एक माह पुरानी सरकार से, अनगिनित सवाल, अन्याय


व्ही.एस.भुल्ले। देश के दो प्रमुख राजनैतिक दल और देश की मीडिया द्वारा मात्र एक माह पुरानी अनुभवहीन सरकार से जिस तरह से अनगिनत सवाल किये जा रहे है,वह लोकतंत्र का मजाक ही नहीं उस सरकार के साथ अन्याय भी है।

जिसका जन्म ही लोकतंत्र में दुषचरित्र दलो की गलतियों और उनके अंहकार बस मजबूरी में अवैध संतान के रुप में हुआ। सच तो यह है कि आजादी के 65 वर्षो तक देश के प्रमुख राजनैतिक दलो द्वारा लेाकतंत्र के नाम जो बोया वह आज वहीं का रहे है।

अब इस लेाकतंत्र की वैध सन्तान बन चुकी यह सरकार अपने पिता का नाम अवैध सन्तान के तरीके से पूछ रही है तो इसमें हर्ज ही क्या? आखिर मात्र एक माह की शिशु सरकार के चाल चलन और परिणामों पर एक ओर उसका मुखर विरोध है तो दूसरी ओर बड़े ही बेशर्मी पूर्ण ढंग से इस नन्ही सरकार से आजादी के 65 वर्षो के कार्यकाल समतुल्य सवाल किये जा रहे है।

कोई कहता है संवैधानिक गरिमा तार-तार हो रही है तो कोई इसे मात्र एक माह में नाकाम सरकार तो कोई वादा खिलाफी करने वाली सरकार करार दे रहा है। तो कोई गर्व के साथ इस एक माह पुरानी सरकार को असफल और झूठे सपने दिखाने वाली सरकार कह रहा है।
मगर इन सवाल करताओंं से कौन सवाल करे कि यह तो मात्र 1 माह पुरानी सरकार है जिसने अपनी क्षमता अनुसार 1 माह में कुछ तो किया है मगर विगत 65 वर्ष में जहां 3 पीढ़ी रन कर 2 तो ऊपर जा चुकी है और तीसरी पीढ़ी जाने के क्रम है। क्या कारण है जो आम भारतीय से उसकी प्रकृति प्रदत्त सुविधायें शुद्ध पेयजल पर्यावरण,शुद्ध खादन्न जैसी सुविधायें छिन गयी।

क्यों देश में मे हर गरीब को दो व त की रोटी,सर पर छत और स मानजनक जीवन नसीब नहीं। अगर खबरों की माने तो हर वर्ष कुपोषण से कितनी मातायें बच्चें दम तोड़ते है, कितने लेाग ठंड से सिकुड़ खुले आसमान के नीचे सड़को पर मर जाते है?
क्या इनका जबाव भी एक माह पुरानी सरकार से लेना चाहिए या फिर आजाद भारत में 65 वर्षो तक सत्ता सुख भोग,सवाल करने वाले दलो से पूछना चाहिए?

फैसला देश की राजा आम जनता को करना है वह अब सवाल करे हर उस दल और नेताओं से जो वोट मांगने आते है कि आप ही बताये कि हम विगत 65 वर्षो से वोट देने और सरकारें बनाने का ही कार्य करते आ रहे है। 3 पीढ़ी निकल गयी मगर परिणाम क्या? आखिर कौन जि मेदार है, इस महान देश की दुव्यवस्था का? कौन है वो लेाग जिन्होंने हमारा बचपन आभाव ग्रस्त जवानी बेकारी और बुढ़ापे को बदत्तर बना दिया जब तक हम आने वाले भविष्य में अपने नेताओं उन राजनैतिक दलो से यह सवाल नहीं करेगें तब तक एक मतदाता के रुप में हमारा शोषण और हमारे द्वारा स्थापित ईमानदारों सरकारों की भ्रूण हत्या इसी प्रकार होती रहेगी। जब तक हम स्वयं जागरुक हों,अपने लेागों को सच गलत,अच्च्छे,बुरे का अर्थ नहीं समझा पाते तब तक हम और हमारे देश के महान लेाकतंत्र को नहीं बचा सकते,क्योकि जो सत्ता में घपे है,वह इसी तरह के अर्नगल सवाल कर जो वह एक माह पुरानी सरकार से कर रहे है,वही लेाग हमें भ्रमित कर अपना उल्लू सीधा कर इस देश में सत्ता सुख भोगते रहेगें।

