किसानों के हित में समर्थन मूल्य पर चने की खरीदी करे केन्द्र: सीएम

भोपाल। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्र सरकार से घोषित समर्थन मूल्य पर प्रदेश के किसानों के हित में चने की खरीदी करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि इसके लिये राष्ट्रीय कृषि सहकारिता विपणन संघ - नाफेड की क्रेडिट सीमा बढ़ाकर ५ हजार करोड़ रुपये की जाना चाहिये ताकि क्रेडिट सीमा के बंधन के कारण किसानों का नुकसान नहीं हो।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज इस संबंध में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से मुलाकात की और विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। प्रधानमंत्री से भेंट के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्रीमती सुषमा स्वराज भी श्री चौहान के साथ थीं। उन्होंने केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री पी. चिदम्बरम से भी इस मुद्दे पर चर्चा की। श्री चौहान ने प्रधानमंत्री को अवगत करवाया कि चने की वर्तमान बाजार दर २३२४ रुपये प्रति क्विंटल चल रही है जो न्यूनतम समर्थन मूल्य ३१०० रुपये से २५ से ३० प्रतिशत तक कम है। उन्होंने कहा कि समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं होने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। 

श्री चौहान ने कहा कि भण्डारण के लिये राज्य सरकार पूरा सहयोग देने को तैयार है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से अपनी १५ मिनिट की चर्चा में कहा कि मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा दलहन उत्पादक राज्य है। इस बार चने की भरपूर फसल की संभावना है। समर्थन मूल्य पर चना खरीदी १५ लाख मीट्रिक टन तक पहुँच सकती है। श्री चौहान ने राज्य सरकार और नाफेड के बीच हुई चर्चा की ओर प्रधानमंत्री का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि नाफेड समर्थन मूल्य पर चना खरीदी के लिये तैयार नहीं है।मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम दिलवाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसानों को सिर्फ बाजार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता, इससे वे कम दाम पर अपनी फसल बेचने को मजबूर हो जायेंगे। 

मुख्यमंत्री ने केंद्र से आग्रह किया कि वह समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिये अग्रिम तैयारी करने, संबंधित एजेंसी की क्रेडिट लिमिट बढ़ाने और जूट के बोरों का इंतजाम करने की पहल करे। राज्य सरकार नाफेड का सहयोग करने के लिये तैयार है। मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव दिया कि यदि कृषि मंत्रालय राज्य की संस्था मार्कफेड को खरीदी की एजेंसी बनाने को तैयार हो तो राज्य शासन सहर्ष तैयार है और मध्यप्रदेश, नाफेड एवं कृषि मंत्रालय के बीच जरूरी समन्वय और वैधानिक कार्रवाई पूरी करेगा। मुख्यमंत्री के तर्क पर सहमत होते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार घोषित समर्थन मूल्य पर चने की खरीदी के लिये प्रतिबद्ध है और सभी जरूरी व्यवस्थाएँ की जायेंगी। केंद्रीय वित्त मंत्री श्री पी. चिदम्बरम ने भी शीघ्र यथोचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

भारत के पूर्वोत्‍तर राज्‍यों की सड़कें सुधारने के लिए १२५.२ मीलियन डॉलर ऋण का समझौता

नई दिल्ली भारत के पूर्वोत्‍तर राज्‍यों की सड़कों की दशा सुधारने के लिए कल यहां भारत सरकार और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के बीच १२५.२ मीलियन डॉलर ऋण के एक समझौते पर हस्‍ताक्षर किए गए। असम, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय और सिक्किम आदि पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में सड़कों को दोबारा बनाने के लिए पूर्वोत्‍तर राज्‍य सड़क निवेश कार्यक्रम तैयार किया गया है। इन राज्‍यों में सड़कें बने से अलग-थलग पड़े इन राज्‍यों में विकास के अवसर बढ़ जाएंगे। सड़क सुधार कार्यक्रम के तहत मौजूदा सड़कों को चौड़ा करना, फुटपाथों को मजबूत करना, किनारों को उंचा करना और नदियों पर पक्‍के पुल बनाना आदि शामिल हैं। इस ऋण समझौते पर हस्‍ताक्षर करने वालों में भारत सरकार की ओर से वित्‍त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के संयुक्‍त सचिव (बहुपक्षीय संस्‍थानों) श्री निलय मिताश और एशियाई विकास बैंक की ओर से कंट्री डायरेक्‍टर (आईएनआरएम) सुश्री एम टेरेसा खो शामिल थे। परियोजना समझौते पर एमडीओएनईआर के निदेशक के. गुइट, असम के पीडब्‍ल्‍यूडी सचिव श्री जे एन शर्मा मणिपुर के अतिरिक्‍त मुख्‍य सचिव श्री आरआर रश्मि, मिजोरम के स्‍थानीय आयुक्‍त श्री रणवीर सिंह और त्रिपुरा के अतिरिक्‍त मुख्‍य अभियन्‍ता, पीडब्‍ल्‍यूडी एवं एनईएसआरआईपी के नोडल ऑफिसर सुकमल भट्टाचार्जी ने हस्‍ताक्षर किए।
इस मौके पर श्री मिताश ने आशा जताई कि पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में अच्‍छी सड़के बनने से न सिर्फ इन राज्‍यों के लोगों का आपसी संपर्क और बढ़ेगा, बल्कि क्षेत्र में निवेश के अवसर भी बढ़ेंगे। एडीबी की कंट्री डायरेक्‍टर सुश्री एम टेरेजा खो ने भी उम्‍मीद जताई कि सड़कों की दशा सुधरने से विभिन्‍न समुदायों के लोगों के बीच आवाजाही और पहुंच बढ़ेगी, जिससे रोजगार और आर्थिक विकास के मौके ही नहीं बढ़ेंगे बल्कि गरीबी भी घटेगी। इस परियोजना के ३० सितंबर २०१९ तक पूरा हो जाने की उम्‍मीद है। इसके तहत असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा राज्‍यों की २३६ किलोमीटर से भी ज्‍यादा की सड़कों की दशा में सुधार होगा।

