कर्तव्य बोध की अनूठी मिशाल बना, वीर सवारकर पार्क

म.प्र. शिवपुरी। यहां विभिन्न प्रकार के वृक्ष,फूलों से लदी क्यारियों पंछियों की चेचाहत और सुबह श्याम घूमने आने वालो की हलचल व्यायाम शाला से लेकर निशुल्क शिक्षा केन्द्र स्कैटिंग मल्टी जिम, संगीत की नि:शुल्क शिक्षा और संघ की शाखा की नहीं वर्ष भर चलने वाली सामाजिक,धार्मिक गतिविधियों को देख, देश के छोटे से शहर को देख, म.प्र. के ह्दय स्थल पर मौजूद वीर सावरकर पार्क आज घूमने फिरने निहारने भर कर स्थान नहीं बल्कि इस पार्क में मौजूद कत्र्तव्य बोध की पर परा हमें स्वर्ग का एहसास कराती है।

त्याग और तपस्या की जीती जागती मिशाल पार्क के रुप में मौजूद इस पर भूभाग पर दो खास सत्यो का एहसास कराती है जो वीर सावरकर पार्क के आवा मण्डल में आत्मसात हो चुके है। प्रथम एहसास अनुशासन और कत्र्तव्य का जहां बगैर  किसी रोक-टोक के कोई भी व्यक्ति इस पार्क की फूल पत्ती नहीं तोड़ता, दूसरा एहसास माता-बहिनों को पार्क में घूमते वक्त किसी भी प्रकार की असुरक्षा का भाव नहीं रहता वह भी बगैर किसी सुरक्षा कर्मी के तैनाती के, इतना ही नहीं देश के भविष्यों के लिये ोल,स्वास्थ,शिक्षा,संगीत की नि:शुल्क शिक्षा इस पार्क में तपो भूमि होने का एहसास स्वत: ही करती है।

मगर कभी शराबियों जुहारियों मवालियो की शरण स्थति बन पार्क के नाम कचरे के ढेर में तब्दील इस पार्क को 10 वर्ष की कड़ी मेहनत कर गढऩे का कार्य शहर के बीचों बीच एक नौजवान ने किया जिसने पार्क को पार्क ही नहीं कत्र्तव्य निष्ठो की तपो भूमि बना दिया और आम व्यक्ति को ये एहसास भी करा दिया कि अगर इन्सान चाहे तो क्या नहीं कर सकता।

आज जो माहौल वर्तमान समाज और व्यवस्था के बीच मौजूद है उसमें सुरक्षा प्रहरियों के रहते भी कोई यह गारन्टी नहीं ले सकता कि कोई फूल पत्ती नहीं तोड़ी जायेगी। आज जहां सरेयाम छेड़छाड़ या बलात्कार की घटनायें देश भर में आम है।
तब वीर सावरकर पार्क के बारे में गारन्टी से कहा जा सकता है कि पार्क के अन्दर माता बहिनों की तरफ किसी बदमास की आंख उठाने की मजाल नहीं है।

प्रतियोगी अभियार्थियों पी.एस.सी. आई.ए.एस. आई.पी.एस. आई.आई.टी. मजिस्टे्रट की नि:शुल्क कक्षायें ही नहीं अंग्रेजी सहित अन्य विषय भी यह निशुल्क पढ़ाये जाते जिनका मार्ग दर्शन रिटायर्स शिक्षक और बड़े समाज सेवी मधुसूदन चौबे करते है। जिनके कई शिष्य भारतीय सेवा के अलावा विदेशो तक में अपनी शिक्षा का लोहा मन वा रहे है।

स्वास्थ हेतु नि:शुल्क स्वास्थ शिविर आधुनिक व्यायाम शाला,संगीत शिक्षा की कक्षायें एवं खेलों में बच्चों को अग्रणी रहने नि:शुल्क प्रकृति सौन्दर्य के साथ साथ वाचनालय की भी व्यवस्था की गई है।
विभिन्न प्रकार के गुलाबों की गंध और फूलों की प्रजातियों के अलावा इस पार्क में नक्षत्र वृक्षों का भी वास है जो इसकी पहचान हट कर बनाता है। अगर यो कहे कि यह पार्क हमारे देश में कत्र्तव्य बोध की मिशाल है,तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी। ऐसा नहीं कि देश अनूठी मिशाल के रुप में मौजूद इस पार्क को निहारने संभाग प्रदेश देश ही नहीं अब विदेशी शैलानी भी यहां आते है। जिसे देखकर पूर्व सेना प्रमुख वी.के. सिंह तथा जाने माने समाज सेवी अन्ना हजारे और लेाकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के प्रमुख राष्ट्रीय चिन्तक रघु ठाकुर भी निहार प्रसन्नसा कर चुके है।