निवेश स्थानों के मामले में शीर्ष स्थान पर भारत

नई दिल्ली भारत ने वर्ष २००० के बाद ३०६.८८ अमेरिकी डॉलर का विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एडीआई) प्राप्त किया है। कुल प्राप्त विदेशी निवेश में से ९४ प्रतिशत राशि पिछले नौ सालों के दौरान प्राप्त की है। भारत की विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नीति को निवेशक के और अधिक अनुकूल बनाने के लिए इसे और अधिक उदार बनाया गया है। नीति की ताजा समीक्षा में सरकार ने कुछ क्षेत्रों में क्षेत्रीय रोक या/और प्रवेश संबंधी संशोधन किए हैं। ये क्षेत्र हैं - पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, कमोडिटी एक्सचेंज, पॉवर एक्सचेंज, स्टॉक एक्सचेंज, डिपॉजिटरीज एवं क्लीयरिंग कॉरपोरेशन, परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी, क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनी, चाय-बागानों समेत टी सेक्टर, सिंगल ब्रांड प्रोडक्ट रिटेल ट्रेडिंग, टेस्ट मार्केटिंग, टेलीकॉम सर्विसेज, कूरियर सर्विसेज और रक्षा। निवेशकों को हौसला बढ़ाने के नजरिए से विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नीति की समीक्षा कराई जाती है, ताकि विदेशी प्रत्यक्ष निवेश का प्रवाह और तेज हो सके और अर्थव्यवस्था का तीव्र विकास सुनिश्चित हो। सरकार ने कई क्षेत्रों में एफडीआई संबंधी नियमों को उदार बनाया है। टेलीकॉम में १०० प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी दे दी गई है। इंश्योरेंस व रक्षा क्षेत्र में भी एफडीआई की सीमा को बढ़ाया गया है। मल्टी ब्रांड रिटेल में ५१ प्रतिशत एफडीआई को अनुमति दे दी गई है। न्यूनतम विदेशी निवेश की आवश्यकता १०० मिलियन अमेरिकी डॉलर की है। एफडीआई आने के बाद तीन साल के भीतर कम से कम ५० प्रतिशत बेकैंड इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश किया जाएगा। सिंगल ब्रांड रिटेल में एफडीआई की सीमा भी १०० प्रतिशत तक बढ़ा दी गई है। सिंगल ब्रांड रिटेल में ४९ प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी देने का भी फैसला किया गया था। रक्षा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा २६ प्रतिशत ही रखी गई है। इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह उदार विदेशी निवेश नीतियों का ही नतीजा है कि भारत लगातार विश्व में तीन शीर्ष निवेश स्थानों में से एक रहा है। वर्ल्ड बैंक, यूएनसीटीएडी जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं इस बात की पुष्टि करती हैं। इन संस्थाओं ने भारत को निवेश के मामले में शीर्ष तीन स्थानों में रखा है। यह बात विदेशी निवेश संबंधी आंकड़ों में भी स्पष्ट नजर आती है। १९९९-२००४ के बीच भारत में १९.५२ बिलियन अमेरिकी डॉलर विदेशी निवेश किया गया जो कि २००४-०९ के बीच बढ़कर ११४.५५ अमेरिकी डॉलर हो गया। देश में विदेशी निवेश का प्रवाह आगे भी बढ़ता गया और २००९ से सितंबर, २०१३ के बीच यह आंकड़ा बढ़कर १७२.८२ अमेरिकी डॉलर हो गया।

