निष्पक्ष चुनाव के लिये परिणामों की घोषणा एक साथ हो, अनावश्यक दवाब से मुक्ति जरुरी

व्ही.एस.भुल्ले/म.प्र. ग्वालियर। जिस तरह से निर्वाचन आयोग ने जमीनी स्तर पर निष्पक्ष,भयमुक्त चुनाव कराने चाक चौबन्ध व्यवस्था की है। उसी प्रकार मतगणना के दौरान निर्वाचन प्रक्रिया को निष्पक्ष एवं अनावश्यक दवाव मुक्त बनाने के लिये समस्त विधानसभा क्षेत्रों के परिणामों की घोषणा एक साथ स्वयं निर्वाचन आयोग द्वारा निर्वाचन मुख्यालय की जाना चाहिए।

अधिक पारदर्शिता और पूर्ण निष्पक्ष चुनावों के लिये जरुरी है, कि परिणामों की घोषणा तभी हो जब मतगणना का कार्य समस्त विधानसभा क्षेत्रों में निर्धारित समय सीमा के अन्दर पूर्ण हो। विवाद की स्थिति में उन विधानसभा क्षेत्रों के ही परिणाम निर्धारित समय तक ही रोके जाये  और उनकी घोषणा भी एक साथ ही हो।

आज जब मतदान का कार्य इलेक्ट्रॉनिक मशीन ई.बी.एम. के माध्ययम से हो रहा है। और मतगणना भी ई.वी.एम.के माध्ययम से जाती है। ऐसे में भी कई उदाहरण लेाकतंत्र में सामने आते है,कि जिन विधानसभा क्षेत्रों के परिणाम कुछ घन्टों में आ जाना चाहिए। वे अनावश्यक दवाब के चलते शाम 7 बजे तक घोषित नहीं हो पाते। जिसकी चर्चा आम लेागों में संदेह पैदा करते नहीं थकती।

हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि एक साथ परिणामों की घोषणा न होने से स्थानीय स्तर पर रुझानों के आधार पर उस मतगणना केन्द्रों पर अनावश्यक दवाब बढऩा शुरु हो जाता है। जहां मतगणना की गति धीमी होती है।

निर्वाचन आयोग को मतगणना के दौरान रिटर्निंग आफीसरों के स्पष्ट निर्देश देना चाहिए कि वह मतगणना को समस्त विवादों का निवटारा करते हुये डले मतों के आधार पर ही मतगणना में समय लगाये।

कई बार सुनने में आता है जिस विधानसभा क्षेत्र में मतदाता अधिक है। और मतदान भी अधिक हुआ है उसके परिणाम जल्द आ जाते है। मगर जहां मतदाता कम और मतदान भी कम होता है। उनके परिणाम देर से आते है।

जिसके चलते कई मर्तवा मतगणना की पारिदर्शिता  निष्पक्षता पर भी लेागों द्वारा कई सवाल खड़े किये जाते है। उस स्थति में सारी निष्पक्षता के दावे धरे के धरे रह जाते है।

इससे बेहतर हो कि निर्वाचन आयोग लेाकतांत्रिक भावना अनुरुप वर्ष 2013 के निर्वाचन को और अधिक निष्पक्ष प्रभावी पारदर्शी बनाने हेतु परिणामों की घोषणा की व्यवस्था एक साथ करे बगैर किसी रुझान ओर टुकड़ों में परिणाम कि घोषणा के तो निश्चित ही जिस तरह की निर्वाचन प्रक्रिया जमीनी स्तर पर प्रभावी दिख रही है। वह ऊपरी स्तर पर भी निष्पक्ष और प्रभावी दिखेे।

