अघोषित बौद्धिक चोरी से आहत देश: जातिगत आरक्षण आम गरीब के साथ अन्याय

यह वो मात्र भूमि है,जहां चमत्कारों का अंबार पटा पड़ा है। विश्व में अगर कोई भू-भाग है जहां कल्पना से परे सोच सच बनती है,तो उस भू-भाग का नाम भारत है। मगर विगत कुछ वर्षो से अगर यो कहें कि भारत ऐसा भू-भाग है,जहाँ बुद्धिमत्ता की कीमत अब धन्यवाद भी नहीं बची। बल्कि कुछ लोग किसी भी कल्पना की सरेयाम बौद्धिक चोरी कर अपना कद बढ़ाने से नहीं चूके ,तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी।

मसला जो भी हों,जिस विधा से ाी जुड़ा हों,हर क्षेत्र में जमकर वौद्धिक चोरी का नंगा नाच चल रहा है। एक वो देश है, जहाँ विधा की पूरी कीमत चुका अदा कर लेाग उसके इस्तेमाल में विश्वास रखते है,तो कुछ देशों में लोग पैटेन्ट कराने में विश्वास रखते है,वहीं विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में इस विधा की कीमत का मूल्य धन्यवाद तक नहीं। अपने राजनैतिक लाभों के लिये देश के बौद्धिक लेागों को कष्ट पहुंचाने वाले, भूल जाते है। कि किसी भी बौद्धिक विधा की कीमत भले ही न दी जाये। मगर संस्कार धन्यवाद का तकाजा अवश्य करते है।

मगर दुर्भाग्य उन विधा विशेषज्ञों का कि,वह भावुकता बस अपने विधा लुटाने के बावजूद भी धन्यवाद को तरसते रहते है। विदित हों कि हॉल ही में एक विधवान पुरुष का जो देश के सबसे बड़े राजनैतिक दल का थिंक टेक माना जाता है। का बयान आया है,कि देश में जाति आधारित आरक्षण खत्म होना चाहिए। उसकी जगह आर्थिक आधार पर आरक्षण कि व्यवस्था होना चाहिए।

निसंदेह समय की मांग है,कि जाति आधारित आरक्षण बंद कर आरक्षण का आधार आर्थिक होना चाहिए। मगर वोट की राजनीति में पैट बना चुके लेाग स पन्न और सक्षम लेाग नहीं चाहते कि उनके हितों पर खुठारा घात हों और आम गरीब को आरक्षण का लाभ मिल सके। फिर चाहे वह किसी भी वर्ग या जाति का क्यों न हों,समय आ गया कि भारत में अब जाति गत आरक्षण की जगह आर्थिक आरक्षण ही होना चाहिए।

आजादी के 65 वर्ष गवां है,कि जिस वर्ग के लिये आरक्षण की व्यवस्था की गई थी आज भी वह वर्ग उसी सामाजिक प्रताडऩा और गरीबी का वायस बना हुआ है। अगर उंगली पर गिननें वाले कुछ लेागों को छोड़ दें और फूट सिक्योरिटी बिल के ही आंकड़े पकड़ ले,तो आजादी के 65 वर्ष बाद भी लगभग सवां अरब में से 80 लाख लेाग इस योजना के लाभ लेने के हकदार है। ये सही है,कि स पन्नता व्यक्ति को सामाजिक पीड़ा की जगह पर धन,बल पर उसे समाज में सबल तो बना देती है मगर जो सामाजिक स मान उसे प्राप्त होना चाहिए वो नहीं दिला पाती। फिर जब देश में 80 लाख लोग आर्थिक रुप से पिछड़े हों,जिन्हें खादय सुरक्षा की जरुरत हों,ऐसे में जाति गत आरक्षण के क्या मायने रह जाते है। जाति गत आरक्षण के पक्षधर बतायें कि आखिर इस जातिगत आरक्षण किस जाति का सरोकार समाज में ऊचा किया है और 65 वर्षो में आरक्षण लेने वाली जातियों में गरीबी की क्या स्थिति है।

देखा जाये तो गरीब किसी भी जाति का हों,वह तो आज भी मुफलिसी में जी रहा है। जो आरक्षण का लाभ पूर्व ले स पन्न हो चुके है सारा आरक्षण उन तक ही सिमट कर रह गया है। इस तर्क पर कई कुर्तक हो सकते है मगर कड़वा सच यहीं है। जब तक आर्थिक आधार पर हर जाति के लोगों को आरक्षण नहीं मिल जाता तब तक देश के आम गरीब के साथ इसी तरह का अन्याय होता रहेगा। भले ही अगले 65 वर्ष ही क्यों न गुजर जाये जाति जो भी हों,आम गरीब का भला होने वाला नहीं। अगर आज भी देश नहीं स हला तो वो दिन दूर नहीं जब देश की गरीब स पन्न लेागों के लिये नासूर बन जीना हराम कर देगी। जिसकी चिंगारी बढ़ती अव्यवस्था के रुप में देखी जा सकती है। तब व्यवस्था बनाने कानून होने के बावजूद भी वह बोने से नजर आयेगें। उदाहरण के रुप में आज चाहे पेयजल,बिजली,सड़क,कॉलोनी,रेल ,चिकित्सालय,बढ़ते अपराध ऐसे कई और उदाहरण हो सकते है देश में जिन्हें देश के सत्तासीन अपनी खुली आंखों से देखना नहीं चाहते।

