कहीं हाईजैक तो नहीं जनपथ............?

व्ही.एस.भुल्ले/ वर्तमान हालात देश में देश के सबसे बड़े राजनैतिक दल,जिसको अनगिनत कुर्बानियों से खड़ा किया गया है, जिसे खून,पसीना शहादतों ...

व्ही.एस.भुल्ले/ वर्तमान हालात देश में देश के सबसे बड़े राजनैतिक दल,जिसको अनगिनत कुर्बानियों से खड़ा किया गया है, जिसे खून,पसीना शहादतों से सीचा गया है। एक ऐसा दल, जो राष्ट्र के लिये पूर्व आक्राता अंग्रेजो  से जूझ देश को आजाद कराने में सफल रहा तथा वर्तमान में सत्ता के लिये लालाहित नव आक्राताओं से वर्तमान में जूझ रहा है।
जो महान देश का इतिहास पलट, सत्तासीन हो, देश की सेवा करना चाहते है मगर आज भी अधिकांश देश वासियों की नजर कॉग्रेस जैसे महान दल पर है जिसका नेतृत्व कभी स्व. सुभाष बाबू,गांधी,नेहरु,इन्दिरा,राजीव गांधी ने किया। और वर्तमान में भारतीय पर पराओं का पालन कर श्रीमती सोनिया गांधी कर रही है। मगर हाल ही में आये चार राज्यो के विधानसभा चुनाव परिणामों के चलते देश ने, देश में फिलहॉल एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया हैै। कि वह आखिर किस पर विश्वास करे? क्या एक ऐसे युवा पर जिसने गांव-गांव ही नहीं, देश की कई चौपालों को महीनों छाना है। सड़क पर बैठ देश की नबज को पहचाना है,यह वहीं युवा है,जिसने कई मुद्दों अपने ही दल की सरकार के निर्णय पर खुली बगावत कर पूरी निर्भीकता के साथ अपनी बात देश के सामने रखी।

मगर जिस तरह का व्यवहार उनकी टीम के थिंकटेकों द्वारा देश वासियों और कांग्रेस जैसे महान संगठन के साथ किया है। देश में यह आम चर्चा है कि कुर्बानियों पर खड़ी कांग्रेस की ऐसी र्दुगति क्यों? एक भले नेतृत्व से ऐसा दुराग्रह क्यों? क्या कहीं जनपथ और अकबर रोड राजनैतिक रुप से हाईजैक तो नहीं हो गया? आज कांग्र्रेस के सामने हार को लेकर कई सवाल है। जिसका जबाव उसे ढूडऩा अतिआवश्यक है।

कॉग्रेस के कत्र्ता धत्र्ता बतायें कि कॉग्रेस की 4 राज्यों में क्यों करारी हार हुई? जबकि कॉग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार का प्रदर्शन देश में  विगत वर्षो में सबसे बेहतर रहा। उसके बावजूद हार का दंश सवाल खड़े करते नहीं थकता। समझना होगा राहुल को,अब तो सीधे संवाद स्थापित करना होगा। देश के विभिन्न माध्ययमों से, देश वासियों से, पहचानना होगा उन चापलूस,चाटूकारों को जो अपने निहित स्वार्थो के चलते कॉग्रेस को निस्तनाबूत कर स्वयं को स्थापित या स्वयं आधारित संगठन स्थापित करना चाहते है। जिससे वह कांग्रेंस का मन माफिक ढंग से शोषण कर सके। ऐसा कुछ काग्रेंस के साथ आज  ही नहीं, बल्कि 2 दशक से हो रहा है। 

देखा जाये तो 90 के दशक तक तो ऐसे लेाग कॉग्रेस में कभी हावी नहीं हो सके जिन पर न तो कोई जनाधार था न ही जिनके पास कांग्रेसी विचार। मगर उसके बावजूद भी पहले साउथ,फिर पश्विम,पूर्व,अब उत्तर में जो खेल चल रहा है वह किसी से छिपा नहीं। बेहतर हो कि राहुल स्वयं देखे,और संगठन की समीक्षा करे। कि जिन प्रदेशों में कभी कांग्रेस की सरकारे प्रचन्ड बहुमत में हुआ करती थी उन प्रदेशों मेंआज कॉग्रेस कहां है? और उसकी यह हालात क्यों है? तभी कॉग्रेस की भावना और सदव्यवहार देश वासी महसूस कर पायेगें जो समीक्षा हार की मंहगाई को लेकर चल रही है,वह बिल्कुल सफेद झूठ है।

