बर्बाद शहर में बातों का बतंगढ़, नैसर्गिक सुविधाओं से मेहरुम शहरवासी

व्ही.एस.भुल्ले/म.प्र ग्वालियर। हालिया खबर ये है कि गन्दे नाले से होकर चांद पाठे में इक_ा होने वाला बरसाती पानी या फिर बगैर परिक्षण के बोरबेलो से सप्लाई होने वाला पानी कुछ और वर्ष शहर वासियों का गला तर कर सकता है।
क्योकि सिन्ध का शुद्ध पेयजल शिवपुरी लाने अब शिवपुरी नगर पालिका को 110 करोड़ खर्जने होंगे। वो भी तब जब जलावर्धन योजना पूर्ण होगी। क्योकि नेशनल पार्क के अनुसार गलती नगर पािलका की है। जिस जलावर्धन योजना को 2011 तक पूरा हो जाना था,वह आज भी अधूरी पढ़ी है। मतलब साफ है आने वाली गर्मियों मे भी शिवपुरी वासियों को शुद्ध पेयजल के लिये दो-चार होना पड़ेगा।

ऐसा ही कुछ सीवर प्रोजक्ट को लेकर है,जिसका कार्य भी प्रचलित होने के बावजूद बन्द सा है।

रहा सवाल 300 विस्तरों वाले नवीन अस्पताल का तो लगभग 18 करोड़ रुपये से बनने वाला यह अस्पताल अब पुराने चिकित्सालय परिसर में ही बनेगा जहां पहले से ही जगह काफी कम है और समुचित पार्किंग भी नहीं उसके बावजूद भी 18 करोड़ की भारी भरकम राशि पुराने चिकित्सालय परिसर मेें ही उड़ेलने की तैयारी है। क्योकि 300 विस्तर वाले अस्पताल के लिये शहर मेें पर्याप्त भूमि होने के बावजूद भी भूमि नहीं मिल सकी।

मगर आज हर शहर वासियों के दिल में यह सवाल जरुर है। आखिर कौन है जो करोड़ों रुपये होने के बावजूद इस शहर की बरबादी का ताना बाना बुन, इस साफ सुन्दर शहर को इन्सानों की भावनाओं का कत्ल खाना बनाना चाहता है।

क्या कुसूर है इन शहर और शहर वासियों का जो विगत 65 वर्षो से वह गटर और गन्दे नाले का बरसाती पानी पीने पर मजबूर है। कौन है जो इस शहर को नेर्सर्गिक सुविधाओं से मेहरुम रखना चाहता है।

3 पीढिय़ा गुजर चुकी है या चल रही है। इस प्रदूषित पेयजल के साथ मगर निजात नहीं।  शर्म आती है अपने अतीत,वर्तमान और भविष्य पर जिसे शिवपुरी का हर शहर वासी भोगने पर मजबूर है।

वो भी निरअपराध। कोई तो बताये क्या अपराध है? हमारे बुजुर्ग,हमारा हमारे नौनिहालों का? जो हम गन्दे नाले गटर मिश्रित चांद पाठे में इक_ा बर्षाती पानी पीने पर मजबूर है।

क्यों धूल के ढेर पर बैठ हम दम घुटने वाली हवा लेने पर मजबूर है। क्यों हम उपचार मौजूद होने के बावजूद बेहतर चिकित्सा हेतु ग्वालियर,दिल्ली भटकने पर मजबूर है।

कारण साफ है हमारी अजागरुकता और मजबूरी। मगर हम इतने लापरवाह कैसे हों सकते है। जिसकी 3 पीढिय़ाँ बरवादियों के दंश से दवी हों वो भी 21 वी  सदी में और हम आज भी,10 साला केन्द्र सरकार और 10 साला रा'य सरकार से रहमों करम की उम्मीद रखे हों। मगर बेजान हों चुके लेाग भले ही न बोले मगर उनकी आह आज भी रोती होगी।

फिलहॉल कारण जो भी हों अगर जमीर जिन्दा है तो जमीर का सबूत भी जरुरी है देखना होगा कि शहर की जनता इस बरबादी पर क्या बतंगढ़ बनाती है?

