अहंकारी भाषा,बॉडी लेंग्यूज,ने डुबोई लुटिया,तीनों राज्यों में सूपड़ा साफ तीरंदाज ......?

व्ही.एस.भुल्ले/चमत्कारी देश में एक और चमत्कार म.प्र. में शिव, तो राजस्थान में बसुन्धरा सरकार,किस कदर आम मतदाता ने कांग्रेस को कूटा है।

यह माजरा देख हारा तो एन्टीना ही काम करना बन्द कर लिया। घट घटे पर आ टिके छत्तीसगढ़ वाले भाई रमन तो बच लिये मगर जो दुर्गति आप ने दिल्ली में दोनों ही प्रमुख राजनैतिक दलो की है,वह देखते ही बनती है। भाजपा तो 32 सीटे हासिल कर बच ली मगर दिल्ली की दिल वाली जनता ने कांग्रेस को अर्स से लाकर फर्स पर पटक दिया, ऐसी दुर्गति देख मने तो अपनी छाती कूटना चाहूं। 

भाया तू ही बता कै.नहीं किया हारी महान पार्टी ने इस देश के उन करोड़ों दीन-हीन, गरीब, मजदूर,किसान को, दिल्ली में हाड़ तोड़ विकास पर ऐसी दुर्गति मने तो समझ से बाहर है। कौन नहीं जनता हारी दिल्ली सरकार ने दिल्ली ही नहीं देश की 100 करोड़ जनता की बिल्कुल ईमानदारी पूरी निष्ठा से सेवा की है। पंचायती एवं नगरीय राज,सूचना एवं संचार क्रान्ति,सड़के,बांध गाँव-गाँव गली मोहल्लों में बिजली,रोजगार,शिक्षा,स्वास्थ जज्जा बच्चा,का पोषण लाखों महिला पुरुषों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उस पर से सूचना का अधिकार, भ्रष्टाचारियों पर कड़ी कार्यवाहीं और अपराधियों के खिलाफ स त कानून सब तो किया, फिर ऐसी कौन सी गाज आन गिरी जो हारे दल का ये हाल हारे मतदाताओं ने किया।

अब हारे प्रदेश में ही देखों कभी सड़कों पर पैदल,घूम गुजारा करने वालो ने ऐसा कौन सा महान कार्य किया? जो करोड़ों में खेल मंहगे मंहगे लग्झरी वाहनों में बैठ प्रदेश की सड़को पर फर्राटे भर रहे है। और छाती ठोक आम गरीबों का राशन तेल,कुपोषितों का पोषण और मध्यायान भोजन तक न छोड़ सरेयाम हजम कर रहे है जिनकी सरकारों के अधिकारी तो अधिकारी छापों में बाबुओं के ही यहां करोड़ों निकल रहे है।

उनकी तो हारी जनता ने कालर तक न पकड़ी और हारे को इतना बड़ा दण्ड दिया कि अब हार का जबाव देने के बजाये हारे दल के बड़े बड़े सूरमा,चाड़क्य मुंह छिपाते फिर रहे है कोई भ्रष्टाचार तो कोई मंहगाई तो कोई गुटीय राजनीति को हार का कारण गिना रहे है।

आखिर मने कै करु हारी समझ में तो कुछ ने आवे अब तू ही भाया आखिर हमारी दुर्गति का कारण कै है,मने बता। हो सके तो सारे देश को सुना तब तो चल जायेगी,बरना तीन माह बाद लेाकसभा है, हारे दल की निष्ठा ईमानदारी की सेवा यूं ही कोणियों के भांव बिच जायेगी।

