देश के भविष्य में विष घोलती, आर्थिक प्रतिस्पर्धा

व्ही.एस.भुल्ले। आज हम 65 वाँ गणतंत्र दिवस मना 66 वे स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र की ओर बढ़ेगें। जो हालात हमारे महान देश में लेाकतंत्र के ...

व्ही.एस.भुल्ले। आज हम 65 वाँ गणतंत्र दिवस मना 66 वे स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र की ओर बढ़ेगें। जो हालात हमारे महान देश में लेाकतंत्र के हमारे सामने है। जिस स्थति में देश के अन्दर हमारी लेाकतांत्रिक संस्थायें काम कर रही है,वह हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि कौन सा रास्ता हमारे देश और बच्चों के लिये बेहतर है।

किन रास्तों पर चल हम देश का व अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित कर सकते है। संविधान में उल्लेखित लेाकतंत्र की तीनों संस्थायें विधायिका, कार्यपालिका, न्यापालिका और अलिखित मीडिया में बढ़ते अर्थवाद और आर्थिक प्रतिस्पर्धा ने देश की हालात बद से बदत्तर बना दी है। जिसमें धीरे-धीरे हमारी स यता,संस्कृति,संस्कार और मूल सिद्धान्त,कत्र्तव्य सभी दम तोड़ते नजर आ रहे है।

हर लेाकतंत्र में जो उम्मीद मीडिया से होती है वह उ मीद भी आर्थिक प्रतिस्पर्धा के चलते भारतीय मीडिया से ओझल होती जा रही है। अगर यो कहें कि आर्थिक चमक और व्यापारिक घराने,साम्राज्य वादी,सामंती ताकतों के मीडिया में लाभ के लिये कूद जाने से मीडिया की भूमिका पर ही सवाल खड़े होने लगे है तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी।

आज जिस तरह से धन,सत्ता लालचियों ने मीडिया में पैठ बना देश के नागरिकों और देश के हितों की अपने लाभ के लिये उपेक्षा शुरु की है। वह भारतीय परिदृश्य में स्पष्ट रुप से देखी जा सकती है।

धन बल के चलते बड़े मीडिया हाउस या तो बन्द हो लिये तो कुछ बन्द होने के कगार पर है। जो शेष है वह भी जिन्दा रहने नोचातूपी के नये नये है नु से तलाश प्रतिस्पर्धा में बने हुये है। तो कुछ पैदा होते ही दफन हो जाते है। या वह रोटी राम बन धारा प्रभाव का हिस्सा बन जिन्दा रहने अर्थबाद का हिस्सा बन जाते है।

फ्री फोकट में 24 घन्टों प्रसारण करते चैनलों और 2=4 रुपये में 10-15 रुपये में छपने वाला मल्टी कलर अखबारों की उपलब्धता बताती है कि मीडिया का आलम हमारे लेाकतंत्र में क्या है कुछ वर्षो पहले तक निष्पक्ष मीडिया को आदम खोर बनाने वाले व्यापारिक ,औद्योगिक घरानो सहित सरकारों,सामंतवादी,साम्राज्य वादी अपने लाभ के लिये इस्तमाल करते थे। जैसे अपराधी गुन्डों,माफियाओं का इस्तमाल राजनैतिक दल चुनाव जीतने हरान में कभी करते थे।

आज वहीं मीडिया और अपराधी विधायिका और उन औद्योगिक घरानों से अर्थ का महत्व समझ दो-दो हाथ करने तैयार है। तो अब कई औद्योगिक घराने राजनीति में आ स्वयं ही विधायका और मीडिया में अधिपत्य जमा लोकतंत्र की नई परिभाषा गढऩे में लग गये है। तो कुछ राजनेता भी पिछले दरवाजे से मीडिया में धमक बनाये हुये है।

अब लेाकसभा,विधानसभाओं में अपराधियों की खासी भरमार हो या फिर आम चुनावों में पेड न्यूजों का सवाल हो, सव तो यह है कि आज लोकतंत्र में मौजूद मीडिया का जो स्वरुप मौजूद है,वह उन धन,सत्ता लालचियों की ही अवैध संतान है। जो हमारे महान लेाकतंत्र को कुचलने तैयार है। जो नित नये ढंग से हर राष्ट्र भक्त को कभी हमारे कानूनों की कमजोरियों का हवाला दे हमारे माहन संविधान और लोकतंत्र की भावना बताते नहीं थकते। ऐसे में हमें संकल्प लेना होगा हमारे 65 वे गणतंत्र दिवस पर कि हम हमारे देश के लिये हमारे हजारों युवाओं की आजादी और हमारे महान नेताओं की कुर्बानी इन धन लालचियों के आगे कुर्बान नहीं कर सकते।

