मेनका: अन्दाज तीखा, मगर सवाल सही

क्या माँ और चाची के सवालो से सीख लेगें राहुल?

बोलने में समय भले ही ल बा लगा हो गांधी परिवार की छोटी बहु को, मेनका का मंच जो भी रहा हो,मगर उन्होंने जो भी कहा, महान भारत देश की प्रतिष्ठा और गांधी परिवार की प्रतिष्ठा के इतिहास को ध्यान में रखकर ही शायद कहां है, जिसे कांग्रेस और कांग्रेस आलाकमान सहित राहुल को पूरी संवेदनशीलता से लेना चाहिए। अगर यो कहें,कि मेनका ने देश के आम आदमी की कांग्रेस के प्रति सोच और भावना को खुले मंच से देश के सामने रखा है तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी।

गत दिनों इलेक्ट्रोनिक मीडिया के एक संवाददाता से उन्होंने जो कुछ भी कहा हो सकता है वह अक्षरश: सही है। फिर इसमें गलत भी क्या है? अगर मेनका के बयान को उनके भाजपा नेता होने की मजबूरी भी मान ले तो भी उन्होंने सच ही कहाँ है। जो भी सवाल उन्होंने विगत 10 वर्षो के कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार के मंत्रियों को लेकर दागे है अगर वह सच न होते तो विगत विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की यह हालात न होती। भले ही उन्होंने भाजपा नेता होने के नाते कॉग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया या राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल की क्षमताओं और उनके नेतृत्व पर सवाल उठाये हो,यह सवाल देश के  राजनैतिक दलो को अपनी-अपनी रोटिया सेकने वाले हो, या फिर स्वार्थ बस चाटूकारिता की राजनैतिक करने वालो को तो सोने में सुहागा हो सकते है और इस बीच उनकी राजनीति में चार चांद लग वह चमक भी सकती है। मगर मेनका द्वारा उठाये सवाल,इस देश के सवां अरब से अधिक लेाग और देश के प्रतिष्ठा पूर्ण परिवार के सुनहरे भविष्य को बचाने आवश्यक थे। जिन्हें विगत वर्षो में न तो कोई कद्दावर कांग्रेसी उठा पाया और न ही,स्वार्थो के चलते,स्वार्थियों ने बताया। क्योकि इतना कड़वा सच कहने की किसी में हि मत कहाँ? इतना कड़वा सच या तो,सच्चा देश भक्त या फिर कुर्बानियों का इतिहास लिये कोई गाँधी परिवार का सदस्य ही बता सकता है।

आज जितना कड़वा सच मेनका ने देश के सामने रखा है,शायद कभी इससे कई वर्षो पूर्व स्व.राजीव गाँधी, बाद में सिर्फ कांग्रेस आलाकमान श्रीमती सोनिया गाँधी ने राहुल को जयपुर स मेलन में समझाते हुये बोला था कि सत्ता विष के समान होती है और आज एक बार फिर से श्रीमती सोनिया गाँधी ने राहुल को प्रधानमंत्री पद के उ मीदवार की घोषणा न कर जो सत्य का रास्ता चुना है उसे सिर्फ और सिर्फ श्रीमती सेानिया गाँधी से बेहतर कौन समझ सकता है? हो सकता है,भाई लोग इस पर भी नफानुकसान के कयास लगा। सवाल खड़े कर सकते है मगर सत्य यही है।

सच तो यह है, कि जो परिवार देश के लिये कुर्बानियाँ दें,इतना कड़वा घूंट राजनीति का पीता आया है इतना सच केवल और केवल कोई देश भक्त या फिर गाँधी परिवार की प्रतिष्ठा को ध्यान में रखने वाला ही बोल सकता है।

बरना स्व.राजीव जी के बाद कांग्रेस के अन्दर और किसी ने क्यों 20 वर्षो से नहीं बोला?
कारण साफ है कि काँग्रेस में सत्ता के स्वार्थी और चाटूकारों का मजमा लगा है जो विगत 10 वर्षो से जमकर मलाई काट सत्ता सुख उठाने में लगे है अब जब बात कॉग्रेस जैसे कुर्बानियों पर खड़े संगठन और स्वयं गाँधी परिवार की प्रतिष्ठा पर आ रुकी है और लेाग आज अपने स्वार्थो और सत्ता में माल काट कॉग्रेस और गाँधी परिवार को दांव पर लगाने से नहीं चूक रहे।

ऐसे में गाँधी परिवार की छोटी बहु और राहुल की चाची ने यह कह दिया कि अली बाबा और चालीस चोर,मंत्रियों ने किस तरह से सोने की चिडिय़ा देश को लूटा है। विगत 10 वर्षेा से वे ही तो सरकार चला रहे है। भले ही प्रधानमंत्री जो भी हो और मोदी शेर है। उनके आगे राहुल सिर्फ चिडिय़ा 500 सौ नहीं 5000 करोड़ खर्च कर ले, कॉग्रेस का अब कुछ नहीं होने वाला आदि आदि ।