ये सही है कि देश की 80 फीसदी आवाम व्यवस्थागत त्रुटियों और भ्रष्टाचार के चलते परेशान हुई है। जिसके चलते बड़ी तादाद में मंहगाई बढ़ी है मगर देखा जाये तो देश में कांग्रेस नीतियों के कारण उसी तादाद में किसानों का उत्पादन,उत्पादन का मूल्य, मजदूर की मजदूरी, कर्मचारी अधिकारियों का वेतन भी बढ़ा है। ये अलग बात है कि कुछ योजनागत नीतियों को बनाते समय स्थानीय जरुरतों और वातावरण की सटीक समीक्षा किये बिना बनने वाली नीतियों ने सरकार का धन और लाभान्वित लेागों को मायूस कर अभावग्रस्त बनाया है। काश सरकार स्थानीय स्तर पर जरुरत अनुसार स्थानीय प्रकृति अनुकूल योजनाओं पर धन उपलब्ध कराती तो स्थाई विकास के साथ लेागों के बीच मंहगाई की  खाई को बहुत अधिक सीमा तक पाटा जा सकता था। जो लेाग आज मंहगाई को सत्ता के लिये अस्त्र बना उसे भुनाना चाहते है वह इस बहाने सिर्फ सत्ता चाहते है। न कि  मंहगाई रोकना।

काश सरकार में बैठे मंत्री आय-व्यय का हिसाब सटीक रखते और विलासता संबंधी उत्पादन को संयमित रख देश का धन अच्छे कामों में लगाते तो आज यह दिन कांग्रेस को नहीं देखना पड़ता। जैसे व्हीकल उत्पादन क्षेत्र में अनाप-शनाप बढ़ोत्तरी,बैंको द्वारा बड़े पैमाने पर लग्जरी वाहनों पर फायनेंस,पैट्रोल पर अनाप-शनाप खर्च और टूव्हीलर,फोर व्हीलर वाहनों की अंधी प्रतिस्पर्दा में जहां देश में पैट्रेाल-डीजल,गैस की खपत बढी, वहीं वाहनों का उपयोग बढऩे से लेागों में अप्रत्याशित बीमारियों को बढ़ावा मिला जहां एक ओर तेल बाजार और दूसरी ओर दवा  बाजार मजबूत हुआ जिसने आम व्यक्ति के घर का बजट बिगाड़ डाला और इसी के चलते आम व्यक्ति मंहगाई के भंवर में  फसता चला गया जो मंहगाई का सबसे अहम कारण है।

रहा सवाल किसान का तो विदेशी खाद, पैस्टीसाईज, दवाओं,कृषि यंत्रो के अंधाधुंध इस्तेमाल ने उत्पादन तो बढ़ाया साथ ही उत्पादन लागत भी बढ़ाई जिसके चलते खेती अब गरीब किसानो को फायदे का धंधा नहीं रही उस पर से प्राकृतिक आपदाये और उनमें राहत के रुप में मिलने वाली आर्थिक सहायता ऊंट के मुंह में जीरे के समान कई कई तो भ्रष्टाचार की बाढ़ में गरीब को जीरा भी नसीब नहीं हुआ।

मगर जो अदभुत कार्य कांगे्रस नेतृत्व वाली सरकार ने रोजगार और सेवा के क्षेत्र में किया चाहे वह रोजगार गारंटी का अधंकुचला स्वरुप, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरी के अंदर प्रतिस्पर्धा पैदा कर मजदूरी 70 रुपये से लेकर 300 रुपये और कुशल श्र्रमिक की मजदूरी 150 से 500 रुपये तक पहुंचा दी वहीं शिक्षा के लिये,शिक्षा माध्ययम से गांव-गांव स्कूल हर मझरे टोले पर गुरुजी,आंगनबाड़ी,आंगनबाड़ी कार्यकत्र्ता,स्वास्थ कार्यकत्र्ता,आशा कार्यकत्र्ता एवं हर गांव को रोशन करने राजीव गांधी विधुतीकरण योजना,बाल एवं मातृत्र रक्षा हेतु ए बूलेंस जैसे केन्द्र सरकार के माहती एवं सेवा भावी कार्यक्रम कांग्रेस न तो उन पर प्रदेशों में आम जनता को बता पाई न ही जहां काग्रेस सरकारे थी वह भी लेागों को समझा पायी। सब कुछ विरोंधी दलो के मिथ्यक प्रचार और देश में घुन की तरह फैले भ्रष्टाचार ने हथिया ली। नहीं तो केन्द्र के पैसे पर चलने वाले रोजगार, स्वास्थ,शिक्षा,महिला एवं बाल विकास मिशन,ग्रामीण, शहरी विधुतीकरण,पंचायती राज,प्रधानमंत्री सड़क,बीआर जी एफ फंड, सूचना का अधिकार,भूमि विधेयक बिल,संचार क्रान्ति फ्रूड सिक्योरिटी बिल,ग्रामीण स्वच्छता मिशन इत्यादि ऐसे कई कार्यक्रम कांगे्रेस सरकार ने आम गरीबोंं के लिये शुरु किये जिनकी चर्चा विपक्षी राज्य सरकारों ने अपने हित में की और कालिख केन्द्र सरकार को मिली। या फिर यह बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई जिससे आम गरीब मजदूर को लाभ नहीं मिल सका।