ऐसे में हमें स्वयं जागरुक हो, उन माता पिताओं को बताना होगा कि वह अपने स्वार्थ छोड़ अपने बच्चों को सिखाये और बताये। कि राष्ट्र और मातृ भूमि क्या हेाती है। हमारी संस्कृति,स यता,संस्कार क्या है? क्यों विश्व में हमें अपने मूल सिद्धान्तों के लिये जाना जाता है? शायद देश के 65 वे गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति जी ने ठीक ही कहां कि लेाक लुभावन वादे, अराजकता शासन का विकल्प नहीं हो सकती ,क्योकि झूठे वायदों की परिणति मोहभंग में होती है जिससे क्रोध भड़कता है और इस क्रोध का एक ही स्वाभाविक निशाना होता है सत्ताधारी वर्ग। हो सकता है। सरकार द्वारा तैयार संदेश संविधान द्वारा प्रदृत्त व्यवस्था का अंग हो,कुछ हद तक वह ठीक भी मगर राष्ट्रपति आपकी भावनाओं के विपरीत देश की कई सरकारे राजनैतिक दल आजादी से लेकर आज तक ऐसा ही करते आये है अब तो बड़े पैमाने पर संवैधानिक संस्थाओं में इसका इस्तमाल आम बात है।
अब ऐसी स्थति में अगर हमें देश के महान नेताओं की कुर्बानियों और देश सहित स्वयं के स मान,स्वाभिमान के साथ बच्चों का भविष्य बेहतर बनाना है तो हमें ही आगे आ ऐसे नेता, राजनैतिक दल, मीडिया के बारे में समय निकाल। अपने बच्चों को सिखाना,बताना पढ़ेगा। कि ऐसी सुविधायें और उत्पादन,उत्पादकों को नकारना होगा जो धन लालची हमें ही नहीं, हमारे बच्चों का भविष्य चौपट करना चाहते है।
आज के दिन हर भारत वासी का स्वयं व देश के लिये यह संकल्प होना चाहिए , कि वह मिथ्या,मीडिया और झूठे वादे करने वाले नेताओं, दलो को नकार अपना बेहतर भविष्य गढ़ेऔर देश के स्वाभिमान को जिन्दा रखे। जय हिन्द

भारत के अच्छे नागरिक बने -राज्यपाल
जयपुर, 27 जनवरी। राज्यपाल श्रीमती माग्र्रेट आल्वा ने मणिपुर से आये स्कूली छात्र-छात्राओं से उनकी शिक्षा के बारे में जानकारी ली व उन्हें भारत देश के अच्छे नागरिक बनने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि बड़े होकर चिकित्सक, पायलेट, शिक्षक, खिलाड़ी या जन प्रतिनिधि बन कर देश की सेवा करें।भारतीय सेना द्वारा आयोजित राष्ट्रीय एकता भ्रमण कार्यक्रम के तहत यह दल उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और आसाम की यात्रा करते हुए राजस्थान पहुंचा। राजभवन में हुई इस भेंट के दौरान दल के विद्यार्थियों से राज्यपाल ने गीत सुना।राज्यपाल ने बच्चों से उनकी यात्रा के अनुभवों के बारे में पूछा। दल की एक छात्रा ने राज्यपाल को शॉल भेंट किया। राज्यपाल ने बच्चों को उनके उज्ज्वल भविष्य और सुखद यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं।

पुलिस कर्मियों के बच्चों को मिलेगी बेहतर शिक्षा - डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री
२७ जनवरी २०१४ मुख्यमंत्री डॉे. रमन सिंह ने आज यहां राजधानी रायपुर में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके बच्चों के लिए पुलिस लाइन में पुलिस पब्लिक स्कूल और पेंशनबाड़ा में पुलिस अधिकारियों के ठहरने के लिए नये पुलिस ट्रांजिस्ट हॉस्टल की सौगात दी। पुलिस पब्लिक स्कूल का निर्माण दो करोड़ ५२ लाख रूपए की लागत से किया गया है, जबकि पुलिस ट्रॉजिस्ट हॉस्टल का निर्माण छह करोड़ २३ लाख ९४ हजार रूपए की लागत से हुआ है। मुख्यमंत्री ने इन दोनों भवनों के लोकार्पण के बाद पुलिस अधिकारियों और जवानों को इस सुविधा के लिए बधाई देते हुए कहा कि अब पुलिस कर्मियों के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिलेगी। उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों के बच्चों की शिक्षा के लिए छत्तीसगढ़ में कोई अलग से व्यवस्था नहीं थी। इनके बच्चों के लिए अलग से पब्लिक स्कूल खुल जाने से बच्चों को ही नहीं बल्कि उनके अभिभावकों को भी बच्चों की बेहतर शिक्षा की चिंता से मुक्ति मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस स्कूल का संचालन निजी भागीदारी से किया जाएगा, जिसमें पुलिस कर्मियों के बच्चों के लिए ५० प्रतिशत प्रवेश आरक्षित रहेगा। शेष पचास प्रतिशत सीटों पर नागरिकों के बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा।

