सह मात के खेल में शिवपुरी का सत्यानाश

व्ही.एसभुल्ले। निक मे घोड़ों पर सवार शिवपुरी के विकास की तैयारी, विगत 25 वर्षो से राजनीति की शह मात के खेल में उलझ शिवपुरी जैसे सुन्दर शहर के सत्यानाश पर उतारु है। जिसका मूल कारण कड़ी मेहनत से स्थानीय सांसद विधायकों द्वारा लाई गयी करोड़ों रुपये की महात्वकांक्षी योजनाओं का ठीक ढंग से क्रियान्वयन न होना है।
नई खबर मुर्दा शहर में ये है कि लगभग 18 करोड़ की लागत से शिवपुरी जिला मु यालय पर 300 विस्तरों वाले नये चिकित्सालय की सौगात शायद अब नहीं मिलेगी उसकी जगह अब पुराने चिकित्सालय में ही लगभग 18 करोड़ फूंक चिकित्सालय का अब ग्रेडेसन हो छ: माला बिल्डिंग ही बनेगी।

अपुष्ट सूत्रों की माने तो म.प्र. शासन ने तय किया है। कि नवीन चिकित्सालय की राशि 17.97 करोड़ से अब नया चिकित्सालय नहीं बल्कि पुराने जिला चिकित्सालय को अपगे्रड कर उसी पुराने परिसर में छ: माला चिकित्सालय बनाया जायेगा तथा जिसके नीचे वैसमेन्ट में पार्किंग व्यवस्था की जायेगी।

शिवपुरी की राजनीति में ऐसा नहीं कि पहली मर्तवा विगत 25 वर्षो से चले आ रहे विकास पर शहमात के खेल की यह पहली नजीर हों, अब्बल शिवपुरी में इससे पूर्व भी चाहे झील संरक्षण योजना हों,या फिर जिले के तालाबों के लिये लगभग 42 करोड़ का पायलट प्रोजेक्ट,या फिर 82 करोड़ की लागत से बनने वाली सिन्ध जलावर्धन योजना,लगभग 52 करोड़ की लागत का सीवर प्रोजेक्ट,नवीन कृषि मण्डी,ट्रान्सपेार्ट नगर,125 करोड़ से निर्मित होने वाला एन.टी.पी.सी. का इन्जीनियरिंग कॉलेज हों। फिलहॉल सारी की सारी महात्वकांक्षी योजनाओं की हालत पतली है फिर भी शिवपुरी शहर इन बदइन्तजामियों के  चलते इस शहर की बर्बादी को  झेलने पर मजबूर है।

कहने को शिवपुरी के विकास पर बाते बहुत है,मगर हालिया हालात लगभग 18 करोड़ की लागत से बननें वाले नवीन चिकित्सालय पर संज्ञान लेने का है,देखा जाये तो, जिस पुराने चिकित्सालय परिसर में सरकार 18 करोड़ रुपया फूकने का मन बना चुकी है उसेे ज्ञात होना चाहिए कि आज से ठीक 50 वर्ष पूर्व निर्मित 200 विस्तरों वाले पुराने जिला चिकित्सालय में भी निर्माण के व त ऐसी ही एक बड़ी गलती हुई थी। जिसका कुरुप चेहरा लिये एक सुन्दर शहर आज भी उस कुरुप चेहरे का दंश झेल रहा है जिसें कुछ मूर्ख लेागों ने बड़ी ही बेरहमी से शहर शान और पहचान बनाने वाले पोलोग्राउन्ड अब तात्या टोपे स्टेडियम के आधे भाग में जिला चिकित्सालय बना डाला था और 500 वाई 500 फिट के लगभग खेल मैदान को 250 वाई 500 के ग्राउन्ड में तब्दील कर पुराना महल,कलेक्ट्रेट,क्लब,सांस्कृतिक भवन के बीचों बीच पोलोग्राउन्ड के स्वरुप को नष्ट कर शहर को कुरुप बना दिया।