देखा जाये तो भारत में म.प्र. के शिवपुरी शहर के बीचों बीच मौजूद इस पार्क में वर्ष भर में मौके दर मौके लेाग छोटी मोटी गोट ही नहीं यहां धार्मिक अवसरों पर भण्डारे तो पवित्र रमजान के दिनो रोजा अवतार जैसे पवित्र मौको पर मिलकर आयोजन किये जाते है। इतना ही नहीं,गरीब लेागों के लिये स्वास्थ शिविर तक लगाये जाते है, बस इन्हीं सब खूबियो को समेटे यह छोटा सा भूभाग हमें समुचे स्वर्ग का दर्शन कराता है।

तो आईये हम आपको मुखातिब करते है इस पार्क के शिल्पी बने उस नौजबान से जिसे छात्र राजनीति से लेकर एक अच्छे खिलाड़ी रहे और अब नेता जी के नाम से जिन्हें लेाग पुकारते है।
-छत्रपाल सिंह गुर्जर जी आप तो नेता है फिर आपको ऐसी क्या पड़ी,जो आपने अपने जीवन के महत्वपूर्ण 10 वर्ष इस पार्क को सवारने में खपा दिये। आखिर यह प्रेरणा आपको कहां से मिली?

-वीरेन्द्र जी प्रेरणा तो मुझे मेरे छात्र जीवन में ही मिल चुकी थी जब मैं शिवपुरी महाविद्यालय का अध्यक्ष एवं जीवाजी विश्व विद्यालय का उपाध्यक्ष निर्वाचित हुआ सच कहंू तो वहीं एक ऐसा समय था,जब मैंने यह सपना देखा कि जीवन तो कई लेाग जीते है,मगर मजा तब आता है,जब आपके जीवन में आपका कर्म और धर्म साथी बन जाये। मैंने वहीं किया जो मुझे मेरी आत्मा ने कहाँ।

-किन आशाओं और बाधाओं के साथ आपकी भावनाओं का कारवा यहां तक पहुंचा है?
-जीवन में आशाओं का रहना जीवन को निश्चित रुप से कोई न कोई दिशा अवश्य देती है,रहा सवाल वाधाओं का तो वह तो,जन्म से ही शुरु हो जाती है और जीवन पर्यन्त वह हर व्यक्ति के जीवन में चोली दामन की तरह साथ बनी रहती है। मैंने सिर्फ एक सच्चे नागरिक की तरह अपना जीवन जीने का प्रयास किया है और मेरी यह यात्रा अनवरत जारी रहेगी।
-आज आपकी मेहनत का पौधा बट वृक्ष के रुप में आपके सामने है,कैसा महसूस करते है आप,-कैसा लगता है,आपको अब इस पार्क को देखकर और इसकी प्रसंशा सुनकर?
-देखिये मैं इन्सान हूं,सो मेरे कर्म पर मेरी प्रतिक्रिया स्वाभाविक कि मुझे खुश होना चाहिए मगर दूसरे क्षण में यह भी सोचता हूं,कि यह तों इस शहर का नागरिक होने के नाते मेरा कत्र्तव्य है।

-आपकी तरह इस शहर में निश्चित रुप से सेकड़ों युवा और छात्र होगें,उन्हें आप क्या संदेश देना चाहेगें?
-वीरेन्द्र जी मेरा ही नहीं,देश के और इस शहर के हर नागरिक का कत्र्तव्य बनता है,कि वह पूरी निष्ठा ईमानदारी से सद कर्म करें और फल देने का काम ऊपर वाले पर छोड़ दें,तो यह काम तो ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। मैं तो बस इतना ही कहूंगा,कि हर छात्र,युवा को अपनी दिशा तय कर एक ऐसा जीवन जीना चाहिए जो स्वयं के साथ औरों को भी प्रेरणा दें।