ौये- चुप कर मुंये कै थारे को मालूम कोणी दिल्ली की राजनीति में आग लगी पढ़ी है।
आप की सरकार बनेगी या दिल्ली दोबारा लड़ेगी किसी को नहीं पता क्योकि पहली बार अंहकारियों की लग्गी आपस में अड़ी है और देश की जनता दिल्ली के सिंहासन पर कौन बैठेगा यह देखने खड़ी है।
भैया- तू छोड़ दिल्ली,बिल्ली की बाते। कहते है दिल्ली तो वैसे भी दिल वालो की है। वो तो मुआ काड़ू ही है जो मुंह बजाता है,फिर रहा है, कि दिल्ली अब दिल नहीं, पैसे वालो की है। मने तो हारी दुर्गति पर बता और गर थारे पास कोई जुमला हो तो हाथों हाथ सुना।
भैये- तने सुनना चाहे तो सुन इतिहास गवाह है चापलूस,चाटूकारों के किस्सों का। वैसे भी कहावत है,कि हकीम को दवा देने से पहले मर्ज का इल्म होना आवश्यक है। कै थारे को मालूम कोणी हारे देश में लेाकतंत्र अर्थात जनतंत्र है फिर राजा कौन हुआ ऐसे में सच जबाव यह है,कि राजा जनता ही है। वहीं सत्ता में बैठाती है, और वहीं सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाती है। रहा सवाल थारे दल की सेवा और साधन जुटाने का तो थारा दल देश और देश की जनता की सेवा और साधन जुटाते-जुटाते यह भूल गया कि वह जनता का नौकर है। इस बीच दल के नेतृत्व वाली सरकार और नेता चापलूस,चाटूकारों से घिर अंहकार में डूब लिये। जिसके चलते उसकी भाषा शैली,और बॉडी लेंग्यूज भी नौकरों के बजाये राजाओं जैसी हो ली। कारण है,थारे दल की र्दुगति।
भैया- ये तो भारत की जनता महान है जिसने 10 वर्षो से खूब थारे दल को झेला। और दल ने नौकरों की बजाये मालिक होने का दम पेला। कहते है,नौकर किसी का भी हो,वह कितना ही हुनरवान, कमाऊ हो,इसकी सेवा कितनी ही अच्छी वफादार हो अगर वह मालिक या अपने राजा को एक दो दिन नहीं पूरे 10 वर्ष तक अपमानित करे तो वह भी उसे चलता कर देगा। कहते है गर कुत्ता भी मालिक को काटले वो भी किसी राजा को तो सरकलम होते देर नहीं लगती।
मगर अब राज तंत्र नहीं लेाकतंत्र है,सो सत्ता से बाहर का रास्ता ही लेाकतंत्र में नौकरों को सबसे बड़ा दंण्ड है।
भैये- तो ऐसा म.प्र. छत्तीसगढ़ में क्यों नहीं हुआ? यहां कि 10 साला सरकारों का त ता पलट क्यों नहीं हुआ? जबकि छत्तीसगढ़ में हारे ढेरन बांधे नेताओं को नस्कलिस्लयो ने घेर मौत के घाट उतार दिया। वे भी तो आम जनता के लिये संघर्षरत थे। फिर ऐसा क्या हुआ।
ौया-तू छोड़ छत्तीसगढ़ को वहां तो जो हुआ सो हुआ रहा सवाल थारे प्रदेश म.प्र का सो जनता का राजकोष कितना बड़ा या खजाना किस कदर लुटा किसे नहीं मालूम मगर सेवा का स मान फिर भी सत्ता सीनों को प्रचन्ड बहुमत से मिला। कारण सेवक द्वारा भाषा शैली बॉडी लेंग्यूज को सेवको की भांति अपना मध्यप्रदेश की जनता अर्थात राजा के लिये यहीं बताता रहा कि वह राजा नहीं सेवक है,भले ही प्राकृतिक स पदा में डग डग,पग पग कितना ही टांका क्यों न लगा हो। मगर जनता राजा की शान में गुस्ताखी नहीं हुई सेवक 10 वर्ष तक जनता को भगवान स्वयं सेवक पुजारी बताता रहा। राजाओं की समय पर आरती,समय पर परसादी और समय से भण्डारे दशियों वर्ष म.प्र. में चलते रहे। मजाल क्या जो सेवक की भाषा बॉडी लेंग्यूज में जरा सा भी अंहकार, बगावत झलकी हो। ऐसा नहीं कि म.प्र. के मन्दिर में भगवान अर्थात जनता राजा की सेवा आरती होती रही,अब्बल प्रदेश में आने जाने वाले जोगी, बाबा, मंहतों और प्रदेश के ही विरोधी मण्डेलश्वरों को भी उनके हक के हिसाब से दक्षणा प्रसादी बटती रही। व्यवस्था के सेवकों ने भी मौका देख समय वे समय सेवादारों के संरक्षण में घोषित अघोषित तौर पर खूब माल उलीचा अब ऐसे में प्रदेश के भगवान राजाओं ने तीसरी मर्तवा मौका दिया है तो हर्ज ही क्या?
भैये- मैं समझ लिया आखिर माजरा क्या है? थारे प्रदेश में भी चापलूसी,चालाकी चाटूकारिता ही जीत हो ली, न कि सरकार की।


एनटीपीसी कायमकुलम ऊर्जा संरक्षण के लिए पुरस्कृत

नई दिल्ली। एनटीपीसी कायमकुलम कल शाम को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार २०१३ में ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए थर्मल पावर स्टेशन श्रेणी (गैस निकाल दिया) में २ पुरस्कार जीता. श्री सी.वी. सुब्रमण्यम, महाप्रबंधक एनटीपीसी - कायमकुलम माननीय से पुरस्कार प्राप्त किया. भारत के राष्ट्रपति, श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विद्युत राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की उपस्थिति में श्री प्रणव मुखर्जी. श्री आर आर मोहंती, सीनियर मैनेजर (एचआर) श्वक्र॥क्त द्वितीय, एनटीपीसी इस अवसर पर सर्वश्रेष्ठ राज्य नोडल अधिकारी पुरस्कार प्राप्त किया.

