सत्ता के महाकुंभ से,आम गरीब हुआ बाहर

व्ही.एस.भुल्ले। जिस तरह की निर्वाचन पर परा हमारे देश में निर्धारित है, उसमें निश्चित ही काफी सुधार विगत वर्षो में हुआ है जिसका परिणाम क...

व्ही.एस.भुल्ले। जिस तरह की निर्वाचन पर परा हमारे देश में निर्धारित है, उसमें निश्चित ही काफी सुधार विगत वर्षो में हुआ है जिसका परिणाम कि विश्व के सबसे बड़े लेाकतंात्रिक देश में अब मतदाताओं की सं या 82 करोड़ के आसपास है। यह हमारे लेाकतंत्र के लिये खुशी का विषय होना चाहिए।
जैसा कि सूत्र बताते है,कि 2014 लेाकसभा चुनाव में अगर 45 करोड़ मतदाता अपना मत डाल पाते है,तो यह हमारे लेाकतंत्र के लिये विश्व में एक इतिहास होगा। मगर जिस तरह से चुनावी पर परायें और खर्चे चुनाव लडऩे के लिये देश के आम गरीब को सत्ता तक पहुंचने में वादा बनते जा रहे है। 

उसे देखकर लगता है,कि अब भारत का आम गरीब जिसकी सं या लगभग 80 करोड़ के पार है,ऐसे में पहले से निर्धारित चुनाव खर्च की सीमा 40 लाख रुपये से बढ़कर लगभग 70 लाख रुपये हो जाना भारत के आम गरीब की सीधे तौर पर सत्ता में भागीदारी को नकार ही नहीं अस्वीकार भी करता है। क्योकि अब अगर कोई चुनाव लडऩा या अपने प्रतिद्वन्दी से चुनाव जीतना चाहता है,तो उसे भी प्रतिस्पर्धा में बने रहने लगभग 1 रुपये से लेकर 70 लाख तक खर्चने पड़ सकते है। क्योकि अब लेाकसभा में जनसेवक, देश सेवक बनने के लिये चुनावों में खर्च की सीमा चुनाव आयोग ने 40 लाख से बढ़ाकर 70 लाख तक कर दी है।

मगर हमारे महान लेाकतंत्र में आज सबसे बड़ा यक्ष प्रश्र यहीं है, कि लगभग 82 करोड़ मतदाता वाले महान लेाकतंत्र में 80 करोड़ से अधिक लोग सस्ते राशन तेल और शुद्ध पेयजल के लिये मोहताज है,जिसे हमारे सरकारी आंकड़े सत्यापित करते है। जो सफर के लिये सुपर फास्ट ट्रेनों में मौजूद चन्द सामान्य डिब्बों में गाजर मूली तरह भर यात्रा कर सीट पर बैठने तक को मोहताज रहते है ऐसे में क्या भारत का आम गरीब सत्ता में सीधी भागीदारी के लिये लेाकसभा चुनाव 2014 में होने वाले विश्व के सबसे बड़े लेाकतंत्र के महाकुंभ में अपनी भागीदारी कर पायेगा क्या वह भी सत्ता में भागीदारी रखने की भावना को मूर्त रुप देने जनसेवा और देश भक्ति के लिये लाखों रुपये की भारी भरकम राशि जिसकी सीमा 70 लाख तक है खर्च पायेगा।

मगर फिलहॉल तो यहीं सत्य है हमारे महान लेाकतंत्र का। जिसे स्वीकारने में हमें कोई कष्ट नहीं होना चाहिए।
रहा सवाल हमारे राजनैतिक दलो या यो कहें अघोषित रुप से साम्राज्यवादी दलो का, जो लेाकतंत्र के नाम कोई बैचारिक तौर पर अपना साम्राज्य फैलाना चाहता है,तो कोई परिवारिेक,व्यक्तिगत या फिर चन्द व्यक्ति विशेषों से जुड़ा कोई विशेष गुठ अपना साम्राज्य फैलाना चाहते है, ये अलग बात है कि इन दलो के विधानो की किताबों में भले ही लेाकतंत्र जिन्दा हो मगर व्यवहारिक तौर पर तो देश के कुद राजनैतिक दलो से लेाकतंत्र अस्त नजर आता है।