पाँच साल का एक-एक मिनट विकास कार्यों में लगेगा

भोपाल ८ फरवरी २०१४ मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि वे राजनीति की परिभाषा बदलकर पाँच साल के कार्यकाल का एक-एक मिनट विकास कार्यों में लगाना चाहते हैं। श्री चौहान आज शाजापुर में 'आओ बनायें अपना मध्यप्रदेश' सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असली राजा मुख्यमंत्री नहीं जनता है। वे भी मुख्यमंत्री कम, जनता के सेवक अधिक हैं। श्री चौहान ने कहा कि विकास की योजनाएँ अब बंद कमरों में नहीं बल्कि आम जनता को भागीदार बनाकर बनायी जाएंगी। उन्होंने कहा कि खेती को फायदे का धंधा बनाने के लिये स्थायी रूप से खाद्य प्र-संस्करण इकाइयाँ शाजापुर जिले में स्थापित की जाएगी। उन्होंने विशेषकर संतरे की प्रोसेसिंग के लिये पोलायकलां में उद्योग इकाइयाँ स्थापित करने की बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती के साथ-साथ छोटा मोटा कार्य करने वाले लोगों की आमदनी कैसे बढ़े इसके प्रयास होंगे। गरीबों को एक रुपये किलो गेहूँ के साथ ही अब चावल भी एक रुपये किलो देना शुरू कर दिया गया है। उन्होंने रोटी, कपड़ा, मकान की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश को अग्रणी बनाना है तो हर वर्ग के विकास की योजना बनानी होगी। बेटी है तो दुनिया है, बेटी के बिना सृष्टि नहीं चल सकती है। प्रदेश सरकार ने स्थानीय संस्थाओं में महिलाओं के लिये ५० प्रतिशत आरक्षण किया है। शासकीय सेवाओं में भी महिलाएँ बड़ी संख्या में शामिल हो रही हैं। अकेले शिवराज सिंह चौहान मध्यप्रदेश नहीं बना सकते, इसके लिये सभी को मिलकर आगे आना होगा। डॉक्टर ईमानदारी से इलाज, अभिभाषक अपनी ड्यूटी और शिक्षक स्कूल में नियमित पढ़ाएँ तभी हम मध्यप्रदेश का निर्माण कर पाएंगे। उन्होंने आम-जन से मंगल अवसर पर पौधारोपण करने का आव्हान किया। प्रत्येक व्यक्ति पौधा लगाए, बारिश का पानी रोके, हर बच्चा स्कूल जाए और समाज मिलकर गाँव को नशामुक्त बनाए, तभी बात बनेगी।

मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ पत्रकार श्री के.के. सिंह के निधन पर शोक प्रकट किया

रायपुर, आठ फरवरी २०१४ मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने वरिष्ठ साहित्यकार और राजधानी रायपुर के वरिष्ठ पत्रकार श्री कृष्ण कुमार सिंह के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने स्वर्गीय श्री सिंह के परिवार के प्रति अपनी संवेदना और सहानुभूति प्रकट की है। मुख्यमंत्री ने आज यहां जारी शोक संदेश में कहा है कि हिन्दी साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में श्री सिंह के योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। ज्ञातव्य है कि छत्तीसगढ़ में साहित्य और पत्रकारिता जगत में के.क.े सिंह के नाम से लोकप्रिय श्री कृष्ण कुमार सिंह का बीती रात यहां निधन हो गया। स्वर्गीय श्री सिंह राजधानी रायपुर के हिन्दी दैनिक च्नई दुनियाज् में उप संपादक के पद पर कार्यरत थे। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है। जनसम्पर्क विभाग के प्रमुख सचिव श्री अमन कुमार सिंह और संचालक जनसम्पर्क श्री ओ.पी. चौधरी ने भी श्री के.के. सिंह के निधन पर शोक प्रकट किया है।

वसूली प्रयासों के आधार पर होंगी गोपनीय प्रतिवेदन में प्रविष्टियां

जयपुर, 8 फरवरी। सहकारी ऋणों की वसूली प्रयासों के आधार पर अब बैंक सचिवोंं के गोपनीय प्रतिवेदन में प्रविष्टियां अंकित होंगी।
सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार श्री पवन कुमार गोयल ने बताया कि प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंकों के सचिवों की 26 सितबंर को जयपुर में आयोजित बैठक में बैंक सचिवों को एक लाख रुपए तक के बकाया मामलों की स्वयं के स्तर पर मॉनीटरिंग और वसूली प्रयासों के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने बताया कि अब बैंक सचिवों के वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदनों में वसूली प्रगति के आधार पर प्रविष्टियां की जाएगी। उन्होंने बताया कि इसमें अवधिपार एवं चालू मांग वसूली की प्रगति, एक लाख या इससे अधिक की वसूली हेतु व्यक्तिगत प्रयास एवं अधिनियमान्तर्गत कार्यवाही, 5 वर्ष से अधिक पुराने प्रकरणों की वसूली प्रगति, निरीक्षण एवं निरीक्षणों में पाए गए आक्षेपों की पूर्ति एवं बैंक व्यवसाय हेतु गुणवत्तापूर्ण ऋण वितरण की प्रगति दर्शानी होगी। श्री गोयल ने बताया कि बैंक सचिवों के वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदनों में इन बिन्दुओं का समावेश करते हुए टिप्पणी करने की स्वीकृति दी गई है। उन्होंने बताया कि इससे सहकारी भूमि विकास बैंकों की वसूली मेें सकारातमक प्रभाव पडऩे के साथ ही गुणवत्तायुक्त दीर्घकालीन सहकारी ऋण वितरण भी संभव हो पाएगा।
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