कल्याणकारी योजनाओं का कबाड़ा

ग्वालियर।  शासन और सरकारे कल्याण के लिये कितना ही सर पटक ले ध्वस्त व्यवस्था में यहीं परिणाम मिलने वाले है। समाज और व्यवस्था  की रग-रग में खुलेयाम भ्रष्टाचार ने शायद ऐलान कर रखा है कि किसी भी सरकार में दम है तो वह रोक ले, भ्रष्टाचार तो यूं ही फलने-फूलने वाला है।
ये अलग बात है कि लेाकपाल लाने वाले अन्ना ने मौजूद बिल से पचास फीसदी भ्रष्टाचार कम होने की उ मीद लगा ली है। मगर लगता नहीं कि लेाकपाल के रुप में व्यवस्था का एक ओर थानेदार भ्रष्टाचार को रोक पायेगा।
बड़ी-बड़ी योजना और विकास हों,दर किनार कर अगर आम आदमी के लिये बनी योजनाओं के धरातल पर जाये तो ढांक के चार-पाँच ही नजर आयेंगें। गरीबों को मिलने वाले राशन,तेल पर चल रहे,सुनियोजित ढांके को देश वासी भूल भी जाये तो इस स्कूलों में अध्यनरत बच्चों को मिलने वाला मध्ययान भोजन, गरीब कुपोषित बच्चों को बटने वाला पोषण आहार और गर्भवती माताओं को मिलने वाली शासकीय सहायता भी लेाग व्यवस्था के संरक्षण में हजम करने से नहीं चूकते।
इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए कि शासन की तमाम व्यवस्थाओं में लेाकतांत्रिक व्यवस्था सर्वोपरि है। मगर र्दुभाग्य हमारा कि हमारे देश में लेाकतांत्रिक व्यवस्था होने के बावजूद भी हमारे लेाग हैरान परेशान है, और शासन सरकारे चिंतित। अगर यो कहें कि हमारे व्यवस्था में बेईमान का बोल वाला और भले का मुंह काला तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी। ऐसे ही प्रकरण जब तब देश वासियों के सामने आते रहते है। जिन पर चर्चा ही नहीं आरोप-प्रत्यारोप भी होते है। मगर परिणाम नहीं मिलते।
भारत के एक राज्य मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले को ही ले,तो यहां शासन की महात्मा गांधी, रोजगार गारंटी योजना,पोषण आहार,मध्ययान भोजन को देखे तो बहुत कुछ स्पष्ट नजर आता है। जिसमें हाल ही में म.प्र.ग्वालियर के एक महत्वपूर्ण दैनिक समाचार पत्र में छपी खबर पर संज्ञान ले तो खबर का सार है,कि पचास फीसदी फन्डे में झूलती योजना जिस मध्ययान भोजन योजना के बारे में दैनिक समाचार पत्र ने खबर प्रकाशित की है उसका मजमून था कि विगत डेढ़ वर्षो से एक ऐसे आंकड़े के आधार पर मध्ययान भोजन वितरण हो रहा है, जो संभावित थे। अगर संभावनाओं के आधार पर कोई योजना चलती है, तो वह सबसे बड़ा झूठ। योजना आंकड़ों के आधार पर पूर्ण परिक्षण पश्चात बनती और चलती मगर यहां तो संभावनाओं से  इतर कुछ भी नहीं।
बहरहॉल जो भी हों,अगर कल्याणकारी योजनाओं का आलम यह है,तो अंदाजा लगाया जा सकता है,कि म.प्र. में जनकल्याणकारी योजनाओं का आलम क्या है भले ही जनता ने दरिया दिली दिखा सरकार को तीसरी बार सेवा का अवसर दिया हो। मगर मु यमंत्री की मंशा ने फिलहॉल तो साफ कर रखा है,कि किसी भी स्तर पर अलाली और भ्रष्टाचार बर्दास्त नहीं किया जायेगा। भले ही केन्द्र सरकार अभी भी लेाकपाल सहित अपनी आगे की रणनीति में जुटी हों,जिसके परिणाम अगर अमूलचूल भले हो, मगर वह आज भी आम नागरिक से कोसो दूर नजर आती है।

अनुसंधान सहयोग के लिए एनटीपीसी और केएफडब्ल्यू जर्मनी स्याही समझौता


नई दिल्ली।  एनटीपीसी लिमिटेड ने एनटीपीसी से यूरो ५ लाख और मिलान योगदान की एक अनुदान के माध्यम से भारत जर्मनी अनुसंधान सहयोग के तत्वावधान में नेत्रा पर सौर थर्मल और फोटोवोल्टिक लैब की स्थापना के लिए केएफडब्ल्यू जर्मनी के साथ वित्तपोषण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. समझौता ज्ञापन पर श्री ए.के. झा निदेशक (तकनीकी), एनटीपीसी और अन्य की उपस्थिति में श्री थॉमस जोसेफ, कार्यकारी निदेशक, एनटीपीसी नेत्रा, श्री पीटर ॥द्बद्यद्यद्बद्दद्गह्य, निदेशक (केएफडब्ल्यू) और श्री एंड्रियास ञ्जद्धद्गह्म्द्वड्डठ्ठठ्ठ, उप निदेशक (केएफडब्ल्यू) द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे आज नई दिल्ली में एनटीपीसी और केएफडब्ल्यू से अधिकारी शामिल हैं.

