फिर छले जायेगें मतदाता,फिर पछतायेेंगे भाई लेाग

व्ही.एस.भुल्ले/ आजादी से लेकर 80 के दशक तक भले ही भारतीय लेाकतंत्र में विचार धाराओं का कड़ा प्रभाव रहा हो,तत समय मौजूद राजनैतिक दलों में मगर 90 के दशक आते-आते दलो और विचारों की परिभाषा ही बदल गयी। 100 के दशक में तो मानो भारतीय राजनीति की फिजा ही बदल गयी, राजनैतिक दलो का शरीर भले ही विचारों की चादरों से ढक गया हो मगर उसमें ढके लेाकतंत्र ने अवश्य शरीर छोड़ दिया।
हालाकि ये वो तथ्य नहीं,जिनकी तथ्यातमक रुप से पुष्ठी नहीं की जा सकती,इन्हें तों सिर्फ महसूस किया जा सकता है।
क्योकि भारतीय राजनीति में जो गठबंधन की राजनीति का मुद्दों और बैचारिक आधार पर जो प्रार्दुभाव हुआ है,उसने लेाकतंात्रिक पर परा के नाम अघोषित रुप से साम्राज्यवाद को जन्म दे दिया है। जिसके फलस्वरुप जिस लेाकतंत्र की स्थापना देश में जनता के लिये,जनता द्वारा चुनी गई,सरकार से उसी जनता के जन कल्याण की भावना अब मित्या नजर आने लगी है। देखा जाये तो हमारे महान लेाकतंत्र का स्वरुप इन 20 वर्षो में इस स्थिति में आ पहुंचा है जहां न तो राजनैतिक दलो के बीच लेाकतंत्र बचा है और न ही निर्वाचन पैमाने में देश के किसी गरीब को सत्ता में सह भागिता बनाने का मौका बचा है।

कारण साफ है,चुनाव प्रक्रिया शुरु हो चुकी है,अपने देश को,अपने ही लेागों द्वारा सरेयाम लूट के बाद देश की बहुत बड़ी आबादी को मंहगाई की आग में झोंक समस्याओं के बीच जिन्दा छोड़ दिया है। मगर चुनाव प्रक्रिया शुरु होने के बावजूद सत्ता हासिल करने साम्राज्यवादी दलो की जमात धन,बल,बाहुबल का परचम लहरा लोगों की भावनायें रोधने निकल चुकी है। जहां धर्म,जाति,क्षेत्र,भाषा आदि शस्त्रों का लेाकतंत्र के महा युद्ध में जमकर उपयोग होने वाला है।

उल्लेखनीय विषय यह है,कि जहां सत्ता प्राप्ति के लिये वोट झटकने मुंह में मिश्री रख हाथ जोड़ बड़े-बड़े उस्ताद बड़ी-बड़ी उस्तादियों के बाद हमें भुलक्कड़ समझ हमारे गली मोहल्ले गाँवों निकल पड़े है,जिन्हें न तो आजादी से लेकर आज तक 65 वर्षो में इन्होंने हमारे लिये क्या किया और भविष्य में हमारे बेहतर भविष्य के लिये इनके पास क्या योजना है बगैर खाका लिये वोट मांगते इन जनप्रतिनिधियों से कौन पूछे कि भईया बताओं आज से 30 वर्ष पूर्व हमारे घरो के नलो में शुद्ध पानी आता था,पक्की सड़क तो दूर,कच्ची पगडंडियाँ ही बेहतर थी,क्यों सड़कों केे नाम पर गड्डों के नाम पर हिचकोले ले रही है,क्यों माता-बहिनों सरेयाम बेइज्जत हो रही है,कहां है,हमारी सुरक्षा जो निर्देशों की हत्यायें हो रही है। क्या कुसूर है,देश के युवाओं का,जिन्हें नौकरिया तो दूर खुद का व्यवसाय कर जिंदगी जीने की उ मीद नहीं दिख रही है,क्यों गरीब का बच्चा लेाकसभा विधानसभा में बैठ गरीबों को बनने वाले कानूनों में अपनी सह-भागिता नही कर पा रहा है। 

