भारत उगा रहा है 270 मिलियन टन फल और सब्जियां

नई दिल्ली। पिछले दशक के दौरान देश में बागवानी उत्‍पादन में आठ प्रतिशत वृद्धि हुई है। जबकि पिछले साल उत्‍पादन २५७ मिलियन टन रहा और जबकि पांच साल पहले उत्‍पादन २१५ मिलियन टन था। इन आंकड़ों को देखकर पता लगता है कि बागवानी उत्‍पादन में खासी उछाल आई है।
परिणामस्‍वरूप फल और सब्जियों जैसे बागवानी उत्‍पादों की प्रतिव्‍यक्ति उपलब्‍धता बढ़ी है जिससे मसाले और काजू आदि जैसे अन्‍य उत्‍पादों के मुकाबले फल और सब्जियों आदि उत्‍पादों के प्रतिव्‍यक्ति घरेलू उपभोग में भी बढ़ोतरी हुई है। इन सबसे इनके निर्यात की संभावनाएं भी काफी बढ़ गई हैं। भारत इस वक्‍त दुनिया में आम, केला, पपीता, अनार, सपोता, आंवला और ओकरा उगाने वाला सबसे बड़ा देश है। बैंगन, पत्‍तागोभी, फूलगोभी, प्‍याज, आलू और मटर के मामले में भारत दूसरे स्‍थान पर है। टमाटर का उत्‍पादन भी भारत में बड़ी मात्रा में होता है। ऐसा सरकार द्वारा नेशनल हॉर्टिकल्‍चर मिशन (एनएचएम), हॉर्टिकल्‍चर मिशन फॉर नॉर्थ-ईस्‍ट एंड हिमालयन स्‍टेट्स (एचएमएनईएच), नेशनल मिशन ऑन माइक्रो इरीगेशन (एनएमएमआई), नेशनल हॉर्टिकल्‍चर बोर्ड (एनएचबी), कोकोनट डिवेलप्‍मेंट बोर्ड (सीडीबी) और वेजीटेबल इनिशिऐटिव फॉर अरबन क्‍लस्‍टर्स (वीआईयूसी) जैसी योजनाओं को लागू करने की वजह से हुआ है। जहां एनएचएम की यह योजना १८ राज्यों और ४ केन्द्र शासित प्रदेशों के ३८३ जिलों के केवल ६६ फसल कलस्टर्स में लागू है वहीं पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों (एचएमएनईएच) के सभी जिलों में यह योजना लागू है। एनएमएमआई योजना में तकरीबन ४ मिलियन हेक्टेयर भूमि को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिचाई, जैसी आधुनिक सिचाई व्यवस्थाओं के तहत लाया गया है। वीआईयूसी योजना के तहत तकरीबन ४ लाख किसानों को २३ हजार फार्मर इंट्रेस्ट ग्रुप्स (एफआईजी) और १९२ फार्मर प्रोडूसर ऑर्गनाइजेशंस (एफपीओ) के तहत लाया गया है। इसके अलावा खुले खेतों और ढकी हुई जमीन पर सब्जियां उगाने के लिए तकनीकी सहायता और मदद भी उपलब्ध भी कराई गयी है। नेशनल सेंटर फॉर कोल्ड चेन डेवल्पमेंट (एनसीसीडी) कोल्ड चेन से जुड़ी ढ़ांचागत सुविधाओं से संबंधित मामलों की देखरेख कर रहा है। इनमें कोल्ड चेन टेस्टिंग के मानक और नियम तय करने, जांच करने, प्रमाण-पत्र देने और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सदस्यता देना आदि शामिल है। ३० मिलियन टन उत्पाद के लिए कोल्ड स्टोरेज क्षमता विकसित की गई है जिसमें से २ मिलयन टन क्षमता पिछले २ सालों के दौरान विकसित की गई। बागवानी से संबंधित चल रही ६ योजनाओं को शामिल कर मिशन फॉर इंटिग्रेटेड डेवल्पमेंट ऑफ हॉर्टिकल्‍चर (एमआईडीएच) को लागू कर ११वीं पंचवर्षीय योजना में बागवानी उत्पादों की चल रही गति को १२वीं पंचवर्षीय योजना में और बढ़ाया जाएगा। मिशन का ध्यान अब बीजा रोपण के अधिक गुणवत्ता वाले उत्पादों को तैयार करने, उत्पादकता सुधार उपायों के जरिए उत्पादों की वृद्धि, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने से संबंधित ढ़ांचागत सुविधाओं को तैयार करने के अलावा बागवानी उत्पादों की बेहतर तरीके से बिक्री के लिए बाजारों का निर्माण करने पर रहेगा। किसानों को फार्मर-प्रोडूसर संगठनों के तहत लाना और बागवानी से संबंधित आंकड़ों को मजबूत करना इस योजना के अन्य विशेषताएं हैं। एमआईडीएच योजना देश के सभी राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों में बांस की खेती सहति सभी बागवानी उत्पादों की खेती पर लागू होगी

