हार जीत की दौड़ में, दम तोड़ते अहम सवाल

व्ही.एस.भुल्ले/ आरोपो से सनी राजनीति और हार जीत के दावो के बीच दम तोड़ते देश के अहम सवाल क्या चुनावी महाकुंभ और भारत के लेाकतंत्र का स प...

व्ही.एस.भुल्ले/ आरोपो से सनी राजनीति और हार जीत के दावो के बीच दम तोड़ते देश के अहम सवाल क्या चुनावी महाकुंभ और भारत के लेाकतंत्र का स पूर्ण सच है,नहीं तों अब जबकि चुनाव प्रक्रिया में मात्र कुछ ही दिन शेष है तब देश की मीडिया में अहम खबर यह है,कि कौन कहां से चुनाव लड़ेगा,कौन किस दल में अपना दल छोड़ शामिल हुआ है।
किसके दल में बगावत के सुर है,कौन सरकार में अहम भूमिका निभा सकता है इन सब चर्चाओं के बीच बस 2014 के चुनावों का महाकुंभ शुरु हो चुका है। जबकि देश और देश की आवाम से जुड़े अहम मुद्दे गौड़ हो चुके है। क्योकि वर्तमान परवेश ही इस देश का कुछ ऐसा हो चुका है। देश की 80 करोड़ के लगभग आबादी शासकीय आंकड़ों के अनुसार खादय सुरक्षा की मोहताज है। उसके बावजूद भी राजनैतिक दलो द्वारा देश और देश की आवाम से जुड़े मुद्दों से इतर सिर्फ और सिर्फ वोट मांगने सरकार बनाने के गणित के ईर्द गिर्द सिमट जाना। आखिर देश को क्या संदेश देता है।
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देखा जाये तो पूर्व में हुये चुनावों की भांति 2014 में होने जा रहे लोकसभा चुनाव भी ठीक उसी दिशा में जा रहे है,जैसे कि पूर्व में चुनाव होते रहे है। चुनाव के कुछ दिन पूर्व राजनैतिक दल का एक घोषण पत्र होता है उसमें भी प्रतिस्पर्धा यह होती है,कि किस राजनैतिक दल ने अपने घोषणा पत्र में क्या लिखा है। इसी के मद्देनजर प्रतिद्विंदी दल भी अपने घोषणा पत्र की घोषणा कर वोट मांगने में जुट जाते है। कोई जाति,धर्म,क्षेत्र तो कोई भाषा या सगे सं बधियों परिचितो का वोट के लिये इस्तेमाल कर वोट हथियाते है। मगर जिस तरह की पर परा स्वस्थ लेाकतंत्र में होना चाहिए उसे कोई भी दल नहीं अपनाना चाहता।

जबकि न तो यह चाहिए कि चुनाव लडऩे वाले हर राजनैतिक दल का घोषणा पत्र चुनाव से पूर्व ही लेागों के बीच आ जाना चाहिए और जमकर उन मुद्देां का प्रचार होना चाहिए जिनको लेकर दल वर्तमान भूत के मद्देनजर भविष्य को गढऩा चाहते है। जिससे देश की आवाम यह निर्णय ले सके कि किस दल की नीतियों के सहारे उनका भविष्य उज्जवल और सुरिक्षत हो सकता है।

मुद्दा विहीन इस चुनावी महाकुंभ में देखा जाये तो भले ही राजनैतिक दल अपनी जि मेदारियों से इतर चुनाव जीत सत्ता में बैठना चाहते हो। ऐसे में देश के आम नागरिक हीं नहीें बुद्धि जीवी वर्ग कलाकार,मीडिया,पत्रकार और जो भी संचार के माध्ययम हो सकते है उन्हें अपनी जबावदेही निभाते हुये ऐसे मौके पर जागरुक करना चाहिए कि आखिर किन मुद्देां को लेकर वोट मांगने या वोट दिलाने वाले लेागों से वह कौन से ऐसे सवाल करे जिससे उनका भविष्य और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

