परियोजनाएं ऐसी बने जो समय पर पूरी हों और लोगों को इसका जल्द से जल्द लाभ मिले -मुख्यमंत्री

जयपुर, 2 जनवरी। मु यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने कहा है कि प्रदेश के जलग्रहण क्षेत्रों में वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर विकसित किये जायेंंं, जिससे लोगों को पीने का शुद्घ पानी एवं सिंचाई सुविधाएं जल्द से जल्द उपलब्ध हो सके। मु यमंत्री गुरूवार को मु यमंत्री कार्यालय में जल संसाधन विभाग एवं इंदिरा गांधी नहर परियोजना के प्रस्तुतीकरण की समीक्षा कर रही थी। उन्होंने प्रस्तुतीकरण के हर बिन्दु पर विस्तृत चर्चा भी की।

श्रीमती राजे ने कहा कि कई वृहद परियोजनाओं को पूरा होने में सालों लग जाते हैं ऐसे में जनता को उसका फायदा समय पर नहीं मिल पाता है और इन परियोजनाओं की लागत में उत्तरोत्तर बढ़ोतरी होती जाती है। उन्होंने झालावाड़ जिले की छापी परियोजना के पूरा होने में 36 वर्ष लगने पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि परियोजनाओं के निर्माण में देरी होने से न केवल उसकी लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी होती है बल्कि लोगों को समय पर उसका लाभ भी नहीं मिलता। 

इसलिये परियोजनाओं के निर्माण को निश्चित समयावधि में पूरा किया जाये। प्रस्तुतीकरण के दौरान परवन सिंचाई एवं पेयजल परियोजना के बारे में यह तथ्य सामने आया कि पूर्ववर्ती सरकार ने जल्दबाजी में परियोजना के टेण्डर आमंत्रित कर लिये जबकि कई औपचारिकताएं बाकी थी। इसलिये इस परियोजना का काम आर भ नहीं हो पाया। श्रीमती राजे ने बेहतर जल प्रबन्धन के साथ कम पानी में अधिक फसलें लेने पर जोर दिया। उन्होंने प्रदेश में नहरी तंत्र के सुदृढ़ीकरण के साथ कृषकों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के अधिकारियों को निर्देश भी दिये। बैठक में भविष्य की योजनाओं तथा लक्ष्यों के साथ आगामी 5 वर्षों में किये जाने वाले कार्यों की जानकारी दी गई। बैठक में 60 दिन की कार्य योजना के संदर्भ में प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि विभाग द्वारा फव्वारा सिंचाई पद्घति को प्रोत्साहन देने के लिये इंदिरा गांधी नहर की फलोदी लि ट योजना के तहत 500 हेक्टेयर क्षेत्र खोला जायेगा। नहरों को सोलर पैनल से ढकने के संबंध में योजना तैयार करने के बारे में भी जानकारी दी गई। कार्य योजना के तहत राज्य के प्रमुख बांधों के क्षेत्र में अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में जल संसाधन मंत्री प्रोø सांवरलाल जाट, मु य सचिव श्री राजीव महर्षि, अतिरिक्त मु य सचिव, इन्फ्रास्ट्रक्चर श्री सी.एस.राजन, प्रमुख सचिव, वित्त श्री सुभाष गर्ग, अध्यक्ष, इन्दिरा गांधी नहर परियोजना डॉø गोविन्द शर्मा, प्रमुख सचिव, सिंचित क्षेत्र विकास डॉ. ललित मेहरा, प्रमुख सचिव जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग श्री पी.एस.मेहरा, प्रमुख सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज श्री श्रीमत पाण्डेय, सचिव, आयोजना श्री अखिल अरोरा सहित विभिन्न विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

विशेषज्ञों द्वारा अधिशेष जल के बेहतर उपयोग पर प्रस्तुतीकरण

इससे पहले मु यमंत्री के समक्ष जल संसाधन के क्षेत्र में विशेषज्ञ श्री टी. हनुमन्त राव एवं श्री श्रीराम वडिरे ने राजस्थान में सिंचित क्षेत्र के विकास, जलग्रहण क्षेत्र के विकास, नदियों को पुनर्जीवित करने और उन्हें आपस में जोडऩे के संबंध में प्रस्तुतीकरण दिया। प्रस्तुूतीकरण में उन्होंने बताया कि कैसे माही एवं च बल बेसिन में उपलब्ध सरप्लस वाटर को लघु सिंचाई टैंकों के जरिये इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने वर्षा जल के बेहतर उपयोग के तरीकों एवं मिट्टी की नमी को वाष्प बनने से बचाने के तरीकों की भी जानकारी दी।

