सिंध को लेकर ही दम लेंगें : भाई वीरेन्द्र

म.प्र.शिवपुरी- नहीं चाहिए मल और मूत्र, सिंध लाऐंगें बस एक सूत्र, हम गरीबों की यही पुकार-हक पाना हमारा अधिकार, इत्यादि नारों के साथ शुरू हुआ लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी का तीसरा धरना एवं महामहिम राष्ट्रपति द्वारा कलेक्टर सौंपे ज्ञापन और संयुक्त गठबंधन की खुली चेतावनी के साथ समाप्त हो गया।
जिसमें लोसपा, राष्ट्रीय एकता परिषद इकाई शिवपुरी व राष्ट्रीय पुर्नजागरण आन्दोलन ने संयुक्त रूप से सिंध जलावर्धन योजना की पूर्णता को लेकर तीसरा धरना दिया और भाग लिया। महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापित मांगों में  पूर्व में दिए गए दो ज्ञापनों में की गई मांगों के अलावा ओला प्रभावित किसानों को 10-10 हजार रूपये प्रति बीघा मुआवजा प्रदाय किया जाए की मांग भी पुरजोर तरीके से की गई, इसके अलावा कृषि ऋण और ब्याज को माफ तथा किसी किसान की दु:खद मृत्यु पर 10-10 लाख रूपये आर्थिक सहायता प्रदाय करने की अतिरिक्त मांग तीनों संगठनों द्वारा की गई। समूचे धरने में शिवपुरी की सबसे अहम समस्या पेयजल की सिंध जलावर्धन योजना आदिवासियों के वन भूमि पर पट्टे एवं आवासीय पट्टे, राशनकार्ड एवं दबंगों के कब्जों के मुद्दे छाए रहे। इस बीच लोसपा ने कहा है कि हम सिंध को लाकर ही दम लेंगें। इसके लिए भले ही चुनाव पश्चात हमें कितने ही धरने प्रदर्शन क्यों ना करना पड़े? वहीं एकता परिषद ने कहा कि आदिवासी भाईयों और आम गरीब के हकों के लिए हमारी संयुक्त लड़ाई जारी रहेगी। इस मौके पर लोसपा के प्रदेश महासचिव भाई वीरेन्द्र ने संबोधित करते हुए कहा कि अभी यह शुरूआत है अगर हमारी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो आन्दोलन और तेज किया जाएगा। जनहित के मुद्दों पर उन्होंने सभी उन संगठनों का आह्वान किया है जो देश से भ्रष्टाचार और जनसेवा के कार्यों में अपनी सहभागिता कर देश के आम गरीबों के हाथों में सत्ता देने संघर्ष करने संयुक्त रूप से तैयार हों। धरना प्रदर्शन में रामश्री एवं एकता परिषद के रामप्रकाश ने भी अपना संबोधन दिया। इस अवसर पर धरना प्रदर्शन के बाद महामहिम के नाम ज्ञापन सौंपकर मांगों की पूर्णता के लिए अपर कलेक्टर को ज्ञापन सांैपा गया। धरने में राष्ट्रीय पुर्नजागरण अभियान के राष्ट्रीय संयोजक हरीश तोमर, एकता परिषद के अध्यक्ष रामप्रकाश शर्मा, लोसपा के जिलाध्यक्ष संजीव पुरोहित, धर्मेन्द्र गुर्जर, प्रहलाद आदिवासी, अनेक आदिवासी, समाजसेवी मनोज गौतम व अन्य सैकड़ों आदिवासी महिला-पुरूष इस धरना प्रदर्शन में शामिल थे।

अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राष्‍ट्रपति का संदेश

नई दिल्ली।  भारत के राष्‍ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने हर वर्ष ८ मार्च को मनाए जाने वाले अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जारी अपने संदेश में कहा- अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मैं अपने देश के सभी क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं का अभिनन्‍दन करता हूं और उन्‍हें शुभ कामनाएं देता हूं।च्भारत में स्‍त्रियों ने – राजनीतिक, शैक्षिक और आध्‍यात्‍मिक सभी क्षेत्रों में महानता प्राप्‍त की है। प्राचीन भारत में उन्‍हें स्‍वतंत्रता प्राप्‍त थी और वे सार्वजनिक जीवन में बराबरी के आधार पर भाग लिया करती थी। ऋग्वेद में महिलाओं को ऊंचा स्‍थान दिया गया है। यत्रनार्यस्‍तु पूज्‍यन्‍ते, रमन्‍ते तत्र देवता यानि जहॉं भी महिलाओं का आदर होता है, देवता वहीं रहते हैं। तैत्रीय उपनिषद में मातृदेवो भव कहा गया है इसका मतलब है आपकी माता आपके लिए देवता की तरह हो। स्‍वामी विवेकानन्‍द ने ठीक ही कहा था कि जिस देश में भी नारियों को सम्‍मान दिया जाता है वह महान बनता है।

