शिवपुरी के विकास की सबसे बड़ी बाधा सुनियोजित भ्रष्टाचार

म.प्र. शिवपुरी। जिस शहर को आज से 100 वर्ष पूर्व अचंल के सबसे सुन्दर सुव्यवस्थित सुविधा युक्त बनाने वाली सिंधिया स्टेट के कत्र्ता धत्र्ताओं ने सपने में भी नहीं सोचा हेागा कि जिस पटारी क्षेत्र को वह ङ्क्षसधिया स्टेट की ग्रीष्म कालीन राजधानी के रुप में सर्व सुविधा युक्त बना,सुन्दर बनाने में जुटे रहे है।
उस शहर का कभी इतना बुरा हाल होगा। शासकीय नुमायेदो को आलीशान कोटियाँ सचिवालय ,पोलोंग्राउण्ड,क्लब,संस्कृति भवन,होटल,सीवज लाइन और समुचे शहर को 18 तालाबों की मदद से प्राकृतिक बातानुकूलित,पर्यावरण शहर में आवा गमन के लिये चौड़ी-चौड़ी सड़के वायपास रिंग रोड़ एवं सड़कों के दोनों ओर फलदार वृक्ष एवं तालाब के निचले भाग में फलदार बगीचे शहर से सटा नेशनल पार्क,वोटिंग क्लब इत्यादि सुविधाओं से इस शहर को संयोजा गया था। मगर दुर्भाग्य अंचल के सबसे सुन्दर शहर शिवपुरी का कि अब यह आजादी के बाद विकास के नाम सेकड़ों करोड़ फूकने के बाद भी अपनी बदकिश्मती पर विलाप कर्ता नहीं थकता। न ही सरकारों का कोई भी नुमायेदा इन यक्ष सवालो का जबाब देता। सब कुछ भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ अपने अपने अस्तित्व के लिये संघर्षरत है।

देखा जाये तो आजादी के बाद से ही इस सुन्दर शहर को न जाने किसकी नजर लगी कि भारत शासन के अधीन परिस पत्तियों का तो बिगाड़ हुआ ही साथ ही ट्रस्ट में तब्दील परिस पत्तियों का भी जमकर दोहन हुआ। शेष कार्य स्थानीय शासन के अधीन कार्य करने वाली स्वायतसासी संस्था नगर पालिका ने कर डाला। नगर पालिका क्षेत्र की परिधि जो कि 5 वाई 5 किलो मीटर में अब होती है,उसी के अधिपत्य में होती है,उसी ने अपने अधीनस्त भाग में कर डाला। देखा जाये तो नगर पालिका के अधीपत्य क्षेत्र में ही शहर की चौड़ी-चौड़ी सड़के 18 तालाब एवं पोलोग्राउण्ड,क्लब, संस्कृति भवन जो अब पुरातत्व विभाग के अधीन है। के अलावा सेकड़ो बीघा खुली जमीन एवं फलदार वृक्षों के बगीचे हाथ आये थे।

मगर सूत्रों की माने तो 1953 तक अर्थात आजादी के बाद तक सब कुछ सरकारी नक्शों में इनदराज था। मगर 1953 से लेकर 1963 के बाद और आज तक इसकी फिजा ही बदल गयी। अब न तो नगर पालिका को उसके अधिपत्य में आये 18 तालाबों का पता है,न ही इन तालाबों के निचले भाग में बनाये गये, जामफल और आम के बगीचों का पता है। रहा सवाल पोलोग्राउण्ड का तो उसके आधे भू-भाग में जिला चिकित्सालय खड़ा है। शेष नगर पालिका द्वारा कभी कुछ समाज सेवी,धार्मिक ट्रस्टो का सामाजिक प्रेयोजन के लिये दी गई,जमीनों पर आवासीय भवनों के रुप में कोंकरीट का जंगल खड़ा है। तो कुछ कोंकरीट के जंगल बनने की तैयारी में है। सूत्र बताते है,कि नगर पालिका से उसका मूल नक्शा तो लेंड रिकार्ड से शहर का 1953 के पहले का नक्शा गायब है। जिसके चलते हजारो करोड़ की शासकीय भूमि खुलेयाम बेच दी गयी। जिसका प्रमाण जुटाना अब मुश्किल हो रहा है। फिलहॉल शासकीय भूमि पर हुये गड़बड़ जाले को छोड़ दें तो भूदान की जमीनों का हाल भी कुछ ऐसा ही हुआ है। इस सबसे इतर जब भी विकास की बात हुई तो यह शहर भी अपनी बर्बादी पर आज तक मुंह दर्शक ही रहा।

ये अलग बात है,कि सिंधिया घराने के नेतृत्व आजाद भारत में इस क्षेत्र में आज तक भले ही रहा हो और उनके प्रयासों का पैमाना आजाद भारत में जान से ज्यादा रहा हो। मगर भ्रष्टाचार की जंग ने साबित कर दिया कि वह कितने ही प्रयास शिवपुरी के विकास को लेकर क्यों न कर ले,सेकड़ों करोड़ की योजनाऐं इस शहर में उपजेे भ्रष्टाचार के सागर में क्यों न उड़ेल दें,मगर भ्रष्टाचारियों को इस शहर में कोई फर्क पडऩे वाला नहीं। चाहे वह शिवपुरी में नई रेल लाइन, शहर की चौड़ी-चौड़ी सड़कों के लिये शासकीय धन तालाबों के संरक्षण के लिये धन खेल मैदान सहित पेयजल,सीवज एवं जिला चिकित्सालय का धन इसके अलावा पॉलोटेनेक्निक अब इन्जीनियरिंग कॉलेज,मेडिकल कॉलेज,प्रशिक्षण संस्था और नेशनल औद्योगिक कोडीडोर के लिये किये गये अथक प्रयासों की ही बात क्यों न हो। मगर सुनियोजित भ्रष्टाचार के चलते सिंधिया परिवार की सारी मंशायें अधूरी है।

जिन्हें पूरा करने मात्र पैसा ही नहीं,इच्छा शक्ति की भी जरुरत है जिसकी उ मीद भी आज शहर वासियों को सिंधिया परिवार से ही है। देखना होगा कि क्या शिवपुरी का मुखिया विकास में मची अलाली और सुनियोजित भ्रष्टाचार पर कितना संज्ञान ले पाता है जो शिवपुरी के विकास के लिये पूरे 19 घन्टे कार्य में जुटे रहने के बावजूद कितना इस शहर को न्याय दिला पाता है,फिलहॉल भविष्य के गर्भ में है। 
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