अगर इन सवालों को सत्यता की कसौटी पर पूरी ईमानदारी से परखा जाये तो मेनका ने वहीं सच कहां जो सत्ता सुख भोगने वाले हर कांग्रेसी को आलाकमान से कहना चाहिए और आलाकमान को भी ऐसे कड़वे वचन सुनने की आदत होनी चाहिए। अगर अब भी कांग्रेस आलाकमान नहीं चेता तो सत्ता सुख भोग मलाई लूटने वाले इसी तरह कॉग्रेस को रसा तल में ले जाते जायेगें।
अगर सत्ता विष के समान हो सकती,सत्य कड़वा जहर तो फिर स्वार्थी चाटूकार विष कन्या विषधर क्यों नहीं? सोचना होगा राहुल को?

राष्ट्रपति कल जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय में दसवां नेहरु यादगार व्याख्यान देंगे
नई दिल्ली।  राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी कल (१८ जनवरी, २०१४) जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में च्नेहरू एवं संसदीय लोकतंत्रज् विषय पर दसवां नेहरू यादगार व्याख्यान देंगे। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय ने इस व्याख्यान श्रृंखला की शुरूआत अगस्त २००३ में की थी। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के नाम पर विश्वविद्यालय का नाम है और उन्हीं की याद में यह व्याख्यान आयोजित किया जाता है।

छत्तीसगढ़ की सिंचाई परियोजनाओं के लिए जल्द मिलेगी ६४० करोड़ रूपए की केन्द्रीय सहायता
रायपुर १७ जनवरी २०१४ छत्तीसगढ़ के जलसंसाधन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कल नई दिल्ली में केन्द्रीय जलसंसाधन मंत्री श्री हरीश रावत से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ की सिंचाई परियोजनाओं के लिए केन्द्रीय सहायता के लंबित प्रकरणों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ की सिंचाई परियाजनों की लगभग ६४० करोड़ रूपए की केन्द्रीय सहायता अब तक लंबित है। इस पर केन्द्रीय जलसंसाधन मंत्री श्री रावत ने सम्बंधित अधिकारियों को तत्काल लंबित सहायता राशि जारी करने के निर्देश दिये। श्री अग्रवाल ने कहा कि, छत्तीसगढ़ में लगभग ३२ प्रतिशत आबादी जनजातियों की है तथा राज्य का ४४ प्रतिशत भाग वनों से आच्छादित है। यहां का अधिकांश क्षेत्र वामचरम पंथ से प्रभावित है। जनजातीय क्षेत्रों के तीव्र विकास के लिए आवश्यक है कि, किसानों को कृषि कार्य के लिए पर्याप्त सिंचाई के साधन सुलभ कराये जायें। उन्होंने बताया कि, वर्ष २०१३-१४ में राज्य की विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं जैसे केलो परियोजना, मनियारी परियोजना, सुतियापाट मध्यम परियोजना, लद्यु सिंचाई योजना, बाढ़ प्रबंधन व अन्य योजनाओं के अतंर्गत लगभग ६४० करोड़ की केन्द्रीय सहायता लंबित है। राशि नहीं  मिलने से न केवल परियोजनाओं के पूर्ण होने में विलंब हो रहा है बल्कि उस क्षेत्र के विकास कार्य भी काफी प्रभावित हो रहे हैं। इस संबंध में केन्द्रीय मंत्री ने जल्द ही लंबित राशि जारी किये जाने का आश्वासन दिया।

राजस्थान में राज्यसभा के लिए मतदान 7 फरवरी को
जयपुर, 17 जनवरी। प्रदेश में राज्य सभा की तीन सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव 7 फरवरी,2014 को होगा। प्रदेश में तीन राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल 9 अपे्रल,2014 को पूरा होने जा रहा है।
अतिरिक्त मु य निर्वाचन अधिकारी डॉ. रेखा गुप्ता ने बताया कि चुनाव के स बन्ध में 21 जनवरी को अधिसूचना जारी होगी। नामांकन की अंतिम तारीख 28 जनवरी होगी और         29 जनवरी को नामांकन पत्रों की छंटनी का कार्य होगा तथा 31 जनवरी तक नाम वापस लिये जा सकेंगे। सात फरवरी को प्रात: 9 बजे से सायं 4 बजे तक मतदान होगा और उसी दिन सायं 5 बजे से मतों की गिनती का कार्य शुरू होगा। दस फरवरी तक स पूर्ण चुनाव प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

मुख्यमंत्री का कानपुर भ्रमण कार्यक्रम निरस्त
लखनऊ जनवरी, २०१४ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव का कानपुर भ्रमण कार्यक्रम निरस्त हो गया है। यह जानकारी देते हुए एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री आज कानपुर के लिए प्रस्थान कर गए थे, किन्तु उन्नाव के पास बारिश और ओला वृष्टि के फलस्वरूप विजि़बिलिटी खराब होने के कारण उन्हें लखनऊ वापस लौटना पड़ा।

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