मुद्दों से इतर लेाकतंत्र का महाकुंभ:

समस्याओं की सीढ़ी चढ़ सत्ता हथियाना चाहते है साम्राज्यवादी दल

व्ही.एस.भुल्ले/ विश्व के सबसे बड़े लेाकतंत्र में भरने वाले महाकुंभ 2014 के चुनावों में किसी को संदेह नहीं होना चाहिए कि समस्याओं की सीढ़ी चढ़ सत्ता हथियाने पर उतारु है,कुछ साम्राज्यवादी दल। जिसके लिये 80 करोड़ से अधिक मतदाता वाले देश में जहां 9 चरणों में स पूर्ण लेाकसभा चुनाव तय कराना निर्वाचन आयोग ने तय किया। ऐसे में मुद्दा विहीन लेाकतंत्र में सत्ता की जंग छिड़ चुकी है।
ये अलग बात है कि चुनावी समर में सत्ता हासिल करने हर एक राजनैतिक दल का घोषणा पत्र होगा और भावनात्मक रुप से वोट हासिल करने अपना एक नुक्शा जो चुनावी कोला हल में जहां मुद्दों को गौड़ कर वोट हासिल करने का फार्मूला भर बनकर रह जायेगा।
जबकि होना यह चााहिए था कि चुनाव के 6 माह पूर्व से सत्ता हासिल करने उतारु दलो को अपने घोषणा,अपनी नीतियाँ और देश में मौजूद समस्याओं के स्थाई हल हेतु अपनी अपनी घोषणायें भावी नीतियों की चर्चा देश वासियों के सामने रखना चाहिए थी। जिससें देश की सवा अरब जनता और लगभग 80 करोड़ मतदाता अपने और देश के बेहतर भविष्य के लिये भविष्य में सरकार बनाने वाले दलो की नीतियों और घोषणाओं पर इतमिनान से विचार कर अपना बहुमूल्य वोट देने का मन बना पाते,न कि हालिया माहौल से प्रभावित हो अपना वोट न जाते हुये भी किसी ऐसे दलो को दे पाते,जिनकी न तो देश और न ही देश के सवा अरब लेागों के बीच 80 करोड़ के लगभग लेागों केे कल्याण और सुखत जीवन के लिये कोई मुद्दें है और न ही नीतियाँ है। बस केवल और केवल जिन दलो का लक्ष्य सत्ता प्राप्ति या फिर सत्ता में आने के बाद अपने दलो का विस्तार भर है।
