राहुल की बात और उनके तर्क

युवा राजनीति में भागीदारी करे तभी उनका उत्थान और देश का संपूर्ण विकास संभव। भावार्थ उनकी बातों और तर्को का जो भी रहा हों मगर मप्र मन्दसौर और बालाघाट लांजी में हुई उनकी चुनावी सभाओं का मजमूल कुछ ऐसा ही प्रतीत होता है।

जहां एक सिरे से उन्होंने केन्द्र की यूपीए सरकार में रोजगार गारन्टी,सूचना का अधिकार, भूमि अधिग्रहण बिल, फूड सिक्यूरिटी कानूनों की बात रखी वहीं उन्होंने यह तर्क भी रखा कि जब तक गरीब समुदाय के युवा या फिर आदिवासी युवा राजनीति में सक्रिय भागीदारी नहीं करेंगे तब तक सत्ता में वह नहीं पहुंच सकते इसके लिये उन्होंने स्वयं राजनीति में सक्रिय हों सत्ता में आना होना।

तभी उनका स पूर्ण विकास और खुशहाल स बृद्ध देश बन सकेगा।

दूसरा उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कॉग्रेस हमेशा जो कहती है, वह करती भी है और विगत वर्षो में कॉग्रेस ने ऐसा किया भी है।

निश्चित ही राहुल की बाते और तर्क यथार्थ हो सकते है। क्योकि चाड़क्य ने भी कहां है कि जिस राष्ट्र के युवा राजनीति के प्रति उदासीन हों उस राष्ट्र का विनाश सुनिश्चित होता है। कमोवेश हालातों के चलते देश की राजनीति और देश की स्थति भी ऐसी ही है। मगर न तो युवाओं को कोई प्लेट फार्म है न ही भले व्यक्तियों को किसी भी राजनैतिक दल में सहज मौका।

राहुल म.प्र. ही नहीं देश भर में युवाओं से कई वर्षो से आव्हन कर रहे है। कभी गांवो में रात बिताते है, तो कभी चौपालों पर बैठे, तो कभी कॉलेजो में जाते है, तो कभी खुले मंचो से भी आव्हन कर आते है।

क्या कभी राहुल ने देश में बढ़े लगभग 22 करोड़ युवाओं के बारे संज्ञान लिया कि कॉग्रेस से कितने युवा अभी तक जुड़ सके है। नहीं तो क्यों? क्या हालात है स्व. राजीव जी की युवा कॉग्रेस की? कभी कॉग्रेस की शान ही नहीं नाक का बाल रही युवक कांग्रेस जिसने कॉग्रेस को सुरेश  पचौरी रमेश चैनीथला,मनिन्दर जीत सिंह बिट्टा,सूरेज वाला सहित सेकड़ों कद्दावर नेता दिये। क्यों स्व.राजीव जी द्वारा देश भर में खड़ी की गई ल बी चौड़ी युवा कॉग्रेस की फौज देश में ध्वस्त है? इतिहास गवाह है कि देश की राजनीति में आज जो दल सक्रिय है वह चाहे कॉग्रेस से बाहर हो नये दल के रुप में अस्तित्व में है। और कांग्रेस के साथ यूपीए सरकार या सरकार से बाहर है साथ ही  ऐसी ही कुछ स्थिति कॉग्रेस के अन्दर भी है। जो अपनी ताकत बढ़ा कॉग्रेस को निस्तनाबूत करने में लगे है। जिन्हें झेलना अब आलाकमान की कमजोरी सी बन गई है। सरकार बनाने या सत्ता में आने के लिये अगर यो कहें कि म.प्र. में संगठन के नाम अब सिर्फ प्रायवेट लिमिटेड क पनियाँ बची है तो कोई अतिसंयोक्ति नहीं। जो म.प्र में चर्चा का वायस बनी हुई है। जिनके अपने अपने चेयरपर्सन सी.एम.डी. भी अघोषित तौर पर है। ऐसे में जब अघोषित तौर पर संगठन की जगह कॉरपोरेट व्यवस्था ने ले ली हों, तो गरीब युवा किस दर पर दस्तक दे कैसे सक्रिय राजनीति में भागीदारी बढ़ाये। हताश निराश अपमानित कई युवा इसीलिये कांग्रेस जैसे महान संगठन से दूर बैठ चुप रहने में ही भला समझने लगे है। इतना ही नहीं जब आलाकमान से स पर्क और संवाद ,पत्राचार,संचार की स्थिति सुरक्षा के चलते किसी नेता नहीं बादशाह जैसी हों जहां दरबारी से लेकर सिपहसालारी तक को मुजरा कर या कांग्रेसी कहलाने का रिवाज हो गया हो,तो अन्दाजा लगाया जा सकता है।