भोपाल इंटरसिटी ट्रेन के समय परिवर्तन की मांग व स्थान परिवर्तन को लेकर दिया सांकेतिक धरना

म.प्र. ग्वालियर शिवपुरी। बीते कुछ दिनों से कै.महाराजा माधवराव सिंधिया परमार्थिक न्यास को ज्ञात हुआ कि शिवपुरी जिले के लिए महत्वाकांक्षी ग्वालियर-भोपाल से जुडऩे वाली भोपाल इंटरसिटी ट्रेन का मार्ग परिवर्तन किया जा रहा है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कै.परमार्थिक सिंधिया न्यास ने स्थान परिवर्तन को रोकने व समय परिवर्तन की मांग पुरजोर तरीके से उठाई और विरोध स्वरूप एक दिवसीय सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया जिससे अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़कर भोपाल इंटरसिटी का स्थान परिवर्तन ना किया जाए और समय में बदलाव जरूर हो ताकि रेल प्रबंधन को पर्याप्त हो और यात्रियों को भी सुगम सुविधा उपलब्ध हो। इस ट्रेन के समय परिवर्तन की मांग अनुसार अलसुबह 4:15 बजे ग्वालियर से चलाया जाए तो 10:30 बजे भोपाल पहुंचेगी और सायं 4 बजे भोपाल से चलाया जाए तो 10 बजे रात्रि शिवपुरी पहुंचते हुए ग्वालियर पहुंचेगी। जिससे यात्रियों को पर्याप्त सुविधा और व्यापार के लिए आवागमन भी हो सकेगा। इस संबंध में ज्ञापन एडीएम दिनेश कुमार जैन को सौंपा गया। कै.महाराजा माधवराव सिंधिया स्मृति परमार्थिक न्यास के रामकुमार शर्मा, जगमोहन सिंह सेंगर, रामकुमार सिंह यादव, शिवप्रताप सिंह कुशवाह, अब्दुल रफीक खान अप्पल, सफदर बेग मिर्जा, खलील खान, विष्णु अग्रवाल, विष्णु गोयल, मुकेश राठौर, केबी श्रीवास्तव, संजय चतुर्वेदी ने संयुक्त रूप से सांकेतिक धरना को संबोधित करते हुए बताया कि भोपाल-ग्वालियर इंटरसिटी ट्रेन को जनता की मांग के अनुरूप केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने अथक प्रयासों से शुरू की थी ओर इससे ना केवल यात्रियों की सं या में इजाफा हुआ बल्कि शहर के व अन्य नगरवासियों के लिए व्यापार में भी लाभदायक साबित हुई जिसके चलते आज शिवपुरी,गुना,अशोकनगर,मुंगावली आदि नगर सीधे ग्वालियर और भोपाल जुड़े, जहां ना केवल इन्हें व इनके व्यापार को गति मिली बल्कि आज इस ट्रेन के द्वारा यह अपना व्यवसाय आगे और बढ़ाने के लिए भी कार्यरत है यही हाल यात्रियों का है शिवपुरी से भोपाल तक गढ्ढोंयुक्त सड़क से निजात पाने का एक माध्यम भोपाल इंटरसिटी है ऐसे में कई लोगों के लिए यह ट्रेन ना केवल जीवनदायिनी है बल्कि आने-जाने का सुगम साधन है। शिवपुरी,गुना,अशोकनगर,मुंगावली, शिपुरी होकर चलने वाली ग्वालियर-भोपाल इंटरसिटी की सौगात देने वाले केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को इस संबंध में पत्र लिखकर न्यास ने अनुरोध किया है कि भारतीय रेल विभाग वर्तमान में भोपाल इंटरसिटी ट्रेन जो जनता के लिए चल रही है उसे बंद करने का प्रयास किया जा रहा है जबकि प्रतिदिन इस ट्रेन से हजारों यात्री यात्रा करते है ऐसे में यदि टे्रन का समय परिर्वतन कर दिया जाए तो भी यह लाभकारी होगा अन्यथा की स्थिति में यदि ट्रेन का मार्ग परिवर्तन किया गया तो इसका विरोध किया जाएगा।
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