देखा जाये तो सवां अरब वाले देश को आज स त जरुरत है,जैसा कि देश के एक राजनैतिक दल जिसका नारा है,सबको रोटी,सबको काम,शिक्षा सुरक्षा और स मान। निश्चित ही वर्तमान अर्थ पूर्ण राजनीति में यह नारा उस दल का नघणन्य हो मगर आज भारत जैसे देश के लिये यह नारा संजीवनी साबित हो सकता है। मगर दुर्भाग्य हमारे लेाकतंत्र का कि ऐसे नारे देने वाले दलो की अर्थ पूर्ण राजनीति के चलते कोई औखात शेष नहीं रह जाती जहां देश की नीति निर्धारक बनने के लिये 1 रुपये से लेकर 70 लाख रुपये तक प्रति स्पर्धा करने खर्चेने पड़ सकते हो। जबकि देश में शासकीय आंकड़ों के अनुसार लगभग 80 करोड़ मतदाताओं के विरुद्ध लगभग 82 करोड़ नागरिक ऐसे हो जो फूट सिक्योरिटी कानून के दायरे में आते हो। ऐसे में 2014 में विश्व के सबसे बड़े लेाकतंत्र में भरने वाले महाकुंभ में स्वस्थ लेाकतंत्र की बातें बेईमानी हो जाती है।
देखा जाये तो सत्ता में मौजूद दल या फिर सत्ता से बाहर राजनैतिक दल जो कभी सत्ता में रह चुके हों,उन्हें तो चुनावों में अधिकतम 70 लााख रुपये तक प्रति लेाकसभा सीट खर्चेने में कोई परेशानी नहीं। जो राजनीति को सत्ता में बने रहने का माध्ययम मान चुके हो। जिसके चलते आज लेाकतंत्र पर ही सवाल नहीं उठ रहे बल्कि सत्ता के लिये लालाहित कुछ राजनैतिक दल साम्राज्यवादियों की तरह नजर आ रहे है। भले ही कुछ ऐसे राजनैतिक दल जो लेाकतंत्र की आड़ में व्यक्ति वादी, परिवार वादी,विचार-धारा वादी,धर्म वादी,भाषा वादी,क्षेत्र वादी हों और खुलेयाम दल के अन्दर लेाकतंत्र जीवित होने का दम भरते हों। मगर अघोषित तौर पर ऐसे दलों की नीति सिर्फ और सिर्फ विस्तार वादी ही नहीं सत्ता में कैसे रहे उसके लिये हर एक कदम उठाने वाली है।
आज विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में मुद्दा विहीन च ुनाव अगर देश वासियो के सर पर है,ऐसे में महान भारत के हर नागरिक का दायित्व है कि वह पूर्ण रुप से जागरुक रहे हर 5 वर्ष में भरने वाले जनतंत्र के महाकुंभ में केवल और केवल उसी दल को अपना आर्शीवाद दे जिसके देश और देश वासियों के जनकल्याण से जुड़े उसके पास मुद्दें हो और स्वच्छ नीतियाँ जिसमें देश और देश वासियों का भविष्य उज्जवल और सुरक्षित हो।

