क्या राहुल की कोशिश नाकाम, फार्मूला फैल, कार्यकर्ता मायूस

व्ही.एस.भुल्ले/कांग्रेस को म.प्र. में सत्ता इतनी ही अहम थी जो इूबते संगठन को पहले ही क्यों मजबूत नहीं बनाया गया? जो सत्ता के लिये संगठन को ताक पर रख सिद्धान्तों को तिलांजली दे  अपने ही नेताओं के त्याग को भुलाया जा रहा है।
निशंदेह राहुल कांग्रेस का भविष्य है भारतीय राजनीति की कोरी किताब आखिर उनकी भावना को क्यों कलंकित किया जा रहा है। क्या कुसूर  है राहुल जी का जो सबसे पहले तो जुलाई तक म.प्र. के टिकट वितरण की भावना को टाला गया।

और अब जब 3 माह बाद आधी लिस्ट जारी हुई है उसमें पूरा फार्मूला ही राहुल जी का दरकिनार कर दिया गया।

म.प्र कॉग्रेस को यह नहीं भूलना चाहिए अपने पूर्व नेताओं के त्याग और बलिदान को चाहे वह स्वर्गीय इन्दिरा जी हो जिन्होंने 1977 में जनादेश कर सम्मान करते हुये सिद्धान्तों से समझौता नहीं किया उन्होंने कुर्बानी दी मगर देश को नहीं टूटने दिया स्व. राजीव  जी 1889 में तोड़ फोड़ की राजनीति से इतर सिद्धान्तों की खातिर सžाा से दूर विपक्ष में बैठने का निर्णय लिया। ऐसा ही कुछ श्रीमती सोनिया जी ने भी संगनात्मक और पारिवारिक परम्पराओं तथा सिद्धान्तों की खातिर आज तक सžाा के लिये समझौता नहीं कियाञ इसी का कठोरता से पालन करते हुये राहुल जी ने भी विगत 10 वर्षो में गांव-गांव गली मोहल्ले गरीबों की झोपड़ी यहां तक किसानों की खातिर चौपाल पर बैठ संघर्ष किया साथ ही अ'छे और स"ो लेाग राजनीति में आये उसके लिये खुले मन से युवाओं,कार्यकर्žााओं से आव्हन किया। वो चाहते तो इस देश की केन्द्र सरकार मंत्री ही नहीें प्रधानमंत्री भी बन सकते थे मगर उन्होंने सिद्धान्त परम्पराओं के विरुद्ध सžाा के लिये नहीं सोचा।

जब वे म.प्र. आये थे तो उन्होंने कार्यकर्žााओं में स्पष्ट संदेश दिया था। कि म.प्र में कांग्रेस को क्या करना है। मगर आज जब कांग्रेस की पहली सूची जारी होते ही साफ हो गया कि राहुल की कोशिस और उनका फॉरमूला धरा का धरा रह गया। कोई कुछ भी कहे मगर आम कार्यकर्žााओं मे जहां मायूसी है तो विपक्ष को भी सवाल खड़े करने का खुला मौका मिल गया।

जो परेशानी कांग्रेस के सामने पहले थी अब वह संकट न बन जाये क्योकि जिस तरह से 2-2,4-4 बार विधायक रह चुके लेागों को कांग्रेस ने जीत का पैमाना मान झण्डे लगाने वाले फर्स विछाने वाले कार्यकर्žााओं को दरकिनार कर टिकिट लुटाये है। उससे संगठन में लेाकतंत्र की हत्या तो हुई ही है। साथ ही भाई,बेटा भतीजे बाद के साथ ही सामंती परम्परा पनपी है। जब एक ही व्यक्ति क्षेत्र से 20-20 ,10-10 वर्षेा तक विधायक रहेगा और तीसरी ,पांचवी मर्तवा उसे टिकिट मिलेगा वो भी इस बिना पर की वह जीत कर ही आयेगा जिससे सरकार बन सके। क्या  ऐसी अन्धी जीत जैब में रखने वाले और किसी को क्यों नहीं जिता सकते पार्टी ने जिन्हें अपने टिकिट पर 2-2 ,4-4 बार विधायक बनाया मंत्री बनाया नेता बनाया क्या इनका कर्žाव्य नहीं कि यह पार्टी के लिये एक बार ही सही अपनी पार्टी और अपने नेता राहुल के लिये किसी युवा को जिताने की गारन्टी ले म.प्र में सरकार बनवाते मगर संगठन और राहुल की परवाह  किसे हर एक कांग्रेस को चूस खुद मदमस्त होना चाहता है और यहीं कारण है कि यह चुनाव हो सकता है, म.प्र के ताबूत में आखरी कील साबित हो।

