एनटीपीसी मध्य प्रदेश में अपनी पहली 800 मेगावाट इकाई की आधारशिला रखी

१६०० मेगावाट चरण का शिलान्यास - मैं , एनटीपीसी के गाडरवारा सुपर थर्मल पावर परियोजना सत्ता में आत्म निर्भरता की ओर से देश के विकास के लिए समर्पित एक पल ने कहा कि श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया , विद्युत राज्य मंत्री (आई / सी ) नरसिंहपुर जिले में एक बड़ी सभा को संबोधित करते हुए. मध्य प्रदेश के आज . उन्होंने कहा कि इस परियोजना के आने के साथ हृड्डह्म्ह्यद्बद्दद्धश्चह्वह्म् मध्य प्रदेश के बिजली राजधानी बन जाएगा कि गयी
.श्री सिंधिया श्री राजेन्द्र शुक्ल , मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री सुरेश पचौरी , पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री की उपस्थिति में परियोजना की आधारशिला का अनावरण किया. आरएन चौबे , अपर सचिव , विद्युत मंत्रालय भारत सरकार , डॉ. अरूप रॉय चौधरी , सीएमडी , एनटीपीसी , वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों , राज्य सरकार, पावर और एनटीपीसी के मंत्रालय के अधिकारी शामिल हैं. इस अवसर डा. अरूप रॉय चौधरी , सीएमडी पर अपने संबोधन में एनटीपीसी तीन नई परियोजनाओं गाडरवारा , क्चड्डह्म्द्गह्लद्धद्ब और खरगोन में राज्य में आने के साथ एनटीपीसी की मध्य प्रदेश कर्मभूमि बुलाया . उन्होंने स्थिरता , सीएसआर का आश्वासन दिया और एनटीपीसी के सभी आगामी परियोजनाओं पर पर्यावरण प्रथाओं ध्वनि .एनटीपीसी '; एस गाडरवारा परियोजना तेजी से क्षमता वृद्धि और लागत प्रतिस्पर्धा के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू की थोक निविदा प्रक्रिया के तहत ह्यशह्वह्म्ष्द्गस्र किया गया है जो ८०० मेगावाट की २ इकाइयां शामिल हैं. गाडरवारा परियोजना इस प्रकार ८००रूङ्ख इकाई की क्षमता सुपर क्रिटिकल इकाइयों और नवीनतम तकनीक होने के साथ मध्य प्रदेश के राज्य में एक प्रवृत्ति सेटर हो जाएगा . इस परियोजना के केवल मध्य प्रदेश राज्य के लिए आपूर्ति परियोजना से उत्पादित बिजली का ५० प्रतिशत के साथ पश्चिमी क्षेत्र के राज्यों / संघ राज्य क्षेत्रों के लाभ के लिए एक क्षेत्रीय शक्ति परियोजना के रूप में कार्यान्वित किया जा रहा है . शेष विद्युत पश्चिमी क्षेत्र के राज्यों को आपूर्ति की जाएगी . परियोजना लगभग क्रह्य.११००० करोड़ के कुल निवेश के साथ १३ वीं योजना में चालू करने का लक्ष्य रखा है .परियोजना की कोयला मांग को नर्मदा नदी से स्रोत मंड - रायगढ़ कोलफील्ड्स और पानी से ञ्जड्डद्यड्डद्बश्चड्डद्यद्यद्ब ब्लॉक से मुलाकात की जाएगी .

मध्यप्रदेश को बासमती उत्पादक प्रदेश मानने के निर्णय के विरूद्ध एपीडा की अपील प्रदेश के किसानों के अधिकारों और राष्ट्रहित के विरूद्ध एपीडा जीआई चेन्नई के आदेश को स्वीकार करे
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को लिखा पत्र
भोपाल १९ फरवरी २०१४ मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर मध्यप्रदेश को बासमती चावल की खेती वाला क्षेत्र स्वीकार करने के भौगोलिक सांकेतक पंजीयक, चेन्नई के फैसले के विरूद्ध कृषि और खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण 'एपीडा' द्वारा बौद्धिक संपदा अपीलीय मंडल, चेन्नई में अपील दायर करने पर गहरा क्षोभ और निराशा व्यक्त की है। श्री चौहान ने कहा कि भौगोलिक सांकेतक पंजीयक, चेन्नई के पास मध्यप्रदेश ने राज्य के किसान संगठनों के साथ पिछली एक शताब्दी से ज्यादा समय से पारम्परिक रूप से बासमती चावल का उत्पादक प्रदेश प्रमाणित करने के लिये अनगिनत अविवादित और प्रामाणिक प्रमाण दिये हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के बासमती चावल की गुणवत्ता उत्तर भारत के अन्य क्षेत्रों में उत्पादित बासमती से अधिक नहीं है तो कम भी नहीं है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इसी आशय का पत्र केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शरद पवार, केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री आनन्द शर्मा को भी लिखा है। श्री चौहान ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि एपीडा जिसके पास कृषि उत्पादन के निर्यात को प्रोत्साहित करने की जिम्मेदारी है, उत्तरी भारत के कतिपय निहित स्वार्थों के दबाव में आ गया है। उन्होंने संस्था द्वारा अपने ही आदेश के विरूद्ध व डब्ल्यूटीओ एवं इंटरनेशनल कोर्टस् की आड़ में जीआई के ३१ दिसम्बर २०१३ के आदेश के विरूद्ध याचिका दायर करने को मध्यप्रदेश के किसानों के जायज व वैधानिक अधिकारों पर चोट बताया है। श्री चौहान ने कहा कि इसका मतलब यह हुआ कि एपीडा को पाकिस्तान में पैदा हुए बासमती पर कोई आपत्ति नहीं है लेकिन मध्यप्रदेश को बासमती उत्पादक क्षेत्र में शामिल करने में आपत्ति है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा है कि राज्य ने सफलता के साथ यह सिद्ध किया है कि बासमती चावल का संबंध मध्यप्रदेश से बहुत पुराना है। भौगोलिक सांकेतक चेन्नई ने राज्य के वस्तुपरक दस्तावेजों को मान्य कर ३१ दिसम्बर २०१३ को एपीडा को निर्देशित किया कि वो मध्यप्रदेश को बासमती चावल पैदावार राज्य के रूप में शामिल करे। राज्य के बासमती किसानों ने इस निर्णय का स्वागत किया था। उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि मैं आपके संज्ञान में लाना चाहूँगा कि मध्यप्रदेश में २ लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ५ लाख मीट्रिक टन बासमती चावल पैदा हुआ था। राज्य में पैदा होने वाला बासमती चावल मानक गुणवत्ता का होता है जिसे विदेशी बाजारों में भी इस सीमा तक पसंद किया गया है कि अमेरिका को भारत से निर्यात किये जाने वाले बासमती में मध्यप्रदेश का हिस्सा ४० प्रतिशत है।