कहां गया भारत का वह चरित्र जिसे देख समुचा विश्व हमसे ईष्र्या रखता था। क्यों आज तक हम अंग्रेजों की गुलाम बनाने वाली शिक्षा नीति और अत्याचार कर देश को लूटने वाले नौकरशाही,कानूनों में बदलाव,नही कर पाये। क्यों देश की आधे से अधिक आबादी सस्ते राशन तेल की मोहताज है, जिस देश में दो व्यक्तियों को जिन्दा रहने कम से कम 10 हजार रुपये की जरुरत हो वहां 1500 रु महीने में जीने पर गरीब की तखती लगाई जाती है। जिस देश की व्यवस्था का भृत्य 15 से 20 हजार रुपये प्रतिमाह बाबू 15 से 30 हजार रुपया और अधिकारी 50 हजार से 1 लाख,विधायक, मंत्री 40 हजार से अधिक पगार प्रतिमाह पाते हों और जिन विश्व विद्यालयों में भाई लेाग 1 घन्टे भी नहीं पढ़ाते वह भी हमारी लेाकतांत्रिक व्यवस्था में साम्राज्यवादी दलो के रहते,1 लाख रुपया प्रतिमाह पगार बनाते हो,ऐसे में आम मतदाता का ठगा जाना सुनिश्चित है। क्योंकि हम भुलक्कड़ जो है। कहीं जाति,धर्म के नाम पर,तो कहीं भाषा,क्षेत्र,तो कहीं अड़ोसी-पड़ोसी,तो कहीं सगे स बंधी,तो कहीं भावनाओं के नाम पर ठगे जायेगें। जरुरत पड़ी,तो जैसी चर्चा रहती है,आम चुनावों में पहुये,पैसे की अगर निर्वाचन आयोग की नजर न रही तो वह भी अपना असर इस चुनाव के महाकुं भ में अवश्य बतायेगी क्योकि हम तो आज भी सवाल करने में सक्षम कहां हमें तो सुनने और चुप रहने की आदत जो पड़ गयी है। यहीं यक्ष प्रश्र वर्ष 2014 की लेाकसभा चुनावों में है? क्या हम वोट देने से पहले वोट कबाड़ुओं से यह सवाल कर पायेगें या पूर्व वत मतदान के नाम यूं ही हम लेाग ठग लिये जायेगें।

सी.ई.ओ. ने दिये अमानक कार्यो को निरस्त करने के निर्देश

म.प्र. शिवपुरी। विगत दिनों शिवपुरी जिला पंचायत सी.ईओ. मधुकर अग्नेय ने जनपत पंचायत पिछोर ,खनियाधाना की ग्राम पंचायतों में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यो का अवलोकन किया। जिसमें उन्होंने खनियाधाना,जनपत पंचायत के गाँव काली पहाड़ी में हुये निर्माण कार्यो का अवलोकन किया। जहां उन्होंने राज्य शिक्षा केन्द्र के मद से निर्माणाधीन,शाला भवन एवं पंच परमेश्वर योजना के तहत निर्मित सीसी रोड़ को अमानक स्तर का पाया। दोनों ही कार्यो की गुणवक्ता घटिया पाये जाने पर साथ में मौजूद आर.ई.एस. के कार्य पालन यंत्री एवं जनपत पंचायत के सी.ई.ओ. को उक्त कार्यो को तत्काल निरस्त कर बसूली की कार्यवाही और एफ.आई.आर कराने के निर्देश दिये।
ज्ञात हो कि विगत कई दिनों से मिल रही शिकायतों के तार तम में जिला सी.ई.ओ. ने कई ग्राम पंचायतों का औचक निरीक्षण किया। इसी दौरान वह काली पहाड़ी गाँव जा पहुंचे जहां उन्हें अमानक स्तर के निर्माण कार्य देखने में जिस पर उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुये स बंधित लेागों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही के निर्देश दिये।

