चिन्तन,मंथन से इतर स्वयं चेतना होगा राहुल को 3 राज्यों में कांग्रेस का खेल खत्म

व्ही.एस.भुल्ले/ सत्ता के संगी,साथी,स्वार्थी सलाहकार,चाटूकार यूपीए सरकार के साफ सुथरे निर्णायक नेतृत्व और देश की युवा तरुणाई के चेहरे को बदरंग बता स्वयं को कितना ही पाक दामन साफ बताने की कोशिस क्यों न करे मगर  जो रंग कॉगे्रस को मिला है। विगत 20 वर्षो में, पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों में मिली कांग्रेस को करारी हार उन्हीं की देन है।
देखा जाये तो जो सवाल कॉग्रेस या सरकार नेतृत्व को लेकर रा.का. के प्रमुख शरद पवार ने खड़े किये है यह सिर्फ राजनैतिक सवाल ही नहींं, अब्बल यह प्रत्याशित सवाल है, जो आज नहीं तो कल होना ही थे और आगे भी हों तो किसी को कोई अचंभा नहीं होना चाहिए।

नेतृत्व को लेकर सरकार पर उठे सवाल पर मीडिया और राजनैतिक पण्डितों के बीच कई कयास हो सकते। स्वार्थी सलाहकार चाटूकारों के अपने तर्क इस समुची चर्चा के बीच हो सकते है।

मगर यथार्थ सत्य यहीं है कि कॉग्रेस आलाकमान और स्वयं राहुल को अब दो कदम और आगे बढ़ खून पसीने कुर्बानियों से सीची गई कॉग्रेस को काकस से कुछ बाहर निकल बचाना होगा। समझना होगा देश और देश की आवाम को वरना उनके इर्द गिर्द इक_े,स्वार्थी सलाहकार चाटूकार और वौद्धिक चोर 2014 में कॉग्रेस को कहां ले जाकर छोड़ेगे यह उ.प्र.,बिहार,गोवा और हॉल ही में म.प्र.,छत्तीसगढ़,राजस्थान,दिल्ली में हुये विधान सभा चुनावों से साफ है। जैसी करारी हार हाल ही में राजस्थान,दिल्ली,म.प्र. में हुई है ऐसी तो किसी हवा में या किसी सहानुभूति वाले चुनावों में भी नहीं हुई।

देखा जाये तो ऐसा कोई कारण भी नहीं, न ही कोई हवा चली भाजपा के पक्ष में जबकि विगत 20 वर्षो में कांग्रेस ने देश के करोड़ों बेरोजगार मजदूर आम आदमी के पक्ष में यथार्थ पारदर्शी निर्णय लिये है। एक ऐतिहासिक पार्टी जिसका अपना सुनहरा इतिहास रहा है। हर वर्ग,हर क्षेत्र में कॉग्रेस ने जबरदस्त काम किया। मगर इस बीच न तो जमीनी स्तर पर कॉग्रेस संगठन बचा, न ही कार्यकत्र्ता, जो आम लेागों के बीच कॉग्रेस का इतिहास उसके नेताओं की कुर्बानी,शहदत और सोनिया राहुल के गरीबों किसानों,युवाओं,बुजुर्गो के मान स मान स्वाभिमान के लिये गये निर्णयों को गिना पाता ।

कार्यकत्र्ता अकेले ही सड़कों पर लुटता पिटता रहा और कॉग्र्रेसी छत्रप अपनी अपनी ताकत बढ़ाते रहे। अपने स्वार्थो और सत्ता के लिये कॉग्रेस की बिना पर आपस में लडऩे वाले छत्रपों के कारण्। परिणाम ये है कि तीन बड़े राज्य म.प्र.,राजस्थान सहित दिल्ली में कॉग्रेस सैया पर जा चुकी है। अगर ये छत्रप चाहते तो कॉग्रेस की विगत 20 वर्षो में ऐसी दुर्गति न होती। सब कुछ करने के बावजूद यहां तक गांव,गली मोहल्ले चौपालों पर बैठने वाले राहुल को यह दिन नहीं देखना पड़ता।

मगर इस स्थति के जो सूत्रधार है जैसी कि आम चर्चा है वो आज भी दूसरों पर कालिख पेात 24 अकबर रोड़ और 10 जनपथ के सलाहकारों के बीच पैठ बनाये हुये है। और अपना रुतवा जमाये हुये है।

आज आम कॉग्रेसी के बीच ये चर्चा है क्यों राहुल यह समीक्षा नहीं करते जैसा कि वे स्वयं भी कहते है कि उन्होंने स्वयं राजनीति में नई शुरुआत की फिर परिणाम क्यों नहीं। कारण साफ है देश भर से अनुशासित समर्पित संगठन का सफाया आम युवा जुड़े तो किससे उन धन कुबेरो से जिन्होंने कॉग्रेसी सत्ता में रह अकूट दौलत बना कार्यकत्र्ताओं को चारागाह बना रखा है।

या उन लेागों से जुड़े जो बैठे तो 24 अकबर रोड में मगर बजाते अपने अपने आकाओं की जो बैचारिक लेागों के मशवरे पचा स्वयं ज्ञान बान बन सलाह परोसते है। जिनसे ज्ञान प्राप्त करते है उन्हें धन्यवाद तक देने मे कंजूसी करते है।

