म.प्र. की मीडिया में, नदारद मोदी

वीरेन्द्र शर्मा/ अब जब कि लेाकसभा चुनाव सर पर है और मोदी अभियान चर्मोत्कर्स पर ऐसे में म.प्र. की मीडिया से मोदी नाम का नदारद रहना क्या भाजपा की चुनावी रणनीति का हिस्सा है या फिर भाजपा में प्रधानमंत्री पद के कलह की सुलगती आग हो सकता है भाजपा के रणनीतिकार 2014 में अपनी सरकार हर हाल में बनाने का मसूवा बना सारी वाजी अपने हाथ में रखना चाहती हो।
क्योकि इतिहास गवाह है जिस तरह से भाजपा के लेाहपुरुष आडवाणी की यात्रा की बिना पर कभी अटल जी देश के प्रधानमंत्री बने और आडवाणी बैटिंग पीएम बन गये। कहीं वहीं खेल तो शायद 2014 के चुनाव पश्चात भाजपा एक मर्तवा फिर से तो नहीं खेलना चाहती है।

कारण साफ है भारतीय राजनीति के जो हालात वर्तमान में राजनैतिक दल जिन मुद्दों को लेकर चल रहे है उनका तकाजा है कि भाजपा को दोनों ही रास्ते साफ रखने होगें जहां से गुजर वह दिल्ली के सिंहासन पर बैठ सके। शायद इसलिये भाजपा के रणनीतिकार भाजपा के लिये दोनों ही रास्ते खुले रखना चाहते है।

मगर भाजपा की इस ऊहापेाह में कहीं ऐसा न हो कि न तो राम ही मिले न ही हरिभजन की स्थति बचे।
कौन नहीं जनता की व्यवहारिक तौर से लेकर सिद्धान्त: हर भारत वासी की पहली पसंद अब मोदी है और देश की यह पहली पसन्द भी निर्णय क्षमता (डिसीजन पावर) के आधार पर है जो मोदी में कूट कूट कर भरी है ऐसे में भाजपा का दिग भ्रमित होना। 2014 में देश की सत्ता के लिये उसकी सबसे बड़ी भूल है। जिसका खुला प्रदर्शन म.प्र. में खुलेयाम चल रहा है और प्रचार अभियान से मोदी का नाम दाये बाये हो रहा है।

ज्ञात हो विधानसभा चुनाव के पूर्व भी मोदी को लेकर म.प्र. में यह कयास थे कि विशेष क्षेत्रों में भाजपा कोई नुकसान मोदी को लेकर न हो इसलिये तब भी मोदी नाम को समुचे विधानसभा चुनाव में दाये बाये रखा गया। मगर विधानसभा चुनाव हो गये और प्रचण्ड बहुमत से म.प्र. में भाजपा की सरकार भी तीसरी मर्तवा बन गयी और लेागों की शंका कुशकाये भी निर्थक साबित हुई। ऐसे में म.प्र. के प्रचार अभियान से मोदी की अनुस्थति दर्शाति है कि भाजपा के कुछ रणनीति कारो और भाजपा आलाकमान के बीच अवश्य कुछ चल रहा है जो भाजपा को स्पष्ट संकेत है कि 2014 की केन्द्रीय सत्ता में मोदी का रास्ता, मेादी के लिये उतना आसान नहीं जैसा कि आम भाजपाई मान कर चल रहा है। निश्चित ही भाजपा के अन्दर कुछ तो चल रहा है रणनीतिकारों के बीच कहीं तो गैप है जो म.प्र. के हालात मोदी को लेकर देश के अन्य प्रदेशों से इतर चल रहे है।

बेहतर साइबर और टेलीफोन अवसंरचना का निर्माण

नई दिल्ली२१-फरवरी २०१४ सरकार बेहतर साइबर एवं टेलीफोन अवसंरचना के निर्माण और नई साइबर एवं टेलीकॉम सुरक्षा प्रक्रियाओं को अपनाकर डाटा और सूचना प्रवाह को सुरक्षित करने के लिए अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए काम कर रही है। सरकार भारत में स्थित अपने सर्वर रखने वाली भारतीय कंपनियों को सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अपनी इंटरनेट सेवाएं विकसित और प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं, ताकि भारतीय नागरिकों के हितों और संचार गोपनीयता की सुरक्षा की जा सके। एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी देते हुए संचार और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री मिलिंद देवड़ा ने आज राज्य सभा में बताया कि रेडिफ और इंडिया टाइम ने भारतीय नागरिकों को ई-मेल और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सर्वर आदि स्थापित कर लिए हैं। सरकार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे विचार-विमर्श के द्वारा बेहतर अंतर्राष्ट्रीय इंटरनेट सुशासन मानदंडों के विकास को प्रोत्साहित करने के बारे में भी कार्य कर रही है।
विदेशों से भारत आने वाले यात्रियों के लिए सोना लाने/पहनने के सम्बंध में सीमा शुल्क नियम में संशोधन
विदेशों से भारत आने वाले यात्रियों के लिए सोना लाने और पहनने के सम्बंध में वर्तमान नियमों को संशोधित करने का कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है। २०१२-१३ के बजट में एक साल से अधिक विदेशों में रहने के बाद भारत लौटने वाले भारतीय यात्रियों के लिए सोना लाने/पहनने के सम्बंध में बैगेज रूल्स-१९९८ को संशोधित किया गया, जिसमें पुरुष यात्री द्वारा ५,००० रुपये तक के समेकित मूल्य तक और महिला यात्री के लिए एक लाख रुपये तक के गहनों को ड्यूटी मुक्त करने के लिए सीमा बढ़ाई गई थी। यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री श्री जे. डी. सीलम ने आज लोक सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

