राहुल के वयान पर बेवजह का बखेड़ा, क्या गलत कहा है, राहुल ने ?

व्ही.एस.भुल्ले। जो कांग्रेसी या अन्य दल के लेाग ये मानते है,और मीडिया वाले दागी अध्यादेश पर राहुल द्वारा दिये वयान को गलत मानते है। ऐसे लेाग न तो देश न ही इस देश के महान लेाकतंत्र और स्वयं के दल शुभचिन्तक हो सकते है।
क्योकि जिस तरह की र्दुगति और आपराधिक, दागी राजनीति का दंश देश,देश वासी, हमारा लेाकतंत्र,स्वयं राजनैतिक दल,और मीडिया भुगत रही है। यह किससे छिपा है,अगर देश का कोई नागरिक या किसी राजनैतिक दल का व्यक्ति फिर चाहे वह राहुल ही क्यों न हों,दागी अध्यादेश के बारे में अपनी राय निजी तौर पर रखते हों,तो फिर इतने बड़े बखेड़े की बजह क्या है?

जब देश के प्रधानमंत्री विदेशी सरजमी पर भारत जैसे लेाकतंात्रिक देश का नेतृत्व कर रहे हो,ऐसे में भारत की सरजमी से यूं कहें कि दिल्ली से ये वयान आता है,कि दागी अध्यादेश पर राय रखना प्रधानमंत्री का अपमान है। देश और लेाकतंत्र के हित में बोलना शायद अपराध तो इससे बड़ा धोका किसी भी देश और लेाकतंत्र के साथ हो ही नहीं सकता। 

इससे  बड़ा अपमान भारत जैसे लेाकतांत्रिक देश का हो ही नहीं सकता। उस पर से मीडिया द्वारा विदेश में महान लेाकतंात्रिक देश का नेतृत्व कर रहे प्रधानमंत्री को इस बात के लिए प्रेरित करना कि जिस पार्टी का नेतृत्व आप यूपीए सरकार में कर रहे है। उसके एक पदाधिकारी ने मीडिया के बीच आपकी केबीनेट द्वारा लिये गये निर्णय के खिलाफ निजी तौर पर बोला है। 

बेचारे विदेश से लौटते प्रधानमंत्री ने जहाज में लौटते मीडिया के बीच कहां बार-बार कहां कि वह राहुल की नाराजगी उनसे से मिलकर समझेगें। और जो कुछ भी उन्होंने कहां यह उनका लेाकतांत्रिक अधिकार है। और वह किसी भी कीमत पर अपना इस्तीफा नहीं देंगें। कौन क्या कहता है वह इस पर नहीं जाना चाहते।

विपक्ष भले ही फिलहॉल शान्त हों मगर मीडिया इतनी उतावली है,कि वह अभी भी कई प्रधानमंत्री जी की राहुल से नाराजगी तो कहीं यूपीए सरकार के सहयोगी दलो की नाराजगी के कयास लगाने में पीछे नहीं। जो स्वस्थ लेाकतंत्र के लिये घातक ही नहीं,खतरनाक है। 

जबकि होना ये चाहिए था कि अगर देश और लेाकतंत्र के हित में कोई भी बात आती है,तेा उसका स्वागत किया जाना चाहिए न कि बखेड़ा खड़ा करना चाहिए। क्योकि देश के लिये सभी की अपनी जबावदेही और उžारादायित्व है। अगर देश की जनभावना को भांप देश हित में देश का कोई भी युवा क्रान्तिकारी निर्णय लेता है तो वह देश व देश में मौजूद लेाकतंत्र और देश वासियों के हित में होगा। और न ही कांग्रेस के हित में होगा।

सच तो यह है,जो कांग्रेसी चाहे वह बुजुर्ग या युवा राहुल के इस निर्णय से सहमत नहीं,जो दल राहुल के इस निर्णय से खिन्न है वह कभी कांग्रेस के शुभचिन्तक, न ही हितेशी हो नहीं सकते। आज जो भी सहयोगी दल कांग्रेस के साथ है कभी न कभी जब वह अस्तित्व में नहीं थे वह कांग्रेसी विचारधारा या कांग्रेस  से ओत-प्रोत रहे है। 

परिणाम कि सžाा की लालसा के चलते जिन्होंने समुचे देश में स्थापित कांग्रेस को तोड़ जगह-जगह अपने गढ़ बना लिये वहीं लेाग आज भी कांग्रेस के लिये नासूर  बने हुये है। कांग्रेस का हित अपनी मूल विचार धारा मूल्य और सिद्धान्तों में ही है जिसकी शुरुआत राहुल ने दागी अध्यादेश का विरोध कर की है। जिसका कांग्रेस ही नहीं समुचे देश में जिन लेागों को लेाकतंत्र से प्यार है,खुलकर राहुल की इस पहल का समर्थन करना चाहिए। 


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