खत्म होती काँग्रेस को, अन्तिम मौका: निराशा के भंवर में कार्यकर्ता

म.प्र. में चुनावों के येन वक्त पर काँग्रेस नेताओं के बीच एक जुटता के दावे कोई कितने ही क्यों न करे। मगर अब यह स्पष्ट है कि म.प्र. में खत्म होती काँग्र्रेस को बचाने काँग्रेंस आलाकमान या फिर राहुल के पास यह अन्तिम मौका है।
काँग्रेस नेताओं की गुटवाजी से चुनाव के येन वक्त मायूस,हताश निराश श्ेाष काँग्रेस कार्यकर्žाा शुभचिन्तक खासे परेशान है। लगता है म.प्र. में काँग्रेस बचाने राहुल  फॉरमूला ही अन्तिम ब्रम्हास्त्र हो सकता। और राहुल को निश्चित तौर पर काँग्रेस की खातिर इस ब्रम्हास्त्र का इस्तेमाल करना चाहिए। चर्चाओं की माने तो जो लेाग म.प्र. में काँग्रेस की इस दुर्गति के लिये जिम्मेदार है। उन्ही लेागों ने अपना भविष्य सुरक्षित कर कांग्रेस को विगत 20 वर्षो में इस स्थति तक  पहुंचाया है। जिससे वह आलाकमान को बता सके। कि हम है तो काँग्रेंस है,हम नहीं तो काँग्रेस खत्म। इसीलिये विगत 20 वर्षो में चुन चुन कर समर्पित काँग्रेस नेता और कार्यकर्žााओं को दर किनार कर समुचे म.प्र. में काँग्रेस के नाम अघोषित रुप में अपने अपने गुट खड़े कर लिये गये और काँग्रेस को नेपथ्म में डाल दिया गया।

वर्तमान मौजूद काँग्रेस में अब नेता कम व्यसायी 'यादा है। जो सžाा की आड़ में अपने अघोषित व्यवसायो धन्धों को चमका धन बल से सžाा में बने रहे, अपना रसूख कायम रखना चाहते है जिसके लिये वह जरुरत पढऩे पर विरोधी दलो के साथ काँग्र्रेस के बिना पर सौदेबाजी करने से भी नहींं चूकते है।

दौलत भी है और धन्धे पानी भी जिसकी ताकत पर वह अपना सिस्टम और व्यवस्था गत संख्या भी बनाये हुये है जिसका नाम मौजूदा काँग्रेस है।

अगर हम विगत 20 वर्षो के दौरान रहे संगठनात्मक प्रदेश अध्यक्षों पर प्रकाश डाले तो जो भी प्रदेश अध्यक्ष रहे या तो वह निस्क्रिय रहे या उन्हें सक्रिय रहने ही नहीं दिया। न ही कभी उन्हें संगठन मजबूत बनानें दिया। जो अपने बने उन्हें भी जेब मेें ही रखा गया। देखा जाये तो क्या काँग्र्रेस सरकार के 10 वर्ष और भाजपा सरकार के इन 10 वर्षो में एक भी करिशमाई प्रदेश अध्यक्ष नहीं रहा। जो संगठन को जिन्दा रख काँग्रेस को मजबूत बना पाता कोई भी अध्यक्ष भोपाल से निकल समुचे प्रदेश में पैर नहीं जमा पाया। चाहें वह उर्मिला सिंह,स्व.राधा कृष्ण मालवीय,स्व.सुभाष यादव,सुरेश पचौरी अब कान्तिलाल भूरिया ही लगभग स्थिति समान ही रही।

जिसका परिणाम यह रहा कि महाकौशल,वघेलखण्ड, बुन्देलखण्ड,मालवा,ग्वालियर चम्बल,निवाड़ की बागडेार अलग अलग छत्रप अपने अपने हिसाब से सम्हाले है। मगर काँग्रेस की 10 वर्षो की सरकार में कुछ बड़े क्षत्रपो का छोड़ दे तो सरकार के इकबाल के चलते ग्वालियर-चम्बल,खरगौन,छिन्दवाड़ा,सीधी के कुछ विधानसभा क्षेत्रों में सेंधमारी कर सारा निजाम कूटनीतिक के तहत एक कर लिया गया। काँग्रेस सरकार के समय शुरु हुई स्वयं की अघोषित काँग्रेस बनाये रखने की परम्परा सरकार जाने के बाद भी आज तक जारी रही।

आज जो काँग्रेस या काँग्रेसी विधायक काँग्रेस के नाम म.प्र. में मौजूद है। उसमें सबसे बड़ा भाग पूर्व काँग्रेस सरकार के समय खड़ा किया हुआ धड़ा है। जिसमें प्रदेश अध्यक्ष और 3-3 मुख्यमंत्री पद के दावेदार है वहीं अन्य क्षेत्रों में सिर्फ छिन्दवाड़ा ग्वालियर-चम्बल क्षेत्र मुख्यमंत्री पद का दावेदार है। जिसको लेकर अभी भी तलवारे अघोषित राजनैतिक रुप से खिची हुई है। काँग्रेस की दिक्कत यह है कि उसे जिस नाम पर म.प्र. में वोटो का लाभ मिल सकता है। वह काँग्रेस के अघोषित सबसे बड़े धड़े को स्वीकार नहीं। और आलाकमान भी इस धड़े के इतिहास को देख पुरानी गलती दौहराने तैयार नहीं।