जिस पोलोग्राउन्ड के आधे भाग में पुराना जिला चिकित्सालय है। जहां सरकार 18 करोड़ फूंक 300 विस्तरों वाले नवीन जिला चिकित्सालय निर्माण के टेन्डर पूर्व बुला नकली एफडी के चलते निरस्त कर अब नये टेन्डर बुला चुकी है।

क्या वह सरकार शिवपुरी शहर के उन नागरिकों और उन नेताओं को बतायेगी जिन्होंने अपना खून पसीना एक कर नवीन चिकित्सालय के लिये केन्द्र सरकार से 18 करोड़ की भारी भरकम राशि स्वीकृत कराई है।

क्या सरकार बतायेगी कि जिस जिला चिकित्सालय परिसर में लेागों को पैर रखने जगह नहीं,मरीजों को ग भीर स्थति में तत्काल चिकित्सालय पहुंचने सुगम रास्ता नहीं,हालात ये है कि जब 200 विस्तरों वाले पुराने चिकित्सालय में पार्किंग की जगह नहीं,मरीजों को अपने वाहन चिकित्सालय परिसर के बाहर सकड़े से मु य मार्ग पर ही रखने होते है,ऐसे में जब जिले की 18 लाख की आबादी के लिये यह जिला चिकित्सालय हो। तो क्या 300 विस्तरों वाले चिकित्सालय का निर्माण कहाँ तक उचित है। क्या सरकार बतायेगी जो उसके पास ऐसी तकनीक है,जो 250 वाई 500 के पूर्व से निर्मित भवनों या भूमि को खींच उसका आकार बढ़ा सकेगी।

क्या सरकार लगभग 30 फुट चौड़े चिकित्सालय के मु य मार्ग को खींच चौड़ा कर सुगम आवागमन का रास्ता बना 300 मरीजों के साथ आने वाले अटेन्डर को कहीं सर छिपाने जगह दिला सकेगी? 

क्या सरकार बतायेगी कि भारत सरकार की जिस राष्ट्रीय एजेन्सी के टे्रनिंग सेन्टर के सामने यह छ: माला भवन बनने जा रहा है। उसकी परिमिशन निर्माण एजेन्सी ने ले ली         है?

क्या शिवपुरी नगर पालिका के पास बनने वाले छ: माला भवन में होने वाली किसी भी घटना-दुर्घटना से बचाव के साधन है और क्या इस छ: माला भवन निर्माण की स्वीकृति नगर पालिका से निर्माण एजेन्सी द्वारा ली जा चुकी है?

क्या सरकार बतायेगी कि आगरा-मु बई राष्ट्रीय राजमार्ग क्र.3 से सटी नगर पालिका क्षेत्र के नौहरी,ठकुरपुरा में सेकड़ों वीघा भूमि किसके लिये खाली पढ़ी है?

क्या सरकार बतायेगी कि शहर में 300 विस्तरों वाले नवीन चिकित्सालय के लिये कोई शासकीय भूमि खाली नहीं जहां 18 करोड़ से नया चिकित्सालय बनाया जा सके?

क्या सरकार बतायेगी कि जिले की 18 लाख के करीब जा पहुंची आबादी के लिये लगभग 200 वाई 500 फिट ऐरिया में बने पुराने चिकित्सालय के ऊपर 18 करोड़ की लागत से छ: माला चिकित्सालय निर्माण उचित है जबकि उसकी इन्च इन्च जगह पर पुराना चिकित्सालय, ट्रामा सेन्टर,नर्स ट्रनिंग सेन्टर,ऑ.पी.डी. सुलभ शौचालय,और सूत्र की माने तो 6 करोड़ की लागत से 3 माला नवीन चिकित्सालय भवन हाल ही में निर्माणाधीन है।

क्या यह शिवपुरी जिले के नागरिकों सहित शिवपुरी शहर और जो लोग इस राशि को स्वीकृत कराकर लाये उनके साथ खुला धोखा नहीं?