मनरेगा के संयोजन से अब ''मेरा खेत-मेरी माटी उप-योजना

ग्वालियर 02 जनवरी 2014/ कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिये प्रदेश में महात्मा गाँधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का बखूबी उपयोग किया जा रहा है। इस कड़ी में अब मनरेगा के संयोजन से प्रदेश सरकार द्वारा ''मेरा खेत-मेरी माटीÓÓ उप-योजना की शुरूआत की जा रही है। इस उप-योजना से लघु एवं सीमांत कृषक, जो मनरेगा के अंतर्गत विभिन्न श्रेणी में पात्रता रखते हैं, उनकी कृषि योग्य तथा गैर-कृषि योग्य भूमि पर हितग्राही मूलक कार्य किये जा सकेंगे।

इस महती योजना से फसलों की उत्पादकता तथा कुल उत्पादन में बढ़ोश्रारी के साथ-साथ कृषकों की वार्षिक आमदनी में भी व्यापक इजाफा होगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा शुरू की जा रही इस अनूठी उप-योजना का क्रियान्वयन किसान-कल्याण तथा कृषि विकास एवं उद्यानिकी विभाग द्वारा मनरेगा अभिसरण से किया जायेगा।

''मेरा खेत-मेरी माटीÓÓ उप-योजना में ऐसे लघु-सीमांत कृषक, जो मनरेगा जॉब-कार्डधारी हैं, उनके मालिकाना हक की कृषि भूमि तथा उनके स्वयं के निवास की भूमि पर हितग्राहीमूलक कार्य मनरेगा कन्वर्जेंस से करवाये जा सकेंगे। मनरेगा मद से किये जाने वाले कार्यों की क्रियान्वयन एजेंसी संबंधित ग्राम-पंचायत होगी। कार्य स पादन ई-मस्टर रोल पद्धति से जॉब-कार्डधारी श्रमिकों द्वारा किया जायेगा। जॉब-कार्डधारी कृषक परिवार अथवा परिवार के किसी सदस्य द्वारा स्वयं की भूमि में कार्य स पादन में स्वयं कार्य करना होगा। इसकी मजदूरी उन्हें भी अन्य श्रमिकों के समान प्राप्त होगी।

इस उप-योजना में अनुसूचित-जाति, अनुसूचित-जनजाति, आदिम-जनजाति, अधिसूचित-जनजाति और अन्य गरीबी रेखा वाले परिवार को पात्रता होगी। इसके साथ ही ऐसे परिवार, जिनकी मुखिया महिला है अथवा जिनके मुखिया नि:शक्त हैं या जो परिवार भूमि सुधार के लाभार्थी हैं, उन्हें भी उप-योजना से लाभान्वित किया जा सकेगा। इसी तरह इंदिरा आवास योजना के हितग्राही, वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत हक प्रमाण-पत्र धारक लाभान्वित हितग्राही तथा ऐसे लघु और सीमांत कृषक, जो कृषि ऋण माफी एवं राहत योजना-2008 में यथा परिभाषित हैं, ऐसे परिवार भी इस उप-योजना का लाभ ले सकेंगे।
यह काम होंगे
इस उप-योजना में कृषि योग्य भूमि पर भूमि समतलीकरण तथा भूमि सुधार, मेढ़ बँधान, कपिलधारा उप-योजना में कुआँ निर्माण, फार्म पोंड निर्माण, नाला-बँधान या लघु स्टॉप डेम, नर्सरी निर्माण, कृषि उद्यानिकी तथा कृषि वानिकी के कार्य किये जा सकेंगे। इसी तरह गैर-कृषि योग्य भूमि पर नॉडेप निर्माण, बॉयोगैस निर्माण, बर्मी क पोस्ट, गाय-भैंस, बकरी, सुअर, मुर्गीपालन के लिये शेड निर्माण जैसे कार्य किये जा सकेंगे। इसी प्रकार राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से संबद्ध स्व-सहायता समूहों के लिये बॉयो खाद एवं कृषि उत्पाद को रखने के लिये छोटे गोदाम तथा स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित आजीविका गतिविधियों के लिये सामुदायिक शेड का निर्माण करवाया जा सकेगा।