बहरहॉल  जो भी हों अगर स्व. इन्दिरा जी,स्व. राजीव जी की कुर्बानियों और सोनिया जी के त्याग पर देश में खड़ी कॉग्रेस को बचाना है तो  निश्चित ही राहुल को आगे आना होगा संगठन को पहले देखना होगा। कार्यकत्र्ताओं की नई फौज और देश व देश वासियों की भावनाओं को समझना होगा। क्योकि आजाद देश की तीन पीढ़ी एक साथ चल रही है। अगर नई पीढ़ी के इतिहास और सरकारों के निर्णय आम जनता तक न ही पहुंंचे तो निश्चित ही 2014 कॉग्रेस के लिये कॉफी घातक होगा।

कहते है जिस राज्य का राजा,शासक या संगठन प्रमुख के गुप्तचर स्वार्थी, चापलूस और धूर्त हो या फिर ईमानदार,वफादारों को खुलकर बात रखने की स्वतंत्रता बगैर किसी भय के  न हों, जहां सलाहकार,महात्वकांक्षी,स्वार्थी हो और चाकर लालची उस राज्य,सत्ता या फिर संगठन का विनाश सुनिश्चित है।

शिवपुरी में तीन पर कांग्रेस तो दो पर भाजपा विजयी 
म.प्र. शिवपुरी। लोकतंत्र के पावन पर्व में आहुति देने वाले मतदाताओं की चुप्पी आज उस समय टूटी जब मतगणना के दिन बंद ईव्हीएमों ने जनप्रतिनिधियों के भाग्य के फैसले सुनाने शुरू कर दिए। शिवपुरी जिले की पांचों विधानसभा सीटों में तीन पर कांग्रेस तो दो पर भाजपा ने कब्जा जमाया है। यहां शिवपुरी से भाजपा की यशोधरा राजे सिंधिया ने कांग्रेस के वीरेन्द्र रघुवंशी को, पोहरी में भाजपा के प्रहलाद भारती ने कांग्रेस के हरिबल्लभ शुक्ला को, करैरा में कांग्रेस से शकुन्तला खटीक ने भाजपा के ओमप्रकाश खटीक को, कोलारस में कांग्रेस के रामसिंह यादव ने भाजपा के देवेन्द्र जैन को और पिछोर में के.पी.सिंह ने भाजपा के प्रीतम सिंह लोधी को शिकस्त देकर विजय हासिल की है। सभी विजयी प्रत्याशियों में खुशी तो देखी गई लेकिन प्रदेश में भाजपा की सत्ता बनने की खबर से कांग्रेस के विजयी प्रत्याशियों में मायूसी भी नजर आए।

एनटीपीसी में नए निदेशक (वित्त)
श्री ्यह्वद्यड्डद्वड्डठ्ठद्ब बिस्वाल आज से प्रभावी एनटीपीसी लिमिटेड के बोर्ड में निदेशक (वित्त), एनटीपीसी के रूप में कार्यभार संभाल लिया है. एक वाणिज्य उत्कल विश्वविद्यालय से स्नातक और भारत श्री बिस्वाल की लागत लेखाकार संस्थान के फैलो सदस्य रुरु.क्च. किया गया है इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से वित्तीय प्रबंधन में संबलपुर विश्वविद्यालय और पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा से. उन्होंने कहा कि न्यू पोर्ट विश्वविद्यालय, कैलिफोर्निया, संयुक्त राज्य अमेरिका से एमबीए की है.
श्री बिस्वाल (५२ वर्ष) कोयला और बिजली क्षेत्र में दोनों २८ साल की समृद्ध अनुभव है. उन्होंने कहा कि अक्टूबर २०१० कंपनी के प्रबंध वित्त, लेखा और कॉर्पोरेट प्रशासन कार्यों के बाद महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) में निदेशक (वित्त) था. उन्होंने कहा कि उत्पादन और लाभ के मामले में भारत का दूसरा सबसे बड़ा कोयला कंपनी के रूप में एमसीएल बनाने में एक निर्णायक भूमिका निभाई. उन्होंने कहा कि केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग में चीफ (वित्त) था और २००४-२०१० साल से बिजली क्षेत्र के सुचारू संचालन के लिए विभिन्न नियमों और नीतियों का मसौदा तैयार करने के लिए योगदान

दतिया, सेवढा, भाण्डेर में भाजपा प्रत्याषी विजयी
दतिया  विधानसभा निर्वाचन 2013 में मतदान के उपरांत मतगणना का कार्य हायर सेकेण्डरी स्कूल क्रमांक 1 ठंडी सडक दतिया पर संपन्न हुआ। मतगणना के बाद प्राप्त अंतिम परिणाम के अनुसार दतिया, सेवढा, भाण्डेर तीनों विधानसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी विजयी घोषित किये गये। दतिया में डा. नरोत्तम मिश्र, भाण्डेर से श्री घनश्याम पिरोनिया, सेवढा से श्री प्रदीप अग्रवाल विजयी रहे।

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