जनता का विश्वास हमारी सबसे बड़ी ताकत डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री
बिजली खपत में हुआ चमत्कार
चार हजार से ज्यादा वन स्वयंसेवियों की होगी भर्ती
छत्तीसगढ़ में बिजली आज भी अन्य राज्यों से सस्ती
रायपुर, २१ फरवरी २०१४ मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज यहां विधानसभा में अपने विभागों से संबंधित बजट अनुदान प्रस्तावों पर सदन में हुई दो दिवसीय चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि जनता के विश्वास से बड़ी कोई ताकत नहीं होती। हमने विगत दस वर्षो में छत्तीसगढ़ की ढाई करोड़ जनता का विश्वास जीता है। जनता का विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। प्रदेश की जनता ने हमारे कार्यों का आंकलन कर परीक्षा ली है, जिसमें हम सफल हुए हैं। आगामी पांच वर्ष भी पूरी ईमानदारी और मेहनत से प्रदेशवासियों के बेहतरी के लिए काम करेंगे और जनता से जो वायदा हमने किया है, उस पर खरे उतरेंगे। हमने अपने घोषणा पत्र का क्रियान्वयन प्रारंभ कर इसकी शुरूआत कर दी है। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार का आगामी वित्तीय वर्ष २०१४-१५ का बजट हमारे ग्यारहवें साल का बजट होगा। यह जनता के विश्वास की एक मजबूत बुनियाद पर विकास की बुलंद इमारत खड़ी करने का मजबूत आधार बनेगा। भारतीय रिजर्व बैंक सहित केन्द्र सरकार के मंत्रालयों ने हमारे कार्यों का मूल्यांकन कर कसौटी पर कसा है और छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। प्रदेश में धान उत्पादन सात लाख टन से बढ़कर ८० लाख टन से भी ज्यादा हो गया है। राज्य को राष्ट्रपति के हाथों दो बार कृषि कर्मण पुरस्कार मिला है। मनरेगा और शहरी विकास में भी राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया गया है। प्रदेश की राष्ट्रीय उपलब्धियां पक्ष-विपक्ष के साथियों सहित सभी लोगों के लिए गर्व का विषय है। छत्तीसगढ़ को एक तेज गति से विकसित होते राज्य के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना हमारा लक्ष्य है।

मु यमंत्री की पहल महर्षि दयानंद जयंती पर रिहा होंगे 150 कैदी
जयपुर, 21 फरवरी। मु यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे की पहल पर महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती (24 फरवरी) के दिन प्रदेश की जेलों में सजा भुगत रहे करीब 150 बंदियों को समय से पहले रिहा किया जाएगा और करीब 3500 बंदियों की सजा का समय कम (परिहार) होगा। इनमें गंभीर बीमारियों से ग्रसित, वृद्घ एवं सदाचार पूर्वक अपनी अधिकांश सजा भुगत चुके बंदी शामिल हैं।
बीमार और वृद्घ कैदियों को मिलेगा परिवार का साथ
मु यमंत्री के इस निर्णय से ऐसे बंदी जो कैंसर, कुष्ठ एवं अन्य गंभीर रोगों से ग्रसित हैं, उन्हें अब अपने परिवार का साथ प्राप्त हो सकेगा। इसी प्रकार निश्चित अवधि की सजा से दण्डित बंदी जो सजा का दो तिहाई भाग भुगत चुके हैं, उन्हें भी इसका लाभ मिलेगा। पहली बार अपराध में दण्डित वृद्घ पुरूष जिनकी आयु 70 वर्ष तथा महिलाएं जिनकी आयु 65 वर्ष है और सजा का एक तिहाई भाग भुगत चुके हैं। उन्हें भी समय पूर्व रिहाई से राहत मिलेगी।
कई परिवारों को मिलेगी खुशियां
श्रीमती राजे की इस पहल से ऐसे परिवारों को खुशियां मिलेंगी, जिनके परिजन आजीवन कारावास की सजा का अधिकांश हिस्सा भुगत चुके। आजीवन कारावास से दण्डित बंदी जिन्होंने 14 वर्ष की सजा विचाराधीन अवधि के साथ भुगत ली है एवं 4 वर्ष का परिहार प्राप्त कर लिया है, वे भी इस फैसले से लाभान्वित होंगे। कुछ मामलों में जिन बंदियों ने 13 वर्ष 4 माह की सजा परिहार के साथ सदाचरण पूर्वक भुगत ली है, उन्हें समय पूर्व रिहा किया जाएगा। छह माह या उससे कम अवधि की सजा से दण्डित बंदी भी रिहा होंगे।
इनकी सजा का समय हुआ कम
विभिन्न बंदियों की सजा का समय भी कम किया गया है। आजीवन एवं 10 वर्ष से अधिक की सजा से दण्डित बंदियों की सजा का समय 6 माह कम किया है। इसी प्रकार 5 से 10 वर्ष तक के कारावास से दण्डित बंदियों की सजा 4 माह एवं 2 से 5 वर्ष तक की सजा से दण्डित बंदियों की सजा में 2 माह का समय कम किया है। दो वर्ष से कम की सजा भुगत रहे बंदियों को एक माह का परिहार दिया है।
इन्हें नहीं सजा में छूट
एनडीपीएस एक्ट, आबकारी अधिनियम, पीसीपीएनडीटी एक्ट, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, आवश्यक वस्तु अधिनियम, सीमा शुल्क अधिनियम के तहत सजा भुगत रहे बंदियों को कोई छूट नहीं दी गई है। अ यस्त अपराधी, साधारण सजा एवं जुर्माने की एवज में सजा भुगत रहे बंदी एवं पिछले 2 वर्ष में जेल में खराब आचरण वाले बंदियों को भी कोई राहत नहीं मिलेगी।
SHARE
    Your Comment

0 comments:

Post a Comment