आईनों को आईना ......?

तीरंदाज/व्ही.एस.भुल्ले/  भैया- मजा आ गया क्या बाछे खिली है थारी भावी की म्हारे को तो लागे,अब तो वह म्हारी भी सुडऩे वाली नहीं। मैं तो बोल्यू भाया थारी भावी की खुशी का ठिकाना नाये। इसलिये ही वह सुन्दर फोटो खिचवा रही है। हाथों हाथ सारा हिसाब मिला रही है। 
टिकट की दौड़ से दूर फिलहाल तो वह अपने विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर दौरे किये जा रही है। कै थारी भावी इस सबके बावजूद चुनाव जीत जायेगी।

भैये- ये तो मुई राजनीति है, जो कभी किसी की न हुई म्हारी भावी तो बावली शै। कै थारे को मालूम कोणी चुनावों में बाहुबल और धन बल बोलता है। ऐसे में थारी भावी एम.एल.ए. बनने आयोग के बल संख्या बल कैसे जुटायेगी भले ही इस चुनाव में आयोग की यह कोशिस हो, कि किसी भी हालात में यह चुनाव निष्पक्ष हो जाये जिसके लिये जितनी भी ताकत क्यों न लगे। मगर निष्पक्ष चुनाव प्रभावित करने कोई भी रणनीति किसी की कामयाब न होने पाये।

भैया- ऐसे में हम कलमचियों  के आयनो का क्या होगा जिस पर फिलहॉल कालिख पुती पढ़ी है। मैं तो बोल्यू भाया फिलहॉल तो भरे सीजन में म्हारी तो दुकान बन्द पढ़ी है। ऐसी दहशत तो भाया हम कलमचियों में माद्यौ मोहर,मलखान तो छोड़ो गड़रिया बन्धु भी नहीं जमा पाये जो दहशत आज हम चिन्दी पन्नो वालो के बीच है। भला करे भगवान आयोग वालो का जो उन्होंने बैलगाम आयना बाजार को उसकी हद तो दिखा दी। अब बैचारे गरीबों का भला तो हो ही जायेगा भले ही 65 वर्ष लगे हो देश को, अब तो निष्पक्ष चुनाव तो हो पायेगा।

काश आयोग इतने सुधारो के बीच जहां उसने पूरी ताकत लगा निष्पक्ष चुनाव को प्रभावित करने वाले बाहुबली,धन कुबेरो पर लगाम कसी वही भविष्य में एक दो काम और करदे, जैसे चुलावी सभा,प्रचार प्रसार खर्च भी आयोग ही करे भविष्य में होने वाले चुनावो मे तो सोने में सुहागा होगा और चुनाव स्वत: ही सम्पूर्ण निष्पक्ष और लेागों के सामने चुनाव लडऩे का समान मौका होगा। जिससे हमारा लेाकतंत्र और मजबूत हो सकेगा।

भैये- चिन्ता न मत कर पहले धन बल बाहूबल से तो सुलटने दे। देख आगे आगे होता है क्या? वैसे भी म्हारे एक साहब बहादुर का मानना है कि भविष्य में कैमरा युक्त मशीन और बटन पर अंगूठे के निशान की व्यवस्था हो ली तो समझो बाहूबली धन बलियो की आधे से अधिक वाठ तो हाथों हाथ लग जायेगी और निर्वाचन प्रक्रिया स्वत: ही पारदर्शी और निष्पक्ष हो जायेगी।

भैया- तो तने समझा थारी भावी को क्यों एम.एल.ए. जैसा छोटा चुनाव लड़ म्हारी लुटिया डुबा रही है। 2014 में भी तो सांसद बनने की घड़ी आ रही है।

भैये- महिला इज फस्ट सो म्हारा तो कहना शै भावी विधानसभा सो विधानसभा सांसदी भी लड़ेगी आयोग की यह शैली रही तो भविष्य में आधे से अधिक सीटो पर महिलाये ही लड़ेगी। क्योकि थारे जैसे कलम रगडु़ओं ने कई वर्षो तक चुनावो को खूब आयना दिखाया है। बड़ी मुश्किल से आयना दिखाने वालो को स्वयं आयना देखने का मौका आया।

मीडिया के लिए आचार संहिता लागू, उल्लंघन किया तो होगी कार्रवाई

शिवपुरी, 28 अक्टूबर 2013/ भारत निर्वाचन आयोग ने मध्यप्रदेश संहिता पांच रा'यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1991 की धारा 126 के तहत मीडिया कव्हरेज के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किये है। आयोग ने निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव प्रक्रिया के निर्धारित समय के समाप्ति के 48 घण्टे पहले की अवधि के दौरान टी.व्ही. तथा अन्य यंत्रों पर चुनाव संबंधी किसी भी विषय के प्रसारण आदि को प्रतिबंधित किया है। इसके अव्हेलना करने पर सजा या जुर्माना दोनों दिए जा सकेगें। आयोग की निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान टी.व्ही. चैनलों द्वारा प्रसारित किए जाने वाले पैनल परिचर्चाओं वाद-विवाद तथा अन्य समाचारों और ताजा स्थिति पर आधारित कार्यक्रमों में अधिनियम की प्रावधानों की अव्हेलना की शिकायतें प्राप्त होती रही है। निर्वाचन आयोग ने पहले भी स्पष्ट किया है कि चुनाव संबंधी किसी भी विषय को चुनावी क्षेत्र में चुनाव प्रक्रिया के निर्धारित समय की समाप्ति से 48 घण्टे की अवधि के दौरान टी.व्ही. आदि पर प्रदर्शन प्रतिबंधित है।