आज देश और देश का 80 करोड़ के लगभग मतदाता,मतदान के मुहाने पर है जिसे एक ऐसी सरकार चुनना है जो देश और देश की आवाम के साथ न्याय उसके कल्याण और सुरक्षा के गांरटी देती हो, खासकर जो सवाल आज भी हमारे लेाकतंत्र में अहम है और परिणाम के नाम पर निरुत्तर है,वहीं सवाल आज मतदाता को वोट मांगने या दिलाने वालो से अवश्य करना चाहिए। उनसे पूछना चाहिए कि हमारा राष्ट्र विश्व की महा शक्ति और संपन्न राष्ट्र कैसे बने,आन्तरिक और वाह सुरक्षा का पैमाना क्या होगा हमारी सिंचाई,कृषि और श्रम नीति क्या होगाी,कैसे वर्तमान दौर में हम शिक्षा नीति को स्वयं के सर्वागीण विकास हेतु निर्धारित कर पायेंगे। रोजगार,कौशल,उघोग की नीति क्या होगी,ऊर्जा उत्पादन और प्राकृतिक स पदा के दोहन की नीति क्या होगी,वाह एवं आन्तरिक व्यापार नीति कैसी होगी,देश में जनकल्याण और सेवाओं के लिये क्या नीति है,स्वास्थ,खेल,नैतिक,शिक्षा के साथ आम व्यक्ति को जागरुक करने क्या नीति है,लेाकतंत्र में निष्पक्ष एवं सत्ता में समान अवसर के लिये क्या नीति होगी,क्यों महात्मा गांधी जी के ग्राम स्वराज का सपना स्वार्थ और लूट का अड्डा बन चुका है,क्यों संस्थायें अपने मूल मार्ग से भटक लेाकतंत्र के उथल पुथल में अपनी पहचान हो रही है। अगर देश का आम नागरिक ये सवाल उन वोट मांगने वाले से इस चुनाव में कर लेता है,तो देश के लिये ही नहीं इस देश के महान लेाकतंत्र के लिये सोने में सुहागा साबित होगा।

विधायकों को देय लिपिकीय सुविधा वापस लेने निर्देश : सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किया परिपत्र
रायपुर, १९ मार्च २०१४ लोकसभा चुनाव के लिए प्रभावशील आदर्श आचरण संहिता को ध्यान में रखते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने सभी राज्य सरकारों द्वारा विधायकों को दी गई लिपिकीय सुविधा वापस लेने के निर्देश दिए हैं। आयोग के निर्देशों के अनुपालन में छत्तीसगढ़ सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा सभी जिला कलेक्टरों को इस माह की ११ तारीख को परिपत्र जारी कर संबंधित कर्मचारियों को उनके मूल विभागों में कार्यभार ग्रहण कराने के लिए कहा गया है। उल्लेखनीय है कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा इस माह की ०५ तारीख को लोकसभा निर्वाचन २०१४ की घोषणा के साथ प्रदेश में आदर्श आचरण संहिता लागू होने के कारण सांसदों को दी गई सुविधा तत्काल वापस लेने के लिए छह मार्च को निर्देश जारी किए गए थे।