मीडिया के लिये आचरण संहिता पर भी होगा विचार

भोपाल मार्च ८,२०१४ भारत निर्वाचन आयोग के उप निर्वाचन आयुक्त श्री विनोद जुत्शी ने आगामी लोकसभा चुनाव के दौरान आदर्श आचरण संहिता का पालन कराने में सभी राजनैतिक दलों से सहयोग का आव्हान किया है। श्री जुत्शी ने कहा कि आदर्श आचरण संहिता के मामले में जितनी जानकारी राजनैतिक दल को होगी, उतने ही उसके उल्लंघन के मामले कम होंगे। श्री जुत्शी आज मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त ६ राजनैतिक दल के पदाधिकारियों की कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री जयदीप गोविन्द, अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री व्ही.एल. कान्ता राव भी उपस्थित थे। श्री विनोद जुत्शी ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने आदर्श आचरण संहिता में राजनैतिक दल के घोषणा पत्र के संबंध में जोड़े गये नये प्रावधानों से अवगत करवाने के लिये राजनैतिक दलों से चर्चा की पहल की है। उन्होंने कहा कि राजनैतिक दलों को निर्वाचन प्रक्रिया संबंधी सभी बातों की जानकारी राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं बल्कि राज्य और निचले स्तर पर भी होना चाहिए। राजनैतिक दलों को चाहिए कि वे निर्वाचन प्रक्रिया संबंधी जानकारी को अपने कार्यकर्ता तक पहुँचाये। राजनैतिक दल के लगभग ९० प्रतिशत व्यक्तियों को यह पता ही नहीं चलता कि उन्हें यह नहीं करना था। आदर्श आचरण संहिता सहित निर्वाचन व्यय पर निगरानी और अन्य मामलों की जानकारी राजनैतिक दल के प्रत्येक व्यक्ति को होना चाहिए। आदर्श आचरण संहिता सबसे पहले प्रशासनिक मशीनरी पर लागू होती है, जिसे इसका सौ फीसदी पालन करना होता है। आचरण संहिता का पालन सभी दलों को समान रूप से करना चाहिए। प्रचार-प्रसार में शासकीय धन के दुरुपयोग से सत्ता दल को बचना चाहिए। आयोग की मंशा है कि सभी अभ्यर्थियों को प्रचार-प्रसार के लिये समान प्रकार की सुविधाएँ मिलना चाहिए। आचरण संहिता की पुस्तक को सभी दल और उसके नेता अपने साथ रखें। श्री जुत्शी ने कहा कि आदर्श आचरण संहिता के अंदर ही कानून विद्यमान है, इस बात का ध्यान सभी दलों को रखना होगा। संहिता के तहत व्यवहार और कानून संबंधी दो आयाम रखे गये हैं। श्री जुत्शी ने बताया कि मीडिया के लिये क्या आचरण संहिता होनी चाहिए, इसके लिये भी आयोग विचार कर रहा है। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर विज्ञापन के प्रमाणीकरण के संबंध में भी आयोग ने निर्देश दिये हैं। आयोग नई दिल्ली में शीघ्र प्रेक्षक और सहायक प्रेक्षक की बैठक लेगा। प्रेक्षकों का काम केवल निगरानी
रखना ही नहीं, बल्कि आयोग का प्रतिनिधि होने के नाते राजनैतिक दलों की भ्रांतियों को दूर करना भी है। श्री जुत्शी के अनुसार पेड न्यूज का एक बड़ा नेटवर्क स्थापित किया गया है। राजनैतिक दलों को पेड न्यूज के दिशा-निर्देशों की जानकारी भी होना चाहिए। उन्होंने राजनैतिक दलों को सलाह दी कि वे एक-दूसरे पर निजी टीका-टिप्पणी करने से बचें। श्री जुत्शी ने कहा कि धरना-प्रदर्शन पर कोई रोक नहीं है, बशर्ते उसे जिला निर्वाचन अधिकारी से अनुमति लेकर किया जाये। उन्होंने राजनैतिक दलों द्वारा की जाने वाली शिकायतों पर कहा कि अधिकांश का निराकरण मौके पर ही होता है। इसी तरह आदर्श आचरण संहिता के मामले में कार्यवाही बिना शिकायत के भी संज्ञान लेकर होती है। उन्होंने अपेक्षा की कि लोकसभा चुनाव में सभी दल आचरण संहिता के बेहतर पालन में सहयोग करेंगे। आयोग भी इसमें सख्ती बरतेगा। अवकाश दिवस में भी राजनैतिक दल/अभ्यर्थियों के आवेदन लेने के लिये सिंगल विण्डो व्यवस्था के उन्होंने निर्देश दिये।