आयोग ने इस बात को पुन: दोहराया है कि टी.व्ही., रेडिया चैनलों व केवल नेटवर्क 48 घण्टे की अवधि के दौरान परिचर्चाओं में शामिल पैनलिस्ट भागीदारों के विचारों सहित ऐसी कोई भी बात प्रसारित नहीं करेगें, जिससे यह आभास हो कि किसी राजनैतिक दल या उम्मीदवार की जीत की संभावना को प्रोत्साहित पूर्वाग्रहित अथवा निर्वाचन को प्रभावित किया जा रहा है। उक्त समयावधि से विभिन्न समयावधि के दौरान टी.व्ही., रेडियो चैलन व केवल नेटवर्क रा'य जिला स्थानीय अधिकारियों से संबंधित प्रसारण की अनुमति प्राप्त करने की अनुमति प्राप्त करने के लिए संपर्क कर सकेगें। उनका प्रसारण आदर्श आचरण संहिता एवं सूचना व प्रसार व केवल नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम की दायरे में होना चािहए। उन्हें पेड न्यूज एवं संबंधी मुद्दों के संबंध में आयोग द्वारा 27 अगस्त, 2012 को जारी निर्देशों में प्रावधानों का पालन भी करना होगा।

आयोग ने सभी प्रचार माध्यमो का ध्यान प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा जारी निर्देशों की ओर दिलाया है, जिसके अनुसार प्रेस का दायित्व होगा कि वह निर्वाचन व उम्मीदवारों से संबंधित वस्तु परख जानकारियां दे। समाचार पत्रों से यह आशा नहीं की गई है कि वे अस्वस्थ्य चुनावी अभियान, किसी राजनैतिक दल उम्मीदवार के प्रति अतिश्योक्ति पूर्ण समाचार के प्रसारण में लिप्त हो। चुनाव अभियान की रिपोर्टिग करते समय समाचार पत्रों को किसी उम्मीदवार द्वारा उठाये गये किसी सवाल की अनदेखी करते हुए उसके प्रतिद्धंदी पर आक्षेप नहीं करना चाहिए। निर्वाचन प्रावधानों के अंतर्गत साम्प्रदायिक अथवा जाति आधारित चुनाव अभियान प्रतिबंधित है। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने निर्देश दिए है कि प्रेस को ऐसे समाचार प्रसारण करने से बचना चाहिए, जिनसे लोगों के मध्य धर्म, जाति, नस्ल, सम्प्रदाय या भाषा को लेकर वैमनस्यता उत्पन्न हो।

प्रेस काउंसिल के अनुसार प्रेस को असभ्य समाचार अथवा आलोचनात्मक बयान करने से बचना चाहिए। जिनसे किसी उम्मीदवार के व्यक्तित्व व आचरण या उम्मीदवारी अथवा नाम वापसी को लेकर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो। प्रेस को उम्मीदवार राजनैतिक दल के विरूद्ध असत्यापित समाचार प्रकाशित करना चाहिए। प्रेस को किसी उम्मीदवार राजनैतिक दल के छवि निर्माण के लिए किसी प्रकार का आर्थिक या अन्य प्रलोभन स्वीकार नहीं करना चाहिए। उसे किसी उम्मीदवार राजनैतिक दल अथवा उनकी ओर से किसी अन्य द्वारा लिया गया आतिथ्य या अन्य सुविधाएं स्वीकार नहीं करना चाहिए। समाचार पत्रों से यह आशा नहीं की जाती है कि वे किसी विशेष उम्मीदवार राजनैतिक दल के प्रति समर्थन जुटाने में लिप्त होंगे। प्रेस को किसी राजनैतिक दल सत्ताधारी दल के बारे में कोई ऐसा विज्ञापन स्वीकार प्रकाशित नहीं करना चाहिए जिससे उसकी अदायगी सरकारी खजाने से हो।

चुनाव लडऩे वाले उम्मीदवार को निक्षेप राशि जमा करना होगी

जबलपुर 28 अक्टूबर 2013 विधानसभा चुनाव लडऩे वाले उम्मीदवार से निक्षेप राशि के रूप में 10 हजार रूपए एवं अनुसूचित जाति, जनजाति के उम्मीदवारों से निक्षेप राशि के रूप में 5 हजार रूपए की राशि जमा करायी जाएगी।

उल्लेखनीय है कि विधि एवं न्याय मंत्रालय भारत सरकार की अधिसूचना दिनांक 23 दिसम्बर 2009 के द्वारा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 34 की उपधारा 1 में संशोधन कर उम्मीदवारों द्वारा जमा कराई जाने वाली निक्षेप राशि को संशोधित किया गया है। अब विधानसभा निर्वाचन के लिए अभ्यर्थी से 10 हजार रूपए एवं अनुसूचित जाति, जनजाति के अभ्यर्थी से 5 हजार रूपए की राशि जमा कराई जायेगी। इसी प्रकार संसदीय निर्वाचन के लिए 25 हजार रूपए एवं अनुसूचित जाति, जनजाति के अभ्यर्थी के लिए साढ़े बारह हजार रूपए की राशि निर्धारित की गई है।
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