भारतीय संविधान में भी स्‍त्रियों की समानता पर जोर दिया गया है। संविधान में ही नहीं बल्‍कि भारतीय राष्‍ट्र में भी महिलाओं को बराबरी का दर्जा हासिल है। यहां राज्‍य ऐसे सक्रिय उपाय करता है जिससे लिंग आधारित भेदभाव नहीं होता। महिला सशक्‍तिकरण को ऐसा तत्‍व माना जाना चाहिए जिससे लिंग समानता की ओर हमारे प्रयास जाहिर ही न हों, बल्‍कि वे राष्‍ट्र निर्माण में उनके पूरी तरह शामिल होने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाएं हमें एक समाज के रूप में महिलाओं के प्रति नकारात्‍मक अवधारणा बदलने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। महिलाओं को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण मिलना चाहिए जहां उनकी प्रतिभा प्रस्‍फुटित हो और वे राष्‍ट्र निर्माण में पूरी तरह योगदान दे सकें। महिलाओं के इस अंतर्राष्‍ट्रीय दिवस पर हम सब महिला दिवस मनाने से हमारे समाज के हर सदस्‍य मे महिलाओं के लिए सर्वोच्‍च सम्‍मान की भावना बढ़े।  
               

कमजोर व गरीब से गरीब के हितों का याल रखें-राज्यपाल

जयपुर, 7 मार्च। राज्यपाल श्रीमती माग्र्रेट आल्वा ने कहा है कि सत्य, आजादी और न्याय के सनातन आदर्शों की ओर सहृदयता से बढ़ते हुए समाज व मीडिया को कमजोर व गरीब से गरीब के हितों का याल रखना चाहिए।राज्यपाल ने विचारों, आदर्शो और विचारधाराओं विषय पर अपने संबोधन में अन्तर्राष्ट्रीय व राष्ट्रीय घटनाक्रमों में निहित आधारभूत विचारों व नेतृत्व की समीक्षा करते हुए कहा कि विचारधाराओं के चलते मानवता को अच्छे तथा बुरे दोनों ही प्रकार के परिणाम झेलने पड़े हैं। उन्होंने आदि शंकराचार्य, गौतम बुद्व, महावीर, जीसस क्राइस्ट, हजरत मोह मद, महात्मा गांधी, कॉर्ल माक्र्स, लेनिन, हिटलर और मार्टिन लूथर का उल्लेख करते हुए कहा कि समयानान्तर शांति, अहिंसा व सत्य चिरस्थायी मूल्य बने हंै व समाज युद्व, रंगभेद, जातिवाद और महिलाओं के प्रति भेदभाव के विरूद्घ एक जुट हो रहा है। श्रीमती आल्वा शुक्रवार को राजस्थान पत्रिका समूह द्वारा आयोजित 'की-नोट-2014 कॉनक्लेव' को स बोधित कर रहीं थीं। राज्यपाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभार भ किया। समारोह में राजस्थान पत्रिका के मु य संपादक श्री गुलाब कोठारी ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि किसी भी देश की संस्कृति के निर्माण में स प्रेषण की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण है।   राज्यपाल ने उच्चतम आदर्शों के संदर्भ में मीडिया का आव्हान किया कि वे निर्भिकता पूर्वक सामूहिक तौर पर समाचारों के बाजारीकरण व पैसे के बल पर खबरें छापने की चिंताजनक प्रवृत्ति को त्याग दें। राज्यपाल ने कहा कि सूचना क्रांति व इसके चलते उठी सरकार से जबावदेही की मांग जोर पकड़ रही हैं। एक व्यक्ति अथवा छोटे से समूहों द्वारा चलाई जा रही विकिलिक्स जैसी वेबसाइटें शक्तिशाली देशों और संस्थाओं को शर्मसार कर रही हैं। राजनीतिक संवाद में गुणवत्तापरक परिवर्तन आया है। भारत में सरकार ने स्वंय ही जनता को सूचना व सुनवाई के अधिकार देने की पहल की है। इन सशक्त साधनों के जरिये ऐसी जानकारियां, जो अब तक प्रतिबन्धित थी, वे सार्वजनिक हो रही हैं, जिससे समाज में अनेकों नये विचार व विचारधाराएं जन्म ले रही हैं समारोह में राजस्थान पत्रिका के डिप्टी एडिटर श्री सुकुमार वर्मा ने आभार ज्ञापित किया। इसमें शिक्षाविद् और वरिष्ठ पत्रकारों ने भाग लिया।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर राज्यपाल की शुभकामनाएं

रायपुर ०७ मार्च २०१४ राज्यपाल श्री शेखर दत्त ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं के शैक्षणिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण का आव्हान करते हुए प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई देते हुए अपनी शुभेच्छा प्रकट की है। राज्यपाल श्री दत्त ने कहा कि आज महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी योग्यता और क्षमता से सफलता की नवीन ऊंचाईयों को स्पर्श किया है। आर्थिक उन्नयन, घर-परिवार को अधिक शिक्षित तथा संस्कारवान बनाकर विकास करने की दृष्टि से महिलाओं का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
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