बेमेतरा : मास्टर्स ट्रेनर्स प्रषिक्षण सम्पन्न

छत्तीसगढ़ बेमेतरा ०८ मार्च २०१४ जिले में लोकसभा चुनाव २०१४ के अंतर्गत मतदान दलों को प्रषिक्षण देने ४० मास्टर्स टेऊनर्स नियुक्त किये गये है। ये मास्टर्स टेऊनर्स जिले के विकासखण्ड साजा, नवागढ़, बेरला एवं बेमेतरा के मतदान दलों को प्रषिक्षण देंगे। आज कलेक्टोरेट सभा-कक्ष में मास्टर्स टेऊनर्स का प्रषिक्षण सम्पन्न हुआ। उप जिला निर्वाचन अधिकारी श्री एन.आर. साहू और जिला स्तरीय निर्वाचन कार्यों के मास्टर्स टेऊनर्स प्रोफेसर एम.डी. पटेल ने मतदान दलों द्वारा सम्पन्न करायी जाने वाली निर्वाचन प्रक्रिया के संबंध में विस्तार पूर्वक जानकारी दिये। मास्टर्स टेऊनर्स जिले के मतदान दलों को निर्वाचन प्रक्रिया के संबंध में प्रषिक्षण के दौरान उन्हें अवगत करायेंगे। प्रषिक्षण के दौरान मास्टर्स टेऊनर्स को बताया गया कि बेमेतरा जिला के तीनों विधानसभा क्षेत्र दुर्ग लोकसभा क्षेत्र में शामिल है। लोकसभा निर्वाचन में रिटर्निंग ऑफिसर दुर्ग कलेक्टर होंगे। बेमेतरा जिला के कलेक्टर सहायक रिटर्निंग ऑफिसर होंगे। नाम निर्देषन की प्रक्रिया को छोड़कर चुनाव की शेष सभी प्रक्रिया बेमेतरा जिला से ही होना है। विगत विधानसभा चुनाव के भांति ही लोकसभा चुनाव में पूर्वत व्यवस्था रहेगी। जिले के मतदान दलों को प्रषिक्षित करने का दायित्व मास्टर्स टेऊनर्स का है। जिलें में मतदान दलों का प्रथम चरण का प्रषिक्षण विकासखण्ड मुख्यालय में माह के अंतिम सप्ताह में आयोजित किये जायेंगे। इस प्रषिक्षण में पीठासीन अधिकारी और मतदान दल क्र.०१ शामिल होंगें। द्वितीय चरण का प्रषिक्षण अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह में होंगे। तृतीय चरण का प्रषिक्षण मतदान पार्टी रवाना होने के पहले सम्पन्न होगा। मास्टर्स टेऊनर्स को प्रषिक्षण के दौरान मतदान प्रक्रिया प्रारंभ होने से लेकर समाप्त होने तक के सम्पूर्ण प्रक्रिया से अवगत कराया गया। ई.व्ही.एम. सीलिंग व बैलेटिंग यूनिट एवं कन्ट्रोलिंग यूनिट के संबंध में भी बताया गया। मतदान दलों को मतदान प्रारंभ करने के पहले व बाद की प्रक्रिया के संबंध में भी बताया गया। मॉक-पोल, पीठासीन अधिकारी की डायरी, चैलेंज वोट, टेन्डर वोट, इलेक्टषन ड्यूटी सेर्टिफीकेट के संबंध में भी जानकारी दी गई। प्रषिक्षण के दौरान मास्टर्स टेऊनर्स ने भी चुनाव प्रक्रिया के संबंध में मतदान दलों को बेहतर ढंग से प्रषिक्षित करने अपने-अपने सुझाव बतायंे। प्रषिक्षण में विकासखण्ड साजा, बेरला, नवागढ़ एवं बेमेतरा के लिए नियुक्त सभी मास्टर्स टेऊनर्स सम्मिलित हुए।
नई दिल्ली के राजीव गांधी हस्तशिल्प भवन में 10 मार्च से

राजस्थानी शिल्पकारों के उत्पादों की शिल्प प्रदर्शनी

जयपुर, 8 मार्च। पिछले दिनों दिल्ली में आयोजित Óशिल्पांगन' प्रदर्शनी की अपार सफलता से प्रोत्साहित होकर राजस्थान सरकार के ग्रामीण गैर कृषि विकास अभिकरण (रूडा) द्वारा 10 से 15 मार्च तक नई दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित राजीव गांधी हस्तशिल्प भवन की शिल्प हाट में विशेष शिल्प प्रदर्शनी ÓÓशिल्प आंगनÓÓ का फिर से आयोजन किया जा रहा है। यह चौथा मौका है जब रूडा द्वारा दिल्ली में इस प्रकार का आयोजन किया जा रहा है।रूडा की अध्यक्ष एवं प्रबंधक निदेशक सुश्री नीलिमा जौहरी ने बताया कि शिल्प प्रदर्शनी का उद्घाटन 10 मार्च को सायं 6 बजे किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस प्रदर्शनी से जहां राजस्थान के शिल्पकारों को अपने उत्पादों की बिक्री के लिये एक मंच मिलेगा, वहीं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के निवासियों को राजस्थान के वास्तविक शिल्प उत्पाद उचित दरों पर सीधे कारीगरों से खरीदने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी में आम जनता के लिये प्रवेश नि:शुल्क रखा गया है।