अरबों खरबों फूंकने के बाद भी यूपीए सरकार का नेतृृत्व करने वाली कांग्रेस चार राज्यों में करारी हार के बाद हार के जि मेदारों के वक्तव्य इतने बेर्शमीपूर्ण आ रहे है न की हार के सहीं कारण गिनाये जा रहे है। वैसे भी पुरानी कहावत है जिस डाल पर व्यक्ति बैठता है उसे स्वयं नहीं काटता। मगर राजनीति में खासकर कांग्रेस में ग्राफिटंग टेक्नोजी का विस्तार जिस तरह से स्वार्गीय राजीव गांधी के बाद हुआ उसने कांग्रेस के वटवृक्ष को देश भर के कई राज्यों में अंग-भंग कर दिया। जिसे कभी स्वयं स्व. राजीव गांधी ने जनता दल की सरकार बनने पर खुलेआम नकार ग्राफिटंग टेक्नॉजी के बजाये विपक्ष में बैठना स्वीकार किया वहीं टेक्नोलॉजी उनके बाद कांग्रेस के अंदर जमकर फली फूली क्योकि इसमें सत्ता के दलाल,स्वार्थी सलाहकार,चाटूकारों का भला छिपा था। चाहे आंध्र,कर्नाटक,बिहार,उप्र,उड़ीसा,महाराष्ट्र,दिल्ली का सभी जगह ग्राफिटंग टेक्नोलेाजी तोड़ फोड़ की राजनीति ही कारण है।

काश कांग्रेस ने देश के सबसे बड़े दल होने के बावजूद बंधन,गठबंधन जैसी राजनीति से स्वयं को दूर रखा होता तो जो हाल कांग्रेस का आज उप्र,बिहार,उड़ीसा,महाराष्ट्र में है और अब छत्तीसगढ़,म.प्र,राजस्थान,दिल्ली में होने वाला है उसके पीछे मंहगाई ही नहीं,ये गठबंधन सरकारों का नेतृत्व करना भी है। जिसमें सहयोगी दल अपने-अपने हितों के लिये सरकार पर दवाब बनाते है। भ्रष्टाचार करते है, और जब कालिख पुतने का मौका आता है, तो कांगं्रेस का चेहरा सामने रख देते है। यहीं बात राहुल को समझना होगी। क्योकि आज जो दल विभिन्न प्रदेशों में चाहे वह सपा हो बसपा हो,या त्रणमूल कांग्रेस,राष्ट्रीय कांग्रेस,बीजू जनता दल या फिर राष्ट्रीय जनता दल जेडीयू हो कहीं इनकी उत्पत्ती में खाद और बीज कांग्रेस का ही पड़ा है। जो कई मुद्दों पर कांग्रेस की आंखों में आंखे डाल चमकाना तो दूर, चुनौती देने से भी नहीं चूकते। इन्हीं पद चिन्हों पर हारे हुये प्रदेशों मे भी ऐसा हो जाये तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी।

क्योकि फिलहॉल तो देश का राजनैतिक बाजार इन्हीं चर्चाओं से पटा पड़ा है ऐसे में राहुल या राहुल की टीम और सच्चे कांग्रेस के थिंकटेक कैसे कांग्रेस को निस्तानाबूत होने से बचा पायेंगें यह यक्ष प्रश्न देश,देश वासियों और कांग्रेस जैसे महान वैचारिक संगठन के बारे में सोचने वालो के सामने ही नहीं राहुल के सामने भी होना चाहिए।

जब तक पुन: जमीनी स्तर तक कांग्रेस संगठन मजबूत और ऐसे त्यागी संगठक जिनका सत्ता से कोई लेना देना न हो देश भर में नहीं निकलेंगें तब तक कांग्रेस को बचा पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। क्योकि अकेले गंाधी ने अंग्रेजी साम्राज्य के विरुद्ध इतना बढ़ा संगठन गुलामी झेलते हुये खड़ा कर दिया था कि अगें्रजों को भारत छोड़कर जाना पड़ा।