जब विश्व के इतने बड़े  लेाकतंत्र  में मौजूद सबसे बड़े दल के मुखियाओं का सीधा संवाद राष्ट्र के विद्धवान,साहित्यकार,खबरयार,पत्रकारों,आम आदमी तक से न हों जिन मुखियाओं के इर्द गिर्द स्वार्थी चापलूस और कार्यालयों में सहायकों के नाम बौद्धिक चोर हो। जो देश भर से आने वाले सलाह मशविरा या कांगे्रस हित की योजनाओं का ज्ञान,विद्या फ्री में हासिल कर मुखिया से खुद की बौद्धिक कुशलता की वाहवाही लूटते हो, जो विद्याओं की चोरी कर धन्यवाद तक देने में शर्म महसूस करते हो, ऐसे राष्ट्र,दल और उन दलो के मुखियाओं को अच्छे और सच्छे युवा राजनेता मिल पाना मुश्किल ही नहीं, नमुकिन है। ऐसी स्थति में स पन्न तो स पन्न आम गरीब की क्या विसात जो वह राजनीति में खुली भागीदारी कर सत्ता तक पहुंच सके।

अब ऐसे में देश का कोई भी नेता फिर वह राहुल ही क्यों न हों,जो देश के युवाओं से आव्हन करे तो उसका क्या अर्थ रह जाता है। जब तक वह दल के अन्दर से ही सटीक शुरुआत नहीं करे और उनके शुभचिन्तक संगठन बचाने पहल नहीं करे तब तक कॉग्रेस जैसे बृहत संगठन का छरण जारी रहेगा।

कहते है बतासे बातों से नहीं, शक्कर से बनते है,राजनीति में युवा आव्हनों से नहीं,मौका देने से मिलते है। यहां सवाल देश के 22 करोड़ युवाओं का है। जो कोरे कागज की तरह आज भी चौराहों पर खड़े हो स्वयं और देश के बेहतर भविष्य की तलाश में है अगर ऐसे मेें उन्हें कोई सच्चा और अच्छा नेता मिल जाये जो सहज और सरल हों,जिससे स पर्क आसान हों न कि एक बादशाह या फिर किसी लिमिटेड,प्रायवेट लिमिटेड का मालिक क्योकि देश में लोकतंत्र है।

20 लीटर अवैध मदिरा सहित तीन आरोपी गिर तार
शिवपुरी, 24 नव बर 2013/      विधानसभा निर्वाचन 2013 के शांतिपूर्ण एवं निर्विघ्न रूप से संपन्न कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा बैध और अवैध तरीकों से शराब के विक्रय और परिवहन कार्य की सघन मोनीटरिंग की जा रही है। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री आर.के.जैन ने निर्देशन में आबकारी विभाग द्वारा की गई कार्रवाई में पिछोर व्रत के ग्राम उमरीखुर्द, महोवा, बिरोली, लोहागढ़, भौति एवं पिछोर में गस्त के दौरान 20 लीटर अवैध शराब जप्त कर तीन आरोपी छोटे यादव, सुरेश जाटव एवं रोहणी कंजर को गिर तार किया गया है।

जिले में 5 लाख 6 हजार 130 मतदाता करेंगे मताधिकार का प्रयोग 

दतिया/ विधानसभा निर्वाचन 2013 में जिला प्रशासन द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री रघुराज एमआर के नेतृत्व में सभी तैयारियां चाक चौबंद कर ली है। 25 नव बर को प्रात: 8 बजे से सायं 5 बजे तक जिले के 575 (करैरा विधानसभा के 14 पोलिंग सेंटर मिलाकर) मतदान केन्द्रों पर वोटिंग होगी। जिसमें 5 लाख 6 हजार 130 मतदाता मताधिकार का प्रयोग करेंगे। जिसमें 2 लाख 73 हजार 573 पुरूष एवं 2 लाख 32 हजार 557 महिलाए शामिल है। जो मतादाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे उनमें 18, 19 वर्ष के 25 हजार 499, 20 से 29 वर्ष के 1 लाख 39 हजार 992 और 29 वर्ष से उपर के 3 लाख 40 हजार 639 मतदाता है।

जिले में कुल 5 हजार 244 अधिकारी कर्मचारी तैनात किए गए है। कुल 78 सेक्टर बनाकर उनमें सेक्टर अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। 83 मंजरे टोले बलनरेबिल चिन्हित किए गए है जिनमें 8 हजार 396 लोग निवासरत है। जिले में शांति व्यवस्था कायम करने हेतु प्रतिबंधात्मक कार्यवाही की गई है। अवैध मदिरा के केस बनाकर 3 हजार 65 लीटर अवैध मदिरा जप्त की गई है।

आदर्श आचरण संहिता पर निगरानी हेतु तीन एमसीसी दल, 9 स्टेटिक सर्वलैंस दल, 9 लायॉग स्कॉड तथा 12 चैक पोस्ट बनाई गई है। जिले में चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती रहेंगी सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए गए है। आम मतदाता निर्भय होकर मतदान करें इसके लिए सभी तैयारियां चाक चौबंद है।


SHARE
    Your Comment

0 comments:

Post a Comment