 ड्îूटी जिसकी उसी को नहीं बल्कि सभी को दें ट्रेनिंग

भोपाल: 7 अक्टूबर 2013. विधानसभा निर्वाचन 2013 के लिए मतदान दलों सहित अन्य निर्वाचन कार्यों में अधिकारियों/कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने के संबंध में की जा रही तैयारियों की समीक्षा करते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर श्री निशांत वरवड़े ने कहा कि ट्रेनिंग सभी को दी जाये । निर्वाचन की तैयारियों से संबंधित समीक्षा बैठक में असिसस्टेंट कलेक्टर श्रीमती सुरभि सिन्हा, एडीएम श्री बी.एस.जामोद, जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री राकेश श्रीवास्तव, एडीएम श्री बसंत कुर्रे, एडीएम एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी श्री अक्षय सिंह, जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों के आरओ और अन्य विभागों के जिला प्रमुख मौजूद थे । जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर श्री वरवड़े ने उप जिला निर्वाचन अधिकारी से कहा कि निर्वाचन ड्यूटी के लिए जो अधिकारियों-कर्मचारियों का डाटाबेस तैयार किया गया है और जिस ड्यूटी के लिए जिस अधिकारी-कर्मचारी को नियत किया गया है उसके लिए प्रशिक्षण अवश्य दिलाया जाये । उन्होंने कहा कि यह सही है कि सभी की ड्यूटी नहीं लगना है परंतु यह भी जरूरी है कि आवश्यकता पडऩे पर किसी की भी सेवायें ली जा सकती हैं इसके लिए उन्हें प्रशिक्षित होना जरूरी है । इन प्रशिक्षितों में से ही ड्यूटी लगाई जायेगी ।

गलत इपिक नंबर देना गंभीर बात है जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर ने कईं कार्यालय प्रमुखों द्वारा उनके कार्यालय के अधिकारियों-कर्मचारियों की बिना पुष्टि किए मतदाता सूची में नाम और इपिक नंबर दिए  जाने पर नाराजी व्यक्त की । कुछ के नाम और इपिक नंबर मतदाता सूची से मिलान नहीं कर रहे हैं । यह उनके पहले के मतदाता सूची के नाम और नंबर है जबकि नवीन मतदाता सूची के अनुसार नहीं हैं । उप जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा बताया गया कि कुछ कार्यालय प्रमुखों द्वारा यह गलती की गई है । कलेक्टर श्री वरवड़े ने ऐसे कार्यालय प्रमुखों को चेतावनी भरा पत्र देने के लिए कहा । उन्होंने कहा कि अधिकारियों-कर्मचारियों का इपिक नंबर इसलिए लिया जा रहा है कि उनको पोस्टल बैलेट दिया जाये जिससे कि वह चुनाव ड्यूटी के साथ अपना मतदान भी कर सकें । गलत इपिक नंबर होने से मतदाता सूची में नाम नहीं होने से जिस उद्धेश्य के लिए यह कार्रवाई की जा रही है वह पूरा नहीं हो रहा है । इस बात को अधिकारी गंभीरता से समझें ।


बिना अनुमति इलेक्ट्रोनिक मीडिया द्वारा प्रचार-प्रसार नहीं किया जा सकेगा

ग्वालियर 07 अक्टूबर 2013/ इलेक्ट्रोनिक मीडिया पर चुनाव-प्रचार संबंधी कार्यक्रम व क्लिपिंग इत्यादि प्रसारित करने के लिये पूर्व अनुमति लेनी होगी। इसके लिये राजनैतिक दलों को तीन दिन और प्रत्याशियों को सात दिन पूर्व मूल स्क्रिप्ट सहित सम्पूर्ण प्रचार सामग्री की कैसेट जिला निर्वाचन अधिकारी को दिखानी होगी। उक्त आशय की जानकारी कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री पी नरहरि ने मीडिया अनवीक्षण एवं प्रमाणन समिति (एमसीएमसी) की बैठक में दी।

सोमवार को यहाँ कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष में आयोजित हुई बैठक में श्री नरहरि ने कहा कि मूल स्क्रिप्ट सहित सम्पूर्ण चुनाव प्रचार सामग्री की बारीकी से जाँच करने के बाद ही इलेक्ट्रोनिक मीडिया से चुनावी प्रचार संबंधी कार्यक्रम व विज्ञापन पट्टियाँ प्रसारित करने की अनुमति दी जायेगी। इस जाँच में खासतौर पर यह देखा जायेगा कि इस प्रचार-प्रसार से आचार संहिता का उल्लंघन तो नहीं हो रहा।

कलेक्टर श्री नरहरि ने एमसीएमसी की जिला स्तरीय समिति के सभी सदस्यों से कहा कि भारत निर्वाचन आयोग ने ''पेड न्यूजÓÓ पर बारीकी से ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। एमसीएमसी ही पेड न्यूज के संबंध में निर्णय लेगी। इसके लिये जिला निर्वाचन कार्यालय में पृथक से मीडिया सेंटर स्थापित किया जा रहा है, जिसके जरिए 24 घण्टे इलेक्ट्रोनिक मीडिया और पिं्रट मीडिया द्वारा प्रसारित होने वाली खबरों की गहन छानबीन की जायेगी। पेड न्यूज साबित होने पर संबंधित प्रत्याशी के निर्वाचन व्यय में पेड न्यूज प्रकाशन पर हुआ खर्च जोड़ा जायेगा।