विकास क े लिए समाज म ें भाईर्चचारा कायम रहना अत्यन्त आवश्यक: मुख्ुख्यमत्रंत्रं ी
लखनऊ: २७ जनवरी, २०१४ उत्तर प्रदेश क े मुख्यमत्रं ी श्री अखिलेश यादव न े कहा कि देश एव ं प्रदश्े ा क े विकास क े लिए समाज म ें भाईचारा कायम रहना अत्यन्त आवश्यक है। उन्होंन े कहाकि कुछ ताकत ें समाज का भाईचारा बिगाडऩ े का लगातार प्रयास कर रही है,ं जिसे नागरिका ें की सजगता स े ही राके ा जा सकता ह।ै उन्होनं े कहा कि साम्प्रदायिक हाने ा बहुत आसान है, लेकिन धर्म निरपेक्ष होना कठिन है। मुख्यमत्रं ी आज यहा ं सगं ीत नाटक अकादमी म ें शहीद मजे र पुष्पन्े द्र देव सिहं चैरिटबे ल ट्रस्ट एव ं उदय भारत सामाजिक सेवा सस्ं थान क े सयं ुक्त तत्वावधान म ें आयोि जत च्एक पहलज् सास्ं कृतिक कार्यक्रम म ें अपन े विचार व्यक्त कर रह े थ।े उन्होंन ेसस्ं था क े कार्यकर्ताओं द्वारा आयोि जत सांस्कृतिक कार्यक्रम एव ं विशष्े ा रूप स े प्रस्तुत नाट्य च्भाईचाराज् की सराहना करते हुए कहा कि समाज को इस नाटक के संदेश को ग्रहण करने की आवश्यकता है। श्री यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश मूलतः ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर आधारित राज्य है। वर्तमान राज्य सरकार प्रदेश के सभी क्षेत्रा ें विशष्े ा रूप स े ग्रामीण क्षेत्रो ं में अधिक स े अधिक विकास क े लिए प्रयास कर रही है। उन्होंन े कहा कि हिन्दुस्तान म ें सर्वाधिक नौजवान आबादी उपलब्ध है। इसम ें भी उत्तर प्रदेश में नौजवाना ें की सख्ं या अधिक है। युवाओ ं का े दक्ष बनाए जान े की आवश्यकता पर बल देत े हुए उन्होंन े कहा कि कुशल एव ं प्रशिक्षित नौजवान प्रदेश व दश्े ा क े विकास म ें अपना सक्रिय यागे दान प्रदान कर सकत े है।

वित्‍त मंत्री ने कहा कि सोने के आयात पर प्रतिबंध से चालू खाता घाटा कम करने में मदद मिली
नई दिल्ली २७-जनवरी २०१४ केंद्रीय वित्‍त मंत्री श्री पी चिदम्‍बरम ने कहा है कि सोने के आयात पर प्रतिबंध लगाकर चालू खाता घाटा कम करने और भुगतान संतुलन की स्थिति पर नियंत्रण में मदद मिली है। श्री चिदम्‍बरम ने कहा कि वतर्मान वित्‍त वर्ष की समाप्ति पर सोने पर प्रतिबंध फिर देखने को मिल सकता है। वित्‍त मंत्री आज यहां अंतर्राष्‍ट्रीय सीमा शुल्‍क दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह दिन हर वर्ष २६ जनवरी को १७९ सीमा शुल्‍क प्रशासनों, ब्रसेल्‍स स्थित विश्‍व सीमा शुल्‍क संगठन के सदस्‍यों द्वारा सीमा शुल्‍क सहयोग के पहले सत्र की शुरूआत के अवसर पर मनाया जाता है। इस परिषद को १९९४ में डब्‍ल्‍यूसीओ नाम दिया गया। इस वर्ष अंतर्राष्‍ट्रीय सीमा शुल्‍क दिवस का विषय है च्ज्संचार : बेहतर सहयोग के लिए सूचना का आदान-प्रदान।च्ज्इस अवसर पर वित्‍त मंत्री श्री चिदम्‍रबम ने कहा कि समेकित वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था के युग में प्रौद्योगिकी विकास का प्रमुख मंत्र है। उन्‍होंने सीमा शुल्‍क अधिकारियों खासतौर से युवा अधिकारियों से कहा कि वे प्रौद्योगिकी के साथ गति बनाए रखें। उन्‍होंने कहा कि वे प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महारत हासिल करें।

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तीरंदाज,328,व्ही.एस.भुल्ले,523,
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Village Times: देश के भविष्य में विष घोलती, आर्थिक प्रतिस्पर्धा
देश के भविष्य में विष घोलती, आर्थिक प्रतिस्पर्धा
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