कलेक्टर रघुराज एमआर द्वारा 4 अपराधियों को जिला बदर किया

दतिया। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी रघुराज एमआर द्वारा विधानसभा निर्वाचन २०१३ शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष सम्पन्न कराने के लिए ४ अपराधियों को जिला बदर किया गया है। जिन अपराधियों को जिला बदर किया है उनमें राकेश पाण्डेय पुत्र सीताराम पाण्डेय निवासी सिमरिया थाना उनाव, कल्ला उर्फ राजवीर पुत्र चुखरू उर्फ राधेश्याम खंगार निवासी अन्दरबस्ती इन्दरगढ़ थाना इन्दरगढ़, हुकुम सिंह पुत्र प्रेमनारायण यादव निवासी पर्थरानारायण थाना भाण्डेर, राममिलन पुत्र सोनेराम गुर्जर निवासी जैतपुरा थाना धीरपरुा के नाम शामिल है।  उपरोक्त अपराधी एक वर्ष की कलावधि के लिए जिला दतिया एवं उससे लगे अन्य जिले शिवपुरी, ग्वालियर, भिण्ड जिलों की राजस्व सीमाओं से बाहर रहेंगे।


 न्यायिक जाँच के उपरांत 8 पुलिस अधिकारियों समेत 3 चिकित्सकों के विरूद्ध हत्या का प्रकरण पंजीबद्ध

 दतिया। जिले के जिगना थानांतर्गत २३ मार्च २०१३ को पुलिस हिरासत में युवक की संदिग्धावस्था में हुई मौत के प्रकरण में न्यायिक जाँच के उपरांत ८ पुलिस अधिकारियों समेत ३ चिकित्सकों के विरूद्ध हत्या का प्रकरण पंजीबद्ध किया गया।

उल्लेखनीय है कि सात माह पूर्व जिले के जिगना थानांतर्गत उदगुवाँ निवासी आनन्द गुप्ता का दतिया से गाँव जाते समय अपहरण हो गया था। उक्त प्रकरण में शक के तौर पर शिवपुरी के ग्वालिया निवासी नेतराम खंगार को गिरफ्तार किया था। पँछताँछ के दौरान बेरहमी से पिटाई के कारण थाने में ही मौत हो गई थी। बाद में पुलिस ने मामले को आत्महत्या में तब्दील करने के लिए थाने से कुछ दूर एक पेड़ पर मृतक का शव लटका दिया था और पुलिस की छबि धूमिल हुई थी। मृतक की माँ ने पलिस पर हत्या के मामला दर्ज करने की माँग की थी।

मृतक का शव जिला चिकित्सालय दतिया में पोस्मार्टम हेतु लाया गया था जहाँ मेडीेकल बोर्ड के सदस्यों ने दबाब में गलत रिपोर्ट तैयार की थी। प्रकरण की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए एवं विभिन्न संगठनों के विरोध के उपरांत और परिजनों की माँग पर पुनः पोस्टमार्टम कराने हेतु शव को ग्वालियर जिला चिकित्सालय भेजा गया जहाँ रिपोर्ट में अन्तर पाया गया। और न्यायिक जाँच कराई गई। जाँच दल ने तात्कालीन उप पुलिस अधीक्षक आर.एस. प्रजापति, एसडीओपी एम. एल. ढोढ़ी, एन.के. परिहार भाण्डेर, एस.ओ. उनाव अरूण सोलंकी, एस.ओ. जिगना मनोज सरयाम, एस.ओ. दुरसड़ा कुलदीप सिंह, ए.एस.आई. आई. सी. गुप्ता, एचसी हरीशंकर राठौर, एवं मेडीकल बोर्ड के चिकित्सकों में डॉ. केसी राठौर, डॉ. ए.के. जैन व डॉ. आर.बी. केरेले को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया। न्यायालय के आदेश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जयवीर सिंह भदौरिया की रिपोर्ट पर पुलिस ने सभी आरोपियों के विरूद्ध ३०२ एवं ३४ के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया है।  
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