सांभर में लगेगा चार हजार मेगावाट का अल्ट्रा मेगा सोलर पॉवर प्रोजेक्ट

जयपुर, 29 जनवरी। राजस्थान की सुप्रसिद्घ सांभर झील के निकट चार हजार मेगावाट क्षमता के अल्ट्रा मेगा सोलर पॉवर प्रोजेक्ट की स्थापना के लिए एक सार्वजनिक उपक्रम क पनी का गठन करने के लिए बुधवार को नई दिल्ली में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। केन्द्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री फारूख अब्दुल्ला और भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्री श्री प्रफुल्ल पटेल की उपस्थिति में हुए इस समझौता ज्ञापन (एम.ओ.यू.) पर भारत सरकार के उपक्रम भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल), सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एस.ई.सी.आई.), सांभर सॉल्ट लिमिटेड (एस.एस.एल.), पावर ग्रिड कॉरर्पोरेशन, सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड (एस.जे.वी.एन) और राजस्थान इलेक्ट्रोनिक्स एण्ड इंस्ट्रयूमेंट्स लिमिटेड (रील) के वरिष्ठ अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए। इस मौके पर रील के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री ए.के.जैन भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि जयपुुर जिले के फुलेरा तहसील के निकट लगने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना में रील की तीन प्रतिशत भागीदारी होगी, जबकि सबसे अधिक साझेदारी 26 प्रतिशत भेल, 23 प्रतिशत एस.ई.सी.एल. और 16-16 प्रतिशत एस.एस.एल., एस.जे.वी.एन. एवं पॉवरग्रिड कॉर्पोरेशन की रहेगी। उल्लेखनीय है कि यह सोलर अल्ट्रा मेगा सोलर पॉवर प्रोजेक्ट सांभर झील के निकट सांभर साल्ट लिमिटेड (हिन्दुस्तान साल्ट एवं राजस्थान सरकार का संयुक्त उपक्रम) के पास उपलब्ध 19 हजार एकड़ भूमि में लगेगा। ार हजार मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता वाले इस ग्रीन पॉवर हाउस से आगामी 25 वर्षो तक प्रतिवर्ष 640 करोड़ यूनिट सोलर बिजली का उत्पादन संभव हो सकेगा, जो कि विश्व में अपने ढंग का पहला सबसे बड़ा सोलर पॉवर प्रोजेक्ट होगा।

छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के २५ हजार नये पद स्वीकृत

रायपुर, २९ जनवरी २०१४ केन्द्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए राज्य के २७ में से १७ जिलों के आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए २५ हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के नये पदों की स्वीकृति प्रदान कर दी है। यह जानकारी आज यहां नया रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित कलेक्टर्स कान्फ्रेंस में दी गयी। डॉ. रमन सिंह ने अधिकारियों को इन पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करने के निर्देश दिए। कलेक्टर्स कान्फ्रेंस में वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों योजना आयोग को यह प्रस्ताव दिया था कि छत्तीसगढ़ में कुपोषण मुक्ति अभियान को गति देने और आंगनबाड़ी केन्द्रों में तीन वर्ष तक आयु समूह के शिशुओं की अच्छी देखभाल करने के लिए २५ हजार अतिरिक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की जरूरत है। योजना आयोग की अनुशंसा पर केन्द्र ने मुख्यमंत्री के इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। राज्य में इस समय लगभग ५० हजार आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित हैं। इन केन्द्रों में ५० हजार के आस-पास आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में महिलाएं काम कर रही हैं। नये पदों को मिलाकर राज्य में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की संख्या लगभग ७५ हजार हो जाएगी। आंगनबाड़ी केन्द्रों में तीन वर्ष से छह वर्ष तक आयु समूह के बच्चों की देखभाल होती है, लेकिन एक माह से तीन वर्ष तक आयु वर्ग के शिशुओं की बेहतर देखभाल की जरूरत को महसूस करते हुए प्रदेश के १७ जिलों में २५ हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के नये पदों की मांग योजना आयोग से की गयी थी। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इन १७ जिलों में कुपोषण, शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर में और भी कमी लाने के लिए विशेष प्रयास करने की जरूरत है। इसे ध्यान में रखकर मुख्यमंत्री ने योजना आयोग को यह प्रस्ताव दिया था। इन १७ जिलों में इस समय २५ हजार ४४२ आंगनबाड़ी केन्द्रों में इतनी ही संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता काम कर रही हैं। इन्हीं १७ जिलों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के २५ हजार नये पद स्वीकृत हुए हैं। इन नये पदों के लिए चयनित महिलाओं को आंगनबाड़ी केन्द्रों में पोषक परामर्शदाता के रूप में तैनात किया जाएगा। जिन १७ जिलों के लिए इन पदों की स्वीकृति मिली है, उनमें बस्तर (जगदलपुर), कोण्डागांव, उत्तर बस्तर (कांकेर), दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा), नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा, जशपुर, बालोद, बेमेतरा, गरियाबंद, महासमुन्द, कबीरधाम, दुर्ग,रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा और कोरबा शामिल हैं।


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