हालात ये है कि हमारे लेाकतंत्र में मौजूद जो दल एक मर्तवा भी सत्ता का रसपान कर चुका है या सत्ता में है वह हर कीमत पर सत्ता चाहता है और सालो साल सत्ता में ही बना रहे। इसके लिये वह 80 करोड़ से अधिक सस्ते खादन्न्य के लियेे मोहताज लेागों के बीच पानी की तरह पैसा वहां उससे वोट हथियाना चाहता है। एक तो देश के 80 करोड़ लेागों की समझ गरीबी ने छीन ली। शेष साम्राज्यवादी दलो के तूफानी,प्रचार और झूठे वादो से भ्रमित हो ली। ऐसे में आम,गरीब कैसे तो लेाकतंत्र तथा कैसे स्वयं को बचा पायेगा सोचनीय विषय है।

अगर यो कहें कि आधे से अधिक आबादी तो सत्ता के खेल से ही बैसे भी बाहर है, तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी।

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने एनटीपीसी की आधारशिला रखी , बुंदेलखंड के २६४० मेगावाट सुपर थर्मल पावर परियोजना


एनटीपीसी की आधारशिला बुंदेलखंड के २६४० मेगावाट सुपर थर्मल पावर परियोजना श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया , क्चड्डह्म्द्गह्लद्धद्ब पर राज्य के पावर (आई / सी) मंत्रालय के ४ इकाइयों की मध्यप्रदेश इसमें से छतरपुर जिला द्वारा रखी गई थी ६६० मेगावाट प्रत्येक और पर्यावरण अनुकूल सुपर क्रिटिकल तकनीक के साथ , परियोजना क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान करने की उम्मीद है .अवसरों पर श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया क्चड्डह्म्द्गह्लद्धद्ब बिजली परियोजना राज्य सह सह अच्छी तरह से पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है कि कहा . बिजली परियोजना ' राज्य की सबसे प्रोस्पेरो बुंदेलखंड क्षेत्र के एक चिह्नित करने के लिए मदद करेंगे , उन्होंने कहा. उन्होंने कहा कि विद्युत मंत्रालय सभी सह बिजली दर को सत्ता तक पहुंचने के लिए अपने विकास के लिए देश के प्रधानमंत्री की जरूरत है एपीडीआरपी , ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यक्रम है पीछा कर रहा है कि गयी . उन्होंने कहा, ' एनटीपीसी की सराहना ; के प्रयासों से देश में बिजली परियोजनाओं की स्थापना और में प्रगति के पहियों को जोड़ने में दूरदराज के स्थानों . मध्य प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं , विद्युत मंत्रालय और एनटीपीसी से बुंदेलखंड क्षेत्र और वरिष्ठ अधिकारियों मौकों पर उसके साथ मौजूद थे अवसरों श्री अधीर रंजन चौधरी , माननीय ' पर सभा को संबोधित ; गेहूं मंत्रालय मैं मध्य प्रदेश में इस ऐतिहासिक अवसरों साक्षी होने के लिए भाग्यशाली रहा हूँ कहा . उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए लाने के लिए और हमारे देश में बिजली की कमी को कम करने में मदद करेंगे अपने विकास और समृद्धि 'परियोजना के लिए इस तरह की परियोजनाओं के लिए जरूरत है कि गयी .मध्य प्रदेश की राज्य ऊर्जा मंत्रालय , श्री राजेन्द्र शुक्ल ने सरकार समर्थक सक्रिय राज्य सत्ता के भविष्य की आवश्यकताओं के साथ कतार में सभी ऊर्जा संबंधी परियोजनाओं को ट्रैक कर रहा है कि कहा . उन्होंने कहा कि यह एनटीपीसी मध्य प्रदेश के विकास में योगदान की तरह पेशेवर कंपनी है करने के लिए गर्व की बात है कि कहा .