राज्य सरकार ने पंचायतों के विश्रीय अधिकार बढ़ाये

श्योपुर 02 जनवरी 2014 पंयायत राज संस्थाओं के बेहतर संचालन के लिये राज्य सरकार ने उनके विश्रीय अधिकारों में इजाफा किया है। इसी कड़ी में ग्राम पंचायतों को 15 लाख रूपए तक विश्रीय अधिकार सौंपे गए हैं। विदित हो अब तक ग्राम पंचायतों को 5 लाख रूपए तक के विश्रीय अधिकार थे, जिसमें 10 लाख की वृद्धि की गई है। ग्राम पंचायतों में स्वयं के प्रशासनिक भवनों की आवश्यकता को देखते हुए हर पंचायात को अपना स्वयं का भवन मुहैया कराने के लिये भी राज्य सरकार ने पूरी शिद्दत के साथ कदम उठाए हैं। कुशाभाऊ ठाकरे ग्राम पंचायत भवन निर्माण योजना के तहत भवन विहीन ग्राम पंचायतों में सर्व सुविधायुक्त भवन बनाये जा रहे हैं। योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाने के लिये प्रत्येक ग्राम पंचायत को ई-पंचायत से जोडऩे के लिये हर ग्राम पंचायत को एक लाख रूपए का बजट उपलब्ध कराया गया है। प्रदेशभर में भवन विहीन 3634 ग्राम पंचायतों में 2776 कुशाभाऊ ठाकरे ग्राम पंचायत भवन 10.85 लाख रूपए प्रति भवन की लागत से स्वीकृत किए गए है। प्रत्येक जिले में एक सामुदायिक सह प्रशिक्षण भवन रूपए 50 लाख की लागत से स्वीकृत किया गया हे। प्रत्येक जनपद पंचायत को 10 लाख के मान से 313 जनपद पंचायत भवनों के लिये राशि स्वीकृत दी गई है। पंचायतों को और ज्यादा सशक्त बनाने के लिये राज्य सरकार ने महिलाओं का प्रतिनिधित्व भी बढ़ाया है। पंचायत राज संस्थाओं में महिलाओं के लिये 50 प्रतिशत पद आरक्षित किए गए हैं। इसी तरह ग्राम पंचायत सचिव सेवा एवं भरती नियम लागू किए जाकर जिला कैडर बनाया गया है। पंचायत संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों के मानदेय में पाँच गुना तक वृद्धि की गई है।

ढाई लाख रूपये से अधिक वार्षिक आय वाले सेवा निवृत शासकीय सेवकों का आयकर कटोत्रा होगा

इंदौर। इंदौर जिले में 30 सितम्बर,2010 के पश्चात शासकीय सेवा से सेवा निवृश्र तथा परिवार पेंशनरों जिनकी वार्षिक पेंशन ढाई लाख रूपये से अधिक है से आयकर कटोत्रा किया जाएगा।
वरिष्ठ कोषालय अधिकारी ने बताया कि ऐसे पेंशनर 20 जनवरी,2014 तक अनिवार्य रूप से इनकम टेक्स रिटर्न (2013-14), कर निर्धारण 80 सी/डी की छायाप्रति सहित वर्ष 2014-15 हेतु आय का गणना पत्रक जिला कोषालय में जमा करें। इस तिथि के पश्चात कर निर्धारण वाले पेंशनरों के जनवरी,2014 की पेंशन जो फरवरी में देय होगी से नियमानुसार आय कर टीडीएस का कटोत्रा कर लिया जाएगा।

लंबित पेंशन प्रकरणों के लिए संभाग के सभी जिलों में शिविर १० और ११ को

-जबलपुर२-जनवरी-२०१४ संभागायुक्त दीपक खांडेकर के निर्देशानुसार सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारियों के लंबित पेंशन प्रकरणों के निराकरण हेतु संभाग के सभी जिलों में १० और ११ जनवरी को शिविर लगाये जायेंगे। इन शिविरों में लंबित प्रकरणों का निराकरण किया जाएगा। संभागायुक्त ने इस संबंध में संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर, कार्यालय प्रमुखों, जिला पेंशन अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।
SHARE
    Your Comment

0 comments:

Post a Comment