कई सवाल हो सकते है शिवपुरी के विकास नाम। मगर दुर्भाग्य कि वर्षो से एक सुन्दर ऐतिहासिक शहर के सत्यानाश पर बोलने वाला कोई नहीं। वर्षो से मनमानी का दंश अब नासूर बनता जा रहा है। मगर देखने वाला कौई नहीं।

बैचारे योजना लाने वाले मेहनत कर योजना लाते है और विकास के नाम वोट देने वाले भोले भाले हर 5 वर्ष में वोट डाल ऐसी सरकार बनाते है,जिसकी अर्कमणयता और मूर्खता का लाभ उठा धन लालची इसी तरह जनता के पैसे को ठिकाने लगा शहर का सत्यानाश करने पर उतारु है। जागना होगा शहर को, देखना होगा,उन योजना लाने वालो को, बरना जो हाल 42 करोड़ के पायलट प्रोजेक्ट, करोड़ों की झील संरक्षण और 82 करोड़ की सिन्ध जलावर्धन योजना का हुआ है और जो हाल 52 करोड़ की सीवर योजना का होने वाला है।  कहीं वहीं हाल 18 करोड़ से निर्मित होने वाले 300 विस्तरों वाले नये चिकित्सालय का न हो।

मुख्यमंत्री हेल्प लाइन में आने वाले कॉल पर उच्च शिक्षा विभाग में होगी ७ दिन में कार्यवाही
 भोपाल ३ फरवरी २०१४ उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विभाग से संबंधित मुख्यमंत्री हेल्प लाइन में आने वाले कॉल पर समय-सीमा में कार्यवाही सुनिश्चित करने की पहल की गई है। इसके लिये प्रत्येक स्तर पर सात दिन की समय-सीमा निर्धारित की गई है। कॉल सेंटर पर प्राप्त कॉल्स पर प्रथमत: संबंधित महाविद्यालय के प्राचार्य द्वारा ७ दिन में कार्यवाही की जायेगी। प्रथम स्तर पर समय-सीमा में कार्यवाही नहीं होने पर द्वितीय स्तर पर शासकीय अग्रणी महाविद्यालय के प्राचार्य ७ दिन में कार्यवाही के लिये उत्तरदायी होंगे। द्वितीय स्तर पर समय-सीमा में कार्यवाही नहीं होने अथवा कॉलर के असंतुष्ट होने पर प्रकरण के अंतिम रूप से निराकरण का उत्तरदायित्व क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक का होगा। इनके लिये भी समय-सीमा ७ दिन निर्धारित की गई है। उच्च शिक्षा संचालनालय स्तर पर समन्वय की जिम्मेदारी अपर संचालक श्रीमती उर्मिला शुक्ला को सौंपी गई है। उनका फोन नम्बर ०७५५-२५५९९८० है। विभागाध्यक्ष भी हर सप्ताह इसकी समीक्षा करेंगे।