अवसरों पर बोलते हुए , सचिव पावर , श्री क्क्यस्द्बठ्ठद्धड्ड बुंदेलखंड परियोजना आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में एनटीपीसी की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक बन जाएगा ने कहा . ' एनटीपीसी की सराहना करते हुए ; के प्रयासों वह कंपनी ने अपने पर्यावरण के अनुकूल पहल के लिए जाना जाता है और सीएसआर कहां कभी यह परियोजनाओं को सेट और बुंदेलखंड में कूदता कर जारी करेगा रहा है. अपने संबोधन में डा. अरूप रॉय चौधरी , सीएमडी में एनटीपीसी पावर स्टेशन की स्थापना करके बुंदेलखंड क्षेत्र की प्रगति की दिशा में योगदान करने का अवसर मिला है विशेषाधिकार प्राप्त है. परियोजना से उत्पादित बिजली ' का साठ प्रतिशत मध्य प्रदेश राज्य को सप्लाई किया जाएगा . परियोजना की अनुमानित लागत लगभग रु १८,००० करोड़ रुपए है और कोयले की खान के विकास से जुड़े १३ वीं योजना में चालू होने की परिकल्पना की गई है .एनटीपीसी वर्तमान में इसके विभिन्न सबस्टेशन से मध्य प्रदेश ह्म्द्गह्नह्वद्बह्म्द्गद्वद्गठ्ठह्लशद्घ आवंटित कुल बिजली का लगभग २४ त्न से मिलता है और देश में इसकी सबसे बड़ी पावर स्टेशन सिंगरौली जिले में स्थित ४.२६० मेगावाट स्थापित क्षमता की विंध्याचल सुपर थर्मल पावर स्टेशन है .बुंदेलखंड में नींव का पत्थर के बिछाने के साथ , एनटीपीसी राजगढ़ में ५० मेगावाट की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना , गाडरवारा नरसिंहपुर जिले में १६०० मेगावाट सुपर थर्मल पावर परियोजना भी शामिल है जो मध्य प्रदेश में निर्माणाधीन क्षमता की ४८०० मेगावाट से अधिक है . , ५०० मेगावाट फाउंडेशन आज रखी है , जिसके लिए क्चड्डह्म्द्गह्लद्धद्ब में विंध्याचल और २६४० मेगावाट पर निर्माण के तहत भी है .एनटीपीसी होने के नाते देश की सबसे बड़ी बिजली उपयोगिता देश की बिजली जरूरतों को पूरा करने और देश के आर्थिक और सामाजिक विकास में योगदान करने में प्रमुख भूमिका निभा रहा है . एनटीपीसी वर्ष २०१३ के लिए रैंकिंग समग्र क्कद्यड्डह्लह्लह्य टॉप २५० ग्लोबल एनर्जी कंपनी में नंबर १ स्वतंत्र बिजली उत्पादक स्थान दिया गया है . एनटीपीसी '; प्लांट लोड फैक्टर ( पीएलएफ ) , उपलब्धता फैक्टर , नियोजित आउटेज और जबरदस्ती आउटेज के मामले में परिचालन प्रदर्शन दुनिया में सबसे विशाल बिजली सबस्टेशन की तुलना में बेहतर रहा है.

उपनिवेशन क्षेत्र में बकाया राशि के ब्याज में छूट की अवधि बढ़ी

जयपुर, 4 मार्च। राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर उपनिवेशन क्षेत्र की समस्त परियोजनाओं के काश्तकारों (सभी श्रेणी के आवंटियों यथा सामान्य आवंटन, विशेष आवंटन व मोहरबंद नीलामी द्वारा आवंटन आदि) को आवंटित भूमि की कीमत के पेटे की बकाया समस्त किश्तों को 31 दिस बर 2013 तक एक मुश्त जमा कराने पर उस पर देय ब्याज की राशि की शत प्रतिशत छूट प्रदान की गई थी जिसकी अवधि 30 जून, 2014 तक बढ़ा दी गयी है।