राजनैतिक दल पार्टी के कोष तथा चुनावी खर्च में पारदर्शिता रखे

भोपाल १३ मार्च२०१४ भारत निर्वाचन आयोग ने राजनैतिक दलों से निष्पक्ष चुनाव के लिए उनके पार्टी कोष एवं चुनावी खर्च में पारदर्शिता रखे जाने को कहा है। आयोग ने कहा है कि धन के उपयोग के कारण सबको बराबर के अवसर प्राप्त नहीं हो रहे हैं। निर्वाचन आयोग ने इसी बात को ध्यान में रखते हुए राजनैतिक दलों को दिशा-निर्देश जारी किये हैं। निर्वाचन आयोग ने राजनैतिक दलों को आयकर अधिनियम का हवाला भी दिया है। आयोग ने कहा है कि राजनैतिक दल अपने बैंक खाते इस तरीके से संचालित करें जिससे उनमें आयकर अधिनियम के अनुरूप आयकर की कटौती की जा सके। राजनैतिक दलों से कहा गया है कि पार्टी के कोषाध्यक्ष अपने सभी बैंक खातों के साथ राजनैतिक दल के मुख्यालय पर एकजाई खाता संधारित करेंगे। यह बैंक खाता इस तरह से संचालित हो कि वह इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंटस ऑफ इंडिया (आईसीएआई) के मापदंडों पर पूरे उतरते हों। राजनैतिक दल को वित्तीय वर्ष का वार्षिक ऑडिट प्रतिवेदन प्रतिवर्ष ३० अक्टूबर के पहले आयोग को भेजे जाने के लिए कहा गया है। आयोग ने आर-पी एक्ट की धारा ७७ का हवाला भी दिया है। इसमें कहा गया है कि यदि राजनैतिक दल अपने उम्मीदवार को कोई राशि चुनाव प्रचार के लिए देना चाहते हैं तो वह निर्धारित सीमा से अधिक न हो और उसका भुगतान क्रास चेक या बैंक ड्राफ्ट अथवा बैंक ट्रांसफर द्वारा ही किया जाए। उम्मीदवार को यह राशि नगद न दी जाए। निर्वाचन आयोग ने आयकर अधिनियम का हवाला दिया है कि कोई भी राजनैतिक दल चुनावी चन्दा २० हजार रुपये से अधिक होने पर केवल चेक या ड्राफ्ट से ही प्राप्त करेगा। राजनैतिक दलों से कहा गया है कि वे एक दिन में २० हजार से अधिक तक की राशि का नगद भुगतान प्राप्त न करें। आयोग ने कहा है कि व्यक्ति अथवा कम्पनियों द्वारा जो राशि चन्दे के रूप में राजनैतिक दल को दी जा रही है, उसकी रसीद राजनैतिक दल संबंधित को देंगे। आयोग ने इन रसीदों के रख-रखाव के निर्देश भी दिये हैं। राजनैतिक दलों से कहा गया है कि वे नगद प्राप्त होने वाली राशि को एक सप्ताह के भीतर बैंक खाते में जमा करवायें।

राजस्थान के शिल्पकारों की प्रदर्शनी "शिल्प आंगन" में दिल्लीवासियों ने की खरीद फरो त
जयपुर, 13 मार्च। ग्रामीण गैर कृषि विकास अभिकरण (रूडा) द्वारा नई दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित राजीव गांधी हस्तशिल्प भवन के शिल्प हाट में आयोजित प्रदर्शनी ÓÓशिल्प आंगनÓÓ में दिल्लीवासियों ने बड़ी सं या में उपस्थित होकर खरीद फरो त की। शिल्पांगन प्रदर्शनी में राजस्थान के विभिन्न अंचलों से पहुंचे 60 दस्तकार अपने उत्कृष्ट उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं। रूडा की अध्यक्ष एवं प्रबंधक निदेशक सुश्री नीलिमा जौहरी बताया कि भारत सरकार के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) के सहयोग से आयोजित छह दिवसीय प्रदर्शनी 15 मार्च तक प्रतिदिन 12 बजे से सायं 8 बजे तक आम जनता के लिए खुली रहेगी। इसमें प्रवेश नि:शुल्क रखा गया है। सुश्री जौहरी ने बताया कि इस प्रदर्शनी से जहां राजस्थान के शिल्प कारीगरों को अपने उत्पादों की बिक्री के लिये एक मंच मिलेगा, वहीं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के निवासियों को राजस्थान के विविधताओं से परिपूर्ण असली शिल्प उत्पाद उचित दरों पर सीधे कारीगरों से खरीदने में मदद मिलेगी। 
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