रिप गैस कचरे गर्मी का उपयोग रामागुंडम में एनटीपीसी का अनावरण 100TR एयर कंडीशनिंग प्रायोगिक संयंत्र

श्री ए.के. झा निदेशक तकनीकी, रामागुंडम थर्मल पावर स्टेशन पर एक "100 टी.आर., अपशिष्ट ग्रिप गैस वातानुकूल पायलट प्लांट" का उद्घाटन एनटीपीसी लिमिटेड,. श्री थॉमस जोसेफ, कार्यपालक निदेशक (नेत्रा), श्री Subhasis घोष, जीएम (आई / सी रामागुंडम) उपस्थित थे.
प्रायोगिक संयंत्र नेत्रा, एनटीपीसी के अनुसंधान एवं विकास शाखा ने घर में बनाया गया है. प्रणाली रामागुंडम एसटीपी में एक 500mW कोयला आधारित बिजली संयंत्र की ग्रिप गैस बर्बाद गर्मी का उपयोग, एक ग्रीन हाउस गैस मुक्त एयर कंडीशनिंग प्रणाली है. पावर स्टेशन की चार कंट्रोल रूम को इस प्रणाली से वातानुकूलित किया गया है. इस प्रणाली पारंपरिक एसी सिस्टम की तुलना में कम बिजली की खपत.

आज भरे गए आठ नामांकन पत्र

शिवपुरी, 06 नवम्बर 2013/ विधानसभा निर्वाचन 2013 के अंतर्गत शिवपुरी जिले की पांच विधानसभा क्षेत्रों में कुल आठ नामांकन पत्र दाखिल किए गए है। विधानसभा क्षेत्र 23 करैरा से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में ओम प्रकाश खटीक व इंडियन नेशनल कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में श्रीमती शकुन्तला खटीक द्वारा आज पुनः नामांकन पत्र प्रस्तुत किया गया है।

इसी प्रकार 24 पोहरी से बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी के रूप में लाखन सिंह बघेल ने नामांकन पत्र दाखिल किया, तो विधानसभा क्षेत्र 25 शिवपुरी से भाजपा के प्रत्याशी के रूप में यशोधरा राजे सिंधिया, 26 पिछोर से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में हरभजन सिंह लोधी, विधानसभा क्षेत्र 27 कोलारस से बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चंद्रभान सिंह यादव, शिवसेना पार्टी के प्रत्याशी के रूप में शिवकुमार शर्मा, निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में देवेन्द्र गर्ग ने नामांकन पत्र दाखिल किया।

माँ रतनगढ़ मंदिर पर लाखों लोंगों को मिलेगा जीवनदान

दतिया। मध्यप्रदेश के दतिया जिले के सेंवढ़ा विकासखण्ड अन्तर्गत सिंध नदी के बीहड़ों के मध्य पर्वत पर स्थित प्राचीन माता रतनगढ़ मंदिर अपने धार्मिक आस्था, महत्व एवं प्राकृतिक वैभव के साथ ही ऐतिहासिक घटनाओं के माध्यम से सदियों से आस्था का केन्द्र बना हुआ है। जीवनदायी माँ रतनगढ़ मंदिर अत्यंत प्राकृतिक सुन्दरता से परिपूर्ण होने के साथ ही हरियाली से भरपूर मनोहारी छटा के जंगलों के बीच दर्शन होते हैं। मंदिर के पास में ही देवगढ़ का किला है जो ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। देवगढ़ के समीप ही आमखो नामक एक प्राकृतिक सुन्दरता से परिपूर्ण स्थल है जहाँ संत तपस्या करते हैं। दीपावली के पड़वा से ही लाखों की संख्या में माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला प्रारम्भ हो गया है। इस मेले में मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ आदि क्षेत्रों श्रद्धालु आते हैं और माँ के दर्शन कर पुण्यलाभ प्राप्त करते हैं।

ऐसी मान्यता है कि किसी भी विषैले जीव (सांप आदि) के काटने पर कुँअर महाराज के नाम का बंध लगाने से विष का प्रभाव नहीं होता किन्तु पीड़ित व्यक्ति को आज के दिन अर्थात दीपावली के बाद भाई दोज को बंध कटवाने के लिए लाना अनिवार्य होता है। पीड़ित नदी में प्रवेश करते ही बेहोशी की अवस्था में आ जाता है और उसके मुँह से झाग निकलने जगते हैं। पीड़ित के कुँअर महाराज के चबूतरे पर बंध कटने के उपरांत स्वस्थ्य हो जाता है ओर उसको जीवनदान मिल जाता है। देव स्थान का प्रभाव पशु को विषैले जीव के काटने पर बंध लगा दिया जाता है और पशु को आज के दिन लाया नहीं जाता बल्कि उसकी रस्सी को बंध काटवाने हेतु लाया जाता है। यह और भी आश्चर्यजनक है कि नदी में प्रवेश करते ही रस्स्ी में ऐंठन उत्पन्न हो जाती है जो बंध कटने के उपरांत सामान्य अवस्था में आ जाती है।

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