छत्तीसगढ़ में १८ लाख किसानों को क्रेडिट कार्ड जारी

रायपुर, चार मार्च २०१४छत्तीसगढ़ के किसानों को खेती के लिए सिर्फ एक प्रतिशत ब्याज पर सरलता से ऋण उपलब्ध कराने के लिए प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों द्वारा चालू वित्तीय वर्ष २०१३-१४ में दो लाख १७ हजार ०८१ किसानों को क्रेडिट कार्ड जारी किया गया। इन्हें मिलाकर अब तक १८ लाख किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड जारी किया जा चुका है। किसान क्रेडिट कार्ड के अन्तर्गत अधिकतम पांच लाख रूपए तक व्यक्तिगत ऋण सीमा निर्धारित है। इसमें पचास प्रतिशत ऋण नगद और पचास प्रतिशत ऋण वस्तुओं-खाद, बीज, कीट नाशक औषधि, कृषि यंत्र आदि के रूप में दिया जाता है। सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि प्रदेश के सभी जिला सहकारी केन्द्रीय बैंको में कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने की योजना प्रारंभ की गई है। यह योजना वर्ष १९९९ से शुरू की गयी है। योजना के तहत समिति के नियमित सदस्यों को अल्पकालीन ऋण की साख सीमा उनकी पात्रता के अनुसार उपलब्ध करायी जाती है। अधिकतम साख सीमा पांच लाख रूपए तक है।
छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स) से प्राप्त जानकारी के अनुसार राजनांदगांव जिले में एक लाख ९७ हजार ३७६ और रायपुर जिले में एक लाख ३१ हजार ३१९ किसानों को केडिट कार्ड जारी किया है। बालोद जिले में एक लाख १२ हजार ६९०, बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में एक लाख नौ हजार ४४५, महासमुंद जिले में ९६ हजार १८४, उत्तर बस्तर (कांकेर) जिले में ९६ हजार सात, धमतरी जिले में ९३ हजार १९४ और दुर्ग जिले में ९१ हजार चौदह किसानों को क्रेडिट कार्ड जारी किया गया है। इसी तरह कबीरधाम जिले में ९८ हजार १४४, बेमेतरा जिले में ८७ हजार २६२, कोण्डागांव जिले में ७९ हजार २०५, जांजगीर-चाम्पा जिले में ७५ हजार ८०९ गरियाबंद जिले में ५९ हजार ९८९, बिलासपुर जिले में ५७ हजार १२६, सरगुजा जिले में ५६ हजार ६६४, बस्तर (जगदलपुर) जिले में ५२ हजार ७९१, कोरिया जिले में ५२ हजार ७६४, सूरजपुर जिले में ४८ हजार ६८९, रायगढ़ जिले में ४८ हजार ३६४, बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में ४४ हजार ७०७, बीजापुर जिले में २० हजार ६३८, कोरबा जिले में १९ हजार २४४, दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा) जिले में १४ हजार १४६, नारायणपुर जिले में आठ हजार ७३२, जशपुर जिले में आठ हजार २३२ और सुकमा जिले में छह हजार ३९१ किसानों को क्रेडिट कार्ड जारी किए गए। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में चालू वित्तीय वर्ष २०१३-१४ में नौ लाख ७४ हजार से अधिक किसानों को मात्र एक प्रतिशत ब्याज दर पर २ हजार ३२३ करोड़ रूपए का अल्पकालीन कृषि ऋण सहकारी समितियों के माध्यम से उपलब्ध कराया गया। मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने नए वित्तीय वर्ष २०१४-१५ से ब्याज मुक्त ऋण देने की घोषणा की है। इसके लिए सहकारी बैकों को ब्याज अनुदान के लिए बजट में ६० करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। इससे राज्य के दस लाख किसान लाभान्वित होंगे।

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तीरंदाज,328,व्ही.एस.भुल्ले,523,
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Village Times: सत्ता के महाकुंभ से,आम गरीब हुआ बाहर
सत्ता के महाकुंभ से,आम गरीब हुआ बाहर
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