लोकसभा निर्वाचन-२०१४ : सोशल मीडिया पर भी लागू होगी आदर्श आचरण संहिता
रायपुर, १४ मार्च २०१४ आगामी लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव प्रचार के लिए प्रयुक्त सोशल मीडिया पर भी आदर्श आचरण संहिता लागू होगी। चुनाव प्रचार से संबंधित कानूनी प्रावधान सोशल मीडिया पर भी उसी तरह लागू होंगे, जैसे किसी अन्य मीडिया के उपयोग पर लागू होते हैं। भारत निर्वाचन आयोग ने लोकसभा चुनाव के दौरान सोशल मीडिया के उपयोग के संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार अभ्यर्थियों को नाम निर्देशन दाखिल करते समय अपने ई-मेल आई-डी और सोशल मीडिया अकाउंट की भी जानकारी निर्वाचन आयोग को देनी होगी और सोशल मीडिया पर विज्ञापनों का व्यय अभ्यर्थी अथवा राजनीतिक दल के प्रचार व्यय में शामिल किया जाएगा।
भारत निर्वाचन आयोग ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल के संदर्भ में सभी राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों और सभी राष्ट्रीय तथा राज्यीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों के लिए जारी परिपत्र में कहा है कि निर्वाचन प्रचार के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल का विनियमन किया जाना जरूरी है। आयोग ने कहा है कि निर्वाचन में पारदर्शिता और समान अवसर प्रदान किए जाने की अनिवार्यता सोशल मीडिया पर लागू होती है। आयोग ने सोशल मीडिया को मोटे तौर पर पांच श्रेणियों में बांटा है, जिनमें सहयोग परक (जैसे विकीपीडिया), ब्लॉग एवं माइक्रोब्लॉग (जैसे ट्विटर), विषय वस्तु समुदाय (जैसे यू-ट्यूब), सोशल नेटवर्किंग साइट (जैसे फेसबुक) और वर्चुअल गेम वर्ल्ड (जैसे वाट्सएप्प)। प्रचार के सभी व्ययों में सोशल मीडिया के विज्ञापनों के व्यय भी शामिल होंगे। इसमें विज्ञापनों के लिए इन्टरनेट कम्पनियों और वेबसाइटों को किए गए भुगतान के साथ-साथ विषय वस्तु के रचनात्मक विकास (उत्पादन एवं डिजाइनिंग) पर होने वाले प्रचालनात्मक व्यय, अभ्यर्थियों और राजनीतिक दलों द्वारा अपने सोशल मीडिया अकाउंट और वेबसाइटों को बनाए रखने के लिए नियोजित कामगारों की टीम को दिए गए वेतन और मजदूरी पर प्रचालनात्मक व्यय आदि शामिल होंगे। आयोग ने परिपत्र में स्पष्ट किया है कि आदर्श आचार संहिता के सभी उपबंध और आयोग द्वारा समय-समय पर जारी अनुदेश अभ्यर्थियों और राजनीतिक दलों द्वारा सोशल मीडिया वेबसाइट सहित इन्टरनेट पर डाली जाने वाली विषय वस्तु पर भी लागू होंगे।

होली पर शहर में कानून एवं सुरक्षा व्यवस्था के विशेष प्रबंध
जयपुर, 14 मार्च। पुलिस कमिश्नरेट द्वारा होली एवं धूलण्डी पर शहर में कानून एवं सुरक्षा व्यवस्था के चाक चौबन्ध  प्रबंध किए गए हैं।पुलिस कमिश्नर श्री जंगा श्रीनिवास राव ने कहा है कि होली रंगो का त्योंहार है, सभी इसे उत्साह एवं उमंग के साथ मनाए परन्तु इस दौरान कोई ऐसा कृत्य नहीं करें जिससे दूसरों को तकलीफ हो। उन्होंने कहा कि होली पर शराब पीकर हुड़दंग करने, बगैर मर्जी के किसी पर रंग डालने, पर्व के नाम पर लोगों को तंग करने आदि की घटनाओं पर पुलिस की विशेष नजर रहेगी। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को भी निर्देश दिए हैं कि होली पर असामाजिक तत्वों पर कड़ी नजर रखी जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि होली के त्योंहार में किसी तरह का कोई खलल नहीं हो।
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