त बाकू नियंत्रण समीक्षा समिति की बैठक त बाकू उत्पादों से होने वाले नुकसानों का अधिकाधिक प्रचार हो-पुलिस कमिश्नर
जयपुर, 19 फरवरी। पुलिस कमिश्नर श्री जंगा श्रीनिवास राव ने शहर में त बाकू नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा करते हुए कहा है कि त बाकू उत्पादों के सेवन को रोके जाने के साथ ंही त बाकू उत्पादों से होने वाले नुकसानों को अधिकाधिक रूप में प्रचारित किए जाने की आवश्यकता है। श्री राव आज यहां कमिश्नरेट सभाकक्ष में त बाकू नियंत्रण सबंधी जिला स्टीयरिंग कॉर्डिनेशन समिति की बैठक में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि त बाकू उत्पादों के उपयोग से होने वाली हानियों के बारे में जागरूक करने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाएं। उन्होंने इस सबंध में त बाकू उत्पादों के उपयोग का सेवन छोडऩे वाले लोगों के अनुभव आधारित लघु फिल्मों के निर्माण, सिनेमाघरो में त बाकू नियंत्रण सबंधी स्लाईड प्रदर्शन के साथ ही शिक्षण संस्थाओं में विशेष रूप से युवाओं को इस दिशा में जागरूक किए जाने पर जोर दिया। पुलिस कमिश्नर ने कोटपा अधिनियम 2003 के उल्लंघन पर की जाने वाली कार्यवाहियों के बारे में भी जानकारी ली तथा कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर धुम्रपान पर त्वरित चालान काटा जाए। उन्होंने त बाकू उत्पादों के प्रोत्साहन वाले विज्ञापनों पर रोक लगाने संबंधित नियम-कानूनों की पुलिस के स्तर पर पालना किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी त बाकू सेवन की ओर प्रवृत नहीं हो, इस सबंध में शहर में विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाए। उन्होंने धुम्रपान निषेध क्षेत्र के बोर्ड आम जन को संप्रेषण होने वाली भाषा में तैयार कर लगवाए जाने पर भी जोर दिया। त बाकू विक्रेताओं को त बाकू सेवन से सबंधित वैधानिक चेतावनियों को समझ में आने वाले रूप में में प्रसारित किए जाने पर भी उन्होंने जोर दिया। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त श्री बिपिन कुमार पाण्डेय ने कहा कि त बाकू नियंत्र्ण अभियान के लिए प्रभावी रूप में कार्य किया जाए। उन्होंने शैक्षणिक संस्थाओं में इस सबंध में कार्यशालाओं के आयोजन, युवाओं को समझाने वाले पोष्टर तैयार कर लगाए जाने और पुलिस द्वारा कानून उल्लंघन पर त्वरित कार्यवाही किए जाने पर जोर दिया। इससे पहले त बाकू नियंत्रण स्टेरियंग समिति के नोडल अधिकारी और अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त श्री नारायण टोगस ने बताया कि त बाकू मुक्त शहर के अंतर्गत अब तक 7 हजार 540 चालान काट कर 7 लाख 70 हजार 587 रूपये का जुर्माना वसूल किया गया है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों द्वारा की जाने वाली कार्यवाही के बारे में भी बताया। बैठक मे समिति के सदस्य राजस्थान वॉलेन्टरी हैल्थ ऑर्गनाईजेशन के श्री सूर्यप्रताप सिंह राजावत, डॉक्टर विरेन्द्र सिंह, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया।
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