सोशल मीडिया के जरिए मतदाता जागरूकता अभियान चलेगा
जयपुर, 19 मार्च। निर्वाचन विभाग द्वारा बढ़ते तकनीकी नवाचारों के बीच आज से सोशल मीडिया की विश्व प्रसिद्व साइट फेसबुक पर भी चुनाव संबंधी जानकारियां उपलब्ध करवाई जाएंगी। राज्य के मतदाता मोबाइल एप्लीकेशन (एप) के जरिए भी मतदान केंद्र आदि की जानकारी ले सकेंगे वहीं लोकसभा चुनाव के दौरान मोबाइल और टेलीफोन के माध्यम से कॉलर ट्यून द्वारा भी मतदाताओं को जागरूक बनाया जाएगा। राज्य में स्वीप कार्यक्रम के माध्यम से मतदान का महत्व जन-जन तक पहुंचाने के लिए पोस्टर्स के माध्यम से भी जागरूकता का संदेश प्रसारित किया जाएगा। मु य निर्वाचन अधिकारी श्री अशोक जैन ने बुधवार को यहां शासन सचिवालय के कॉफे्रंस हॉल में संवाददाता स मेलन में मतदाता जागरूकता अभियान के लिए फेसबुक पेज का शुभार भ करने के साथ ही मोबाईल एप सुविधा का भी लोकार्पण किया। उन्होंने कॉलर ट्यून ÓÓसमय है चुनने का...सुख सपनों के बुनने का....यह चुनाव समय है.....'' का शुभार भ किया और स्वीप कार्यक्रम के तहत ही नए डिजाइन के विभिन्न पोस्टर्स का विमोचन भी किया। श्री जैन ने बताया कि फेसबुक पेज के जरिए अब निर्वाचन विभाग देश और दुनिया में लोकतंत्र के सबसे बड़े महोत्सव लोकसभा चुनाव-2014 की प्रक्रिया, मतदाताओं का जुड़ाव और चुनाव संबंधी जानकारियां पहुंचा सकेगा। मोबाइल एप के जरिए मतदाता सुगम तरीके से अपने मतदान केंद्र, भाग सं या आदि की जानकारी प्राप्त कर सकेगा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण मतदान के लिए तकनीकी प्रयोगों के साथ ही किए गए अन्य सभी प्रबंधों के बीच करीब 1625 मतदान केंद्रों पर बूथ केप्चरिंग, मतदान को बलपूर्वक प्रभावित करने जैसी प्रवृत्तियों को रोकने के लिए वेबकास्टिंग की व्यवस्था भी की जा रही है। निर्वाचन विभाग में नई तकनीक का समावेश निश्चय ही हमारे कार्यों में बेहतरी के साथ पारदर्शिता भी लाएगा। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य में मतदाता जागरूकता अभियान के सुखद परिणाम सामने आए हैं, जिसके चलते विधानसभा चुनाव-2013 में पहली बार 75 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ। उन्होंने बताया कि पहली बार शहरी क्षेत्रों, युवाओं और महिलाओं ने भी ग्रामीण क्षेत्र जैसा उत्साह दिखा कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। उन्होंने कहा कि स्वीप की सफलता को लोकसभा चुनाव के दौरान भी फिर से दोहराए जाने के लिए निर्वाचन विभाग की पूरी टीम जुटी हुई है। शहरों से लेकर सुदूर गांव ढ़ाणियों तक स्वीप कार्यक्रम के जरिए जन-जन तक मतदान के महत्व तथा मताधिकार के बारे में जनचेतना कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इसके साथ ही जल्द ही लोकतंत्र का महोत्सव भी मनाया जाएगा जिसके तहत पूरे प्रदेश में विभिन्न प्रकार की गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।
मु य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए वातावरण निर्माण के परिणामस्वरूप भी 10 फरवरी को संपन्न मतदाता सूचियों का संक्षिप्त पुनरीक्षण, 9 मार्च को भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए चलाए गए एक दिवसीय अभियान को मिलाकर अब तक करीब 25 लाख मतदाताओं ने नाम जुड़वाने के लिए आवेदन किया है।

पिछले दो आम चुनावों में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित संसदीय क्षेत्रों में वि‍भिन्‍न पा‍र्टियों का प्रदर्शन
नई दिल्ली। २००९ के आम चुनाव में लोकसभा की कुल ५४३ सीटों में से ८४ सीटें अनुसूचित जातियो के लिए आरक्षित थीं। इनमें से उत्‍तर प्रदेश में १७ सीटें जबकि पश्चिम बंगाल में १०, आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु में ७-७ आरक्षित सीटें थीं। निम्‍नलिखित ग्राफ में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित अधिकतम संख्‍या वाले पांच राज्‍यों को दर्शाया गया है-
२००९ में सर्वाधिक अनुसूचित जाति सीटों वाले राज्‍य
२००९ के आम चुनाव में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों पर जहां तक राजनीतिक दलों के प्रदर्शन की बात है भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) ने ३० सीटें और भारतीय जनता पार्टी ने १२ सीटों पर जीत दर्ज की थी। २००४ के आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने १८ और भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस ने १४ सीटें जीती थीं। निम्‍नलिखित चार्ट में २००४ और २००९ के आम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी, सीपीएम, भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और जेडीयू के अनुसूचित जाति के सफल उम्मीदवारों की संख्‍या दशाई गई है-
*२००४ में विभिन्‍न दलों का प्रदर्शन २००९ में विभिन्‍न दलों का प्रदर्शन
*२००४ के आम चुनाव में अनुसूचित जातियों के लिए ७९ सीटें आरक्षित थीं।

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Village Times: हार जीत की दौड़ में, दम तोड़ते अहम सवाल
हार जीत की दौड़ में, दम तोड़ते अहम सवाल
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