राहुल ही बतायें, कैसे पहुंचे युवा विधानसभा,लेाकसभा?

  • दलों के अन्दर दम तोड़ता लेाकतंत्र
  • तार-तार होती लोकतांत्रिक  परम्परायें
व्ही.एस.भुल्ले/ म.प्र. ग्वालियर। भले ही देश में सक्रिय राजनैतिक दल चर्चाओं में दल के अन्दर और दल के बाहर स्वस्थ लेाकतंत्र का दम भरते नहीं थकते हों मगर 2013 में होने वाले कई प्रदेशों के विधानसभा चुनावों में टिकट वितरण को लेकर हालात दलेा के अन्दर लेाकतंत्र का गला घोटने जैसे ही है।
ये अलग बात है कि दलों द्वारा दलो के अन्दर दिखावे के लिये पूरी लेाकतांत्रिक प्रक्रियाओं का भरपूर प्रदर्शन किया जाता हो। मगर अन्ततोगत्वा दलो के अन्दर या बाहर दिखने वाले आक्रोश या मजबूरी यह दिखाते नहीं थकती। कि टिकट वितरण में किस तरह लेाकतंात्रिक परम्पराओं का मजाक उड़ाया जाता है। ऐसा नहीं कि लेाकतांत्रिक परम्पराओं का दम घोटने वाला एकाद दल हों लगभग अधिकांश दलेा में हालात कुछ ऐसे ही है।


अभी हाल ही में जिस तरह का अंसतोष भाजपा के अन्दर सड़को पर है ऐसा ही असंतोष आने वाले भविष्य में कांग्रेस में भी देखने मिल सकता है। रहा सवाल कुछ छोटे दलों का तो उनमें भी टिकट को लेकर आया राम गया राम जैसी स्थिति है।

जिस तरह से सžाा धारी दल में कई वर्षो से चुनाव जीतते चले आ रहे नेताओं को पार्टी इस बार भी टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारना चाहती है। ऐसा ही कुछ कांग्रेंस भी चर्चाओं में आती घोषित होने वाले प्रत्याशियों की सुर्खिया भी बताती है। सूत्र बताते है,कि एक गुठ विशेष से जुड़े कुछ वर्तमान विधायकों को चौथी,पांचवी बार कांग्रेस का टिकट देकर नवाजा जा रहा है। तो किसी को पारवारिक,राजनैतिक,संरक्षण बतौर टिकट मिलने जा रहा है।

अगर एक विधानसभा सीट पर एक ही प्रत्याशी 4-4,5-5 बार टिकट हासिल करने में कामयाब हो जाता है तो फिर लेाकतंत्र कहां बचा यह हर राजनैतिक दल को देखना होगा। आखिर क्या कारण है कि दो-दो,तीन-तीन बल्कि चार-चार बार विधायक रह चुके विधायक पांचवी मर्तवा विधायक बन अन्य कार्यकर्žाा या नये नेताओं को आगे नहीं बढऩे देना चाहते। क्यों आला कमान सžाा की अंधी दौड़ में संगठन में इतने अनुभवी नेताओं का उपयोग करना चाहते। जिससे संगठन तो मजबूत होगा ही साथ ही नये नेता भी उभर कर सामने आ सकेगें। ये अलग बात है कि अभी तक अधिकृत तौर पर किसी दल भी ने अपनी सूची जारी नहीं की है। मगर जिस तरह की चर्चायें वर्तमान में मीडिया की सुर्खियां बटौर रही है उनमें भाजपा ही नहीें सर्वाधिक चर्चा कांग्रेस की है। जहां भाई लेाग चौथी या पांचवी मर्तवा टिकट हासिल कर वर्षो से दलो की सेवा में जुटे कार्यकžााओं की भावनाओं पर कुठाराघात कर एक बार फिर से अपना परचम फेहराना चाहते है। जिन राहुल के नाम पर कांग्रेस के अन्दर यह सब कुछ चल रहा है उन्हीं राहुल ने पूरी ताकत से ग्वालियर के मंच से कहां था कि जब तक युवा विधानसभा लेाकसभा में नहीं जायेगें तब तक इस देश का कुछ होने वाला नहीें। अब राहुल ही बताऐं कैसे युवा विधानसभा और लेाकसभा में उनके दल से पहुंच पायेगा।

कैसे होगा,निष्पक्ष चुनाव, तैनात है,वर्षो से जमे अधिकारी?

