झूठ बना बड़ा मुद्दा, भूत,भविष्य को लेकर गौड़ रहे अहम मुद्दे

भैया- मने तो कुछ समझ नहीं आरिया शै कि अपना बहुमूल्य वोट में किसको डालू और भूत को भूल अपने भविष्य को चाक चौबन्द कर डालू। यूं तो सारे ही दल वाले चिल्ला रहे है कि वोट हमें दो हमें दो क्योकि इतिहास या भूत गवाह है और भविष्य सामने खड़ा है जहां देश ार में वोट मांगते वक्त किसी पर जूते तो किसी पर थप्पड़ पड़ रहे है तो कोई इतिहास का लेखा-जोखा रख भविष्य का विजन प्रस्तुत कर रहे है।
भाया मने तो आयोग कि वोट डालने की बात छोड़ किसी की बात समझ नहीं आवे आखिर किसके भविष्य और इतिहास में दर्ज भूत को देख वोट डालू। हाल ही में कमल दल वालो की सरकार के मुखिया सहित भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जी ने खुला संगीन आरोप बेहतर भविष्य को बता,भूत और वर्तमान पर लगाए है कि इतिहास वाले झूठे है वहीं इतिहास और वर्तमान वालो ने भी जमकर आरोप लगाऐ है कि ये तो झूठ का पुलिंदा ही नहीं मायावी फरैवी है, आखिर मैं कै करुं हारे इस वोट का।

भैये- कै थारे को मालूम कोणी देश की सौलहवी लेाकसभा चुने जाने के लिये निर्वाचन चल रहा है और थारे क्षेत्र में 17 अप्रैल को वोट डल रहा है जहां मु य मुद्दे,गौड़ कर आरोप प्रत्यारोपों के साथ ही कराये गए। विकास कार्य और नाम का खेल चल रहा है अब ऐसे में थारे को भूत वर्तमान और भविष्य का ज्ञान नहीं तो मैं कै करुं।

भैया- हारे को लेाकतंत्र के इस महाकुंभ के शुभ अवसर पर कुछ तो बता हारी माली हालत पर कुछ तो तरस खा। आखिर झूठ के पुलन्दे,मायावी या फिर फरेवी लेागों से 16 वी लेाकसभा की पूर्व संध्या पर कैसे दो-दो हाथ करुं और हाथों हाथ,ज्वलंत मुद्देा पर विजन ही नहीं पूरी की पूरी डी.पी.आर. सामने रखु। तब तो चल जायेगी,बरना एक बार फिर से 5 वर्ष तक के लिये हारी मिट्टी वेभांव ही पिट जायेगी।

भैये- इतना सब कुछ करने के लिये तने हारे लेाकतंत्र के फैडरल सिस्टल (संघीय ढांचे) को समझना होगा किसकी क्या जबाव देही है। केन्द्र और राज्य सरकार में यह सबको बताना होगा मगर विगत वर्षो में जब केन्द्र की 10 शाला सरकार और प्रदेश की दस शाला सरकार ने विभिन्न मुद्दे पर जब हम खबरचियों की ही नहीं सुनी हमारे चिन्दी पन्नों की हालत जब पै पलेटो जैसी कर दी। तो क्या ये ऐसे में सत्ता के लिये जूझ रहे ये दल थारी कहानी सुन पायेगें। मने तो लागे भैये चुप ही कर गर रुठ गये तो थारी तो थारी हारी भी जुबाड़ , हारे मीडिया आड़े की तरह बन्द कर दी जायेगी। और फोकट के राशन,पानी की जुगाड़ में बैठी थारी 80 करोड़ की जमात भी ठगी सी रह जायेगी।

भैया- तो क्या लेाकतंत्र में हारा इतना भी हक नहीं जो हारे जैसे 80 करोड़ से अधिक सस्ते राशन तेल को मोहताज हारे लेाग हारे राजनैतिक दलो और उनके नेताओं से यह पूंछ सके कि क्यों हम आजादी केे 65 वर्ष बाद भी समान शिक्षा,स्वास्थ,सुरक्षा,शुद्ध पेयजल,रोजगार हेतु प्रशिक्षण को मोहताज है? क्यों वोटो की खातिर हमारे बीच झूठ बोला जाता है? क्यों सच को झूठ और झूठ को सच ठहराया जाता है? आखिर झूठ से सना हमारा भूत,वर्तमान और भविष्य इसी तरह कब तक चलेगा और।
कब तक हमारा भोला भाला मतदाता छला जाता रहेगा। आखिर कुछ तो रास्ता होगा।

भैये- तने तो बावला शै कै थारे को मालूम कोणी हाल ही में म.प्र. का किसान बारिस,ओला वृष्टि से बदहवास पढ़ा है। केन्द्र 411 करोड़ तो म.प्र. सरकार का 2000 करोड़ सरकार के पास पड़ा है,मगर आज तक बर्बाद हुये हारे किसानो को एक धैला तक नहींं मिला है।

भैये- बस तू चुप कर मने समझ लिया तू भी झूठों की जमात में चल पढ़ा है। दाल,दलिया,राशन,तेल,शुद्ध पेयजल को कलफते लेागों को आज तक कहा इन्साफ मिला है।
मैं तो बोल्यू भाया काठी टूटे उन झुटल्लों की जिनके कारण बदहॉल सड़कों पर हारा गरीब आय दिन मर रहा है। भ्रष्टाचार इतना किअब तो बाबू,चपरासियों के ही यहां करोड़ों का खजाना निकल रहा है।


SHARE
    Your Comment

0 comments:

Post a Comment