ऐसे में अघोषित रुप में गुटो में बटी डूबती म.प्र. काँग्रेस को बचाने काँग्रेस आलाकमान या राहुल को कड़ा निर्णय लेना ही होगा। किसी छत्रप की सिफारिस के बगैर ही स्वयं के सर्वे अनुसार कर्नाटक की तरह टिकिट वितरण करना होगा। साथ ही 3-3,2-2 मर्तवा चुनाव जीत चुके विधायको को संगठन में ले लेाकसभा में उनका उपयोग करना होगा। वरना इतिहास गवाह है बिहार,उ.प्र. का जहां केन्द्र में लगातार 10 वर्षो तक सरकार रहने के बावजूद काँग्रेस का नाम लेवा पानी देवा नहीं।

काँग्रेस आलाकमान और राहुल को दबाव की राजनीति के आगे न झुक, आगे बढऩा चाहिए। और कांग्रेस तथा काँग्रेसी कार्यकर्žााओं,आम गरीबों के लिये  स्व.इन्दिरा जी, स्व.राजीव जी की तरह कड़े निर्णय ले आगे बढऩा चाहिए।

क्योकि संगठन हमेशा अनुशासन से चलते है। अनुशासन हीनता से नहीं। जो अघोषित तौर पर म.प्र. में एका के नाम खुलेयाम जारी है। जिसका परिणाम कि काँग्रेस विगत 10 वर्षो में सžााधारी भाजपा के खिलाफ एक भी निर्णायक आन्दोलन खड़ा नहीं कर पायी न ही 10 साल पुरानी भाजपा सरकार में बैचारिक रुप से एड़ी से लेकर चोटी तक कमी होने के बावजूद न तो इस सरकार की कमियाँ और न ही केन्द्र सरकार की उपलŽिधयां जन मानस तक पहुंचा पाई। बजाये जन समर्थन जुटाने के नेतृत्व को लेकर आज भी अघोषित तौर पर काँग्रेस में ल_म ल_ा मची है।

अगर ऐसा ही रहा और जिस तरह की आम चर्चा गली चौपालो पर देखने सुनने मिलती है, ऐसी विकट स्थति में सžाा में अघोषित भागीदारी कर धन्धा चमकाने वाली काँगे्रस म.प्र. में भले ही शेष रह जाये मगर असली काँग्रेस बिहार,उ.प्र. की तरह हमेशा के लिये खत्म हो जायेगी।

सेक्टर मजिस्ट्रेट अपनी जिम्मेदारी समझें

भोपाल. आगामी विधानसम निर्वाचन के लिए जिले में नियुक्त किए गए सम्ी 178 सेक्टर मजिस्ट्रेट को आज एमएलए रेस्ट हाउस स्थित शहीद म्वन के समकक्ष में उनको सेक्टर मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारियों से अवगत कराया गया । इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में उप जिला निर्वाचन अधिकारी और अपर कलेक्टर श्री अक्षय सिंह सहित जिले की सातों विधानसम क्षेत्रों के रिटर्निंग आफीसर और सहायक रिटर्निंग आफीसर मौजूद थे ।

प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर्स द्वारा मरत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी निर्देशों से अवगत कराते हुए सेक्टर मजिस्ट्रेट को सौंपी गई जिम्मेदारियां बताई गई । उप जिला निर्वाचन अधिकारी श्री सिंह ने कहा कि सम्ी सेक्टर मजिस्ट्रेट नियमों का बारीकी से अध्ययन करें । प्रशिक्षण कार्यक्रम में मास्टर ट्रेनर्स द्वारा उन्हें जो बताया जा रहा है उसके अनुसार जिम्मेदारी निमने के लिए तैयार हो जायें ।

सामान्य प्रशासन स्थाई समिति की बैठक आज

छतरपुर/20 सितम्बर/जिला पंचायत की सामान्य प्रशासन स्थाई समिति की बैठक का आयोजन 21 सितम्बर को पूर्वान्ह 11.30 बजे से जिला पंचायत सभाकक्ष में किया जायेगा। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डॉ. सतेन्द्र सिंह ने बताया कि बैठक में गत बैठक के पालन प्रतिवेदन पर चर्चा उपरांत फरफोरमेन्स ग्रान्ट फण्ड योजनांतर्गत उपाध्यक्ष के कार्यों को जोडऩे हेतु समीक्षा की जायेगी। इसके अतिरिक्त अन्य विषय अध्यक्ष की अनुमति से रखे जायेंगे।


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