रतनगढ़ माता के घायलों हेतु नोडल अधिकारी नामांकित करें

दतिया। कलेक्टर रघुराज एमआर द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देशित किया है कि रतनगढ़ हादसे के यद्यपी कोई घायल जिला चिकित्सालय में भर्ती नहीं है फिर भी यदि कोई पीड़ित व्यक्ति इलाज कराना चाहता है तो उसकी सुविधा हेतु पृथक से एक डाक्टर को नोडल अधिकारी बनाते हुए उनका नाम व मोबाईल नम्बर समाचार पत्रों में प्रकाशित कराए।

कलेक्टर रघुराज एमआर द्वारा पुलिस अधीक्षक जिला दतिया को पत्र लिखकर रतनगढ़ हादसे में गुम व्यक्तियों के संबंध में जानकारी मांगते हुए कहा है कि इस कार्य के लिए एक पुलिस अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाए ताकि गुम व्यक्तियों के परिजन नोडल अधिकारी के मोबाईल नम्बर पर सम्पर्क कर सके।

साथ ही माता रतनगढ़ के भाई दोज पर आयोजित होने वाले विशाल मेले हेतु प्रशासन द्वारा पूर्व से तैयारियों में जुट गया है, प्रशासन का दाबा है कि अब किसी प्रकार की कोई भूल न हो और मेले आये श्रद्धालुओं की सूर्ण सुरक्षा रहेगी।

पत्रकार साकिर अली के पिता के निधन पर पत्रकारों ने जताया शोक

पत्रकार साकिर अली के पिता हाजी गुलामअली मिस्त्री का गत दिवस असामायिक निधन हो गया। उनके निधन से पत्रकार जगत में भी शोक की लहर व्याप्त है और पत्रकार साथियों ने अपने दु:ख की इस घड़ी में फरमान अली व साकिर अली को सांत्वना देते हुए यह दु:ख सहन करने की ईश्वर से प्रार्थना की है। गत दिवस पत्रकार साथियों ने एक शोक संवेदना स्वरूप श्रद्धांजलि अर्पित की। जिसमें शहर के सभी पत्रकारों ने गहन दु:ख व्यक्त करते हुए अश्रुपूरित श्रद्धांजलि दी। शोक व्यक्त करने वालों में जनसंपर्क अधिकारी अनिल वशिष्ठ, वरिष्ठ पत्रकार प्रेमनारायण नागर, प्रमोद भार्गव, अशोक कोचेटा, वीरेन्द्र वशिष्ठ, संजय बेचैन, बृजेश सिंह तोमर, अनुपम शुक्ला, वीरेन्द्र शर्मा भुल्ले, आलोक इंदौरिया, अभय कोचेटा, विपिन शुक्ला, सेमुअलदास, रंजीत गुप्ता, अजय खेमरिया, राधेश्याम सोनी, धर्मेन्द्र त्रिवेदी, दीपेन्द्र सिंह चौहान, अशोक अग्रवाल, परवेज खान, उमेश भारद्वाज, सत्यम पाठक, विजय चौकसे, सुनील व्यास, विक्रम सिंह रावत, लोकेन्द्र सेंगर, राजू ग्वाल यादव, मणिकांत शर्मा, रशीद खान, डॉ.ए.के.मिश्रा, भूपेन्द्र नामदेव,देवू समाधिया, जयनारायण शर्मा गुरू, रिंकू जैन, राजकुमार शर्मा राजू, तपन अरोरा, मनोज भार्गव, मनीष भारद्वाज, प्रमोद श्रीवास्तव, एस.एस.चौहान, अनुराग जैन, नरेन्द्र शर्मा, बृज दुबे, विनोद विकट, केपी परिहार, दशरथ परिहार, नेपाल सिंह पाल, नरेन्द्र ङ्क्षसह कुशवाह, संजीव भटेले, विनय धौलपुरी, अजय दण्डौतिया,इस्लाम शाह, आसिफ शिवानी, खालिद खान, राकेश जाटव, अशफाक खान, अब्दुल रफीक अप्पल, शिव कुमार शर्मा, संतोष शर्मा, केदार सिंह, वीरू चौधरी, के.के.चौबे, संजय जोशी, गणेश कुलश्रेष्ठ, नीरज गुप्ता, मानसिंह परिहार आदि शामिल है।
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