तो ले आ क्योकि मोदी ने तो सर्व प्रथम बनारस को साफ सुथरा रखने की महात्मा गांधी का हबाला दे अपनी मंशा जाहिर कर दी है। कॉग्रेस आलाकमान भी तो बताये कि उसने 10 जनपथ और 24 अक्टूबर रोड को महात्मा गांधी की भावना अनुसार शुद्धिकरण की क्या व्यवस्था कर रखी? तभी थारे जैसे के साथ हाथ वालो की चल पायेगी बरना 50 से अधिक संगठनों की ताकत पर खड़ी भाजपा जैसी मजबूत पार्टी से संगठन शून्य हो चुकी थारे हाथ वालो की पार्टी कैसे दो-दो हाथ कर पायेगी। अगर अभी भी सुनहरा इतिहास और एनर्जेटिक युवा नेतृत्व वाली थारी पार्टी स्वतंत्र भारत में इतिहास से सबक ले आज भी न चेति तो स्वयं एक इतिहास बन कर रह जायेगी। क्योकि पहले संगठन फिर सत्ता से गयी पार्टी कहीं युवा नेतृत्व से कोसो दूर न चली जाये अगर ऐसा हुआ तो यह बात न तो इस दल और न ही देश वासियों को नहीं पच पायेगी इसलिये देश की जनता ने सही फैसला लिया है। देश में सफाई का काम भले ही भाजपा को मिला है। वहीं दल के अन्दर सफाई का कार्य थारे दल को मिला है। 60 माह थारे दल को और 60 माह कमल दल को। दिये है हारे देश की महान जनता ने।
भैया- तो क्या अब जनता का जनता दरबार खत्म, अब मने कहां गुहार लगाऊं आखिर कैसे मैं हारे महान दल को बचाऊ।
भैये- बचने बचाने का दौर खत्म अगले 5 वर्ष बाद आना। साथ ही ठीक से हाथों हाथ इतिहास,भूगोल,नैतिक शिक्षा और संस्कृति की तैयारी लगाना, हो सके तो सोशल प्रबन्धन पर भी ध्यान लगाना तब तो भाया थारे दल की चल जायेगी बरना थारे दल की कहानी भी इतिहास में स्वत: ही दर्ज हो जायेगी।
भैया-मने समझ लिया अगर कमल दल 5 पीढ़ी खपा जनता का दिल सारे देश में जीत सकता है तो हमारे साथ हाथ वालो का दल क्यों नहीं इसलिये, सफाई में ही है भलाई है, ये बात अब समझ में आई है। बोल भैया कैसी रही।


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