म.प्र. शिवपुरी। मामला म.प्र के व्ही.आई.पी. जिले का है,और वर्षो से जिले के महत्वपूर्ण महकमों में तैनात लोगों का है जो चुनाव प्रभावित करने का मादा रखते है। कुछ तो 15 वर्षो तो कुछ विगत 4-5 वर्षो से जिले के ग्रामीण विकास विभाग में तैनात है। अर्थात ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग शिवपुरी जो सीधे तौर पर जिला पंचायत मुख्य कार्यपाल अधिकारी और कलेक्टर के अधीन आता है।

जी हां सूत्रों का कहना है जिला पंचायत से लेकर ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग ही नहीं,खनिज, लेाक निर्माण विभाग भी इस दंश से अछूते नहीं। मजे की बात तो यह है कि वर्षो से तैनात इन अधिकारियों की राजनैतिक दल व नेताओं से नजदिया भी किसी से छिपी नहीं कोई नेताओं का यार है तो कोई रिश्तेदार मगर यहां यक्ष प्रश्र यह है कि समुचे प्रदेश में निष्पक्ष चुनाव कराने वाले निर्वाचन आयोग की नजर हमारे महान शिवपुरी जिले पर क्यों नहीं पढ़ी। 4-5 वर्ष तो छोडिय़े कई उस्ताद  तो ऐसे है जो नियुक्ति दिनांक से जिले के बाहर ही नहीं गये तो कुछ यहां आये तो यहीं के होकर रह गये तो कुछ निर्वाचन आयोग की आखों में धूल झौंक अपने रसूख और नेताओं से सम्बन्ध रिश्तेदारी के चलते आज भी यहीं तैनात है। जिनकी संख्या 1-2 नहीं दशियों है मगर अपनी बारिक नजर के लिये मशहूर मुखिया से इतनी बढ़ी चूक कैसे हो गई है। जो नेताओं के यार और रिश्तेदार खुल्लम खुल्ला निष्पक्ष निर्वाचन के लिये तैनात है।

ऐसे में आम चर्चा यह है कि क्या 2013 का चुनाव निष्पक्ष हो पायेगा जबकि अपनी अपनी आस्था विभिन्न दलो में रखने वाले अधिकारी जो वर्षो से तैनात है, वो भी ऐसे महकमों में जो चुनाव को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकते है। फिलहॉल तो शिवपुरी जिले में हालात यही है, देखना होगा निर्वाचन आयोग निष्पक्ष चुनावों के लिये क्या कुछ कर पाता है।

अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के सिरकोबाई दूसरे दिन हो सकी ग्वालियर रैफर

रामजी राय/ म.प्र. दतिया। माँ रतनगढ़ मंदिर में घटित हुए हृदय विदारक हादसे में बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल के उपरांत भी अस्पताल प्रबंधन पर किसी प्रकार संवेदनशीलता नजर नहीं आ रही है। उल्लेखनीय है कि गत रोज हादसे में हुए घायलों का हाल जानने आये काँग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने अल्प प्रवास पर ग्राम दुरसड़ा निवासी श्रीमती सिरकोबाई नायक की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें ग्वालियर भर्ती कराने की आवश्यकता जताई थी किन्तु श्री गांधी के वापस जाने के बाद जिला चिकित्सालय प्रबंधन कुम्भकरणीय निद्रा में सो गया। दूसरे दिन काँग्रेसियों के हस्तक्षेप के उपरांत उक्त महिला को पाँच घंटे की मशक्कत करने के उपरांत एम्बूलेंस मिली और ग्वालियर के लिए रबाना किया।

जिला अस्पताल में गंभीर रूप से घायलों के उपचार की स्थिति जानने प्रदेश के मुयमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने भ्रमण के दौरान उचित उपचार हेतु निर्देश दिये थे। किन्तु बार-बार प्रशासनिक लापरवाही का शिकार होते है घायल एवं मरीज। जिला अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही पर काँग्रेसियों ने रोष व्यक्त किया है।

जिलाध्यक्ष काँग्रेस कमेटी ऊषा नाहर ने प्रेस को बताया कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी दतिया डॉ. आर.एस. गुप्ता रतनगढ़ हादसे के घायलों की समुचित देखभाल करने के बजाय भाजपा सरकार की हो रही फजीहत से चिंतित है। डॉ. आर.एस. गुप्ता द्वारा श्री गांधी के दौरे के पूर्व अपने बयान में कहा था कि अस्पताल में काँग्रेस कार्यकर्ता जबरन भर्ती हो गये हैं। इस बयान को श्रीमती नाहर ने स्पष्टतः आचार संहिता का उल्लंघन बताया, उन्होने प्रेस को बताया कि शीघ्र ही पार्टी कार्यकताओं का शिष्ट मंडल डा. गुप्ता की शिकायत करने जिला निर्वाचन अधिकारी एवं ऑब्जर्वर से मिलकर उन्हें हटाने की माँग करेगा। ताकि जिले में आचार संहिता का पालन हो सके।

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