आज भी कई युवा,बुद्धिजीवी,त्याग पुरुष देश के अंदर छटपटा रहे है। कांग्रेस को पुर्न: स्थापित करने, जो देश के ऐसे युवा के साथ जुड़ काम करना चाहते है जो निर्भीक और देश के बारे में पूरी निष्ठा और ईमानदारी से बगैर किसी नफानुकसान के वेबाकी से अपनी बात रखता हों।जो आम व्यक्ति के उत्थान के बारे में सोचता हों उसके साथ लेाग जी जान से, काम करना चाहते है, जो दिल से सच्चा और देश के लिये मन से अच्छा भी है। मगर क्या करे,वो लेाग उनके सामने अकबर रोड और जनपथ के रास्ते में कई बेरीगेटस है, न तो ऐसे लेागों के पास वो धन है और न ही वो साधन जो दिल्ली पहुंच इन जबरदस्त बेरीगेटो को हटा राहुल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सर पर कफन बांध देश और देश वासियों की सेवा के लिये सड़को पर संघर्ष कर सके। और शेष बचे कांग्रेसी गांधीवादी विचार धारा और इंदिरा,राजीव जी के इतिहास को तथा सोनिया के त्याग को बदलते इतिहास में यथावत रख सके।

एनटीपीसी में कैंसर जांच शिविर

१०० से अधिक व्यक्तियों एनटीपीसी सहेली क्लब और ष्ठद्धड्डह्म्द्वह्यद्धद्बद्यड्ड हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के सहयोग से चिकित्सा प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित महिलाओं के लिए कैंसर स्क्रीनिंग शिविर में लाभान्वित. शिविर श्रीमती द्वारा उद्घाटन किया गया. शर्मिला रॉय चौधरी, अध्यक्ष सहेली क्लब, एनटीपीसी. श्रीमती. त्रद्बह्लद्बद्मड्ड शिव, महाप्रबंधक (मानव संसाधन), एनटीपीसी और डॉ. पीसी अपनी टीम के साथ राय (सीएमओ) इस अवसर पर उपस्थित थे. डॉ. स्ड्डह्ल1द्गठ्ठस्रद्गह्म् कौर, ह्रठ्ठष्श-स्त्री रोग विशेषज्ञ, ष्ठद्धड्डह्म्द्वह्यद्धद्बद्यड्ड अस्पताल भी शिविर के लाभार्थियों की सलाह दी.

शाला प्रभारियों को कारण बताओ नाटिस
भोपाल: 12 दिस बर 2013.एसडीएम बैरसिया (आईएएस) सुश्री नेहा मारव्या ने अनुभाग बैरसिया स्थित पांच शिक्षा संस्थाओं के शाला प्रभारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए । एसडीएम द्वारा आज शासकीय प्राथमिक शाला सलोई संगराज, शासकीय प्राथमिक शाला निदानपुर, शासकीय माध्यमिक शाला चांदासलोई, शासकीय माध्यमिक शाला चांटाहेड़ी और शासकीय प्राथमिक शाला चांटाहेड़ी का आकस्मिक निरीक्षण किया गया । ये सभी शालाएं सांय 4:30 बजे के पूर्व ही बंद पाई गई । निर्धारित समय से पूर्व शालाएं बंद पाए जाने के चलते एसडीएम द्वारा इन सभी पांच शालाओं के शाला प्रभारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए गए । एसडीएम सुश्री मारव्या ने बताया कि शाला से अनुपस्थिति के चलते इनका आज 12 दिस बर एक दिन का वेतन काटे जाने और दो-दो वेतनवृद्धि रोकने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश भी दिए जा रहे हैं ।

कमिश्नर मेट्रो रेलवे सेफ्टी का मानसरोवर स्टेशन का दौरा
जयपुर, 12 दिस बर। रेलवे संरक्षा आयुक्त (कमिश्नर मेट्रो रेल्वे सेफ्टी-सीएमआएस) श्री पी. एस. बघेल ने गुरूवार को जयपुर मेट्रो के मानसरोवर स्टेशन का दौरा कर वहां मेट्रो ट्रेन, ट्रैक और प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा उपायों, मानकों और तकनीकी मानदंडों का जायजा लिया। श्री बघेल ने जयपुर मेट्रो में यात्रियों की सुरक्षा के हिसाब से जो उपाय किए गए हैं और जो किए जा रहे हैं, उन पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि नियमित निरीक्षण में इनकी विस्तृत समीक्षा की जाएगी। ज्ञातव्य है कि आरडीएसओ- रिसर्च डिजाईन एवं स्टेण्डर्ड ऑर्गेनाईजेशन द्वारा ऑसिलेशन ट्रायल के बाद सीएमआरएस द्वारा जयपुर मेट्रो प्रोजेक्ट का नियमित निरीक्षण होगा श्री बघेल ने मानसरोवर स्टेशन पहुचने के बाद अधिकारियों से सर्वप्रथम टोकन टिकट काउंटर, पैसेन्जर इन्फॉर्मेशन सिस्टम एवं अन्य यात्री सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। बाद में स्टेशन पर पार्क की गई मेट्रो टे्रन का निरीक्षण किया।

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तीरंदाज,328,व्ही.एस.भुल्ले,523,
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कहीं हाईजैक तो नहीं जनपथ............?
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