पैरी वितरक नहर रिमॉडलिंग एवं लाईनिंग के लिए १०.५५ करोड़ रूपए से अधिक की मंजूरी

रायपुर, १७ फरवरी २०१४ राज्य शासन द्वारा बालोद जिले के बालोद एवं गुण्डरदेही विकासखण्ड की पैरी वितरक शाखा नहर के रिमॉडलिंग एवं लाईरिंग कार्य के लिए १० करोड़ ५५ लाख रूपये से अधिक की मंजूरी प्रदान की गयी है। योजना के तहत पैरी वितरक शाखा नहर के आर.डी. ० मीटर से १६ हजार ५५० मीटर तक रिमाडलिंग एवं लाईनिंग की स्वीकृति दी गई है। इसकी प्रशासकीय स्वीकृति का आदेश यहां नया रायपुर स्थित मंत्रालय(महानदी भवन) से जल संसाधन विभाग द्वारा जारी कर दिया गया है।

बीकानेर के सांसद ने संसद मे उठाया राजस्थानी भाषा का मुद्दा

जयपुर, 18 फरवरी। बीकानेर सांसद श्री अर्जुन राम मेघवाल ने मंगलवार को लोक सभा मे तांराकित प्रश्न के माध्यम से राजस्थानी भाषा का मुद्दा उठाते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री से संविधान की आठवीं अनुसूचित में भाषाओं को स िमलित किये जाने के बारें मे प्रश्न पूछा। उन्होंने अपने प्रश्न मे पूछा कि सरकार द्वारा संविधान की आठवीं अनुसूची में और अधिक भाषाओं को शामिल करने हेतु क्या मानदंड अपनाए गए है तथा राज्यों और अन्यों से इस अनुसूची में और अधिक भाषाओं को शामिल करने हेतु प्राप्त प्रस्तावों का ब्यौरा क्या है और इस पर सरकार की राजस्थानी व भोजपुरी सहित राज्य और भाषावार क्या प्रतिक्रिया है। श्री मेघवाल ने प्रश्न किया कि भाषाई विशेषज्ञों संबंधी समिति (सीताकंात महापात्र समिति) द्वारा अपनी रिपोर्ट मे की गई सिफारिशों का ब्यौरा क्या है तथा क्या सरकार द्वारा उक्त समिति की सभी सिफारिशों को कार्यान्वित कर दिया गया है और यदि हां तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है और यदि नहीं तो इसके क्या कारण है? सांसद के प्रश्न का केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री श्री आर.पी.एन.सिंह ने अपने लिखित जवाब मे कहा कि भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची मे भाषाओं को शामिल करने के लिए कोई अनुमोदित मानदंड नहीं है। इस समय भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में राजस्थानी व भोजपुरी सहित 38 और भाषाओं को शामिल करने की मांग है। केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि वस्तुपूरक मानदंडो का एक सैट तैयार करने के लिए वर्ष 2003 मे भाषाई विशेषज्ञों की एक समिति सीताकांत महापात्र समिति गठित की गई थी, जिसके संदर्भ मे 8वीं अनुसूची में औेर अधिक भाषाओं को शामिल करने के लिए सभी प्रस्तावों की जांच की जा सके और उनका अंतिम रूप से निपटान किया जा सके। किसी भाषा के विकास के प्रसार इसके उपयोग आदि से संबंधित एकसमान मानदंडो के एक सेट का सुझाव देने के लिए सीताकांत महापात्र समिति की सिफारिशों सहित पूरे मुद्दे का गहराई से अध्ययन करने के लिए मंत्रालय द्वारा एक आंतरिक अंतर मंत्रालय समिति गठित की गई थी, जो आठवीं अनुसूची मे किसी भाषा को शामिल करने अथवा न करने का निर्णय लेने के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी। यह मामला सरकार के विचाराधीन है। 
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