फिर हुआ देश, लहूलुहान: बिहार धमाकों में 5 की मौत 83 घायल

पटना। बिहार की राजधानी पटना में भाजपा की रैली से ठीक पहले हुये सीरियल धमाकों से देश एक मर्तवा फिर से देश ललूलुहान हुआ है। मगर धन्यवाद के पात्र है देश के नेता और राजनैतिक दल जिन्होंने समझदारी का परिचय देते हुये हालातों को सम्हाल लिया। और कोई बड़ी अप्रिय घटना नहीं घटी।

मगर एक बात तो तय है कि इस तरह की घटनाओं को अन्जाम देने वालो का कोई धर्म ईमान नहीं होता जिसमें बिहार की ही नहीं देश की जनता ने हमेशा ऐसे घटना क्रमों के बाद शान्ति सौहार्द का माहौल कायम रख जताया है कि भारत का भाई-चारा और इसका लोकतंत्र कॉफी मजबूत है। जिसे इस तरह की घटनाओं से कमजोर नहीं किया जा सकता।

पटना में सीरियल बम धमाके के बाद भाजपा रैली में मौजूद नेता और मोदी का लाखों लेागों के लिये सम्बोधन और समझाइस सराहनीय है। साथ ही रैली पश्चात बिहार के मुख्यमंत्री की व्यानी भी एक सूझबूझ और गम्भीर मुखिया की रही। जिसने बिहार को सम्बल देते हुये इस घटना पर दुख व्यक्त कर मृत और घायलों की मदद की घोषण की।

मगर सवाल यहां आम देश वासियों के मन मस्तक में हर बार इस तरह के देश में होने वाले बम धमाकों के पश्चात यहीं रहता है। कि हम शक्ति और जनसंख्या में विश्व के गिने चुने देशों मे है। फिर भी आय दिन हमारे देश में इस तरह की घटनाये क्यों होती है? और ऐसा नहीं इस तरह की घटनाओं के शिकार देश का आम निर्दोष नागरिक ही नहीं देश के सैनिक सुरक्षा अधिकारी और नेता भी हुये है। फिर भी हम एक धमाके के बाद दूसरे धमाकों या नरसंहार का इन्तजार करते है। आखिर किस उम्मीद पर और  क्यों? आखिर देश ही नहीं प्रदेश की सरकारे भी ऐसे लेागों के खिलाफ निरन्तर निर्णायक कार्यवाही क्यों नहीं करती। जबकि ऐसे देश के दुश्मनों के खिलाफ निरन्तर कार्यवाही चलनी चाहिए।

क्या कमी है हमारे देश में न तो जवानों की न ही जनसंख्या और हथियारों की आखिर कैसे चन्द लेाग हमारे देश के नागरिक नेता सैनिक सुरक्षा कर्मियों को निशाना बनाने में कामयाब हो जाते है कुछ तो करो भाई।
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