राजनीतिक दलों के लिए राज्‍य स्‍तरीय या राष्‍ट्रीय दर्जा प्राप्‍त करने की परिस्थितियां
भारत का कोई भी २५ वर्षीय नागरिक जिसका नाम मतदाता सूची में भी शामिल हो वह बिना कोई दल बनाए चुनाव लड़ सकता है। इसी तरह, विभिन्‍न संस्‍थाएं भी चुनाव आयोग में पंजीकृत हुए बिना चुनाव में भाग ले सकती हैं लेकिन ऐसे में उन्हें राजनीतिक दल का दर्जा प्राप्‍त नहीं होगा और न ही जनप्रतिनिधित्‍व अधिनियम (आरपीए), १९५१के प्रावधानों के तहत मिलने वाले लाभ इन संस्‍थाओं को मिल पाएंगे।

किसी भी पंजीकृत राजनीतिक दल को कई प्रकार के लाभ प्राप्‍त होते हैं। आरपीए, राजनीतिक दलों को किसी सरकारी कंपनी के अलावा किसी भी व्‍यक्ति या अन्‍य कम्‍पनियों से मिलने वाले स्‍वैच्छिक सहायता योगदानों को स्‍वीकार करने की अनुमति देता है। इसके अलावा, पंजीकृत दलों को चुनाव चिन्‍हों के आवंटन में भी प्रमुखता दी जाती है जबकि अन्‍य उम्‍मीदवारों को निर्दलीय उम्‍मीदवार माना जाता है और ऐसे उम्‍मीदवार को चुनाव चिन्‍हों के मामले में प्रमुखता नहीं दी जाती है।

पंजीकृत राजनीतिक दलों को चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित शर्तें पूरी करने पर चुनाव चिन्‍ह (आरक्षण व आवंटन) आदेश १९६८, समय-समय पर संशोधित, के तहत कुछ समय के बाद राज्‍य स्‍तरीय या राष्‍ट्रीय दल का दर्जा भी प्रदान किया जा सकता है।

अगर किसी पंजीकृत दल को राज्‍यस्‍तरीय दल की मानयता प्राप्‍त है तो उसे जिस राज्‍य में मान्‍यता प्राप्‍त है, वहां उसे उस राज्‍य में अपने उम्‍मीदवारों को दल के लिये सुरक्षित चुनाव चिन्‍ह आवंटित करने का विशेष अधिकार प्राप्‍त होता है। यदि किसी दल को राष्‍ट्रीय दल का दर्जा हासिल है तो उसे पूरे भारत में अपने उम्‍मीदवारों को दल के लिए सुरक्षित चुनाव चिन्‍ह आवंटित करने का विशेष अधिकार प्राप्‍त होता है। मान्‍यता प्राप्‍त राष्‍ट्रीय या राज्‍य स्‍तरीय उम्‍मीदवारों को नामांकन-पत्र दाखिल करते वक्‍त सिर्फ एक ही प्रस्‍तावक की जरूरत होती है। इसके अलावा उन्‍हें मतदाता सूचियों में संशोधन के वक्‍त मतदाता सूचियों के दो सेट नि:शुल्क पाने का अधिकार भी होता है। आम चुनाव के दौरान उनके उम्‍मीदवारों को भी मतदाता सूची का एक सेट नि:शुल्क पाने का हक होता है। इसके अलावा आम चुनाव के दौरान उन्‍हें आकाशवाणी और दूरदर्शन पर प्रसारण की सुविधा भी मिलती है। ऐसे राजनीतिक दलों को आम चुनाव के दौरान अपने स्‍टार प्रचारक नामित करने की सुविधा भी प्राप्‍त हो जाती है। एक मान्‍यता प्राप्‍त राष्‍ट्रीय या राज्‍य स्‍तरीय दल अपने लिए अधिकतम ४० स्‍टार प्रचारक रख सकता है जबकि एक गैर मान्‍यता प्राप्‍त पंजीकृत दल अधिकतम २० स्‍टार-प्रचारक ही रख सकता है। इन स्‍टार प्रचारकों का यात्रा खर्च उस उम्‍मीदवार के खर्च में नहीं जोड़ा जाता जिसके पक्ष में ये स्‍टार प्रचारक, प्रचार करते हैं। 
SHARE
    Your Comment

0 comments:

Post a Comment