त बाकू नियंत्रण कानून का हो प्रभावी क्रियान्वयन- कलेक्टर श्री वरवड़े

भोपाल: 18 दिस बर 2013 जिले में त बाकू नियंत्रण कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कलेक्टर श्री निशांत वरवड़े की अध्यक्षता में आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में एक जरूरी बैठक आयोजित की गई । बैठक में सीईओ जिला पंचायत श्री राकेश श्रीवास्तव, मु य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ0 पंकज शुक्ला, स्वास्थ्य विभाग के साथ साथ जिला प्रशासन, नगर निगम, शैक्षणिक संस्थाओं और स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधिगण मौजूद थे । बैठक में कलेक्टर श्री वरवड़े ने अधिकारियों को ताकीद की कि 18 वर्ष से कम उम्र वालों को त बाकू बेचना एवं खरीदना अपराध है इसलिए भारतीय त बाकू नियंत्रण कानून के तहत इस पर रोक लगाई जाये और भारतीय त बाकू नियंत्रण कानून का पालन जिले में कड़ाई से किया जाना सुनिश्चित करें ।  कलेक्टर श्री वरवड़े ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस कानून के तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करते पाये जाने पर संबंधित व्यक्ति से दो सौं रूपये दण्ड के तौर पर लिये जाये । उन्होंने शैक्षणिक स्थानों के आसपास से त बाकू उत्पाद बेचने वाली दुकानों को हटाने के भी अधिकारियों को निर्देश दिए ।

पत्रकारों के अधिमान्यता कार्डों के नवीनीकरण का कार्य प्रारंभ

इंदौर, 18 दिस बर,2013/ मध्यप्रदेश शासन के जनस पर्क विभाग द्वारा राज्य स्तर, जिला स्तर एवं तहसील स्तर पर जिन पत्रकारों को अब तक अधिमान्यता प्रदान की गई है, उन सभी के कार्डों की अवधि 31 दिसंबर 2013 को पूरी हो रही है।  इसलिये अधिमान्यता कार्डों के नवीनीकरण का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। इस हेतु निर्धारित प्रपत्र एवं क प्यूटर शीट को विधिवत भरने के पश्चात उसे मंगलवार 24 दिसंबर 2013 को अपरान्ह 4 बजे तक जमा करने का अनुरोध इंदौर जिले के समस्त अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों से किया गया है। नवीनीकरण हेतु निर्धारित किये गये नवीन प्रपत्र एवं क प्यूटर शीट की प्रतियां इंदौर जिले के सभी अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों को प्रेषित कर दी गई है। जिन पत्रकारों को नवीन प्रपत्र एवं क प्यूटर शीट प्राप्त न हुये हो, वे कार्यालयीन दिवसों एवं कार्यालयीन समय में रीगल चौराहा स्थित संभागीय जनस पर्क कार्यालय इंदौर से प्राप्त कर सकते हैं।

विभागीय बैंक खाते में एक माह की आवश्यकता से अधिक राशि जमा न रखने के निर्देश

जबलपुर 18 दिस बर  2013 राज्य शासन ने विभागों को विभागीय खाते में एक माह की आवश्यकता से अधिक राशि जमा न रखने के निर्देश जारी किए हैं। विभागों से कहा गया है कि विभागीय बैंक खाते में राशि जमा करने के लिए राशि के आहरण संबंधी कोषालय में प्रस्तुत किए जाने वाले देयक के साथ संबंधित बैंक खाते की पासबुक की नवीनतम प्रविष्टि की फोटो प्रति तथा इस आशय का प्रमाण पत्र भी संलग्न करें कि राशि आहरण के पश्चात बैंक खाते का शेष एक माह की आवश्यकता से अधिक नहीं है यह निर्देश इस तथ्य के ध्यान में आने के बाद दिया गया है कि कतिपय आहरण-संवितरण अधिकारियों द्वारा ई-भुगतान के माध्यम से शासन से अनुमति प्राप्त कर खोले गए विभागीय खातों में तात्कालिक आवश्यकता से अधिक राशि आहरित कर जमा की जा रही है।
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