एनवीवीएन JNNSM में योगदान के लिए सम्मानित किया

एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम (एनवीवीएन) सफल जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन (छ्वहृहृस्रू) के कार्यान्वयन के पहले चरण सौर ऊर्जा डेवलपर में मिलो और आज नई दिल्ली में आयोजित पुरस्कार २०१३ के लिए सम्मानित किया गया है.
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा डा. फारूक अब्दुल्ला के माननीय मंत्री पुरस्कार प्रदान किया और एनवीवीएन, नोडल एजेंसी के प्रयासों लगभग शून्य प्रारंभिक सौर क्षमता से सौर क्षमता वृद्धि बनाने के लिए, छ्वहृहृस्रू पहले चरण के लिए भारत सरकार द्वारा नियुक्त की सराहना देश में.५५० मेगावाट सौर क्षमता के आसपास सौर पीवी और सौर तापीय दोनों अब तक कमीशन दिया गया है और बिजली की विभिन्न राज्यों को आपूर्ति की जा रही है. राजस्थान, उत्तर प्रदेश एपी, महाराष्ट्र, ह्रस्रद्बह्यह्यड्ड, कर्नाटक, पंजाब, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु आदि इंटर राज्य और इंट्रा राज्य पारेषण प्रणाली के माध्यम से.एनवीवीएन कार्यान्वयन योजना के तहत पहले चरण में भी प्रदर्शन उनके कमीशन जल्दी और परिचालन के लिए सम्मानित किया गया है छ्वहृहृस्रू का हिस्सा थे जो विभिन्न सोलर पावर डेवलपर्स.

ओशोन के नो माईंड थेरेपी शिविर में मना वॉर्न अगेन

शिवपुरी-ओशो ने कहा है कि इस जीवन को स्व'छंद वातावरण में स्वयं की अनुभूति अनुरूप जीओ और एक भी पल ऐसा ना जाए जिसमें स्वयं को ना आंक सको इसलिए ओशोन के नो माईंड थेरेपी शिवर में प्रतिदिन विभिन्न सांस्कृतिक व रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है। इसी क्रम में आज ओशोन के नो माईंड थेरेपी शिविर में वॉन अगेन(दुबारा हुआ जन्म) मनाया गया हालांकि इसे हिन्दी शŽद में नहीं कहा जाता लेकिन हिन्दी शŽदावली में इसका अर्थ पुन: जन्म होना बताया गया है। ओशोन के इस शिविर की संचालिका मॉं मीरा(ममतानीर) ने बड़े ही संक्षिप्त शŽदो में इसकी व्याख्या दी और इसके बाद शुरू हुआ ओशो प्रेमियों का बचपन-जन्म जिसमें सभी ओशो प्रेमीयों ने उस जीवन को जीया जो वह बीते कई वर्षेाँ पहले जी चुके, ओशो की वाणी में ओशो के सम्मुख अपने जीवनकाल का स्मरण करते हुए सभी ओशोप्रेमियों ने बचपन रूपी इस वार्न अगेन को बड़े उत्साह के साथ मनाया, स्वामी आनन्द नीरज(पुष्पेन्द्र अग्रवाल), मॉं ध्यान पलवा, स्वामी निर्दोष (रविन्द्र गोयल), स्वामी बल्ले महाराज, स्वामी अंकित, स्वामी भूपेन्द्र विकल सहित अन्य ओशोप्रेमियों ने वार्न अगेन में अपने बचपन को जिया और खेल-खिलौनों से खेले, किसी ने सीटी बजाई तो किसी ने बलगईंया लेकर एक-दूसरे के साथ बचपन की यादों को तरोताजा किया। इसके साथ-साथ अंताक्षरी भी खेली गई जिसमें ना केवल गीतो को गायन हुआ बल्कि उस गीत पर नृत्य भी किया गया। गत दिवस ओशोन संस्था के इस शिविर में आनन्द उत्सव मनाया गया था जहां पानी के बीच ओशो प्रेमियों ने ध्यान क्रियाऐं की और माटी से खेलकर ओशो का स्मरण किया। ओशोन संस्था के नो माईंड थेरेपी शिविर का समापन कल 27 सितम्बर को होगा। शिविर में सैकड़ों की संख्या में ओशो प्रेमी प्रात: सक्रिय ध्यान तत्पश्चात दोपहर में विभिनन कार्यक्रम, सांय 4 बजे से कुण्डली व सायं 6 बजे से सत्संग में भाग ले रहे है।




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