भू-जल स्रोतों में फ्लोराइड की जांच के लिए छत्तीसगढ़ में २६ प्रयोगशाला स्थापित
विगत तीन वर्षों में ५६,३८८ भू-जल स्रोतों के नमूनों का परीक्षण
रायपुर. २२ फरवरी २०१४ भू-जल स्रोतों में फ्लोराइड की मात्रा की जांच के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने छत्तीसगढ़ में २६ जिला स्तरीय प्रयोगशालाओं की स्थापना की है। इन प्रयोगशालाओं में विगत तीन वर्षों में भू-जल स्रोतों के ५६ हजार ३८८ नमूनों का परीक्षण किया गया है। प्रदेश भर की ३२८ बसाहटों के नमूनों में फ्लोराइड की अधिकता पाई गई है। फ्लोराइड से प्रभावित इलाकों में लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा अनेक फ्लोराइड निवारण संयंत्रों की स्थापना की गई है। फ्लोराइड प्रभावित बसाहटों में लोगों को पीने का साफ पानी मुहैया कराने के लिए विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में राज्य शासन ने वित्तीय वर्ष २०१२-१३ में पांच करोड़ ६२ लाख रूपए से अधिक की राशि खर्च की है। जिला स्तरीय प्रयोगशालाओं में जशपुर जिले में सात हजार ५४१, जिला अंबिकापुर में पांच हजार ४९५, जिला सुकमा में पांच हजार १०२, जिला दुर्ग में चार हजार २९२, जिला राजनांदगांव में तीन हजार ७५४, जिला रायपुर में तीन हजार ३८६, जिला नारायणपुर में तीन हजार ३६५ और जिला कबीरधाम में तीन हजार २५३ जल स्रोतों के नमूनों का परीक्षण किया गया है। जिला कोरबा में दो हजार ७११, जिला धमतरी में दो हजार ४३१, जिला बिलासपुर में दो हजार २५८, जिला बीजापुर में एक हजार ८७६, जिला कोरिया में एक हजार ७८८, जिला दंतेवाड़ा में एक हजार ७३१, जिला कांकेर में एक हजार ४६६, जिला रायगढ़ में एक हजार ३८७, जिला बस्तर में एक हजार ७९, जिला जांजगीर-चांपा में ९२२, जिला बलरामपुर-रामानुजगंज में ५४७, जिला गरियाबंद में ५००, जिला बेमेतरा में ४२०, जिला महासमुंद में ३८८, जिला मुंगेली में ३७३, जिला बालोद में १८३ और जिला सूरजपुर में १४४ नमूनों में फ्लोराइड की मौजूदगी का परीक्षण किया जा चुका है।

क्षेत्र की मिट्टी से तय हो सड़क निर्माण की तकनीक-सार्वजनिक निर्माण मंत्री
जयपुर, 22 फरवरी। सार्वजनिक निर्माण मंत्री श्री यूनुस खान ने कहा है कि भौगोलिक विषमताओं वाले हमारे प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग प्रकार की मिट्टियां मिलती हैं, इसलिए सड़कों के निर्माण की तकनीक जिले और क्षेत्र की मिट्टी के आधार पर निर्धारित होनी चाहिए ताकि उनका स्थायित्व बढ़ सके। उन्होंने सानिवि के अधिकारियों को अच्छी सड़क निर्माण सामग्री की प्रचुरता वाले जिलों का सर्वे करने के निर्देश दिए हैं। सानिवि मंत्री श्री खान ने शनिवार को आरएसआरडीसी सभागार में प्रदेश और दूसरे राज्यों से आए सड़क निर्माण क्षेत्र के निवेशकों को स बोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि राजस्थान में कई जिलों में अच्छी सड़क निर्माण सामग्री की प्रचुरता है, जबकि कहीं-कहीं कई सौ किलोमीटर से इसे लाना होता है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नि न गुणवत्ता की सामग्री से निर्माण की गुणवत्ता भी गिर जाती है। श्री खान ने अधिकारियों को प्रचुर सामग्री वाले क्षेत्रों का सर्वे करने के निर्देश दिए।
एक महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए श्री खान ने निवेशकों को बताया कि नवाचार के रूप में तहसील या जिले को इकाई मानकर मेंटीनेंस के सभी काम 'कॉंन्टे्रक्ट मैनेजमेंट सिस्टमÓ के जरिए एक ही यूनिट से करवाए जाने की संभावना पर विचार के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है। राज्य के चुनिन्दा डाक बंगलों को पीपीपी मोड में मेन्टेन करने पर भी विचार किया जा रहा है। इसी प्रकार सानिवि के मु य वास्तुविद एवं मु य अभियंता, भवन की अध्यक्षता वाली समिति का गठन किया गया है जो राजकीय भवनों के एलिवेशन, फेस, सुविधाओं में बदलाव की सिफारिशें देगी। बैठक में निवेशकों ने भी सानिवि मंत्री को अपनी समस्याएं बताईं, जिनमें अतिक्रमण, भूमि की अवाप्ति नहीं होना, आरओबी की अनुमति नहीं मिलना, निवेशक को निवेशक के बजाय एक संवेदक मानकर व्यवहार करना, टोल वसूली की समस्याएं आदि प्रमुख थीं। इस पर श्री खान ने निवेशकों को टीम मे बर बताते हुए हर संंभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि सड़कें राज्य सरकार और मु यमंत्री की प्राथमिकता में हैं और इस क्षेत्र में राज्य को मॉडल राज्य बनाना है। विभाग, निवेशक और संवेदकों के सहयोग से ही इस लक्ष्य को समयबद्घता और गुणवत्ता के साथ हासिल किया जाएगा। 
SHARE
    Your Comment

0 comments:

Post a Comment