बैठक में अपर कलेक्टर श्री शिवराज वर्मा, एमसीएमसी के सदस्य सचिव एवं संयुक्त संचालक जनसंपर्क श्री एच एल चौधरी, वरिष्ठ पत्रकार श्री राजेन्द्र श्रीवास्तव और दूरदर्शन केन्द्र के कार्यक्रम अधिकारी श्री मुकेश सक्सेना मौजूद थे।



समाचार पत्रों एवं इलेक्ट्रोनिक चेनलों की खबरों की मानीटरिंग का कार्य प्रारंभ

श्योपुर, 07 अक्टूवर 2013कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री ज्ञानेश्वर बी पाटील द्वारा विधानसभा निर्वाचन को शांति पूर्वक और व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने की दिशा में एमसीएमसी समिति और सहायक अधिकारियों के माध्यम से गठित की गई सेल द्वारा विभिन्न समाचार पत्रों और इलेक्ट्रोनिक चेनलों की खबरों की मानीटरिंग का कार्य विगत दिवस से प्रारंभ कर दिया गया है।

जिला निर्वाचन अधिकारी श्री पाटील के निर्देशानुसार कलेक्टर कार्यालय श्योपुर में एमसीएमसी समिति और सहायक अधिकारियों के माध्यम से समाचार पत्रों और इलेक्ट्रोनिक चेनलों की खबरों की समीक्षा प्रारंभ की चुकी है। साथ ही मानीटरिंग का कार्य प्रतिदिन जारी रहेगा।

एमसीएमसी समिति के दायित्व श्योपुर जिले में गठित की गई एमसीएमसी समिति द्वारा इलैक्ट्रोनिक मीडिया पर राजनैतिक विज्ञापन प्रसारण से पूर्व उसका प्रमाणन तथा समाचार पत्रों सहित समस्त संचार माध्यमों में छपने अथवा दिखाए जाने वाले विज्ञापनों पर सतत निगरानी प्रतिदिन रखने का दायित्व सौपां गया है। साथ ही समाचारों में प्रकाशित खबरों की समीक्षा के दौरान समाचार की शक्ल में विज्ञापन तो नहीं हैं और यदि ऐसा है तो आगे की कार्रवाई समिति द्वारा प्रस्तावित की जावेगी।

क्या है आगे की कार्रवाईएमसीएमसी समिति यह पाती है कि किसी प्रत्याशी अथवा राजनैतिक दल द्वारा प्रमाणन के लिए दिया गया विज्ञापन प्रसारित करने के योग्य नहीं है तो वह इसके प्रमाणन से इंकार कर सकती है। समिति का निर्णय कानूनी रूप से बाध्यकारी होगा। इसी प्रकार यदि समिति पाती है कि किसी समाचार पत्र, इलैक्ट्रौनिक मीडिया अथवा अन्य संचार माध्यम में आने वाला समाचार पेड न्यूज है तो वह इस संबंध में संबधित प्रत्याशी को जिला निर्वाचन अधिकारी के माध्यम से नोटिस देगी। कि क्यों न उसपर होने वाले व्यय को उसके निर्वाचन व्यय में शामिल कर लिया जावे।

इस प्रकार के समाचार हो सकते हैं पेड न्यूज
एक जैसे लेख एक जैसे छायाचित्रों के साथ अलग अलग समाचार पत्रों में अलग अलग लेखक के नाम से।
ऽ किसी समाचार पत्र के एक ही पृष्ठ पर प्रतिद्वंदी प्रत्याशियों के जीत की संभावना बताने वाले समाचार।
ऽ इस प्रकार के समाचार जिनमें लिखा हो कि कोई एक प्रत्याशी हर वर्ग का समर्थन पा रहा है तथा उस क्षेत्र से जीत जाएगा।
ऽ किसी प्रत्याशी का समर्थन करने वाले समाचार जिनमें बाईलाइन नहीं हो।
ऽ इस प्रकार के शीर्षक जिनमें लिखा हो कि प्रत्याशी की ऐतिहासिक जीत होगी, परन्तु इस उसके साथ समाचार न होना।
ऽ किसी समाचार पत्र के एक ही पृष्ठ पर विभिन्न प्रकार के फॉन्ट एवं ड्रॉप केस स्टाइल्स का प्रयोग।


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