नया रायपुर में बीएसयूपी मकानों का जल्द होगा आवंटन
नया रायपुर के ४१ गाँवों के लोगों को दिया जाएगा मकान
रायपुर ३ फरवरी १४ नया रायपुर में शहरी गरीबों के लिए बनाये जाने वाले शहरी गरीबों के लिए मूलभूत सेवा (बीएसयूपी) के तहत बने मकानों का जल्द आवंटन होगा. नया रायपुर डेव्हलपमेंट अथॉरिटी  ने दस गाँवों में बने इन मकानों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. बीएसयूपी के तहत नया रायपुर के १० गाँवों में कुल ८८८ मकानों का निर्माण कराया गया है. इन मकानों के आवंटन के लिए एनआरडीए ने मापदण्ड तय किया है जिसके तहत नया रायपुर के ४१ गाँवों के लोग ही इन मकानों को लेने के पात्र होंगे. एनआरडीए के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया ने बताया कि इन ८८८ मकानों को निर्माण के लिहाज से चार समूहों में रखा गया है.इसमें वर्ग ए में २१६ मकान,वर्ग ब में ३१२ मकान, वर्ग स में १४४ और वर्ग द में २१६ मकान हैं. इन मकानों में रहने के वाले लोगों को पक्की सड़कें,बिजली,जल आपूर्ति और जल निकासी की समुचित व्यवस्था की गई है. उन्होंने बताया कि उपरवारा, खपरी, तूता, नवागाँव (खपरी), झाँझ, कयाबाँधा,चीचा,कोटराभाठा , रीको , नवाँगाँव (छतौना) गाँवों में ये मकान बनाए गए हैं. इन मकानों का निर्माण कुल २८.७८ करोड़ की लागत से किया गया है.श्री कटारिया ने बताया कि बीएसयूपी के मकानों के आवंटन के लिए प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है. ग्रामीणों से आवेदन मगांए जा रहे हैं. इन मकानों को नया रायपुर परियोजना में शामिल ४१ गांवों के आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों के लिए आरक्षित रखा गया है. साथ ही आरक्षण के सभी  प्रावधान भी किए गए हैं. इसमें उन किसानों को भी आवास उपलब्ध हो सकेगा जिन्हें अतिरिक्त पुनर्वास योजना के मापदण्डों के तहत भूखण्ड आवंटन नहीं हो सका है.
उल्लेखनीय है कि नया रायपुर में ग्राम विकास योजना के तहत सभी व्यस्क किसान परिवारों को न्यूनतम १२ सौ वर्ग फीट विकसित आवासीय भूखण्ड आवंटन किया जा रहा है. इसमें कम से कम एक एकड़ जमीन जिन किसानों ने एनआरडीए को आपसी सहमति से विक्रय किया है उन्हें इस योजना का लाभ दिया गया है. इससे कम जमीन विक्रय करने वालों को आवास उपलब्ध कराया जाना है. 

मुख्यमंत्री का पंजाब के सीएम को पत्र
सतलुज नदी में प्रदूषण रोकने का आग्रह
इंदिरा गांधी नहर के पानी की गुणवत्ता पर सरकार चिंतित
जयपुर, 3 फरवरी। मु यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे ने पंजाब के मु यमंत्री श्री प्रकाश सिंह बादल को पत्र लिखकर बताया है कि सतलुज एवं इसकी सहायक नदियों में पंजाब की औद्योगिक इकाइयों द्वारा अशोधित अपशिष्ट एवं सीवेज छोड़ा जा रहा है। यह पानी राजस्थान के लोगों के लिए बहुत ही नुकसानदायक है। उन्होंने इसके लिये जि मेदार औद्योगिक इकाइयों एवं स्थानीय निकायों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह करते हुए बताया कि पंजाब की ओर से औद्योगिक अपशिष्ट एवं सीवेज को बिना शोधन के निरन्तर रूप से सतलुज एवं इसकी सहायक नदियों में बहाये जाने के कारण इनका पानी अत्यधिक प्रदूषित हो गया है। उन्होंने बताया कि हरिके बैराज से नहरों के माध्यम से छोड़े जाने वाले प्रदूषित पानी के कारण इन्दिरा गांधी फीडर में पानी की गुणवत्ता को लेकर राजस्थान सरकार बेहद चिन्तित है क्योंकि पश्चिमी राजस्थान के 8 जिलों में इस फीडर का पानी पेयजल के रूप में उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह दूषित पानी स्वास्थ्य के लिये अत्यधिक हानिकारक है। इसके कारण इस क्षेत्र के लोग जल जनित बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। राजस्थान सरकार ने इस संबंध में बार-बार पंजाब सरकार से इस मामले में आग्रह किया है लेकिन समस्या जस-की-तस बनी हुई है। नव बर,2012 में केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पंजाब से निकलने वाली नहरों के पानी की गुणवत्ता की जांच कर अपनी रिपोर्ट में पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव दिये थे। इन सुझावों पर तुरन्त कार्यवाही करना जरूरी है।
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