फेसबुक पर बेलगाम इन्सान: दम तोड़ती संस्कृति, तार-तार होते संस्कार

व्ही.एस.भुल्ले। संचार क्षेत्र की चमत्कारिक क्रान्ति इतनी चमकदार होगी किसी ने शायद ही सपने में सोचा हों। जिसमें लाभ हानि एक साथ कदम ताल करती नजर आती है। विधा जो भी हों उसका उपयोग जनकल्याण,लेाक कल्याण में होना स्वभाविक है।

मगर फेसबुक पर संचार क्रान्ति के अचूक दुरुपयोग ने इसे कुरुप बना हेया दृष्टि का पात्र बना दिया है। हमारा दुर्भाग्य यह है कि जहां फेसबुक के रुप में ज्ञान,विज्ञान और विचारों के आदान-प्रदान का एक जबरदस्त माध्यम है। उसे कुछ विकृत मानसिकता के लोगों ने उपहास और असंस्कारिक,संस्कृति और सभ्यता विहीन बना दिया है। जो किसी भी सभ्य समाज के लिये अशोभनीय कृत्य है। मगर सब कुछ  खुलेयाम चल रहा है,जिसके दुष्परिणाम आज नहीं तो कल समाज के सामने होगें।

सोशल मीडिया के नाम से चिर परिचित फेसबुक यू तो सम्पर्क पहचान विचारो, दृश्यो को सांझा करने,पसन्द,नपसन्द और सार्थक टिप्पणियाँ रखने का बेहतर माध्ययम है। जिसका भरपूर उपयोग युवा युवतियों,महिला,पुरुषों,नेता,विद्ववान लेागों का बड़ा वर्ग कर रहा है। ऐसे में कुछ खामियो के चलते कुछ लेाग स्वयं के स्वार्थ या विकृत मानसिकता और घटिया मानसिकता के चलते उपहास के रुप में भी कर रहे है। जो फेसबुक पर अपनी घटिया असंस्कारिक मानसिकता का प्रदर्शन कभी कर्टून तो कभी ऐसे फोटो स्टीगरों को डाल सीधे तौर पर हमारे संस्कार सभ्य समाज,संस्कृति पर हमला कर रहे है।

मगर इतना तो तय है,कि किसी भी सभ्य समाज,धर्म,जाति,सम्प्रदायों में माता-बहिनों बहु बेटियों का स्थान सर्वोपरि और सम्मान जनक होता है। ऐसे में उनके भद्दे-भद्दे कार्टून,स्टीगर,फोटो डालना मानसिक दीवालियापन की पराकाष्ठा है। आज चन्द विकृत मानसिकता के लेाग फेसबुक पर न तो समाज न ही नेतृत्व करने वाले नेता हमारी संस्कृति,संस्कार और सभ्यता को बख्श रहे है और न ही अंधेरे मे चमकती संचार क्रान्ति को फलने-फूलने दे रहे है।

ऐसे में देश की युवा शक्ति और विरासत में उन्हें मिली सभ्य,संस्कृति और संस्कारों का कैसा अक्स तैयार होगा अंदाजा लगाया जा सकता है। बेहतर हो कि सोशल मीडिया पर जाने वाला समाज,युवा शक्ति ऐसे विकृत लेागों को ऐसा मुंह तोड़ जबाव दें। संस्कारिक तौर पर कि उनका बन्द दिमाग स्वत: खुल जाये। साथ ही सरकारों को भी चाहिए कि वह ऐसे लेागों की कोई तो ऐसी व्यवस्था हो जिससे युवा पीढ़ी को इन विकृत मानसिकता वाले लेागों से निजात मिले। 

सोशल साइटे चलाने वाली कम्पनियों को भी चाहिए कि वह किसी भी ऐसे व्यक्ति को रजिस्ट्रर्ड न करे जिनके पास यथा मान प्रमाणिकता न हों। नहीं तो अगर ऐसा ही चलता रहा तो हमारी आने वाली पीढ़ी और सभ्यता,संस्कृति,संस्कार तो प्रभावित होंगे ही साथ ही फेसबुक जैसा एक अचूक माध्ययम उपहास का शिकार भर बनकर रह जायेगा।
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